संक्षिप्त उत्तर: भाद्रपद मास 2026 उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में लगभग 29 अगस्त से 26 सितंबर तक और आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र व गुजरात की अमांत गणना में लगभग 12 सितंबर से 11 अक्टूबर तक चलता है। सटीक आरंभ अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें, क्योंकि तिथि का समय ही पहला दिन तय करता है।

भाद्रपद (भादों, भाद्र) पारंपरिक हिंदू चंद्र वर्ष का छठा मास है और पूरे कैलेंडर के सबसे व्यस्त धार्मिक महीनों में से एक। वर्ष 2026 में यह असाधारण रूप से त्योहारों से भरा है: गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी, वामन जयंती, दो एकादशियाँ, अनंत चतुर्दशी के साथ गणेश विसर्जन, भाद्रपद पूर्णिमा, और पितृ पक्ष का आरंभ। यह स्तंभ पृष्ठ 2026 के पूरे मास का मानचित्र देता है, तिथियाँ दोनों प्रमुख गणनाओं में बताता है, और प्रत्येक त्योहार के विस्तृत मार्गदर्शक से जोड़ता है।

इस मास के बारे में समझने योग्य सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरे भारत में एक ही दिन आरंभ नहीं होता। उत्तर की पूर्णिमांत और दक्षिण-पश्चिम की अमांत पद्धति मास की सीमाएँ भिन्न रूप से तय करती हैं, इसलिए "भाद्रपद" नाम ही 2026 में दो अतिव्यापी पर भिन्न कालखंडों की ओर संकेत करता है। नीचे हम इसे समझाते हैं और दोनों तिथियाँ देते हैं ताकि आप अपनी परंपरा के अनुसार चल सकें।

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  • मास: भाद्रपद (छठा चंद्र मास)
  • पूर्णिमांत कालखंड 2026: लगभग 29 अगस्त - 26 सितंबर
  • अमांत कालखंड 2026: लगभग 12 सितंबर - 11 अक्टूबर
  • ऋतु: उत्तर-वर्षा / आरंभिक शरद
  • प्रमुख त्योहार: गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी, अनंत चतुर्दशी, भाद्रपद पूर्णिमा
  • पितृ पक्ष आरंभ: 26 / 27 सितंबर 2026 (परंपरानुसार)
  • सदा पुष्टि करें: अपने स्थानीय पंचांग से, क्योंकि तिथि के आरंभ-अंत का समय हर तारीख तय करता है

भाद्रपद मास 2026 दोनों गणनाओं में

हिंदू चंद्र मास दो प्रकार से गिने जाते हैं। पूर्णिमांत पद्धति में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है और अगला दिन से नया आरंभ होता है; मास का नाम उस नक्षत्र पर पड़ता है जिसके निकट पूर्णिमा हो। अमांत पद्धति में मास अमावस्या पर समाप्त होता है। चूँकि पूर्णिमा अमांत मास के लगभग मध्य में पड़ती है, दोनों पद्धतियाँ एक ही पक्ष को भिन्न नाम देती हैं, और उनके भाद्रपद कालखंड लगभग एक पक्ष के अंतर पर रहते हैं।

गणनाअनुसरण करने वाला क्षेत्रभाद्रपद 2026 आरंभभाद्रपद 2026 समाप्त
पूर्णिमांतउत्तर भारत, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिंदी क्षेत्रलगभग 29 अगस्त 2026 (श्रावण पूर्णिमा के अगले दिन)लगभग 26 सितंबर 2026 (भाद्रपद पूर्णिमा)
अमांतआंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडुलगभग 12 सितंबर 2026 (भाद्रपद अमावस्या के अगले दिन)लगभग 11 अक्टूबर 2026 (अगली अमावस्या)

कोई भी पद्धति दूसरे से अधिक "सही" नहीं है; ये समान प्राचीनता की दो वैध क्षेत्रीय परंपराएँ हैं। महत्वपूर्ण है निरंतरता: वही अपनाएँ जो आपका परिवार और स्थानीय मंदिर मानते हैं। पक्ष भिन्न मास-नाम क्यों पाते हैं इसके विस्तार के लिए पढ़ें अमांत बनाम पूर्णिमांत की व्याख्या, और विदेश में कौन सी पद्धति अपनाएँ यह तय करने के लिए देखें प्रवासियों को कौन सा पंचांग मानना चाहिए

जन्माष्टमी भिन्न मासों में क्यों आती है

एक सुंदर उदाहरण: 2026 में कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को है। पूर्णिमांत गणना में वह दिन भाद्रपद (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) में है, इसीलिए उत्तर भारत में कहा जाता है "जन्माष्टमी भादों में है।" अमांत गणना में वही दिन अभी भी श्रावण में है, इसलिए तेलुगु, कन्नड़ और मराठी परिवार जन्माष्टमी को श्रावण मास में रखते हैं। एक ही त्योहार, एक ही तारीख, दो मास-नाम। यह दोनों पद्धतियों का सबसे स्पष्ट रोज़मर्रा का उदाहरण है, इसीलिए हमारा कैलेंडर हर प्रविष्टि के साथ परंपरा बताता है।

