संक्षिप्त उत्तर: शनिवार, 26 दिसंबर 2026 को आखुरथ संकष्टी चतुर्थी है, जो कृष्ण पक्ष का मासिक गणेश व्रत है। हैदराबाद में कृष्ण तृतीया 8:04 PM IST तक रहती है, उसके बाद चतुर्थी आती है, और चंद्रोदय 8:32 PM पर होता है। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर और गणेश पूजा करके व्रत खोला जाता है।

संकष्टी का अर्थ है "संकट से मुक्ति", और यह व्रत सबसे अधिक रखे जाने वाले मासिक व्रतों में से एक है, विशेषकर महाराष्ट्र में और हर जगह गणेश भक्तों के बीच। आज देर से होने वाले चंद्रोदय की लंबी प्रतीक्षा इसे धैर्य की सच्ची साधना बना देती है, और शायद यही इसका उद्देश्य भी है।

आज का पंचांग (हैदराबाद)

पंचांग अंगहैदराबाद, IST
दिनांक और वारशनिवार, 26 दिसंबर 2026
चंद्र मासमार्गशीर्ष (अमांत, जैसा तेलुगु राज्यों में माना जाता है); उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में पौष
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथितृतीया 8:04 PM तक, फिर चतुर्थी
नक्षत्रपुष्य 8:12 PM तक, फिर आश्लेषा
योगवैधृति 12:22 AM तक (अगले दिन, 27 दिसंबर)
करण (दिन का पहला)वणिज
सूर्योदय / सूर्यास्त6:44 AM / 5:50 PM
चंद्रोदय / चंद्रास्त8:32 PM / 8:46 AM
द्रिक पंचांग में सूचीबद्ध पर्वआखुरथ संकष्टी
राहु काल, यमगंड, मुहूर्तयहाँ शामिल नहीं; अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखें

स्रोत: हैदराबाद, तेलंगाना (IST) के लिए द्रिक पंचांग का दैनिक पंचांग। तिथि और नक्षत्र के समाप्ति समय पूरे भारत में एक ही क्षण होते हैं; सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय शहर-दर-शहर कुछ मिनट बदलते हैं।

वैधृति योग पूरे दिन और शाम तक रहता है। व्यतीपात की तरह, मुहूर्त विचार में नए कार्यों के आरंभ के लिए इसे टाला जाता है, परंतु यह संकष्टी व्रत या प्रार्थना में कोई बाधा नहीं है।

धार्मिक महत्व

हर हिंदू अनुष्ठान में गणेश जी की पूजा सबसे पहले विघ्नहर्ता के रूप में होती है। हर पूर्णिमा के बाद चौथे दिन आने वाली संकष्टी चतुर्थी उनका मासिक व्रत है, और जब यह मंगलवार को पड़ती है तो इसे अंगारकी कहा जाता है। व्रत के अंत में चंद्रमा की पूजा एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा से जुड़ी है, जिसमें चंद्रमा ने गणेश जी का उपहास किया और शाप पाया, फिर क्षमा किया गया; संकष्टी पर चंद्रमा का सम्मान गणेश जी की कृपा के अंग के रूप में किया जाता है।

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आज 8:12 PM तक का नक्षत्र पुष्य है, जिसके अधिष्ठाता देवता शास्त्रीय सूचियों में देवगुरु बृहस्पति हैं। पुष्य को सबसे पोषक और शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है, जो भक्ति के दिन का सुखद साथी है। चंद्र दर्शन और व्रत खोलने के नियमों के लिए हमारा लेख देखें: संकष्टी चतुर्थी चंद्र नियम।

