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माचैल माता मंदिर

देवी temple · Jammu & Kashmir, India

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मचैल माता मंदिर जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले के पाडर क्षेत्र में मचैल गाँव में स्थित देवी चंडी का धाम है, जो माँ दुर्गा का एक रूप हैं। मंदिर ऊँचे हिमालय में स्थित है, जिसकी ऊँचाई PTI ने अधिकारियों के हवाले से लगभग 9,705 फ़ुट बताई है। यह वार्षिक मचैल माता यात्रा का गंतव्य है, जो ग्रीष्मकालीन तीर्थयात्रा जम्मू क्षेत्र की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक बन गई है।

स्थानीय लोग देवी को चंडी माता कहते हैं, और इस धाम को अक्सर चंडी धाम मचैल कहा जाता है। मचैल तक पूरा रास्ता मोटर सड़क से नहीं पहुँचा जा सकता, इसलिए तीर्थयात्री अंतिम हिस्सा पाडर घाटी से होकर पैदल तय करते हैं।

Faith & Tradition

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Religious Significance of माचैल माता मंदिर

भक्त चंडी माता को जाग्रत देवी मानते हैं। किश्तवाड़ ज़िला प्रशासन के अनुसार मचैल यात्रा जम्मू क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी तीर्थयात्रा बनती जा रही है, और भीड़ वाले दिनों में एक समय में 50,000 से अधिक तीर्थयात्री मचैल में एकत्र होते हैं।

ज़िला प्रशासन के अनुसार, पाडर के मंदिरों के कपाट भादों के पहले दिन (भादों संक्रांति, लगभग 15–16 अगस्त) खुलते हैं। उस दिन मचैल में चंडी माता मंदिर के बाहर एक बड़ा मेला लगता है, और पूरे पाडर से लोग पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।

Heritage

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History of माचैल माता मंदिर

देखे गए स्रोतों में मंदिर की स्थापना की तिथि दर्ज नहीं है। आधुनिक यात्रा का केंद्र छड़ी है, जो देवी की पवित्र गदा है। ज़िला प्रशासन के अभिलेखों के अनुसार भक्त छड़ी को भद्रवाह के चिनोत से शोभायात्रा में ले जाते हैं, जो ठाकुर कुलबीर सिंह का पैतृक गाँव है और जिनकी देखरेख में यह यात्रा बढ़ी। भजन, ढोल और बाँसुरी के साथ यह पुल डोडा और किश्तवाड़ होते हुए पाडर के अठोली तक जाती है, और अब एक यात्रा जम्मू से भी निकलती है।

तीर्थयात्रियों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। PTI के अनुसार आगमन 2022 में लगभग 58,000 से बढ़कर 2023 में लगभग 1.94 लाख हो गया, जो 43 दिनों की इस तीर्थयात्रा का रिकॉर्ड था; उस वर्ष यात्रा 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चली।

14 अगस्त 2025 को यात्रा के दौरान तीर्थ मार्ग पर स्थित गाँव चशोती में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई। The Hindu के अनुसार दर्जनों लोगों की मृत्यु हुई और कई लोग लापता हो गए, साथ ही घरों, दुकानों और भक्तों के लिए चल रहे एक सामुदायिक लंगर को भी नुकसान पहुँचा। अगली सूचना तक यात्रा स्थगित कर दी गई।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

2026 की यात्रा के लिए श्री मचैल माता यात्रा वेबसाइट पर बताया गया था कि ऑनलाइन पंजीकरण और RFID कार्ड अनिवार्य हैं और ऑफ़लाइन पंजीकरण नहीं होगा। किश्तवाड़–गुलाबगढ़–मचैल मार्ग पर यात्रा केवल निर्धारित कट-ऑफ़ समय के भीतर ही अनुमत थी। यह जानकारी अक्टूबर 2026 में जाँची गई थी; व्यवस्थाएँ हर वर्ष बदलती हैं, इसलिए यात्रा से पहले श्री मचैल माता यात्रा बोर्ड या किश्तवाड़ ज़िला प्रशासन से वर्तमान व्यवस्थाओं की पुष्टि कर लें।

यह ऊँचाई वाली हिमालयी पैदल यात्रा है, जिसमें भूस्खलन और अचानक बाढ़ का ख़तरा रहता है, जैसा कि 2025 की आपदा ने दिखाया। ज़िला प्रशासन की मौसम और मार्ग संबंधी सूचनाओं पर ध्यान रखें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with श्री मचैल माता यात्रा समिति, जिसके अध्यक्ष मंडलायुक्त (डिविज़नल कमिश्नर), जम्मू हैं और उपाध्यक्ष उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर), किश्तवाड़ हैं (official website) before travelling. Last reviewed 5 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at माचैल माता मंदिर

