सत्यनारायण स्वामी व्रत — सत्यनारायण रूप में भगवान विष्णु की आरोग्य, समृद्धि, सुख एवं सफलता हेतु की जाने वाली प्रसिद्ध पूजा। किसी महत्वपूर्ण अवसर के बाद या कठिन समय में अनेक NRI इसे करते हैं। घर पर सरल विधि यह है।

कब कर सकते हैं?

किसी भी दिन किया जा सकता है, पर एकादशी, पूर्णिमा, संक्रांति एवं गुरु/शुक्रवार विशेष शुभ माने जाते हैं। नए घर, नए कार्य या रोग-मुक्ति के बाद अनेक लोग करते हैं।

सामग्री

  • सत्यनारायण का चित्र/मूर्ति; नारियल सहित कलश
  • पुष्प, फल (पाँच प्रकार), हल्दी, कुंकुम, चावल
  • विशेष नैवेद्य रूप में सूजी का शीरा/हलवा
  • पान-सुपारी, दीप, धूप, कपूर

विधि (चरणबद्ध)

  1. घर एवं पूजा-स्थल स्वच्छ करें; स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. स्वच्छ चौकी पर सत्यनारायण का चित्र/मूर्ति रखें; जल-आम के पत्ते-नारियल सहित कलश रखें।
  3. दीप-धूप जलाकर पहले गणेश जी का आवाहन — "ॐ गं गणपतये नमः"।
  4. सत्यनारायण स्वामी का आवाहन करें; यथासंभव जल, दूध, दही, शहद, घी से अभिषेक करें।
  5. पुष्प, फल एवं शीरा अर्पित करें।
  6. सत्यनारायण स्वामी कथा पढ़ें/सुनें; कपूर आरती करें।
  7. प्रसाद परिवार, मित्रों एवं पड़ोसियों में बाँटें।

व्यस्त NRI हेतु सरल विधि

  1. सत्यनारायण के चित्र के समक्ष दीप जलाकर पुष्प, फल, मिठाई अर्पित करें।
  2. "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "ॐ नमो नारायणाय" 21/108 बार जपें।
  3. संक्षिप्त सत्यनारायण कथा पढ़ें, संक्षिप्त आरती कर प्रसाद बाँटें।

NRI हेतु सुझाव

  • अधिकांश सामग्री भारतीय दुकानों या ऑनलाइन उपलब्ध है।
  • शीरा न बना सकें तो श्रद्धा से कोई भी घर की मिठाई अर्पित करें।
  • बच्चों को सम्मिलित करें।

सूचना: विधि क्षेत्र एवं पारिवारिक परंपरा अनुसार बदलती है; बड़ों/पुरोहित की विधि अपनाएँ।