संक्षिप्त उत्तर: शुक्रवार, 25 दिसंबर 2026 को कृष्ण द्वितीया है, यानी पूर्णिमा के बाद का दूसरा दिन। हैदराबाद के लिए द्रिक पंचांग के अनुसार द्वितीया 11:25 PM IST तक और पुनर्वसु नक्षत्र 10:50 PM तक है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में आज से पौष मास आरंभ होता है; तेलुगु अमांत पंचांग में अभी मार्गशीर्ष ही है।

बहुत से परिवारों के लिए, विशेषकर विदेश में, आज सार्वजनिक अवकाश भी है, जिससे यह बिना जल्दबाज़ी के पूजा करने का अच्छा दिन बन जाता है। शुक्रवार को लक्ष्मी जी के लिए एक दीपक, भोर में तिरुप्पावै का दसवाँ पद और परिवार के साथ शांत भोजन — दिन को सार्थक बनाने के लिए इतना ही पर्याप्त है।

आज का पंचांग (हैदराबाद)

पंचांग तत्वहैदराबाद, IST
तिथि और वारशुक्रवार, 25 दिसंबर 2026
चंद्र मासमार्गशीर्ष (अमांत, जैसा तेलुगु राज्यों में माना जाता है); उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में पौष
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथिद्वितीया 11:25 PM तक, फिर तृतीया
नक्षत्रपुनर्वसु 10:50 PM तक, फिर पुष्य
योगब्रह्म 8:28 AM तक
करण (दिन का पहला)तैतिल
सूर्योदय / सूर्यास्त6:43 AM / 5:49 PM
चंद्रोदय / चंद्रास्त7:25 PM / 7:51 AM
द्रिक पंचांग में सूचीबद्ध पर्वपौष आरंभ (उत्तर)
राहु काल, यमगंड, मुहूर्तयहाँ शामिल नहीं; अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग देखें

स्रोत: हैदराबाद, तेलंगाना (IST) के लिए द्रिक पंचांग का दैनिक पंचांग। तिथि और नक्षत्र के समाप्ति समय पूरे भारत में एक ही क्षण होते हैं; सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय शहर-दर-शहर कुछ मिनट बदलते हैं।

दो पंचांग, एक आकाश

भारत में चंद्र मासों के नामकरण की दो मुख्य पद्धतियाँ हैं। पूर्णिमांत पद्धति में, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और आस-पास के राज्यों में प्रचलित है, हर मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है। चूँकि कल सूर्योदय के समय मार्गशीर्ष पूर्णिमा थी, उत्तर भारत आज पौष (पूस) में प्रवेश करता है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की अमांत पद्धति में हर मास अमावस्या पर समाप्त होता है, इसलिए ये क्षेत्र आने वाली अमावस्या तक मार्गशीर्ष में ही रहते हैं।

इसी कारण उत्तर भारतीय और तेलुगु पंचांग दो सप्ताह तक मास के नाम पर असहमत हो सकते हैं, जबकि हर तिथि और पर्व की तारीख पर सहमत रहते हैं। इसे समझ लेने से बहुत-सा भ्रम दूर हो जाता है। हमारी पंचांग के पाँच अंगों की मार्गदर्शिका इसकी मूल बातें समझाती है।

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धार्मिक महत्व

उत्तर भारतीय परंपरा में पौष मास का सूर्य देव की उपासना से गहरा संबंध है, और कुछ परिवारों में इस मास के रविवार विशेष सूर्य पूजा के साथ मनाए जाते हैं। यह खरमास के साथ भी पड़ता है, जब सूर्य धनु राशि में होते हैं और कई समुदाय विवाह नहीं करते। दक्षिण में यही सप्ताह धनुर्मास कहलाते हैं, जो भोर में विष्णु उपासना को समर्पित हैं।

आज का नक्षत्र पुनर्वसु देवताओं की माता अदिति से जुड़ा है और परंपरा से इसे भगवान राम का जन्म नक्षत्र माना जाता है। इसके नाम का भाव है "शुभ का लौटना": कठिनाई के बाद नवजीवन। लक्ष्मी जी को समर्पित शुक्रवार के लिए यह घर-वापसी और पुनर्स्थापना का कोमल भाव है।

