संक्षिप्त उत्तर: भुवनेश्वर में दीवाली 2026, 6 से 10 नवंबर तक मनाई जाएगी। मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर को होगी। यहाँ ओड़िया परंपरा में 'बड़बडुआ आह्वान' के साथ पूर्वजों का स्मरण किया जाता है और लिंगराज मंदिर सहित नगर के मंदिरों में दीपदान होता है।

भुवनेश्वर को 'मंदिरों का शहर' कहा जाता है और यहाँ दीवाली का पर्व सनातन धर्म की परंपराओं के साथ ओड़िया संस्कृति की विशिष्ट रीतियों का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। वर्ष 2026 में यह पंच-दिवसीय उत्सव 6 नवंबर से 10 नवंबर तक मनाया जाएगा।

इस गाइड में हम भुवनेश्वर की दीवाली की तिथियों, लिंगराज मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों की परंपराओं, ओड़िया रीति-रिवाजों और श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी मार्गदर्शन साझा कर रहे हैं। सटीक 2026 आयोजनों के लिए स्थानीय मंदिर एवं समुदाय की घोषणाएँ अवश्य देखें।

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भुवनेश्वर दीवाली 2026 की तिथियाँ

दीवाली एक पंच-दिवसीय पर्व है जो धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज तक चलता है। वर्ष 2026 में मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर को पड़ रही है, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

पर्वदिन और तिथि
धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी / छोटी दीवालीशनिवार, 7 नवंबर 2026
दीवाली / लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिन)रविवार, 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा / अन्नकूटसोमवार, 9 नवंबर 2026
भाई दूजमंगलवार, 10 नवंबर 2026

ओड़िया परंपरा में दीवाली और 'बड़बडुआ'

ओडिशा में दीवाली की सबसे विशिष्ट परंपरा 'बड़बडुआ आह्वान' है। इस दिन परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हैं और जूट या पटसन की डंठलों को जलाकर आकाश की ओर दिखाते हुए पितरों से मार्ग आलोकित करने तथा आशीर्वाद देने की प्रार्थना करते हैं।

यह रीति सनातन धर्म की श्राद्ध-भावना को दीपोत्सव के साथ जोड़ती है, जिसमें प्रकाश और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता दोनों का सम्मान होता है। इसके साथ ही घरों में देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की सामान्य परंपरा भी निभाई जाती है।

लिंगराज मंदिर और नगर के प्रमुख मंदिर

भुवनेश्वर का प्राचीन लिंगराज मंदिर भगवान हरिहर (शिव और विष्णु का संयुक्त रूप) को समर्पित है। दीपावली के अवसर पर मंदिर परिसर तथा नगर के अनेक मंदिरों में दीपदान, सफ़ाई और विशेष अर्चना की परंपरा रहती है, जिससे मंदिरों का शहर दीपों से जगमगा उठता है।

  • लिंगराज मंदिर — भगवान हरिहर को समर्पित प्राचीन शैव तीर्थ
  • मुक्तेश्वर एवं राजारानी जैसे ऐतिहासिक मंदिर-स्थल
  • ISKCON एवं स्थानीय लक्ष्मी-नारायण मंदिर, जहाँ लक्ष्मी पूजा होती है
  • आस-पास के गाँवों के ग्राम-देवता मंदिर जहाँ ओड़िया रीति निभाई जाती है

कृपया ध्यान दें कि दर्शन का समय, विशेष अनुष्ठान और भीड़-प्रबंधन प्रतिवर्ष बदल सकते हैं; इसलिए 2026 की सटीक व्यवस्था के लिए मंदिर प्रशासन की आधिकारिक सूचना देखें।

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घर पर लक्ष्मी पूजा की सामान्य विधि

  1. घर की सफ़ाई कर मुख्य द्वार पर रंगोली और तोरण सजाएँ।
  2. पूजा-स्थल पर देवी लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. दीप, धूप, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
  4. 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' जैसे प्रचलित मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
  5. आरती कर परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें और दीपदान करें।

