सावन सोमवार व्रत 2026: तिथियाँ, नियम और परंपरागत विधि
सावन सोमवार व्रत 2026 — भगवान शिव को समर्पित श्रावण के सोमवार व्रत। दोनों कैलेंडर तिथियाँ, व्रत के परंपरागत रूप (जो विधान नहीं), दिन का क्रम और सोलह सोमवार से अंतर।
सावन सोमवार व्रत 2026 — भगवान शिव को समर्पित श्रावण के सोमवार व्रत। दोनों कैलेंडर तिथियाँ, व्रत के परंपरागत रूप (जो विधान नहीं), दिन का क्रम और सोलह सोमवार से अंतर।
संक्षिप्त उत्तर: सावन सोमवार व्रत 2026 श्रावण के सोमवारों को है, भगवान शिव को समर्पित। पूर्णिमांत में सोमवार 3, 10, 17, 24 अगस्त; अमांत में 17, 24, 31 अगस्त और 7 सितंबर हैं।
सावन सोमवार व्रत श्रावण मास के सोमवारों की आराधना है, भगवान शिव को समर्पित। भक्त अभिषेक करते हैं, बिल्व (बेल) पत्र अर्पित करते हैं, और अनेक व्रत रखते हैं। उत्तर और दक्षिण की गणना भिन्न होने से 2026 की तिथियाँ दो समूहों में हैं।
सावन सोमवार 2026 तिथियाँ — दोनों कैलेंडर
| परंपरा | श्रावण सोमवार 2026 |
|---|---|
| पूर्णिमांत (उत्तर) — सावन सोमवार | 3, 10, 17, 24 अगस्त |
| अमांत (तेलुगु, कन्नड़, मराठी) — श्रावण सोमवारम | 17, 24, 31 अगस्त, 7 सितंबर |
व्रत के परंपरागत रूप
परंपरा कई रूप देती है, और यहाँ किसी को श्रेष्ठ नहीं बताया गया — अनेक घर बिना उपवास के भी मनाते हैं:
- निर्जला — बिना अन्न-जल।
- फलाहार — फल, दूध और विशेष व्रत-आहार।
- एक सात्विक भोजन, प्रायः संध्या को।
- बिना उपवास आराधना — पूजा, अभिषेक और मंत्र जप, जो स्वयं पूर्ण आराधना है।
स्वास्थ्य सूचना: उपवास व्यक्तिगत चुनाव है। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली, मधुमेह या रक्तचाप की स्थिति वाली, नियमित दवा लेने वाली, वृद्ध या अस्वस्थ, अथवा भोजन-विकार के इतिहास वाली किसी भी व्यक्ति को उपवास से पहले चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। परंपरा स्वयं बिना उपवास के आराधना की व्यवस्था देती है। यह परंपरा का वर्णन है, चिकित्सा सलाह नहीं।
दिन का परंपरागत क्रम
- स्नान और स्वच्छ वस्त्र।
- संकल्प — दिन का उल्लेख करते हुए।
- जल और पंचामृत से शिवलिंग अभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण।
- चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप से पूजा।
- व्रत कथा का पाठ या श्रवण।
- आरती और नैवेद्य।
- पारण — संध्या पूजा के बाद, अपनी पारिवारिक रीति अनुसार।
सावन सोमवार व्रत बनाम सोलह सोमवार व्रत
ये भिन्न हैं। सावन सोमवार व्रत केवल श्रावण के सोमवारों को रखा जाता है। सोलह सोमवार व्रत एक अलग सोलह-सोमवार का संकल्प है जो प्रायः श्रावण में आरंभ होकर मास से आगे तक चलता है, अपनी कथा और उद्यापन के साथ। इन्हें मिलाएँ नहीं।
यदि आप इस वर्ष उपवास न कर सकें
बिना उपवास आराधना — अभिषेक, मंत्र जप, मंदिर प्रायोजन, या परिवार के अन्य सदस्य द्वारा आराधना — वैध और परंपरा-सम्मत है। यह कोई कम विकल्प नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सावन सोमवार 2026 की तिथियाँ क्या हैं?
पूर्णिमांत: 3, 10, 17, 24 अगस्त। अमांत: 17, 24, 31 अगस्त और 7 सितंबर। अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।
दो कैलेंडर अलग तिथियाँ क्यों देते हैं?
पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर और अमांत अमावस्या पर समाप्त होता है, इसलिए श्रावण की तिथि-सीमा भिन्न होती है। दोनों सही हैं।
क्या सावन सोमवार व्रत और सोलह सोमवार व्रत एक हैं?
नहीं। सावन सोमवार श्रावण के सोमवारों को है; सोलह सोमवार एक अलग सोलह-सोमवार संकल्प है, प्रायः श्रावण से आगे तक, अपनी कथा और उद्यापन के साथ।
क्या निर्जला उपवास अनिवार्य है?
नहीं। परंपरा कई रूप देती है — निर्जला, फलाहार, एक सात्विक भोजन, या बिना उपवास — और कोई श्रेष्ठ नहीं। केवल वही चुनें जो आपके लिए सुरक्षित हो; स्वास्थ्य स्थिति में चिकित्सक से परामर्श करें।
क्या बिना उपवास के मना सकते हैं?
हाँ। अभिषेक, पूजा और मंत्र जप स्वयं पूर्ण आराधना है। बिना उपवास आराधना परंपरा-सम्मत है, कोई कम विकल्प नहीं।
सावन सोमवार किस देवता को समर्पित है?
भगवान शिव को। श्रावण के सोमवार अभिषेक और बिल्वपत्र अर्पण के साथ शिव को समर्पित हैं।
एनआरआई किस सोमवार को मनाएँ?
अपने स्थानीय सोमवार को, अपने समय-क्षेत्र में। समय मंदिर से पुष्टि करें।
पारण कब करें?
पारण प्रायः संध्या पूजा के बाद, पारिवारिक रीति अनुसार। इसे सौम्यता से करें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।



