संक्षिप्त उत्तर: 2026 में श्रावण मंगलवार दो कैलेंडरों में आते हैं: पूर्णिमांत सावन मंगलवार (4, 11, 18, 25 अगस्त) और अमांत श्रावण मंगलवारम (18, 25 अगस्त, 1, 8 सितंबर)। ये मंगला गौरी (पार्वती) को समर्पित हैं और स्थानीय मंगलवार को मनाए जाते हैं।

श्रावण के मंगलवार — उत्तर में सावन मंगलवार, दक्षिण में श्रावण मंगलवारम — मंगला गौरी (देवी पार्वती) को समर्पित हैं। यहाँ 2026 के दोनों तिथि-समूह, स्थानीय-मंगलवार नियम और भारत में परिवार से समन्वय हेतु समय-अंतर तालिका दी गई है।

2026 में तिथियाँ अलग क्यों हैं?

उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण-पश्चिम अमांत कैलेंडर मानता है, इसलिए श्रावण की तिथि-सीमा भिन्न होती है और मंगलवार अलग पड़ते हैं। कोई भी अधिक सही नहीं — अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

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परंपराश्रावण मंगलवार 2026
पूर्णिमांत — सावन मंगलवार4, 11, 18, 25 अगस्त
अमांत — श्रावण मंगलवारम18, 25 अगस्त, 1, 8 सितंबर

एनआरआई किस मंगलवार को मनाएँ?

अपने स्थानीय मंगलवार को। पूजा का समय अपने बड़ों या पारिवारिक पुरोहित से पुष्टि करें।

भारत में परिवार से समन्वय

अनेक लोग माँ या सास के साथ वीडियो कॉल पर पूजा करते हैं। भारतीय समय अमेरिकी पूर्वी से 9.5 घंटे और प्रशांत से 12.5 घंटे आगे है:

अमेरिकी समय-क्षेत्रIST आगेभारत में सुबह 8 बजे, अमेरिका में
पूर्वी (ET)9.5 घंटेपिछली रात 10:30
सेंट्रल (CT)10.5 घंटेपिछली रात 9:30
प्रशांत (PT)12.5 घंटेपिछली शाम 7:30

परंपरागत रूप से कौन मनाता है

मंगला गौरी व्रत को परंपरा में नव-विवाहित महिलाओं का व्रत बताया गया है, प्रायः विवाह के पहले पाँच वर्षों में। यह परंपरा का वर्णन है, कोई नियम नहीं: प्रथा परिवार और क्षेत्र के अनुसार बहुत भिन्न होती है और कई घर व्यापक रूप से मनाते हैं। कोई एक सही रूप नहीं, और जो न मनाए उसने कुछ गलत नहीं किया।

क्षेत्रीय नाम और प्रथाएँ

  • तेलुगु — मंगला गौरी व्रतम / नोము।
  • कन्नड़ — मंगला गौरी व्रत, बागिना अर्पण के साथ।
  • मराठी — मंगलागौर, रात्रि-भर के खेल के साथ।
  • उत्तर भारतीय — मंगला गौरी व्रत।

सोमवार (शिव) और शुक्रवार (लक्ष्मी) के व्रतों के लिए भी हमारी श्रावण मार्गदर्शिकाएँ देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियाँ क्या हैं?

पूर्णिमांत सावन मंगलवार: 4, 11, 18, 25 अगस्त। अमांत श्रावण मंगलवारम: 18, 25 अगस्त, 1, 8 सितंबर। अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

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दोनों कैलेंडर अलग मंगलवार क्यों देते हैं?

पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर और अमांत अमावस्या पर समाप्त होता है, इसलिए श्रावण की तिथि-सीमा भिन्न होती है और मंगलवार अलग पड़ते हैं।

मंगला गौरी व्रत किस देवी को समर्पित है?

मंगला गौरी को, देवी पार्वती का एक रूप। श्रावण के मंगलवार उन्हीं के सम्मान में मनाए जाते हैं।

एनआरआई किस मंगलवार को मनाएँ?

अपने स्थानीय मंगलवार को, और पूजा का समय बड़ों या पारिवारिक पुरोहित से पुष्टि करें।

भारत में परिवार के साथ पूजा का समन्वय कैसे करें?

अनेक लोग वीडियो कॉल पर मनाते हैं। IST पूर्वी से 9.5 और प्रशांत से 12.5 घंटे आगे है, इसलिए भारत की सुबह अमेरिका की पिछली शाम होती है — उसी अनुसार कॉल तय करें।

परंपरागत रूप से मंगला गौरी व्रत कौन मनाता है?

परंपरा इसे नव-विवाहित महिलाओं का व्रत बताती है, प्रायः पहले पाँच वर्षों में, पर प्रथा परिवार व क्षेत्र से बहुत भिन्न होती है और कई व्यापक रूप से मनाते हैं।

श्रावण के वारों में क्या अंतर है?

मंगलवार मंगला गौरी के लिए, सोमवार शिव के लिए, और शुक्रवार महालक्ष्मी के लिए हैं।

बागिना क्या है?

बागिना कन्नड़ परंपरा है जिसमें विवाहित महिलाओं को अर्पण-टोकरी दी जाती है; इसकी सामग्री और रीति परिवार अनुसार भिन्न होती है।