संकष्टी पूजा विधि

  • सुबह: स्नान करें, गणेश जी के सामने दीपक जलाएँ और अपने स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखने का सरल संकल्प लें।
  • दिन में अपने परिवार की परंपरा के अनुसार फल, दूध, जल या एक हल्का भोजन लें। बहुत से लोग अनाज नहीं खाते।
  • शाम को गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल और मोदक या लड्डू के साथ स्थापित करें। दूर्वा पारंपरिक है; श्रद्धा से अर्पित कोई भी ताज़ा हरा पत्ता स्वीकार्य है।
  • संकष्टी व्रत कथा पढ़ें या सुनें, या यदि आप जानते हों तो गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
  • चंद्रोदय के बाद (हैदराबाद में 8:32 PM), एक छोटे पात्र से चंद्रमा को जल अर्पित करें, उपलब्ध हो तो उसमें थोड़ा दूध, चावल और फूल मिलाएँ।
  • गणेश जी की आरती करें और प्रसाद से व्रत खोलें।

सामग्री नहीं है? चंद्रमा को देखें, गणेश जी से मन ही मन प्रार्थना करें, और कृतज्ञता के साथ पहला कौर खाएँ। व्रत का सार भावना है।

आज का मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

अर्थ: "ॐ, गणपति को नमस्कार", जिसमें "गं" गणेश जी का बीज अक्षर है। शाम की पूजा में इसका 108 बार जप करें। यह स्थिरता और सही प्रयास की प्रार्थना है; यह किसी विशेष बाधा के मिट जाने का वादा नहीं करता।

व्रत संबंधी मार्गदर्शन

चंद्रोदय देर से होने के कारण यह लंबा व्रत है। यदि आप निर्जल व्रत नहीं रखते तो दिन भर पानी पीते रहें, और स्वयं पर ज़ोर न डालें। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, बच्चे और मधुमेह या अन्य बीमारी वाले लोग व्रत रखने के लिए बाध्य न समझें और डॉक्टर से सलाह लें।

आज आप क्या कर सकते हैं

  • शाम से पहले अपने शहर का चंद्रोदय समय नोट कर लें।
  • गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें; बच्चे छोटे-छोटे गुच्छे बाँधने में मदद कर सकते हैं।
  • यदि आप धनुर्मास का पालन करते हैं तो भोर में तिरुप्पावै का ग्यारहवाँ पाशुरम् पढ़ें।
  • इस शनिवार, यदि आपके परिवार में शनिवार की प्रार्थना होती है, तो तिल के तेल का दीपक भी जलाएँ।
  • अपने जीवन की कोई छोटी लंबित बाधा दूर करें, जैसे बहुत समय से टाला गया कोई फ़ोन या काम।
  • पूजा के बाद पड़ोसियों के साथ मोदक या लड्डू का प्रसाद बाँटें।

परिवार और बच्चों के लिए

बच्चों को चंद्रमा की राह देखना अच्छा लगता है। उन्हें ही चंद्रमा खोजने और उसकी घोषणा करने दें। चंद्रमा के गणेश जी पर हँसने की कथा सुनाएँ और बताएँ कि यह विनम्रता के बारे में क्या सिखाती है। बच्चे सामान्य रूप से भोजन करें; वे पूजा में शामिल होकर अर्घ्य देने में मदद कर सकते हैं।

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विदेश में बसे हिंदू: शनिवार 26 दिसंबर, स्थानीय सूर्योदय पर

भारत के बाहर अपने स्थानीय सूर्योदय के अनुसार चलें, भारतीय घड़ी के समय से नहीं। तालिका में स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त तथा स्थानीय सूर्योदय पर तिथि और नक्षत्र दिए गए हैं, जिनकी गणना HinduTone के पंचांग कैलकुलेटर से की गई है और द्रिक पंचांग से मिलान किया गया है; विदेश में पर्व की तिथि एक दिन अलग हो सकती है — अपने मंदिर के पंचांग का पालन करें।

