संक्षिप्त उत्तर: दीवाली 2026 का मुख्य दिन यानी लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर, रविवार को है। खाड़ी देशों में बसे हिंदू परिवार धनतेरस (6 नवंबर) से भाई दूज (10 नवंबर) तक यह पाँच दिवसीय पर्व घर, मंदिर और समुदाय के साथ दीये, रंगोली, पूजा और मंत्रों के साथ मनाते हैं।

दीपों का पर्व दीवाली भारत के साथ-साथ विश्वभर में बसे हिंदू श्रद्धालुओं के लिए वर्ष का सबसे प्रतीक्षित उत्सव है। खाड़ी देशों — संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान — में रहने वाले लाखों भारतीय परिवारों के लिए दीवाली अपनी संस्कृति, आस्था और परिवार से जुड़ाव का विशेष अवसर बनकर आती है। इस मार्गदर्शिका में दीवाली 2026 की तिथियाँ, लक्ष्मी पूजा का महत्व, पाँच दिवसीय अनुष्ठान और खाड़ी में उत्सव मनाने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।

दीवाली 2026 कब है — पाँच दिवसीय पर्व की तिथियाँ

दीवाली एक दिन का नहीं, बल्कि पाँच दिनों का पर्व है, जो धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज पर समाप्त होता है। वर्ष 2026 में मुख्य दीवाली यानी लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है, जो रविवार होने के कारण और भी शुभ मानी जा रही है क्योंकि इस दिन बहुत से परिवारों को अवकाश मिलता है।

Advertisement
पर्वतिथि 2026दिन
धनतेरस6 नवंबरशुक्रवार
नरक चतुर्दशी / छोटी दीवाली7 नवंबरशनिवार
दीवाली / लक्ष्मी पूजा8 नवंबररविवार
गोवर्धन पूजा / अन्नकूट9 नवंबरसोमवार
भाई दूज10 नवंबरमंगलवार

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और खाड़ी समय क्षेत्र

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के शुभ समय में की जाती है, जब अमावस्या तिथि प्रबल होती है। खाड़ी देश भारतीय मानक समय से डेढ़ घंटे पीछे चलते हैं, इसलिए भारत में प्रकाशित पंचांग के मुहूर्त को अपने स्थानीय समय के अनुसार समायोजित करना आवश्यक है। सटीक मुहूर्त और सूर्यास्त समय के लिए अपने शहर के मंदिर, पुरोहित या विश्वसनीय पंचांग की घोषणा अवश्य देखें।

  • प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन सर्वाधिक शुभ माना जाता है
  • स्थिर लग्न (वृषभ आदि) में पूजा करना श्रेष्ठ रहता है
  • खाड़ी देशों में सूर्यास्त भारत से भिन्न होता है — स्थानीय समय के अनुसार दीये जलाएँ
  • पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि की उपस्थिति में ही पूजा करें

पाँच दिवसीय अनुष्ठान मार्गदर्शिका

धनतेरस (6 नवंबर) — समृद्धि का शुभारंभ

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन बर्तन, सोना-चाँदी या नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। खाड़ी देशों में भारतीय परिवार इस दिन घर की सफाई पूरी कर, मुख्य द्वार पर दीया जलाकर समृद्धि का स्वागत करते हैं।

नरक चतुर्दशी / छोटी दीवाली (7 नवंबर)

इस दिन को अभ्यंग स्नान का दिन माना जाता है, जिसमें सूर्योदय से पूर्व तेल-उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। घरों को दीयों से सजाया जाता है और नकारात्मकता को दूर करने का संकल्प लिया जाता है।

दीवाली / लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर) — मुख्य पर्व

यह पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। संध्या के समय देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है, घर दीयों से जगमगा उठते हैं और परिवार एकत्र होकर आरती करते हैं। खाड़ी देशों में अनेक परिवार अपने घरों में तथा स्थानीय मंदिरों में सामूहिक पूजा में भाग लेते हैं।

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट (9 नवंबर) और भाई दूज (10 नवंबर)

गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला का स्मरण करते हुए अन्नकूट अर्पित किया जाता है। अंतिम दिन भाई दूज पर बहनें भाइयों के दीर्घायु की कामना करती हैं और परिवार का प्रेम-बंधन दृढ़ होता है।