भाद्रपद 2026 त्योहार कैलेंडर

नीचे की तालिका मास के प्रमुख अनुष्ठान सूचीबद्ध करती है। तिथियाँ तिथि के अनुसार दी गई हैं और सर्वाधिक प्रचलित पंचांग सहमति दर्शाती हैं; चूँकि एक तिथि अंग्रेज़ी कैलेंडर के दो दिनों में फैल सकती है, आपके शहर में सटीक दिन एक दिन आगे-पीछे हो सकता है। यात्रा, व्रत या मुहूर्त तय करने से पूर्व स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

तिथि (2026)दिनत्योहार / अनुष्ठानपरंपरा व टिप्पणी
4 सितशुक्रकृष्ण जन्माष्टमीपूर्णिमांत में भाद्रपद; अमांत में श्रावण
14 सितसोमगणेश चतुर्थी (विनायक चविति)शुक्ल चतुर्थी; अखिल भारतीय, महाराष्ट्र-आंध्र-तेलंगाना-कर्नाटक में विशाल
15 सितमंगलऋषि पंचमीशुक्ल पंचमी; प्रायः स्त्रियों द्वारा
17 सितगुरुज्येष्ठा गौरी / गौरी पूजा (क्षेत्रीय)गौरी हब्बा, महाराष्ट्र व कर्नाटक
19 सितशनिराधा अष्टमीशुक्ल अष्टमी; राधा प्राकट्य, ब्रज व वैष्णव केंद्र
23 सितबुधवामन जयंतीशुक्ल द्वादशी; वामन अवतार प्राकट्य
23 सितबुधपरिवर्तिनी / वामन एकादशीशुक्ल एकादशी वैष्णव व्रत
25 सितशुक्रअनंत चतुर्दशी + गणेश विसर्जनशुक्ल चतुर्दशी; दस दिवसीय गणेशोत्सव समाप्ति
26 सितशनिभाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा; पूर्णिमांत भाद्रपद का अंत
26/27 सितशनि/रविपितृ पक्ष आरंभकृष्ण पक्ष; 16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष आरंभ

गणेश चतुर्थी: सोमवार 14 सितंबर 2026

मास का शिखर है गणेश चतुर्थी, जो सोमवार 14 सितंबर 2026 को है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है, निश्चित दिनों तक पूजी जाती है, फिर विधिपूर्वक विदाई दी जाती है। चूँकि हम इस त्योहार के लिए समर्पित समूह रखते हैं, यहाँ मुहूर्त और शहर-वार विवरण दोहराते नहीं। पूजा समय व क्षेत्रीय रीतियों के लिए देखें गणेश चतुर्थी 2026 तिथि, मुहूर्त, शहर-वार मार्गदर्शक

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ऋषि पंचमी और गौरी दिवस

गणेश चतुर्थी के अगले दिन ऋषि पंचमी (15 सित) सप्त ऋषियों का सम्मान करती है और प्रायः स्त्रियों द्वारा शुद्धि व कृतज्ञता के व्रत रूप में मनाई जाती है। इसी काल में महाराष्ट्र और कर्नाटक ज्येष्ठा व कनिष्ठा गौरी (गौरी हब्बा) का स्वागत करते हैं, देवी को प्रिय पुत्री के रूप में गणेश के साथ दो-तीन दिन के गृह-प्रवास पर बुलाते हैं। ये शांत, गृह-केंद्रित अनुष्ठान पंडालों के सार्वजनिक उल्लास के पूरक हैं।

राधा अष्टमी: शनिवार 19 सितंबर 2026

राधा अष्टमी, श्री राधा का प्राकट्य दिवस, शनिवार 19 सितंबर 2026 (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि अनुसार) को है। यह बरसाना, वृंदावन और वैष्णव संप्रदायों में विशेष उत्साह से मनाई जाती है, अभिषेकम, कीर्तन और मध्याह्न दर्शन के साथ, क्योंकि राधा का प्राकट्य परंपरागत रूप से दोपहर के निकट माना जाता है। 2026 में शनिवार होने से यह कार्यरत परिवारों व प्रवासियों के लिए विशेष सुविधाजनक है। अनेक भक्त मध्याह्न पूजा तक आंशिक व्रत रखते हैं।

