संक्षिप्त उत्तर: 2026 में लगभग 24 एकादशियाँ हैं (अधिक मास वाले वर्ष में 25-26), हर चंद्र मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एक-एक। हर एकादशी का पारण अगले दिन द्वादशी को स्थानीय सूर्योदय के बाद किया जाता है। व्रत और पारण का सटीक समय शहर और परंपरा से बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पक्का करें।

एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं चंद्र तिथि है, जिसे वैष्णव और अनेक हिन्दू भगवान विष्णु की भक्ति और उपवास के दिन के रूप में मनाते हैं। हर चंद्र मास में दो पक्ष होते हैं, इसलिए सामान्यतः महीने में दो एकादशियाँ और वर्ष में लगभग 24 होती हैं — और जब अधिक (मलमास) मास जुड़ता है तब 25 या 26 हो जाती हैं।

हर एकादशी का अपना नाम और कथा है, और हर एक अगले दिन द्वादशी को एक निश्चित पारण काल में पूरी होती है जो स्थानीय सूर्योदय के बाद आरंभ होता है। सूर्योदय, तिथि का आरंभ-अंत और पक्ष की गणना आपके शहर तथा अमांत या पूर्णिमांत प्रणाली पर निर्भर करती है, इसलिए सटीक समय जगह-जगह अलग होता है। यह पृष्ठ आपको वर्ष भर की तिथियाँ और सही विधि देता है; व्रत तथा पारण का सटीक समय सदा अपने स्थानीय पंचांग से पक्का करें।

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  • आयोजन: एकादशी व्रत (विष्णु हेतु)
  • आवृत्ति 2026: लगभग 24 एकादशियाँ (प्रति मास दो)
  • मुख्य तिथि: एकादशी (ग्यारहवीं चंद्र तिथि)
  • पारण: अगले दिन द्वादशी, सूर्योदय के बाद
  • देव: भगवान विष्णु / श्रीकृष्ण
  • समय पक्का करें: स्थानीय पंचांग से

एकादशी क्या है?

एकादशी का अर्थ है "ग्यारहवीं" — अमावस्या और पूर्णिमा दोनों के ग्यारह दिन बाद की तिथि। शुक्ल पक्ष की एकादशी बढ़ते (उजले) पक्ष में और कृष्ण पक्ष की एकादशी घटते (अँधेरे) पक्ष में आती है। इस दिन आंशिक या पूर्ण उपवास, अतिरिक्त प्रार्थना, विष्णु नाम-जप और उस विशेष एकादशी की कथा सुनने की परंपरा है।

बहुत से भक्त एकादशी पर अन्न और दालें (विशेषकर चावल) त्यागकर केवल फल, दूध या एक सात्त्विक भोजन लेते हैं, और कुछ निर्जल व्रत रखते हैं। बच्चे, वृद्ध, रोगी और गर्भवती स्त्रियाँ हल्का व्रत रखें। एकादशी का उद्देश्य मन-तन की शुद्धि और भक्ति बढ़ाना है, सहनशक्ति की परीक्षा नहीं — अपने स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का स्तर चुनें।

पारण (व्रत तोड़ना) कैसे करें

व्रत एकादशी को नहीं, बल्कि अगली सुबह द्वादशी को स्थानीय सूर्योदय के बाद खुलने वाले निश्चित पारण काल में तोड़ा जाता है। सामान्य नियम है कि सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले शीघ्र पारण करें, तथा जहाँ यह परंपरा है वहाँ हरि वासर (द्वादशी का प्रथम चरण) टालें। यह आपके सूर्योदय और तिथि समय पर निर्भर करता है, इसलिए पारण का समय शहर के अनुसार अलग होता है।

