
सोमनाथ मंदिर
शिव temple · प्रभास पाटन, Gujarat, India
सोमनाथ मंदिर गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले में अरब सागर के तट पर, वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित भगवान शिव का मंदिर है। यहाँ शिव की पूजा सोमनाथ, अर्थात् 'चंद्रमा के स्वामी', के रूप में होती है। पारंपरिक द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् का प्रारंभिक श्लोक सबसे पहले सोमनाथ का नाम लेता है, और मंदिर का प्रबंधन करने वाला श्री सोमनाथ ट्रस्ट इसे बारह आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम कहता है।
यह मंदिर अपने इतिहास के लिए भी उतना ही प्रसिद्ध है। आक्रमणकारियों ने इसे कई बार लूटा, यह बार-बार फिर से बनाया गया, और सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में हुए पुनर्निर्माण के बाद 11 मई 1951 को वर्तमान मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।
Faith & Tradition
Religious Significance of सोमनाथ मंदिर
ट्रस्ट द्वारा दोहराई जाने वाली पौराणिक परंपरा के अनुसार, चंद्रदेव को उनके ससुर दक्ष प्रजापति ने अपना तेज खो देने का श्राप दिया था। इस तीर्थ में शिव की आराधना करके वे श्राप से मुक्त हुए, और यह मंदिर उन्हीं (सोम) के नाम पर जाना जाता है। भक्त चंद्रमा के घटने-बढ़ने को इसी कथा से जोड़ते हैं, और यहाँ कार्तिक पूर्णिमा का उत्सव चंद्रमा पर केंद्रित होता है।
प्रभास पाटन श्रीकृष्ण के अंतिम दिनों से भी जुड़ा है। भालका तीर्थ और त्रिवेणी संगम घाट जैसे आसपास के स्थलों के दर्शन सोमनाथ के साथ किए जाते हैं। बहुत से भारतीयों के लिए 1951 का पुनर्निर्माण स्वतंत्रता के बाद सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय महत्व भी रखता है। 2026 में भारत सरकार ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्यम से महमूद गज़नवी के आक्रमण के 1,000 वर्ष और मंदिर के पुनः खुलने के 75 वर्ष, दोनों को चिह्नित किया।
Heritage
History of सोमनाथ मंदिर
परंपरा में: ट्रस्ट उस पौराणिक मान्यता को दर्ज करता है कि यहाँ सबसे पहले चंद्रदेव ने सोने का, रावण ने चाँदी का और श्रीकृष्ण ने चंदन का मंदिर बनवाया था। ये पवित्र कथाएँ हैं, पुरातात्विक निष्कर्ष नहीं।
ऐतिहासिक अभिलेखों में: महमूद गज़नवी ने 1025–26 की सर्दियों में मंदिर को लूटा। Encyclopaedia Britannica इस आक्रमण की तिथि 1024–25 बताती है, जबकि भारत सरकार के 2026 के स्मरणोत्सव में पहले दर्ज आक्रमण की तिथि जनवरी 1026 बताई गई है। Britannica के अनुसार मंदिर 1169 में फिर से बनाया गया और 13वीं सदी के अंत के आक्रमणों में फिर नष्ट हुआ, फिर कई बार और बना तथा नष्ट हुआ। ट्रस्ट के अनुसार, 1782 में इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने खंडहरों के पास एक अलग सोमनाथ मंदिर बनवाया ताकि पूजा जारी रह सके। वह मंदिर आज भी खड़ा है।
12 नवंबर 1947 (दिवाली, कार्तक सुद 1) को सरदार वल्लभभाई पटेल ने खंडहरों का दौरा किया और मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया; इस कार्य से निकटता से जुड़े लोगों में के. एम. मुंशी भी थे। नए मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा 11 मई 1951 को हुई, जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्राण-प्रतिष्ठा की। इसकी पचासवीं वर्षगांठ 31 अक्टूबर 2001 को मनाई गई, और जनवरी 2026 में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (8–11 जनवरी) ने इन दोनों पड़ावों का स्मरण किया।
Architecture and sacred features
भारत सरकार के अनुसार वर्तमान मंदिर कैलाश महामेरु प्रासाद शैली में बना है, जो पश्चिम भारतीय (चालुक्य / मारु-गुर्जर) मंदिर परंपरा के अंतर्गत आती है। इसमें गर्भगृह, सभामंडप (सभा कक्ष) और नृत्य मंडप है, और यह समुद्र के ठीक किनारे खड़ा है। Press Information Bureau के अनुसार, शिखर लगभग 150 फ़ुट ऊँचा है और उस पर लगभग 10 टन वज़न का कलश है, साथ में 27 फ़ुट का ध्वजदंड है।