मंत्रोच्चार में केवल प्रचलित एवं मान्य मंत्रों का ही उपयोग करें। पूजा का शुभ मुहूर्त क्षेत्र और पंचांग के अनुसार बदलता है, अतः स्थानीय पंडित या विश्वसनीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें।

पर्व के पाँच दिनों का महत्त्व

  • धनतेरससमृद्धि एवं आरोग्य की कामना; बर्तन-आभूषण की खरीद की परंपरा
  • नरक चतुर्दशीअभ्यंग स्नान और नकारात्मकता के नाश का प्रतीक
  • लक्ष्मी पूजादेवी लक्ष्मी का आह्वान; बड़बडुआ रीति और दीपोत्सव
  • गोवर्धन पूजाभगवान कृष्ण एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञता; अन्नकूट
  • भाई दूजभाई-बहन के स्नेह और रक्षा का पर्व

श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुझाव

  • त्योहार के दिनों में मंदिरों में भीड़ रहती है; दर्शन के लिए पर्याप्त समय रखें।
  • पर्यावरण-अनुकूल दीये और मिट्टी के दीपक अपनाएँ; ध्वनि-प्रदूषण से बचें।
  • सटीक 2026 आयोजनों, मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्थानीय घोषणाएँ देखें।
  • बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ सुरक्षित रूप से दीप जलाएँ।

भुवनेश्वर की दीवाली प्रकाश, भक्ति और पारिवारिक स्नेह का पर्व है, जहाँ प्राचीन मंदिरों की गरिमा और ओड़िया परंपराओं की मिठास एक साथ अनुभव की जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुवनेश्वर में दीवाली 2026 कब है?

भुवनेश्वर में दीवाली 2026 का पंच-दिवसीय पर्व 6 नवंबर (धनतेरस) से 10 नवंबर (भाई दूज) तक मनाया जाएगा। मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर 2026 को होगी।

ओडिशा में 'बड़बडुआ' क्या है?

बड़बडुआ ओडिशा की विशिष्ट दीवाली परंपरा है जिसमें दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर जूट की डंठलें जलाई जाती हैं और पितरों से मार्ग आलोकित करने तथा आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।

लिंगराज मंदिर किसको समर्पित है?

भुवनेश्वर का प्राचीन लिंगराज मंदिर भगवान हरिहर को समर्पित है, जो शिव और विष्णु का संयुक्त स्वरूप है। दीवाली पर यहाँ दीपदान और विशेष अर्चना की परंपरा रहती है।

मुख्य लक्ष्मी पूजा 2026 में किस दिन है?

मुख्य लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर 2026 को है। रविवार को पड़ने के कारण इसे विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

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लक्ष्मी पूजा के लिए कौन-सा मंत्र प्रचलित है?

'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' देवी लक्ष्मी का एक प्रचलित और सरल मंत्र है। श्रद्धालु आरती और स्तुति के साथ इसका श्रद्धापूर्वक जाप कर सकते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त कैसे जानें?

शुभ मुहूर्त क्षेत्र और पंचांग के अनुसार बदलता है। सटीक समय के लिए स्थानीय पंडित या किसी विश्वसनीय पंचांग से पुष्टि करना उचित है।

भुवनेश्वर में दीवाली की क्या विशेषता है?

मंदिरों के शहर भुवनेश्वर में दीवाली सनातन परंपरा और ओड़िया रीतियों का संगम है, जहाँ बड़बडुआ आह्वान, दीपदान और अनेक प्राचीन मंदिरों की गरिमा एक साथ अनुभव होती है।

2026 के आयोजनों की जानकारी कहाँ मिलेगी?

मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मंदिर व्यवस्था की सटीक 2026 जानकारी के लिए संबंधित मंदिर प्रशासन और स्थानीय समुदाय की आधिकारिक घोषणाएँ देखें।