  1. अपने चुने स्तर (फलाहार, एक भोजन या निर्जल) के अनुसार पूरी एकादशी दिन-रात व्रत रखें।
  2. अगली सुबह (द्वादशी) स्थानीय सूर्योदय के बाद ही भोजन करें।
  3. अपने स्थानीय पंचांग में दिए पारण काल के भीतर व्रत तोड़ें — प्रायः दिन के आरंभिक भाग में।
  4. यदि कोई विशेष नियम हो (जैसे द्वादशी शीघ्र समाप्त हो, या स्मार्त-वैष्णव के लिए अलग दिन हों) तो अपनी परंपरा का अनुसरण करें।
  5. व्रत तोड़ने से पहले विष्णु की प्रार्थना करें और यथासंभव अन्न या दान दें।

2026 की सभी एकादशी तिथियाँ (संकेतात्मक कैलेंडर)

नीचे की तालिका में 2026 की एकादशियाँ सामान्य नाम और पक्ष सहित दी गई हैं। तिथियाँ संकेतात्मक हैं और आपके शहर, सूर्योदय गणना तथा स्मार्त या वैष्णव आचरण के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं। एकादशी के नाम भी क्षेत्र और परंपरा से थोड़े भिन्न होते हैं। सटीक तिथि और पारण काल सदा अपने स्थानीय पंचांग से मिलाएँ।

अनुमानित तिथिदिनएकादशी नामपक्ष
9 जनशुक्रपुत्रदा / पौष शुक्लशुक्ल
24 जनशनिषटतिलाकृष्ण
8 फररविजया / भैमीशुक्ल
22 फररविविजयाकृष्ण
9 मारसोमआमलकीशुक्ल
24 मारमंगलपापमोचिनीकृष्ण
7 अप्रैलमंगलकामदाशुक्ल
22 अप्रैलबुधवरूथिनीकृष्ण
7 मईगुरुमोहिनीशुक्ल
22 मईशुक्रअपराकृष्ण
5 जूनशुक्रनिर्जलाशुक्ल
20 जूनशनियोगिनीकृष्ण
5 जुलरविदेवशयनी (आषाढ़ी)शुक्ल
19 जुलरविकामिकाकृष्ण
3 अगसोमश्रावण पुत्रदा / पवित्राशुक्ल
18 अगमंगलअजा / अन्नदाकृष्ण
7 सितसोमअजा / पार्श्व (टीप देखें)शुक्ल
22 सितमंगलपरिवर्तिनी / पार्श्वशुक्ल
6 अक्तूमंगलइंदिराकृष्ण
21 अक्तूबुधपापांकुशा / पाशांकुशाशुक्ल
5 नवगुरुरमाकृष्ण
20 नवशुक्रदेवउठनी (प्रबोधिनी)शुक्ल
4 दिसशुक्रउत्पन्नाकृष्ण
19 दिसशनिमोक्षदा / वैकुंठशुक्ल

भाद्रपद (अग-सित) की एकादशियों पर टीप: भाद्रपद 2026 लगभग अगस्त के अंत से अक्टूबर के आरंभ तक फैला है और अमांत तथा पूर्णिमांत प्रणालियाँ महीनों की गणना अलग करती हैं, इसलिए इस काल की एकादशियाँ — अजा (~7 सित) और परिवर्तिनी / पार्श्व / वामन (~22 सित) — अलग-अलग समुदायों में भिन्न नामों से जानी जाती हैं। कोई भी प्रणाली "गलत" नहीं; अपने परिवार की परंपरा अपनाएँ और स्थानीय रूप से पक्का करें।

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2026 में याद रखने योग्य प्रमुख एकादशियाँ

  • निर्जला एकादशी (~5 जून) — निर्जल व्रत, जो सभी एकादशियों का फल देने वाला कहा जाता है।
  • देवशयनी / आषाढ़ी एकादशी (~5 जुल) — विष्णु की योगनिद्रा आरंभ; चातुर्मास का प्रारंभ।
  • परिवर्तिनी / पार्श्व एकादशी (~22 सित) — विष्णु शयन में करवट बदलते हैं; भाद्रपद में।
  • देवउठनी / प्रबोधिनी एकादशी (~20 नव) — विष्णु जागते हैं; चातुर्मास समाप्त, विवाह पुनः आरंभ।
  • वैकुंठ / मोक्षदा एकादशी (~19 दिस) — गीता जयंती और वैकुंठ द्वार से संबंधित।