वामन जयंती और एकादशियाँ

वामन जयंती, लगभग 23 सितंबर 2026, विष्णु के वामन अवतार का प्राकट्य दर्शाती है, जिन्होंने तीन पगों में ब्रह्मांड नापा। यह परिवर्तिनी एकादशी (वामन या पार्श्व एकादशी) से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है, मास की शुक्ल पक्ष एकादशी, जिस पर वैष्णव व्रत व जागरण करते हैं। चक्र में आगे कृष्ण पक्ष में दूसरी एकादशी है। वर्ष की पूरी व्रत सूची दोनों गणनाओं सहित के लिए नीचे जुड़ा एकादशी तिथि मार्गदर्शक देखें।

  • परिवर्तिनी / वामन एकादशी - शुक्ल पक्ष, लगभग 23 सितंबर 2026, वामन प्राकट्य से जुड़ा वैष्णव व्रत दिवस।
  • इंदिरा एकादशी - कृष्ण पक्ष, पितृ पक्ष काल में पड़ती है, पूर्वजों हेतु व्रत व अर्पण के साथ।
  • दोनों में अन्न का त्याग किया जाता है; पारण अगले प्रातः अपने स्थानीय पंचांग की समयावधि में करें।

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन: शुक्रवार 25 सितंबर 2026

अनंत चतुर्दशी, शुक्रवार 25 सितंबर 2026, अनंत-पद्मनाभ विष्णु पूजा का दिन है, जिस पर भक्त पवित्र अनंत सूत्र बाँधते हैं। यह दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन दिवस भी है, जब बड़ी सार्वजनिक व अनेक घरेलू मूर्तियाँ भव्य शोभायात्रा में विसर्जन हेतु ले जाई जाती हैं। व्रत विधि के लिए पढ़ें अनंत चतुर्दशी 2026 मार्गदर्शक, और विसर्जन समय व पर्यावरण-हितैषी मार्गदर्शन के लिए गणेश विसर्जन 2026 तिथियाँ व विधि

भाद्रपद पूर्णिमा और पितृ पक्ष का आरंभ

भाद्रपद पूर्णिमा, शनिवार 26 सितंबर 2026 की पूर्णिमा, पूर्णिमांत मास का समापन करती है। ठीक अगले दिन, या कुछ परंपराओं में पूर्णिमा से ही, पितृ पक्ष आरंभ होता है - दिवंगत पूर्वजों हेतु श्राद्ध व तर्पण को समर्पित सोलह दिवसीय पक्ष, जो लगभग 26/27 सितंबर से अक्टूबर मध्य तक चलता है। इस काल में अनेक परिवार नए शुभ आरंभ टालते हैं और पूर्वज-स्मरण पर केंद्रित रहते हैं। दैनिक तिथि-वार श्राद्ध सूची के लिए देखें पितृ पक्ष 2026 स्तंभ

मास के व्रत व उपवास का सारांश

भाद्रपद व्रतों से समृद्ध मास है। ऊपर के त्योहार व्रतों के साथ मासिक नियमित व्रत यथावत पड़ते हैं, और साधकों को निश्चित घड़ी-समय के बजाय निम्न क्रम पर ध्यान देना चाहिए, जो स्थान अनुसार बदलता है।

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  1. संकष्टी / गणेश-संबंधित चतुर्थी व्रत गणेश चतुर्थी के आसपास त्योहार-समूह का आरंभ करते हैं।
  2. दो एकादशियाँ (शुक्ल में परिवर्तिनी, कृष्ण में इंदिरा) मास के प्रमुख अन्न-रहित व्रत हैं।
  3. प्रदोष व्रत (त्रयोदशी, संध्या शिव पूजा) शैव भक्तों हेतु प्रत्येक पक्ष में आता है।
  4. पूर्णिमा (26 सित) व पितृ पक्ष श्राद्ध दिवस सात्विक भोजन, सादगी और अनेक के लिए प्याज-लहसुन-मांस के त्याग की माँग करते हैं।
  5. हर व्रत का पारण केवल उस तिथि हेतु अपने स्थानीय पंचांग द्वारा दी समयावधि में करें।

क्षेत्रीय परंपराएँ

एक ही मास क्षेत्रों में उल्लेखनीय भिन्नता से मनाया जाता है, और प्रत्येक समान रूप से वैध है। महाराष्ट्र में भाद्रपद दस दिवसीय गणेशोत्सव व गौरी आगमन से परिभाषित है। आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में यह विनायक चविति का भाद्रपद मास है और कुछ समुदायों में बतुकम्मा की ओर बढ़ती ऋतु। कर्नाटक गणेश को गौरी हब्बा व स्वर्ण गौरी व्रत के साथ जोड़ता है। गुजरात इसे सामुदायिक गणेश मंडपों व शरद त्योहार ऋतु की तैयारी से मनाता है। उत्तर भारत में ब्रज की राधा अष्टमी व पितृ पक्ष के गंभीर आरंभ पर बल है। तमिल समुदाय विनायक चतुर्थी व अपनी पुरट्टासि-ऋतु भक्ति मनाते हैं। इनमें कोई विचलन नहीं; ये एक ही चंद्र मास की समानांतर जीवंत धाराएँ हैं।

