नवरात्रि दिन 9, 2026: भारत में माँ सिद्धिदात्री की पूजा सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को होती है, जब दुर्गा अष्टमी और महानवमी एक ही दिन पड़ रही हैं (द्रिक पंचांग); विजयादशमी इसके बाद मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। USA, कनाडा और UK में भी महानवमी सोमवार, 19 अक्टूबर को है। उनके मंत्र, रंग और चरण-दर-चरण पूजा विधि के लिए देखें नवरात्रि 2026 दिन 9: माँ सिद्धिदात्री।

सिद्धिदात्री, शक्ति का नौवाँ स्वरूप

शक्ति का नौवाँ स्वरूप सिद्धिदात्री सभी सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। पुराणों के अनुसार उन्हीं की कृपा से देवी पार्वती ने परमेश्वर का आधा शरीर प्राप्त किया। उनकी प्रार्थना करने से परम आनंद देने वाला अमृत पथ खुल जाता है।

साधना: मार्कण्डेय पुराण में 8 सिद्धियाँ

दुर्गा माता के नौवें स्वरूप का नाम 'सिद्धिदात्री' है। वे हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं। मार्कण्डेय पुराण में सिद्धियाँ आठ प्रकार की बताई गई हैं:

  1. अणिमा
  2. महिमा
  3. गरिमा
  4. लघिमा
  5. प्राप्ति
  6. प्राकाम्य
  7. ईशित्व
  8. वशित्व

सरल शब्दों में: इन आठों की प्रचलित व्याख्या में अणिमा का अर्थ है अणु के समान सूक्ष्म हो जाना, महिमा विशाल हो जाना, गरिमा भारी हो जाना, लघिमा हल्का हो जाना, प्राप्ति कुछ भी प्राप्त कर लेना, प्राकाम्य अपनी इच्छा पूर्ण होना, ईशित्व प्रभुत्व और वशित्व वस्तुओं को वश में करने की शक्ति। (यह संक्षिप्त व्याख्या HinduTone द्वारा जोड़ी गई है।)

ब्रह्मवैवर्त पुराण में 18 सिद्धियाँ

ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में सिद्धियाँ अठारह प्रकार की बताई गई हैं। वे हैं:

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  1. अणिमा
  2. लघिमा
  3. प्राप्ति
  4. प्राकाम्य
  5. महिमा
  6. ईशित्व और वशित्व
  7. सर्वकामावसायिता
  8. सर्वज्ञत्व
  9. दूरश्रवण
  10. परकाया प्रवेश
  11. वाक्त्व सिद्धि
  12. कल्प
  13. सृष्टि
  14. संहारकरण सामर्थ्य
  15. अमरत्व
  16. सर्वन्यायकत्व
  17. भावना
  18. सिद्धि

अर्धनारीश्वर और देवी का स्वरूप

माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियाँ प्रदान कर सकती हैं। देवी पुराण में कहा गया है कि परमेश्वर ने देवी की कृपा से ही ये सभी सिद्धियाँ प्राप्त कीं। इन्हीं माँ सिद्धिदात्री ने परम शिव पर कृपा करके उनके आधे शरीर का रूप ले लिया; इसीलिए वे अर्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हैं। देवी सिद्धिदात्री चतुर्भुजा हैं और सिंह पर सवार होती हैं। इस स्वरूप में देवी कमल पर विराजमान हैं। उनकी दाहिनी ओर के एक हाथ में चक्र और दूसरे में गदा है। बाईं ओर के एक हाथ में शंख और दूसरे में कमल धारण कर वे दर्शन देती हैं।

नवरात्रि दिन 9 की पूजा

नवरात्रि उत्सव के नौवें दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि जो लोग नौवें दिन विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा से उनकी पूजा करते हैं, उनके लिए सभी सिद्धियाँ हथेली पर रखे आँवले की तरह सहज सुलभ हो जाती हैं। सृष्टि में कुछ भी उनकी पहुँच से बाहर नहीं है। पुराणों के अनुसार इन माँ की कृपा से उपासक को सारे ब्रह्मांड को भी जीत लेने की शक्ति प्राप्त होती है।

हर व्यक्ति को माँ सिद्धिदात्री की कृपा का पात्र बनने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। इन माँ की करुणा के प्रभाव से व्यक्ति इस अनंत, दुःख भरे सांसारिक चक्र से विरक्त हो सकता है। भक्तों का विश्वास है कि ऐसा व्यक्ति न केवल हर सुख प्राप्त करता है, बल्कि मोक्ष भी प्राप्त करता है।

