संक्षिप्त उत्तर: पश्चिम बंगाल में दिवाली 2026 पर केवल WBPCB द्वारा अनुमोदित ग्रीन पटाखे ही चलाए जा सकते हैं। दिवाली (8 नवंबर 2026) की रात निर्धारित 2 घंटे की समय-सीमा में ही पटाखे जलाने की अनुमति रहती है। सटीक समय के लिए स्थानीय प्रशासन की घोषणा अवश्य देखें।

दिवाली रोशनी, समृद्धि और आनंद का पर्व है, और पश्चिम बंगाल में यह उत्सव विशेष उमंग के साथ मनाया जाता है। लेकिन बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (WBPCB) और न्यायालयों ने पटाखों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए हैं। दिवाली 2026 को सुरक्षित, स्वच्छ और नियमों के अनुरूप मनाने के लिए इन नियमों को समझना ज़रूरी है।

दिवाली 2026 की प्रमुख तिथियाँ

उत्सव की योजना बनाते समय इन तिथियों को ध्यान में रखें ताकि आप पटाखा जलाने की अनुमत रात और समय-सीमा के बारे में सजग रहें।

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पर्वदिन और तिथि
धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवालीशनिवार, 7 नवंबर 2026
दिवाली / लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिन)रविवार, 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा / अन्नकूटसोमवार, 9 नवंबर 2026
भाई दूजमंगलवार, 10 नवंबर 2026

पश्चिम बंगाल में पटाखों को लेकर मुख्य नियम

पश्चिम बंगाल में पटाखों को लेकर नियम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और WBPCB के आदेशों के आधार पर तय होते हैं। मुख्य उद्देश्य वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित रखना है।

  • केवल WBPCB और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित ग्रीन पटाखे ही चलाए जा सकते हैं।
  • बेरियम-लवण युक्त और अत्यधिक शोर करने वाले लड़ी वाले पटाखों (सीरीज़ क्रैकर्स) पर प्रायः रोक रहती है।
  • पटाखे केवल दिवाली की रात की निर्धारित समय-सीमा में ही जलाने की अनुमति होती है।
  • अस्पतालों, स्कूलों, न्यायालयों और धार्मिक स्थलों के आसपास के 'साइलेंस ज़ोन' में पटाखे प्रतिबंधित रहते हैं।
  • निर्धारित ध्वनि-स्तर की सीमा से अधिक शोर करने वाले पटाखों की बिक्री और उपयोग अवैध है।

WBPCB के अनुसार पटाखा जलाने की समय-सीमा

हर वर्ष प्रशासन दिवाली की रात पटाखे जलाने के लिए एक निश्चित समय-खिड़की तय करता है, जो सामान्यतः 2 घंटे की होती है। नीचे दी गई जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है; दिवाली 2026 का सटीक समय स्थानीय प्रशासन और WBPCB की आधिकारिक घोषणा से ही पुष्ट करें।

अवसरसामान्य मार्गदर्शन
दिवाली की रातरात के निर्धारित लगभग 2 घंटे की समय-सीमा में
छठ पूजाप्रायः प्रातःकाल की निर्धारित सीमित अवधि में
समय की पुष्टिस्थानीय पुलिस/WBPCB की घोषणा के अनुसार

ग्रीन पटाखे क्या हैं?

ग्रीन पटाखे CSIR-NEERI द्वारा विकसित ऐसे पटाखे हैं जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत तक कम प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इनमें हानिकारक रसायनों की मात्रा कम होती है और ये कम धुआँ तथा कम शोर करते हैं। असली ग्रीन पटाखों पर QR कोड और अनुमोदन चिह्न होता है, जिसे खरीदते समय अवश्य जाँचें।

सुरक्षा के आवश्यक उपाय

पटाखे जलाते समय थोड़ी-सी सावधानी बड़ी दुर्घटनाओं को टाल सकती है। परिवार, विशेषकर बच्चों और वृद्धजनों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

  1. पटाखे हमेशा खुले, हवादार स्थान पर और वयस्कों की देखरेख में ही जलाएँ।
  2. पास में पानी की बाल्टी या रेत तैयार रखें।
  3. ढीले, सूती कपड़े पहनें; सिंथेटिक और लटकते कपड़ों से बचें।
  4. जलते या अधजले पटाखे को दोबारा जलाने की कोशिश न करें और उसे हाथ में न पकड़ें।
  5. पटाखों को दीयों, मोमबत्तियों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें।
  6. जलने पर तुरंत ठंडे पानी से प्रभावित हिस्से को धोएँ और गंभीर स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करें।

पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित विकल्प

प्रदूषण घटाने और सभी के लिए त्योहार को सुखद बनाने हेतु पटाखों के स्थान पर इन विकल्पों को अपनाया जा सकता है।