शुक्रवार की सरल पूजा

  • सुबह प्रवेश द्वार और पूजा स्थान को साफ़ करें और रंगोली बनाएँ।
  • लक्ष्मी जी, या लक्ष्मी-नारायण के सामने घी का दीपक जलाएँ।
  • ताज़े फूल, कुमकुम और थोड़े अक्षत अर्पित करें। कमल पारंपरिक है, पर कोई भी फूल ठीक है।
  • नीचे दिए मंत्र का 27 या 108 बार जाप करें।
  • दूध, फल या घर की बनी मिठाई का नैवेद्य अर्पित करें।
  • शाम को सूर्यास्त के बाद (हैदराबाद में 5:49 PM) द्वार पर दीपक जलाएँ।

सामग्री नहीं है? एक मोमबत्ती या दीपक जलाएँ, परिवार के साथ दो मिनट बैठें और मिलकर एक छोटी-सी धन्यवाद प्रार्थना करें।

आज का मंत्र

ॐ श्रियै नमः

अर्थ: "ॐ, श्री को नमस्कार।" श्री लक्ष्मी जी का सबसे प्राचीन नाम है, जिसका अर्थ है तेज, कृपा और मंगल। कृतज्ञता और कल्याण का भाव जगाने के लिए इसका जाप करें; किसी भौतिक फल का वचन नहीं दिया जाता।

आज आप क्या कर सकते हैं

  • यदि आप धनुर्मास का पालन करते हैं तो भोर में तिरुप्पावै का दसवाँ पाशुरम पढ़ें।
  • यदि आप उत्तर भारतीय पंचांग मानते हैं, तो पौष के स्वागत में सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें।
  • छुट्टी का उपयोग बुज़ुर्ग संबंधियों से मिलने या दूर रहने वालों को फ़ोन करने में करें।
  • कल की अखुरथ संकष्टी की तैयारी करें: अपने शहर का चंद्रोदय समय नोट कर लें।
  • गर्म कपड़े या कंबल दान करें, जो सर्दियों का पारंपरिक दान है।
  • पुनर्वसु की भावना में, कुछ समय शांत चिंतन में बिताएँ कि नए वर्ष में आप किस ओर "लौटना" चाहेंगे।

परिवार और बच्चों के लिए

छुट्टियाँ बच्चों को पंचांग की कार्यप्रणाली सिखाने का अच्छा समय हैं। उन्हें एक छपा हुआ पंचांग और दीवार कैलेंडर दिखाएँ, और उनके जन्मदिन की तिथि खोजने में मदद करें। उन्हें पुनर्वसु नक्षत्र में श्रीराम के जन्म की कथा सुनाएँ और अयोध्या के उत्सव का चित्र बनाने दें।

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विदेश में हिंदू: शुक्रवार 25 दिसंबर, स्थानीय सूर्योदय पर

भारत के बाहर अपने स्थानीय सूर्योदय के अनुसार चलें, भारतीय घड़ी के समय से नहीं। तालिका में स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त तथा स्थानीय सूर्योदय पर तिथि और नक्षत्र दिए गए हैं, जिनकी गणना HinduTone के पंचांग कैलकुलेटर से की गई है और द्रिक पंचांग से मिलान किया गया है; विदेश में पर्व की तारीखें एक दिन अलग हो सकती हैं — अपने मंदिर के पंचांग का पालन करें।

देशशहरसूर्योदयसूर्यास्तसूर्योदय पर तिथिसूर्योदय पर नक्षत्र
अमेरिका (USA)न्यूयॉर्क (New York)7:16 AM4:35 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
ब्रिटेन (UK)लंदन (London)8:03 AM3:57 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
कनाडाटोरंटो (Toronto)7:47 AM4:47 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
ऑस्ट्रेलियासिडनी (Sydney)5:41 AM8:08 PMकृष्ण प्रतिपदाआर्द्रा
ब्राज़ीलसाओ पाउलो (São Paulo)5:17 AM6:55 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)दुबई (Dubai)7:00 AM5:37 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
सिंगापुरसिंगापुर (Singapore)7:02 AM7:07 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
मलेशियाकुआलालंपुर (Kuala Lumpur)7:13 AM7:12 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
जर्मनीफ्रैंकफर्ट (Frankfurt)8:21 AM4:29 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
दक्षिण अफ्रीकाडरबन (Durban)4:52 AM6:59 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु
यूरोपएम्स्टर्डम (Amsterdam)8:47 AM4:33 PMकृष्ण द्वितीयापुनर्वसु

