आषाढ़ अमावस्या 2026: तिथि, भीमना, पितृ तर्पण व अनुष्ठान
आषाढ़ अमावस्या 2026 (12 अगस्त): भीमना अमावस्या, दीपस्थ गौरी व हरियाली अमावस्या — पितृ तर्पण, क्षेत्रीय अनुष्ठान, मंत्र व प्रवासी गाइड।

आषाढ़ अमावस्या 2026 (12 अगस्त): भीमना अमावस्या, दीपस्थ गौरी व हरियाली अमावस्या — पितृ तर्पण, क्षेत्रीय अनुष्ठान, मंत्र व प्रवासी गाइड।
आषाढ़ अमावस्या — आषाढ़ मास का समापन करने वाली अमावस्या — 12 अगस्त 2026 को है। यह पितरों के स्मरण व देवी-आराधना का दिन है, अनेक क्षेत्रीय नामों से जाना जाता है। यह आषाढ़ मास 2026 का समापन करती है; अगले दिन श्रावण मास आरंभ होता है।
आषाढ़ अमावस्या 2026 तिथि व नाम
- तिथि: 12 अगस्त 2026 (आषाढ़ अमावस्या)
- कर्नाटक: भीमना अमावस्या — स्त्रियों का ज्योति भीमेश्वर व्रत
- तेलुगु क्षेत्र: दीपस्थ गौरी — दीप व गौरी पूजा
- उत्तर भारत: हरियाली अमावस्या — हरियाली व वृक्षारोपण; गटारी (महाराष्ट्र), दशमा व्रत (गुजरात)
महत्व
अमावस्या पितृ तर्पण का पारंपरिक दिन है — पितरों को जल व कृतज्ञता। आषाढ़ अमावस्या पर देवी-आराधना भी: कर्नाटक में स्त्रियाँ पति व भाइयों के कल्याण हेतु भीमेश्वर व्रत रखती हैं, तेलुगु घरों में दीपों से गौरी पूजा। मानसून की हरियाली में उत्तर भारत में यह हरियाली अमावस्या — प्रकृति का उत्सव बन जाती है।
अनुष्ठान व पूजा विधि
- स्नान व संकल्प से आरंभ करें।
- पितरों को पितृ तर्पण (जल, तिल); परंपरा हो तो श्राद्ध।
- दीप दान व गौरी/देवी पूजा।
- दान — अन्न, वस्त्र या धन ज़रूरतमंदों को।
- हरियाली परंपरा में वृक्ष/पौधा लगाएँ।
मंत्र
पितर: ॐ पितृ देवताभ्यो नमः · oṃ pitṛ-devatābhyo namaḥ — तर्पण के समय कृतज्ञता सहित।
गौरी: ॐ गौर्यै नमः · oṃ gauryai namaḥ।
प्रवासियों हेतु
विदेश में जल व तिल से सरल तर्पण, पितरों व देवी हेतु दीप, स्थानीय सेवा हेतु दान करें। कई मंदिर अमावस्या तर्पण सेवाएँ करते हैं; पितरों की स्मृति में वृक्षारोपण हरियाली भाव को सुंदर श्रद्धांजलि है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है?
आषाढ़ अमावस्या 2026 — 12 अगस्त, वह अमावस्या जो आषाढ़ मास का समापन करती है।
इसके क्षेत्रीय नाम क्या हैं?
भीमना अमावस्या (कर्नाटक), दीपस्थ गौरी (तेलुगु क्षेत्र), हरियाली अमावस्या (उत्तर भारत), गटारी अमावस्या (महाराष्ट्र), दशमा व्रत (गुजरात)।
आषाढ़ अमावस्या पर क्या करते हैं?
पितृ तर्पण, दीप दान, दान; हरियाली परंपरा में वृक्षारोपण। कर्नाटक में स्त्रियाँ भीमेश्वर/ज्योति भीमेश्वर व्रत रखती हैं।
क्या अमावस्या पितरों हेतु शुभ है?
हाँ — पितृ तर्पण व श्राद्ध हेतु अमावस्या पारंपरिक दिन है; इस दिन पितरों का सम्मान विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
मुख्य बिंदु
- आषाढ़ अमावस्या 2026: 12 अगस्त।
- पितृ तर्पण + देवी-आराधना; अनेक क्षेत्रीय नाम।
- अगले दिन 13 अगस्त को श्रावण मास।
देखें: आषाढ़ मास 2026 गाइड व आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026।