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  • मिट्टी के दीयों और तेल के दीपकों से घर-आँगन को सजाएँ।
  • रंगोली, फूलों और LED झालरों से सजावट करें।
  • परिवार के साथ लक्ष्मी-गणेश पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन करें।
  • यदि पटाखे चलाने हों तो केवल कम शोर वाले ग्रीन पटाखे और फुलझड़ी जैसे विकल्प चुनें।
  • मिठाई और उपहार बाँटकर पड़ोसियों व ज़रूरतमंदों के साथ खुशियाँ साझा करें।

उल्लंघन पर दंड और नागरिक ज़िम्मेदारी

प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री या उपयोग, तथा निर्धारित समय-सीमा के बाहर पटाखे जलाने पर पुलिस कार्रवाई, जुर्माना और अन्य कानूनी परिणाम हो सकते हैं। एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में नियमों का पालन करना और बुज़ुर्गों, रोगियों तथा पशु-पक्षियों की संवेदनशीलता का ध्यान रखना हमारा कर्तव्य है।

  • अनुमत पटाखेकेवल WBPCB-अनुमोदित ग्रीन पटाखे
  • मुख्य दिनरविवार, 8 नवंबर 2026
  • समय-सीमाप्रशासन द्वारा घोषित निर्धारित अवधि में
  • प्रतिबंधित क्षेत्रसाइलेंस ज़ोन (अस्पताल, स्कूल आदि)

दिवाली प्रकाश और आनंद का पर्व है — इसे स्वच्छ, सुरक्षित और नियमों के अनुरूप मनाकर हम पर्यावरण और समाज दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। दिवाली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में दिवाली 2026 पर कौन-से पटाखे चलाने की अनुमति है?

पश्चिम बंगाल में केवल WBPCB और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित ग्रीन पटाखे ही चलाने की अनुमति है। इनमें प्रदूषण और शोर पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम होता है। खरीदते समय पटाखों पर अनुमोदन चिह्न और QR कोड अवश्य जाँचें।

दिवाली 2026 का मुख्य दिन कब है?

दिवाली और लक्ष्मी पूजा का मुख्य दिन रविवार, 8 नवंबर 2026 है। यह रविवार होने के कारण विशेष शुभ माना जा रहा है। इसी रात निर्धारित समय-सीमा में पटाखे जलाने की अनुमति सामान्यतः रहती है।

पश्चिम बंगाल में पटाखे किस समय जला सकते हैं?

प्रशासन प्रायः दिवाली की रात लगभग 2 घंटे की एक निश्चित समय-सीमा तय करता है। छठ पूजा के लिए भी अलग सीमित अवधि हो सकती है। दिवाली 2026 का सटीक समय स्थानीय पुलिस और WBPCB की आधिकारिक घोषणा से ही पुष्ट करें।

ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों से कैसे अलग हैं?

ग्रीन पटाखे CSIR-NEERI द्वारा विकसित होते हैं और पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत तक कम प्रदूषण करते हैं। इनमें हानिकारक रसायन कम होते हैं तथा धुआँ और शोर भी कम होता है। असली ग्रीन पटाखों पर पहचान हेतु QR कोड होता है।

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क्या साइलेंस ज़ोन में पटाखे जलाना मना है?

हाँ, अस्पतालों, स्कूलों, न्यायालयों और धार्मिक स्थलों के आसपास घोषित साइलेंस ज़ोन में पटाखे जलाना प्रतिबंधित है। इन क्षेत्रों में रोगियों, विद्यार्थियों और संवेदनशील व्यक्तियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होता है?

प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री या उपयोग, तथा निर्धारित समय-सीमा के बाहर पटाखे जलाने पर पुलिस कार्रवाई, जुर्माना और अन्य कानूनी परिणाम हो सकते हैं। इसलिए नियमों का पालन करना और ज़िम्मेदार नागरिक बनना आवश्यक है।

पटाखे जलाते समय क्या सुरक्षा सावधानियाँ रखें?

पटाखे खुले हवादार स्थान पर वयस्कों की देखरेख में जलाएँ, पास में पानी या रेत रखें, सूती कपड़े पहनें और अधजले पटाखे को दोबारा न छुएँ। बच्चों और वृद्धजनों की विशेष सुरक्षा का ध्यान रखें।

पटाखों के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प क्या हैं?

मिट्टी के दीये, रंगोली, फूलों और LED झालरों से सजावट, लक्ष्मी-गणेश पूजा तथा भजन-कीर्तन जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। यदि पटाखे चलाने हों तो केवल कम शोर वाले ग्रीन पटाखे और फुलझड़ी जैसे विकल्प चुनें।