संक्षिप्त उत्तर: श्रावण मास में परंपरा भक्तों से कहती है — मांसाहार व मदिरा से बचें, मन शांत व सात्विक रखें, नित्य दीपम व सोमवार शिव अभिषेक करें, दान करें, और साँप-बाँबी को न छेड़ें। नीचे पूरी सूची है — प्रत्येक के कारण सहित।

श्रावण मास के अनेक परंपरागत नियम हैं। यहाँ दोनों — क्या करें व क्या न करें — और महत्वपूर्ण रूप से प्रत्येक के पीछे का कारण दिया है, ताकि मास समझ के साथ मनाया जाए। तिथियों हेतु श्रावण मास 2026 कैलेंडर देखें।

क्या करें — मास को परिभाषित करने वाले आचरण

  1. घर में नित्य प्रातः-सायं दीपम जलाएँ।
  2. सोमवार को जल व बिल्व (मरेडु) पत्र से शिव अभिषेक करें।
  3. सात्विक शाकाहारी आहार रखें।
  4. दान व अन्नदान करें।
  5. श्री सूक्तम, रुद्रम या भागवत का पाठ/श्रवण करें।
  6. शिव व देवी मंदिरों के दर्शन करें, विशेषकर पावन वारों पर।
  7. प्रतिदिन द्वार पर मुग्गु (रंगोली) बनाएँ।
  8. महिलाओं में पसुपु-कुंकुम व ताम्बूलम का आदान-प्रदान करें।
  9. तुलसी पूजा करें व घर स्वच्छ रखें।
  10. बड़ों के प्रति कृतज्ञता व सेवा दिखाएँ।

क्या न करें — और प्रत्येक का कारण

  • मांसाहार व मदिरा: चातुर्मास में अहिंसा और सात्विक मन हेतु त्याज्य (नीचे अनुभाग देखें)।
  • कुछ पत्तेदार सब्जियाँ: श्रावण में हरी पत्तेदार सब्जियों से बचते हैं — वर्षा में वे शीघ्र ख़राब होती व रोगाणु पालती हैं, यह आयुर्वेदिक स्वच्छता परंपरा है।
  • बैंगन व दही (कुछ परंपराओं में): वर्षा ऋतु में पाचन कारणों से त्याज्य; परिवार अनुसार भिन्न।
  • कुछ दिनों पर बाल/दाढ़ी: विशेष तिथियों व वारों पर परंपरा से बचा जाता है।
  • कलह व कटु वचन: यह मास शांत, अनुशासित आचरण का है।
  • साँप व बाँबी को छेड़ना: श्रावण में नाग पूजा के कारण पावन माने जाते हैं — पारिस्थितिक रूप से भी उचित।
  • वृक्ष काटना; दिन में सोना: इस तप-मास में परंपरा से वर्जित।

श्रावण मास में मांसाहार क्यों त्याज्य है

परंपरा में चार कारण दिए जाते हैं, जो परस्पर पुष्ट करते हैं: यह अनेक जीवों व मछलियों का वर्षाकालीन प्रजनन काल है; आयुर्वेद अनुसार वर्षा में जठराग्नि दुर्बल होती है, अतः हल्का सात्विक आहार उपयुक्त है; चातुर्मास में अहिंसा पर बल है, जिसमें श्रावण आता है; और सात्विक आहार मास की गहन उपासना हेतु मन को स्थिर करता है।

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व्रत: प्रकार व कैसे चुनें

  • निर्जल — बिना अन्न-जल (सर्वाधिक कठोर)।
  • फलाहार — फल, दूध व अनाज-रहित अनुमत आहार।
  • एकभुक्तम — दिन में एक बार भोजन।
  • नक्तम — सूर्यास्त के बाद ही भोजन।
  • आंशिक — विशेष आहार (जैसे मांसाहार, अनाज) का त्याग, पूर्ण उपवास बिना।

अपने स्वास्थ्य अनुसार ईमानदारी से प्रकार चुनें। सोमवार व्रत विवरण हेतु श्रावण सोमवार गाइड देखें।

क्या श्रावण में विवाह, गृहप्रवेश व नई खरीद कर सकते हैं?

आषाढ़ मास के विपरीत (जब कई परिवार ऐसे कार्य टालते हैं), श्रावण मास सामान्यतः शुभ माना जाता है — विवाह, गृहप्रवेश, स्वर्ण/वाहन क्रय, अक्षराभ्यास व नए आरंभ प्रायः किए जाते हैं, उचित मुहूर्त के अधीन। अपने चुने दिन का मुहूर्त पुरोहित से पुष्ट करें।

वर्षा-मास में स्वास्थ्य व आयुर्वेद

मास की अधिकांश आहार-बुद्धिमत्ता वर्षा-स्वास्थ्य से मेल खाती है — हल्का, ताज़ा पका, सात्विक आहार; कच्ची पत्तेदार व संग्रहित वस्तुओं में सावधानी; और गर्म, सुपाच्य भोजन। यह परंपरागत आहार-अभ्यास है, चिकित्सा सलाह नहीं; अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं हेतु चिकित्सक से परामर्श करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावण मास में क्या नहीं करना चाहिए?

परंपरागत रूप से: मांसाहार व मदिरा, कुछ पत्तेदार सब्जियाँ (वर्षा-स्वच्छता परंपरा), कलह व कटु वचन, साँप-बाँबी को छेड़ना, वृक्ष काटना, और कुछ परंपराओं में विशेष दिनों पर बाल कटवाना।

श्रावण मास में मांसाहार क्यों त्याज्य है?

चार परस्पर पुष्ट कारणों से: यह वर्षाकालीन प्रजनन काल है; आयुर्वेद अनुसार वर्षा में पाचन दुर्बल होता है; चातुर्मास में अहिंसा पर बल है; और सात्विक आहार उपासना हेतु मन स्थिर करता है।

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क्या श्रावण मास में विवाह कर सकते हैं?

हाँ — आषाढ़ के विपरीत, श्रावण विवाह, गृहप्रवेश व नई खरीद हेतु सामान्यतः शुभ माना जाता है, उचित मुहूर्त के अधीन। मुहूर्त पुरोहित से पुष्ट करें।

श्रावण मास में व्रत के नियम क्या हैं?

भक्त अपने स्वास्थ्य अनुसार प्रकार चुनते हैं: निर्जल, फलाहार, एकभुक्तम, नक्तम, या विशेष आहार त्याग वाला आंशिक व्रत।

क्या श्रावण मास में बाल कटवा सकते हैं?

कुछ परंपराएँ मास में विशेष तिथियों व वारों पर बाल कटवाना व दाढ़ी बनाना टालती हैं; अभ्यास परिवार व क्षेत्र अनुसार भिन्न है — अपनी परंपरा का पालन करें।