कंबोडिया में दिवाली 2026: प्रकाश पर्व के आयोजन, गतिविधियाँ और सांस्कृतिक झलक
कंबोडिया में दिवाली 2026 (6–10 नवंबर) कैसे मनाई जाती है — नोम पेन्ह और सिएम रीप में भारतीय प्रवासी समुदाय की पूजा, दीपोत्सव, आतिशबाज़ी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सम्पूर्ण जानकारी।

कंबोडिया में दिवाली 2026 (6–10 नवंबर) कैसे मनाई जाती है — नोम पेन्ह और सिएम रीप में भारतीय प्रवासी समुदाय की पूजा, दीपोत्सव, आतिशबाज़ी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सम्पूर्ण जानकारी।
संक्षिप्त उत्तर: कंबोडिया में दिवाली 2026 का मुख्य दिन रविवार 8 नवंबर है, जब लक्ष्मी पूजा होती है। पाँच दिवसीय पर्व धनतेरस (6 नवंबर) से भाई दूज (10 नवंबर) तक चलता है। नोम पेन्ह और सिएम रीप में भारतीय समुदाय दीप, पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ इसे मनाता है।
कंबोडिया, जिसे प्राचीन काल में कम्बुज देश कहा जाता था, भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं से सदियों पुराना नाता रखता है। यहाँ अंगकोर वाट जैसे विश्व प्रसिद्ध मंदिर इस साझा विरासत की जीवंत गवाही हैं। आज कंबोडिया में बसा भारतीय प्रवासी समुदाय और भारतीय मूल के लोग दिवाली 2026 को उसी उत्साह और श्रद्धा से मनाने की तैयारी में हैं।
इस लेख में हम कंबोडिया में दिवाली 2026 की तिथियों, पूजा विधि, नोम पेन्ह और सिएम रीप में होने वाले आयोजनों तथा सांस्कृतिक झलकियों की विस्तृत जानकारी देंगे। ध्यान दें कि किसी भी विशेष आयोजन की सटीक तिथि, स्थान और समय के लिए स्थानीय मंदिर या समुदाय की घोषणाओं की पुष्टि अवश्य करें।
कंबोडिया में दिवाली 2026 की तिथियाँ
दिवाली एक पाँच दिवसीय पर्व है जो धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज पर समाप्त होता है। कंबोडिया इंडोचाइना समय क्षेत्र (ICT, UTC+7) में आता है, जो भारतीय समय से डेढ़ घंटा आगे है, इसलिए तिथियाँ भारत के अनुरूप ही मानी जाती हैं।
| पर्व दिवस | दिन और तिथि |
|---|---|
| धनतेरस | शुक्रवार 6 नवंबर 2026 |
| नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली | शनिवार 7 नवंबर 2026 |
| दिवाली / लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिन) | रविवार 8 नवंबर 2026 |
| गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | सोमवार 9 नवंबर 2026 |
| भाई दूज | मंगलवार 10 नवंबर 2026 |
मुख्य दिवाली का दिन रविवार 8 नवंबर 2026 को पड़ रहा है, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि यह अवकाश का दिन है और परिवार तथा समुदाय अधिक संख्या में एकत्र होकर पूजा और उत्सव में सम्मिलित हो सकते हैं।
दिवाली का आध्यात्मिक महत्व
दिवाली अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व है। यह भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाया जाता है, जब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी दिन धन और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान है।
प्रवासी भारतीयों के लिए दिवाली केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का माध्यम भी है। कंबोडिया की धरती पर, जहाँ हिंदू विरासत पहले से रची-बसी है, यह पर्व और भी गहरा अर्थ ग्रहण कर लेता है।
नोम पेन्ह में दिवाली उत्सव
राजधानी नोम पेन्ह कंबोडिया में भारतीय समुदाय का सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ भारतीय दूतावास, सांस्कृतिक संगठन और मंदिर मिलकर दिवाली के अवसर पर पूजा-अर्चना, दीपोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
- सामूहिक लक्ष्मी-गणेश पूजा और आरती के आयोजन
- दीप और रंगोली से सजे घर और मंदिर परिसर
- भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्य-संगीत के सांस्कृतिक कार्यक्रम
- पारंपरिक भारतीय मिठाइयों और व्यंजनों का सामुदायिक भोज
- बच्चों के लिए दीप बनाने और रंगोली की गतिविधियाँ
सिएम रीप में दिवाली