देशशहरसूर्योदयसूर्यास्तसूर्योदय पर तिथिसूर्योदय पर नक्षत्र
अमेरिका (USA)न्यूयॉर्क7:17 AM4:36 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
ब्रिटेन (UK)लंदन8:03 AM3:58 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
कनाडाटोरंटो7:48 AM4:48 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
ऑस्ट्रेलियासिडनी5:41 AM8:09 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
ब्राज़ीलसाओ पाउलो5:18 AM6:55 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)दुबई7:00 AM5:37 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
सिंगापुरसिंगापुर7:02 AM7:07 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
मलेशियाकुआलालंपुर7:14 AM7:13 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
जर्मनीफ्रैंकफर्ट8:21 AM4:30 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
दक्षिण अफ्रीकाडरबन4:53 AM6:59 PMकृष्ण तृतीयापुष्य
यूरोपएम्स्टर्डम8:47 AM4:34 PMकृष्ण तृतीयापुष्य

सूची के सभी स्थानों पर सूर्योदय के समय कृष्ण तृतीया है, और विदेश में संकष्टी स्थानीय चंद्रोदय पर निर्भर करती है। अपना स्थानीय पंचांग या मंदिर देखें; कुछ शहरों में व्रत 27 दिसंबर को पड़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्योदय पर तिथि तृतीया होने पर भी संकष्टी 26 दिसंबर को क्यों है?

संकष्टी का निर्धारण चंद्रोदय के समय की तिथि से होता है, सूर्योदय से नहीं। हैदराबाद में कृष्ण चतुर्थी 8:04 PM IST पर आरंभ होती है और चंद्रोदय 8:32 PM पर होता है, इसलिए 26 दिसंबर को चंद्रोदय के समय चतुर्थी रहती है। इसी कारण द्रिक पंचांग आज आखुरथ संकष्टी बताता है।

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संकष्टी, 26 दिसंबर 2026 को चंद्रोदय कितने बजे है?

हैदराबाद में चंद्रोदय 8:32 PM IST पर होता है। चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अन्य स्थानों के भक्त स्थानीय पंचांग देखें। विदेश में अपने स्थानीय चंद्रोदय का पालन करें; भारतीय समय को परिवर्तित न करें।

आखुरथ का अर्थ क्या है?

आखु का अर्थ है चूहा और रथ का अर्थ है रथ या वाहन, अतः आखुरथ वे गणेश हैं जो मूषक पर सवार होते हैं। हर मासिक संकष्टी में गणेश जी का अपना एक नाम होता है; पौष (पूर्णिमांत) की संकष्टी के लिए आखुरथ नाम प्रयुक्त होता है।

संकष्टी व्रत कैसे खोला जाता है?

परंपरा के अनुसार चंद्रमा के दर्शन के बाद भक्त चंद्रमा को अर्घ्य (जल) देते हैं, गणेश पूजा करते हैं और फिर भोजन करते हैं। जो बादलों के कारण चंद्रमा नहीं देख पाते, वे बताए गए चंद्रोदय समय पर व्रत खोल सकते हैं। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और कोई भी बीमार व्यक्ति व्रत रखने के लिए बाध्य न समझें।

एक समापन विचार

चंद्रमा की प्रतीक्षा वही सिखाती है जो गणेश जी सिखाते हैं: कि बाधाएँ टल जाती हैं, अक्सर अपने समय पर। कल रविवार है, सबरीमाला में मंडल पूजा का अपेक्षित दिन।

पिछला दिन: पंचांग शुक्रवार, 25 दिसंबर 2026। अगला दिन: पंचांग रविवार, 27 दिसंबर 2026। पूरा महीना: दिसंबर 2026 के हिंदू त्योहार, तिथियाँ और अनुष्ठान।

संपादक की टिप्पणी

संपादक की टिप्पणी (9 अक्टूबर 2026): पंचांग के समय और पर्व का पालन स्थान, क्षेत्रीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। यह मार्गदर्शिका हैदराबाद (IST) के लिए द्रिक पंचांग का अनुसरण करती है। कृपया स्थानीय पूजा समय किसी विश्वसनीय पंचांग या पुरोहित से अवश्य जाँच लें।

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