अपनी सटीक तिथि और पारण समय कैसे पक्का करें

एक ही एकादशी अलग-अलग शहरों में अलग अंग्रेज़ी तिथि को पड़ सकती है — और दो लगातार दिनों (एक स्मार्त, एक वैष्णव) पर भी मनाई जा सकती है — इसलिए सबसे सुरक्षित है अपने ही शहर के पंचांग को देखना। सूर्योदय, एकादशी तिथि का आरंभ-अंत और अगली द्वादशी का छपा पारण काल देखें। यदि आप विदेश में (एनआरआई) भिन्न तिथि रेखा पर हैं, तो यह और भी आवश्यक है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में कितनी एकादशियाँ हैं?

2026 में लगभग 24 एकादशियाँ हैं — हर चंद्र मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एक-एक। जिन वर्षों में अधिक मास जुड़ता है वहाँ 25 या 26 हो सकती हैं, पर यहाँ गणना के अनुसार 2026 में सामान्य दो प्रति मास हैं।

पारण क्या है और एकादशी व्रत कब तोड़ें?

पारण व्रत को विधिपूर्वक तोड़ना है। इसे एकादशी को नहीं, अगली सुबह द्वादशी को स्थानीय सूर्योदय के बाद और पंचांग में छपे पारण काल के भीतर — प्रायः दिन के आरंभिक भाग में — करते हैं। सटीक समय शहर पर निर्भर है।

कुछ कैलेंडरों में एकादशी तिथि एक दिन क्यों बदल जाती है?

तिथि चंद्रमा की स्थिति से गिनी जाती है और भिन्न समय पर आरंभ-अंत होती है, इसलिए एक ही एकादशी अलग शहरों में अलग अंग्रेज़ी तिथि पर पड़ सकती है। स्मार्त और वैष्णव परंपराएँ अलग दिन भी मना सकती हैं। सदा स्थानीय रूप से पक्का करें।

एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?

बहुत से भक्त अन्न, चावल और दालें त्यागकर केवल फल, दूध, मेवे या एक सात्त्विक भोजन लेते हैं। कुछ निर्जल व्रत रखते हैं। सही स्तर स्वास्थ्य पर निर्भर है — बच्चे, वृद्ध, रोगी और गर्भवती स्त्रियाँ हल्का व्रत रखें।

2026 की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी है?

निर्जला एकादशी (लगभग 5 जून) विशेष फलदायी मानी जाती है क्योंकि यह निर्जल व्रत वर्ष की सभी एकादशियों का फल देने वाला कहा जाता है। देवशयनी, प्रबोधिनी और वैकुंठ एकादशी भी व्यापक रूप से मनाई जाती हैं।

भाद्रपद 2026 में कौन-सी एकादशियाँ आती हैं?

अजा एकादशी (लगभग 7 सितंबर) और परिवर्तिनी / पार्श्व एकादशी (लगभग 22 सितंबर) भाद्रपद काल में आती हैं। अमांत और पूर्णिमांत प्रणालियाँ महीनों की गणना अलग करती हैं, इसलिए नाम समुदाय से भिन्न हो सकते हैं; अपने परिवार की परंपरा अपनाएँ।

क्या एकादशी के नाम क्षेत्र से बदलते हैं?

हाँ। एक ही एकादशी अलग नामों से जानी जा सकती है — जैसे परिवर्तिनी, पार्श्व या वामन एकादशी — विभिन्न क्षेत्रों और संप्रदायों में। व्रत और उसका अर्थ वही रहता है; केवल स्थानीय नाम भिन्न होता है। कोई नाम गलत नहीं।

क्या मैं विदेश में (एनआरआई) इस कैलेंडर को मान सकता हूँ?

इन तिथियों को केवल मार्गदर्शन मानें। सूर्योदय और तिथि समय विश्वभर में अलग होते हैं, इसलिए एनआरआई को सही एकादशी तिथि और पारण समय हेतु अपने ही शहर के पंचांग से मिलाना चाहिए। एनआरआई कौन-सा पंचांग मानें, हमारी मार्गदर्शिका देखें।