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नवदुर्गाओं में सिद्धिदात्री स्वरूप अंतिम है। पहले आठ दिनों में दुर्गा देवी के आठ स्वरूपों की क्रम से विधिपूर्वक और निष्ठा से पूजा करने के बाद, नौवें दिन उपासक को सिद्धिदात्री की उपासना में लीन हो जाना चाहिए। भक्तों का विश्वास है कि इन देवी की पूजा पूर्ण होते ही भक्तों और साधकों की सभी लौकिक और पारलौकिक कामनाएँ पूरी हो जाती हैं। जो भक्त माँ सिद्धिदात्री की कृपा का पात्र बन गया है, उसकी कोई इच्छा शेष नहीं रहती। ऐसा भक्त हर प्रकार की सांसारिक लालसा, आवश्यकता और आसक्ति से ऊपर उठ जाता है। वह मन से भगवती देवी के दिव्य लोक में निवास करता है। देवी की कृपा के अमृत का निरंतर रसपान करते हुए वह विषय-भोगों की आसक्ति से मुक्त हो जाता है। ऐसे लोगों के लिए भगवती देवी का सान्निध्य ही सब कुछ बन जाता है। इस परम अवस्था को प्राप्त कर लेने पर उसे अन्य सांसारिक वस्तुओं की कोई आवश्यकता नहीं रहती।

हमारा कर्तव्य है कि हम दुर्गा माता के चरणों की शरण पाने के लिए अनुशासन और भक्ति के साथ निरंतर उनकी उपासना करें। भगवती माता के स्मरण, ध्यान और पूजन के प्रभाव से हमें समझ आता है कि यह सांसारिक जीवन सारहीन है। उनकी महिमा से हमारे लिए परम आनंद देने वाला सच्चा अमृत पथ खुल जाता है।

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नवमी पर कई भक्त दुर्गा के 108 नाम का पाठ भी करते हैं। नवमी देवी पूजा का मुख्य दिन क्यों है, यह जानने के लिए देखें महानवमी का महत्व।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माँ सिद्धिदात्री कौन हैं?

सिद्धिदात्री नवदुर्गाओं में देवी दुर्गा का नौवाँ स्वरूप (शक्ति स्वरूप) हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के नौवें दिन की जाती है। उनके नाम का अर्थ है सिद्धियाँ देने वाली, और माना जाता है कि वे भक्तों और साधकों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं।

8 सिद्धियाँ कौन-सी हैं?

इस लेख के अनुसार मार्कण्डेय पुराण में बताई गई आठ सिद्धियाँ हैं: अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में 18 सिद्धियाँ कौन-सी हैं?

इस लेख में उद्धृत ब्रह्मवैवर्त पुराण के कृष्ण जन्म खंड में अठारह सिद्धियाँ बताई गई हैं: अणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व-वशित्व, सर्वकामावसायिता, सर्वज्ञत्व, दूरश्रवण, परकाया प्रवेश, वाक्त्व सिद्धि, कल्प, सृष्टि, संहारकरण सामर्थ्य, अमरत्व, सर्वन्यायकत्व, भावना और सिद्धि।

2026 में नवरात्रि दिन 9 की सिद्धिदात्री पूजा कब है?

भारत में नवरात्रि का दिन 9 सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को है, उसी दिन दुर्गा अष्टमी और महानवमी भी हैं (द्रिक पंचांग), और विजयादशमी इसके बाद मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। USA, कनाडा और UK में भी महानवमी सोमवार, 19 अक्टूबर को है।

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सिद्धिदात्री का अर्धनारीश्वर से क्या संबंध है?

पुराणों में बताया गया है कि सिद्धिदात्री ने परम शिव पर कृपा करके उनके आधे शरीर का रूप ले लिया, इसीलिए वे अर्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हैं। यह भी कहा जाता है कि परमेश्वर ने देवी की कृपा से ही सभी सिद्धियाँ प्राप्त कीं।

संपादकीय टिप्पणी (19 अक्टूबर 2026)

यह लेख HinduTone को तेलुगु में भेजा गया था। तेलुगु संस्करण मूल है; अंग्रेज़ी पृष्ठ उसका विश्वसनीय अनुवाद है। सिद्धियों की सूचियाँ ठीक वैसे ही दी गई हैं जैसे लेखक ने उन्हें मार्कण्डेय पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के कृष्ण जन्म खंड से उद्धृत किया है। हमने केवल हल्के संपादन किए हैं: वर्तनी सुधार, फल-संबंधी कथनों को भक्तों के विश्वास या पुराणों के कथन के रूप में प्रस्तुत करना, अनुभाग शीर्षक, 2026 की तिथियाँ और आठ सिद्धियों की संक्षिप्त व्याख्या। तिथियाँ द्रिक पंचांग से ली गई हैं।

अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026।

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