संक्षिप्त उत्तर: काठमांडू में दीवाली 2026 पाँच दिवसीय तिहार के रूप में 6 से 10 नवंबर 2026 तक मनाई जाएगी। मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर 2026 को होगी। घर दीयों व मेखर से सजते हैं और पशुपतिनाथ, स्वयंभूनाथ में विशेष पूजा-अर्चना होती है।

काठमांडू घाटी में दीवाली को नेपाली में 'तिहार' या 'यमपंचक' कहा जाता है और यह हिंदू समुदाय का दूसरा सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। हिमालय की गोद में बसी इस प्राचीन नगरी में दीयों की रोशनी, फूलों की मालाएँ, रंगोली और लोक-गीतों के साथ प्रकाश का यह उत्सव पाँच दिनों तक अद्भुत भक्ति-भाव में मनाया जाता है। दीवाली 2026 में तिहार का यह क्रम 6 से 10 नवंबर तक चलेगा।

काठमांडू में दीवाली 2026 की तिथियाँ

तिहार के पाँच दिन यम, लक्ष्मी और परिवार के पवित्र संबंधों को समर्पित हैं। नीचे दी गई तिथियाँ पंचांग आधारित हैं; स्थानीय मंदिर एवं समुदाय की घोषणाओं के अनुसार पूजा का सटीक मुहूर्त थोड़ा भिन्न हो सकता है।

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दिनतिथि 2026पर्व
धनतेरस / काग तिहार निकटशुक्रवार 6 नवंबर 2026धन-समृद्धि की शुरुआत
नरक चतुर्दशी / छोटी दीवालीशनिवार 7 नवंबर 2026कुकुर तिहार का समय
दीवाली / लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिन)रविवार 8 नवंबर 2026लक्ष्मी पूजा (रविवार — शुभ)
गोवर्धन पूजा / अन्नकूटसोमवार 9 नवंबर 2026गोरु/गाय तिहार, म्हपूजा
भाई दूज / भाई टीकामंगलवार 10 नवंबर 2026भाई-बहन का पर्व

तिहार के पाँच दिन और उनकी परंपराएँ

काठमांडू का तिहार भारत की दीवाली से मिलता-जुलता होते हुए भी अपनी विशिष्ट पशु-पूजा परंपराओं के कारण अनूठा है। प्रत्येक दिन किसी विशेष प्राणी या देवता को समर्पित होता है, जो प्रकृति और जीवन के प्रति नेपाली संस्कृति की श्रद्धा को दर्शाता है।

  • काग तिहार — कौवे को यमराज का दूत मानकर उसे भोजन अर्पित किया जाता है।
  • कुकुर तिहार — कुत्ते को माला व टीका लगाकर उसकी निष्ठा का सम्मान किया जाता है।
  • गाय तिहार व लक्ष्मी पूजा — मुख्य दिन गाय की पूजा और संध्या को देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
  • गोरु तिहार व म्हपूजा — बैल की पूजा तथा नेवार समुदाय में आत्म-पूजा (म्हपूजा) का अनुष्ठान होता है।
  • भाई टीका — बहनें भाइयों के मस्तक पर सप्तरंगी टीका लगाकर दीर्घायु की कामना करती हैं।

लक्ष्मी पूजा — तिहार का हृदय

मुख्य दीवाली 2026 रविवार 8 नवंबर को घरों में देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जाएगा। लोग घर के द्वार से पूजा-स्थान तक लाल रंग के पवित्र पगचिह्न बनाते हैं ताकि देवी सहज प्रवेश कर सकें। दीयों, मोमबत्तियों और विद्युत-मालाओं से पूरा काठमांडू जगमगा उठता है। पूजा में देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश तथा धन-कुबेर का भी स्मरण किया जाता है।

पूजा में शामिल सामान्य विधियाँ

  • घर व दुकान की सफाई और सजावट
  • देहली पर रंगोली एवं लाल पगचिह्न
  • दीप-प्रज्वलन और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा की स्थापना
  • पुष्प, अक्षत, धूप, नैवेद्य व मिठाई का अर्पण
  • 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' जैसे प्रसिद्ध मंत्रों का जप

काठमांडू के पवित्र मंदिर और दर्शन

तिहार के दिनों में काठमांडू घाटी के मंदिर विशेष रूप से सजते हैं और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में गिने जाने वाले ये स्थल आस्था और स्थापत्य दोनों की दृष्टि से अनुपम हैं।