समुद्री दीवार पर बाण स्तंभ खड़ा है। इसके संस्कृत शिलालेख में लिखा है कि इस बिंदु से दक्षिण की ओर दक्षिणी ध्रुव तक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है। यह स्तंभ आधुनिक मंदिर परिसर का हिस्सा है। इसके प्राचीन होने के लोकप्रिय दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक या पुरातात्विक स्रोत ने नहीं की है।
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Darshan and Visitor Information
श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार, दर्शनार्थियों को शालीन वस्त्र पहनने चाहिए (मिनी स्कर्ट और अन्य अमर्यादित वस्त्रों की अनुमति नहीं है), प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारने चाहिए, और मंदिर के आसपास कहीं भी धूम्रपान नहीं करना चाहिए। अंदर मोबाइल फ़ोन, कैमरा और सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित हैं, और ट्रस्ट निःशुल्क लॉकर की सुविधा देता है। अंदर फ़ोटोग्राफ़ी की अनुमति नहीं है।
ट्रस्ट के अनुसार दर्शन सुबह जल्दी से देर शाम तक होते हैं, प्रतिदिन तीन आरतियाँ (सुबह, दोपहर और शाम) होती हैं, और मानसून के मौसम को छोड़कर शाम को साउंड-एंड-लाइट शो होता है (श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार, अक्टूबर 2026 में जाँचा गया)। यात्रा से पहले वर्तमान व्यवस्थाओं की पुष्टि श्री सोमनाथ ट्रस्ट (somnath.org) से कर लें। कमरे और पूजा केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही बुक करें, क्योंकि ट्रस्ट ने WhatsApp, फ़ोन और UPI के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के बारे में चेतावनी दी है।
Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with श्री सोमनाथ ट्रस्ट (official website) before travelling. Last reviewed 5 October 2026.
Sacred Calendar
Festivals at सोमनाथ मंदिर
महाशिवरात्रि
ट्रस्ट रात भर चार प्रहर की पूजा, महाअभिषेक, महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करता है। गुजरात पर्यटन भी शिवरात्रि के आसपास सोमनाथ महोत्सव आयोजित करता है।
कार्तिक पूर्णिमा मेला (कार्तक पूनम लोकमेला)
श्री सोमनाथ ट्रस्ट लगभग सात दशकों से देव दिवाली से कार्तिक पूर्णिमा तक पाँच दिन का सार्वजनिक मेला आयोजित करता आ रहा है। भक्तों की मान्यता है कि पूर्णिमा की मध्यरात्रि महापूजा के दौरान चंद्रदेव मंदिर के शिखर पर विराजमान होते हैं।
प्राण-प्रतिष्ठा वर्षगांठ
यह तिथि वर्तमान मंदिर की 1951 में हुई प्राण-प्रतिष्ठा की याद दिलाती है। इसकी पचासवीं वर्षगांठ 2001 में और पचहत्तरवीं 2026 में मनाई गई।
Location
How to Reach सोमनाथ मंदिर
श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार सोमनाथ रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 0.5 km और वेरावल लगभग 7 km दूर है। वेरावल से राजकोट, अहमदाबाद और गुजरात के अन्य शहरों के लिए ट्रेनें मिलती हैं।
ट्रस्ट के अनुसार दीव हवाई अड्डा लगभग 85 km, राजकोट लगभग 200 km और अहमदाबाद लगभग 390 km दूर है। केशोद और पोरबंदर अन्य क्षेत्रीय हवाई अड्डे हैं, लेकिन वहाँ की उड़ानें सीमित हैं, इसलिए वर्तमान समय-सारणी अवश्य देख लें। गुजरात राज्य परिवहन (GSRTC) और निजी बसें सोमनाथ को पूरे सौराष्ट्र के कस्बों से जोड़ती हैं।
Location: प्रभास पाटन, Gujarat, India
Nearest airport: दीव हवाई अड्डा (लगभग 85 km, श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार)
Nearest railway station: सोमनाथ (लगभग 0.5 km); वेरावल (लगभग 7 km)
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Photographs
सोमनाथ मंदिर Photos

Questions
सोमनाथ मंदिर: Frequently Asked Questions
सोमनाथ को पहला ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?