जुलाई के अंत से सितंबर की शुरुआत तक

मचैल माता यात्रा

मुख्य वार्षिक तीर्थयात्रा। 2023 और 2025 में यह 25 जुलाई से 5 सितंबर तक निर्धारित थी, जिसकी शुरुआत छड़ी मुबारक शोभायात्रा से हुई।

भादों (लगभग 15–16 अगस्त)

भादों संक्रांति मेला

इस दिन पाडर के मंदिरों के कपाट खुलते हैं, और मचैल में चंडी माता मंदिर के बाहर एक बड़ा मेला लगता है।

अप्रैल

बैसाखी (मंदिर के कपाट पुनः खुलना)

PTI के अनुसार मंदिर के कपाट हर वर्ष बैसाखी पर खोले जाते हैं।

Location

How to Reach माचैल माता मंदिर

किश्तवाड़ ज़िला प्रशासन के अनुसार निकटतम हवाई अड्डा जम्मू है, जो किश्तवाड़ से लगभग 245 किमी दूर है, और निकटतम रेलवे स्टेशन उधमपुर (लगभग 166 किमी) और जम्मू तवी (लगभग 240 किमी) हैं। किश्तवाड़ से पाडर के गुलाबगढ़ तक नियमित बसें चलती हैं। गुलाबगढ़ से आगे पूरा रास्ता मोटर सड़क नहीं है, और तीर्थयात्री भागा नदी के किनारे-किनारे चशोती और हमोरी जैसे पड़ावों से होते हुए पैदल धाम तक पहुँचते हैं।

आधिकारिक यात्रा वेबसाइट के मार्ग मानचित्र के अनुसार जम्मू से किश्तवाड़ लगभग 210 किमी, किश्तवाड़ से पाडर के गुलाबगढ़ 65 किमी, गुलाबगढ़ से मचैल के दर्शनी गेट 32 किमी, और दर्शनी गेट से मंदिर तक लगभग 2 किमी पैदल है। ज़िले के पुराने आँकड़ों में गुलाबगढ़ से लगभग 30 किमी की लंबी पैदल यात्रा बताई गई है, इसलिए यात्रा से पहले वर्तमान मार्ग की जानकारी अवश्य लें।

Location: Jammu & Kashmir, India

Nearest airport: जम्मू (किश्तवाड़ से लगभग 245 किमी)

Nearest railway station: उधमपुर (किश्तवाड़ से लगभग 166 किमी); जम्मू तवी (लगभग 240 किमी)

Questions

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माचैल माता मंदिर: Frequently Asked Questions

मचैल में किस देवी की पूजा होती है?

यहाँ की देवी चंडी माता हैं, जो माँ दुर्गा का एक स्वरूप हैं। यह धाम किश्तवाड़ ज़िले के पाडर क्षेत्र में मचैल गाँव में स्थित है।

मचैल माता यात्रा कब होती है?

यात्रा जुलाई के अंत, अगस्त और सितंबर की शुरुआत में लगभग 43 दिनों तक चलती है। 2023 और 2025 की यात्राएँ 25 जुलाई से 5 सितंबर तक निर्धारित थीं। तिथियों की घोषणा हर वर्ष यात्रा बोर्ड और ज़िला प्रशासन द्वारा की जाती है।

क्या मचैल यात्रा के लिए पंजीकरण आवश्यक है?

2026 के लिए आधिकारिक यात्रा वेबसाइट के अनुसार ऑनलाइन पंजीकरण और RFID कार्ड अनिवार्य थे, और ऑफ़लाइन पंजीकरण की सुविधा नहीं थी। यात्रा से पहले वर्तमान नियम अवश्य जाँच लें।

मचैल माता की छड़ी क्या है?

छड़ी देवी की पवित्र गदा है। इसे भद्रवाह के चिनोत से किश्तवाड़ होते हुए पाडर तक शोभायात्रा में ले जाया जाता है, और अब 'छड़ी मुबारक' यात्रा जम्मू से भी आरंभ होती है।

मचैल माता मंदिर कैसे पहुँचें?

जम्मू से सड़क मार्ग द्वारा किश्तवाड़ और फिर पाडर के गुलाबगढ़ तक जाएँ, उसके बाद यात्रा बोर्ड द्वारा निर्धारित मार्ग से मचैल की ओर बढ़ें; अंतिम हिस्सा पैदल तय करना होता है। निकटतम हवाई अड्डा जम्मू है, और निकटतम रेलवे स्टेशन उधमपुर और जम्मू तवी हैं।

2025 में चशोती में क्या हुआ था?

14 अगस्त 2025 को मचैल यात्रा मार्ग पर स्थित चशोती में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई। दर्जनों लोगों की मृत्यु हुई और कई लोग लापता हो गए, तथा यात्रा स्थगित कर दी गई।

मचैल मंदिर कितनी ऊँचाई पर है?

PTI ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह धाम लगभग 9,705 फ़ुट की ऊँचाई पर है।

Pilgrim Circuit

Temples Near माचैल माता मंदिर