सिएम रीप, जो विश्व धरोहर अंगकोर वाट का प्रवेशद्वार है, में भी भारतीय पर्यटकों और प्रवासियों की उपस्थिति के कारण दिवाली का उत्साह देखने को मिलता है। यहाँ कुछ होटल, रेस्तरां और सामुदायिक समूह छोटे स्तर पर दीप-सज्जा और उत्सव आयोजित करते हैं। अंगकोर की प्राचीन हिंदू विरासत के बीच दीप जलाना एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव देता है।
घर पर लक्ष्मी पूजा की सरल विधि
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ कर सजाएँ
- भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- दीप, धूप, पुष्प, अक्षत, रोली और नैवेद्य से पूजन सामग्री तैयार करें
- गणेश जी का स्मरण कर पूजा आरंभ करें, फिर लक्ष्मी जी का आवाहन करें
- "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" जैसे प्रसिद्ध मंत्र का जप करें
- आरती करें, प्रसाद वितरित करें और घर के हर कोने में दीप जलाएँ
पूजा के सटीक शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या मंदिर के पुजारी से परामर्श करें, क्योंकि कंबोडिया के समय क्षेत्र के अनुसार समय भिन्न हो सकता है।
आतिशबाज़ी और सुरक्षा
कंबोडिया में आतिशबाज़ी से जुड़े स्थानीय नियम और प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। सार्वजनिक रूप से पटाखे जलाने से पहले स्थानीय प्रशासन की अनुमति और नियमों की जानकारी अवश्य लें। पर्यावरण के अनुकूल दीप और मोमबत्तियाँ जलाकर प्रकाश पर्व की भावना को सुरक्षित ढंग से मनाना श्रेष्ठ रहता है।
यात्रियों और प्रवासियों के लिए सुझाव
- दिवाली से पहले स्थानीय भारतीय समुदाय या दूतावास के आयोजनों की घोषणाओं पर नज़र रखें
- दीप, अगरबत्ती और पूजा सामग्री भारतीय दुकानों या ऑनलाइन से पहले से मंगवा लें
- नोम पेन्ह में भारतीय रेस्तरां दिवाली विशेष व्यंजन उपलब्ध करा सकते हैं
- सामुदायिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर संस्कृति और मित्रता दोनों का आनंद लें
- मुख्य दिवाली तिथिरविवार 8 नवंबर 2026
- समय क्षेत्रइंडोचाइना समय (UTC+7)
- प्रमुख शहरनोम पेन्ह और सिएम रीप
- आराध्य देवमाँ लक्ष्मी और भगवान गणेश
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कंबोडिया में दिवाली 2026 कब है?
कंबोडिया में दिवाली 2026 का पाँच दिवसीय पर्व 6 नवंबर (धनतेरस) से 10 नवंबर (भाई दूज) तक चलेगा। मुख्य दिवाली और लक्ष्मी पूजा का दिन रविवार 8 नवंबर 2026 है।
दिवाली का मुख्य दिन कौन-सा है?
मुख्य दिवाली का दिन रविवार 8 नवंबर 2026 है, जब माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह अवकाश का दिन होने के कारण विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।
नोम पेन्ह में दिवाली कहाँ मनाई जाती है?
नोम पेन्ह में भारतीय समुदाय, मंदिर और सांस्कृतिक संगठन पूजा, दीपोत्सव और कार्यक्रम आयोजित करते हैं। सटीक स्थान और तिथि के लिए स्थानीय समुदाय की घोषणाओं की पुष्टि करें।
क्या सिएम रीप में भी दिवाली मनाई जाती है?
हाँ, सिएम रीप में भारतीय पर्यटकों और प्रवासियों के कारण छोटे स्तर पर दीप-सज्जा और उत्सव होते हैं। अंगकोर वाट की हिंदू विरासत इस अनुभव को और विशेष बनाती है।
घर पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें?
स्नान कर स्वच्छ स्थान पर गणेश-लक्ष्मी की स्थापना करें, दीप-धूप-पुष्प अर्पित करें, प्रसिद्ध लक्ष्मी मंत्र का जप करें, आरती करें और घर में दीप जलाएँ। शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
कंबोडिया में आतिशबाज़ी की अनुमति है?
आतिशबाज़ी को लेकर स्थानीय नियम और प्रतिबंध हो सकते हैं। सार्वजनिक रूप से पटाखे जलाने से पहले स्थानीय प्रशासन की अनुमति लें। सुरक्षित रूप से दीप और मोमबत्तियाँ जलाना श्रेष्ठ विकल्प है।
कंबोडिया और भारत के समय में कितना अंतर है?
कंबोडिया इंडोचाइना समय (UTC+7) में है, जो भारतीय मानक समय से डेढ़ घंटा आगे है। इसलिए पूजा मुहूर्त का स्थानीय समय भारत से भिन्न होगा।
पूजा सामग्री कंबोडिया में कहाँ मिलेगी?
नोम पेन्ह की भारतीय दुकानों और ऑनलाइन विक्रेताओं से दीप, अगरबत्ती और पूजा सामग्री मिल सकती है। दिवाली से पहले माँग बढ़ने के कारण इन्हें पहले से मंगवा लेना उचित रहता है।