पारंपरिक द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् ('सौराष्ट्रे सोमनाथं…') में सोमनाथ का नाम सबसे पहले आता है। श्री सोमनाथ ट्रस्ट इसे बारह आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम बताता है।
सोमनाथ नाम का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'सोम के स्वामी', यानी चंद्रमा के स्वामी। परंपरा के अनुसार, चंद्रदेव यहाँ शिव की आराधना करके दक्ष के श्राप से मुक्त हुए थे।
वर्तमान सोमनाथ मंदिर कब बना?
नवंबर 1947 में सरदार पटेल की यात्रा के बाद पुनर्निर्माण शुरू हुआ। राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को वर्तमान मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की।
महमूद गज़नवी ने सोमनाथ पर कब आक्रमण किया?
1025–26 की सर्दियों में। Britannica यह तिथि 1024–25 बताती है, जबकि भारत सरकार पहले दर्ज आक्रमण की तिथि जनवरी 1026 मानती है।
मुख्य मंदिर के पास स्थित पुराना सोमनाथ मंदिर किसने बनवाया?
श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार, रानी अहिल्याबाई होल्कर ने इसे 1782 में बनवाया, ताकि खंडहर हो चुके मुख्य मंदिर के पास पूजा जारी रह सके।
क्या सोमनाथ मंदिर के अंदर मोबाइल फ़ोन ले जाने की अनुमति है?
नहीं। ट्रस्ट मंदिर के अंदर फ़ोन, कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर रोक लगाता है और निःशुल्क लॉकर की सुविधा देता है।
सोमनाथ में बाण स्तंभ क्या है?
यह मंदिर की समुद्री दीवार पर बना एक स्तंभ है, जिसके शीर्ष पर बाण है। इसके संस्कृत शिलालेख के अनुसार सोमनाथ से दक्षिणी ध्रुव तक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है।
सोमनाथ का निकटतम रेलवे स्टेशन कौन-सा है?
ट्रस्ट के अनुसार सोमनाथ स्टेशन, जो मंदिर से लगभग 0.5 km दूर है। लगभग 7 km दूर स्थित वेरावल से अधिक ट्रेनें मिलती हैं।
Sources and attribution
- Shree Somnath Trust — Shree Somnath Trust — official website
- Shree Somnath Trust — Somnath Darshan
- Shree Somnath Trust — Frequently Asked Questions
- Press Information Bureau, Government of India — Somnath Swabhiman Parv: A Thousand Years of Deep-rooted Faith and Civilisational Pride
- Encyclopaedia Britannica — Somnath
- Incredible India, Ministry of Tourism — Somnath Kartak Poonam Fair
- Incredible India, Ministry of Tourism — Somnath Mahotsav 2027
- Utsav, Ministry of Tourism — Mahashivratri at Somnath
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