सूची के लगभग हर शहर में सूर्योदय पर कृष्ण द्वितीया है; सिडनी में अभी प्रतिपदा है। विदेश में भारतीय समुदाय के मंदिर अपनी सेवा वाले समुदाय के अनुसार पूर्णिमांत या अमांत, किसी भी पद्धति का मास-नाम मान सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 25 दिसंबर 2026 को पौष मास आरंभ होता है?

उत्तर भारत के अधिकांश भागों में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग में, हाँ: द्रिक पंचांग शुक्रवार 25 दिसंबर 2026 को "पौष आरंभ (उत्तर)" दर्शाता है, जो मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद का पहला दिन है। तेलुगु राज्यों, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात के अमांत पंचांग में अमावस्या तक अभी मार्गशीर्ष मास ही है।

आज उत्तर और दक्षिण भारत में अलग-अलग मास के नाम क्यों दिखते हैं?

पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर समाप्त होते हैं, इसलिए पूर्णिमा के बाद का कृष्ण पक्ष अगले मास में गिना जाता है। अमांत मास अमावस्या पर समाप्त होते हैं। तिथि हर जगह एक ही है; केवल कृष्ण पक्ष के मास का नाम अलग होता है।

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क्या पौष शुभ मास है?

पौष मास को व्यापक रूप से सूर्य उपासना से जोड़ा जाता है, और उत्तर भारत के कई परिवारों में यह खरमास के साथ पड़ता है, जब विवाह टाल दिए जाते हैं। रीति-रिवाज समुदाय के अनुसार अलग होते हैं, इसलिए संस्कार तय करने से पहले अपने कुल पुरोहित से परामर्श करें।

25 दिसंबर 2026 को कौन-सी तिथि है?

सूर्योदय के समय कृष्ण द्वितीया है, जो हैदराबाद में रात 11:25 PM IST तक रहेगी, इसके बाद तृतीया आरंभ होगी। नक्षत्र 10:50 PM तक पुनर्वसु है।

क्या हिंदू क्रिसमस के उत्सव में शामिल हो सकते हैं?

कई हिंदू परिवार, विशेषकर विदेश में, इस मौसम को मित्रों और सहकर्मियों के साथ एक सांस्कृतिक अवकाश के रूप में मनाते हैं। इससे अपनी दैनिक पूजा-प्रार्थना में कोई विरोध नहीं है; बहुत से लोग हमेशा की तरह दीपक जलाते हैं और छुट्टी का उपयोग परिवार के साथ समय बिताने में करते हैं।

एक समापन विचार

दो पंचांग एक ही चंद्रमा को अलग-अलग नाम दे सकते हैं और फिर भी एक ही आकाश की ओर संकेत करते हैं। इसे एक-दूसरे की परंपराओं के प्रति धैर्य का छोटा-सा पाठ मानें। कल अखुरथ संकष्टी है, गणेश जी का व्रत जो चंद्रोदय पर खोला जाता है।

पिछला दिन: पंचांग गुरुवार, 24 दिसंबर 2026. अगला दिन: पंचांग शनिवार, 26 दिसंबर 2026. पूरा महीना: दिसंबर 2026 के हिंदू त्योहार, तिथियाँ और विधि-विधान.

संपादक की टिप्पणी

संपादक की टिप्पणी (9 अक्टूबर 2026): पंचांग के समय और पर्व-पालन स्थान, क्षेत्रीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। यह मार्गदर्शिका हैदराबाद (IST) के लिए द्रिक पंचांग का अनुसरण करती है। कृपया स्थानीय पूजा समय किसी विश्वसनीय पंचांग या पुरोहित से अवश्य जाँच लें।

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