प्रवासी टिप्पणी: 2026 का सप्ताहांत लाभ

विदेश में परिवारों के लिए 2026 की दो तिथि-समूह सुविधाजनक रूप से सप्ताहांत पर या निकट पड़ते हैं। राधा अष्टमी शनिवार है (19 सितंबर)। अनंत चतुर्दशी-पूर्णिमा-पितृ पक्ष क्रम शुक्रवार से रविवार (25-27 सितंबर) चलता है, जो विसर्जन, पूर्णिमा पूजा व तर्पण आरंभ हेतु दुर्लभ तीन दिवसीय अवसर देता है। गणेश चतुर्थी स्वयं सोमवार है (14 सितंबर)। यदि आप भारत से बाहर हैं, अपने शहर के अनुसार सूर्योदय-आधारित तिथि की पंचांग से पुष्टि करें, क्योंकि त्योहार तय करने वाली तिथि भारत से एक दिन पहले या बाद आरंभ हो सकती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाद्रपद मास 2026 कब आरंभ और समाप्त होता है?

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में भाद्रपद 2026 लगभग 29 अगस्त से 26 सितंबर तक चलता है। दक्षिण व पश्चिम की अमांत गणना में यह लगभग 12 सितंबर से 11 अक्टूबर तक चलता है। सटीक पहला दिन अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें, क्योंकि तिथि आरंभ समय ही उसे तय करता है।

पूर्णिमांत और अमांत भिन्न भाद्रपद तिथियाँ क्यों देते हैं?

पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर और अमांत मास अमावस्या पर समाप्त होता है। चूँकि पूर्णिमा अमांत मास के मध्य निकट पड़ती है, एक ही पक्ष को प्रत्येक पद्धति में भिन्न मास-नाम मिलता है, जिससे भाद्रपद कालखंड लगभग एक पक्ष का अंतर पाते हैं। कोई अधिक सही नहीं; अपने क्षेत्र-परिवार की पद्धति अपनाएँ।

2026 में कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद में है या श्रावण में?

गणना अनुसार दोनों में। 4 सितंबर 2026 की जन्माष्टमी उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति में भाद्रपद में और आंध्र-तेलंगाना-कर्नाटक-महाराष्ट्र की अमांत पद्धति में श्रावण में पड़ती है। एक ही त्योहार, एक ही तारीख, केवल मास-नाम भिन्न।

भाद्रपद 2026 में गणेश चतुर्थी कब है?

गणेश चतुर्थी सोमवार 14 सितंबर 2026 को है, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी। पूजा मुहूर्त व शहर-वार विवरण के लिए हमारा समर्पित गणेश चतुर्थी 2026 मार्गदर्शक देखें, जिसे इस मास स्तंभ पर हम दोहराते नहीं।

राधा अष्टमी 2026 कब है?

राधा अष्टमी शनिवार 19 सितंबर 2026 को है, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी, श्री राधा का प्राकट्य दर्शाती। परंपरागत रूप से मध्याह्न के निकट पूजी जाती है, और अनेक भक्त दोपहर पूजा तक आंशिक व्रत रखते हैं। सटीक तिथि समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन 2026 कब है?

अनंत चतुर्दशी शुक्रवार 25 सितंबर 2026 को है, दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन दिवस, जब बड़ी मूर्तियाँ विसर्जन हेतु ले जाई जाती हैं। यह अनंत-पद्मनाभ विष्णु पूजा और अनंत सूत्र बाँधने का दिन भी है।

2026 में पितृ पक्ष कब आरंभ होता है?

पितृ पक्ष, पूर्वजों हेतु श्राद्ध का सोलह दिवसीय पक्ष, लगभग 26 या 27 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा के ठीक बाद आरंभ होता है और अक्टूबर मध्य तक चलता है। इस दौरान अनेक परिवार नए शुभ आरंभ रोकते हैं और तर्पण पर केंद्रित रहते हैं। तिथि-वार सूची पंचांग से देखें।

भाद्रपद 2026 में कौन से व्रत पड़ते हैं?

मुख्य व्रत हैं दो एकादशियाँ (शुक्ल में परिवर्तिनी लगभग 23 सितंबर, कृष्ण में इंदिरा), गणेश चतुर्थी के आसपास चतुर्थी व्रत, प्रत्येक पक्ष का प्रदोष व्रत, और पूर्णिमा। पितृ पक्ष दिवस सात्विक भोजन माँगते हैं। हर व्रत का पारण अपने स्थानीय पंचांग की समयावधि में ही करें।