Advertisement

खाड़ी देशों में दीवाली मनाने के व्यावहारिक सुझाव

  • अपने शहर के हिंदू मंदिर या सांस्कृतिक संगठन की आधिकारिक घोषणाओं से 2026 के आयोजनों की जानकारी लें
  • खुली आग के स्थान पर सुरक्षित एलईडी दीये या मोमबत्तियाँ अपार्टमेंट में प्रयोग करें
  • पटाखों को लेकर स्थानीय नियमों और अनुमति का पालन करें
  • पूजा सामग्री, मिठाई और सजावट भारतीय स्टोर या समुदाय से समय रहते जुटाएँ
  • दूर बसे परिवार से वीडियो कॉल के माध्यम से सामूहिक आरती में जुड़ें

रंगोली और घर की सजावट

रंगोली दीवाली की शोभा का अभिन्न अंग है। खाड़ी के अपार्टमेंट्स में स्थान सीमित होने पर द्वार पर छोटी रंगोली, चिपकाने योग्य रंगोली स्टिकर या फूलों की सजावट का उपयोग किया जा सकता है। तोरण, बंदनवार और दीयों की कतारें घर में त्योहार का उल्लास भर देती हैं।

  • मुख्य दिन8 नवंबर 2026, रविवार
  • देवतादेवी लक्ष्मी एवं भगवान गणेश
  • पूजा समयप्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद)
  • अवधि5 दिन (6 से 10 नवंबर)

दीवाली पर जपे जाने वाले प्रमुख मंत्र

पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के मंत्रों का जप शुभ माना जाता है। श्रद्धालु सामान्यतः देवी लक्ष्मी के बीज मंत्र, श्री सूक्त तथा गणेश जी के 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का उच्चारण करते हैं। मंत्रों का शुद्ध उच्चारण और श्रद्धाभाव सर्वाधिक महत्वपूर्ण है; लंबे स्तोत्रों का पाठ किसी अनुभवी पुरोहित के मार्गदर्शन में करना उत्तम रहता है।

  • ॐ गं गणपतये नमः — विघ्नहर्ता गणेश का स्मरण
  • ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः — देवी लक्ष्मी का बीज मंत्र
  • श्री सूक्त का पाठ — समृद्धि और कृपा की कामना
  • दीप जलाते समय दीपज्योति को नमन का भाव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीवाली 2026 का मुख्य दिन कब है?

दीवाली 2026 का मुख्य दिन यानी लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। यह रविवार होने के कारण और भी शुभ माना जा रहा है।

दीवाली 2026 का पूरा पाँच दिवसीय कार्यक्रम क्या है?

धनतेरस 6 नवंबर, नरक चतुर्दशी 7 नवंबर, दीवाली/लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर, गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और भाई दूज 10 नवंबर 2026 को है।

खाड़ी देशों में लक्ष्मी पूजा किस समय करें?

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद की जाती है। खाड़ी समय भारत से डेढ़ घंटे पीछे है, इसलिए स्थानीय पंचांग या मंदिर की घोषणा के अनुसार समय निर्धारित करें।

अपार्टमेंट में दीये कैसे जलाएँ?

जहाँ खुली आग की अनुमति न हो, वहाँ सुरक्षित एलईडी दीये या मोमबत्तियाँ प्रयोग करें और अपने भवन तथा स्थानीय नियमों का पालन करें।

Advertisement

दीवाली पर कौन से मंत्र जपे जाते हैं?

सामान्यतः 'ॐ गं गणपतये नमः', देवी लक्ष्मी का बीज मंत्र 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और श्री सूक्त का पाठ किया जाता है। शुद्ध उच्चारण और श्रद्धा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

खाड़ी में दीवाली आयोजनों की जानकारी कहाँ से लें?

अपने शहर के हिंदू मंदिर, सांस्कृतिक संगठन या समुदाय की आधिकारिक घोषणाओं से 2026 के आयोजनों, समय और स्थान की सटीक जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ है?

धनतेरस पर बर्तन, सोना-चाँदी या नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है, यह समृद्धि और देवी लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है।

सीमित स्थान में रंगोली कैसे बनाएँ?

अपार्टमेंट में द्वार पर छोटी रंगोली, चिपकाने योग्य रंगोली स्टिकर या फूलों की सजावट का उपयोग करें, जिससे स्थान की कमी के बावजूद त्योहार की शोभा बनी रहे।