  • पशुपतिनाथ मंदिर — बागमती तट पर स्थित भगवान शिव का यह विश्वप्रसिद्ध धाम दीप-दान और आरती के लिए विशेष है।
  • स्वयंभूनाथ (मंकी टेम्पल) — पहाड़ी पर स्थित यह स्तूप घाटी का विहंगम दृश्य और शांति प्रदान करता है।
  • बौधनाथ स्तूप — विशाल स्तूप के चारों ओर दीप और प्रार्थना-ध्वजों की छटा दर्शनीय होती है।
  • बूढ़ानीलकंठ — भगवान विष्णु के शयन-रूप के दर्शन के लिए प्रसिद्ध।
  • दक्षिणकाली व अन्य शक्तिपीठ — देवी उपासकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

देउसी-भैलो और लोक-उल्लास

तिहार की एक विशेष परंपरा 'देउसी-भैलो' है, जिसमें बच्चों और युवाओं की टोलियाँ घर-घर जाकर पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और आशीर्वाद देती हैं। बदले में उन्हें फल, मिठाई और दान मिलता है। यह सामुदायिक आनंद और सद्भाव का प्रतीक है, जो काठमांडू की गलियों को संगीतमय बना देता है।

काठमांडू की यात्रा और व्यावहारिक सुझाव

  • सर्वोत्तम समय6 से 10 नवंबर 2026 (तिहार पंचक)
  • मुख्य पूजा दिवसरविवार 8 नवंबर 2026
  • मौसमनवंबर में शरद ऋतु — दिन सुहावने, रातें ठंडी
  • पहनावामंदिर दर्शन हेतु शालीन एवं गर्म वस्त्र
  • सावधानीस्थानीय आयोजनों व मुहूर्त की पुष्टि स्थानीय मंदिर/समुदाय से करें

यदि आप विदेश या भारत से काठमांडू आ रहे हैं, तो त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मुख्य प्रवेश-द्वार है। इस अवधि में होटलों और उड़ानों की माँग बढ़ जाती है, इसलिए आवास और यात्रा की बुकिंग पहले से करना उचित रहता है। पटाखों का प्रयोग संयम से करें और पर्यावरण एवं वृद्धजनों का ध्यान रखें।

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निष्कर्ष

काठमांडू में दीवाली 2026 केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पशु-पक्षियों, देवी लक्ष्मी और पारिवारिक स्नेह के प्रति कृतज्ञता का सुंदर उत्सव है। हिमालय की छाया में दीयों की लौ, देउसी-भैलो के गीत और मंदिरों की आरती मिलकर एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव रचते हैं। सटीक 2026 आयोजनों के लिए स्थानीय घोषणाओं पर अवश्य ध्यान दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काठमांडू में दीवाली 2026 कब मनाई जाएगी?

काठमांडू में दीवाली 2026 पाँच दिवसीय तिहार के रूप में 6 से 10 नवंबर 2026 तक मनाई जाएगी। मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर 2026 को होगी।

नेपाल में दीवाली को क्या कहते हैं?

नेपाल में दीवाली को 'तिहार' या 'यमपंचक' कहा जाता है। यह पाँच दिवसीय पर्व है जिसमें कौवा, कुत्ता, गाय, बैल और भाई-बहन के संबंध का सम्मान किया जाता है।

तिहार के पाँच दिन कौन-कौन से हैं?

तिहार के पाँच दिन हैं — काग तिहार, कुकुर तिहार, गाय तिहार व लक्ष्मी पूजा, गोरु तिहार व म्हपूजा, और अंत में भाई टीका (भाई दूज)।

लक्ष्मी पूजा किस दिन होगी?

दीवाली 2026 की मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर 2026 को होगी। रविवार को होने के कारण इसे विशेष शुभ माना जा रहा है। सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

काठमांडू में दीवाली के समय कौन-से मंदिर देखें?

पशुपतिनाथ, स्वयंभूनाथ (मंकी टेम्पल), बौधनाथ स्तूप, बूढ़ानीलकंठ और दक्षिणकाली प्रमुख हैं। ये सभी दीप, आरती और सजावट से विशेष रूप से जगमगाते हैं।

देउसी-भैलो क्या है?

देउसी-भैलो तिहार की एक लोक-परंपरा है, जिसमें बच्चों व युवाओं की टोलियाँ घर-घर जाकर पारंपरिक गीत गाती हैं, आशीर्वाद देती हैं और बदले में मिठाई, फल व दान प्राप्त करती हैं।

काठमांडू में दीवाली के समय मौसम कैसा रहता है?

नवंबर में काठमांडू में शरद ऋतु रहती है — दिन सुहावने और रातें ठंडी होती हैं। मंदिर दर्शन के लिए शालीन तथा गर्म वस्त्र पहनना उचित रहता है।

क्या 2026 के सटीक आयोजनों की जानकारी पहले से मिल जाएगी?

सामान्य परंपराएँ हर वर्ष समान रहती हैं, पर विशेष कार्यक्रम, मेले व पूजा-मुहूर्त के सटीक विवरण के लिए स्थानीय मंदिर एवं समुदाय की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा करें।