संक्षिप्त उत्तर: भारत में 2027 में 25 प्रदोष व्रत हैं, मंगलवार, 5 जनवरी के भौम प्रदोष से शनिवार, 25 दिसंबर के शनि प्रदोष तक। इनमें 4 सोम (सोमवार) और 5 शनि (शनिवार) प्रदोष हैं। प्रदोष पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है; दिल्ली का समय तालिका में दिया है। उत्तरी अमेरिका में तिथि अक्सर एक दिन पहले होती है।

अंतिम अपडेट: 25 अक्टूबर 2026

प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष व्रत (दक्षिण भारत में प्रदोषम) भगवान शिव के लिए त्रयोदशी को रखा जाता है, जो हर पक्ष की तेरहवीं चंद्र तिथि है, इसलिए यह महीने में दो बार आता है। इसका मूल शाम का समय है: सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भक्त शिव और पार्वती की पूजा करते हैं, अक्सर शिवलिंग का अभिषेक और बिल्व पत्र अर्पण करते हैं, और कई मंदिरों में नंदी के साथ प्रदोषम शोभायात्रा निकलती है। व्रत का नाम वार से पड़ता है: सोम (सोमवार), भौम (मंगलवार), बुध (बुधवार), गुरु (गुरुवार), शुक्र (शुक्रवार), शनि (शनिवार) और रवि (रविवार) प्रदोष।

प्रदोष व्रत 2027 तिथियाँ (भारत)

#तिथिनाममास और पक्षप्रदोष काल (दिल्ली)त्रयोदशी तिथि (IST)
1मंगलवार, 5 जनवरीभौम प्रदोष व्रतपौष (उत्तर) / मार्गशीर्ष (दक्षिण) कृष्ण5:38 PM से 8:21 PM6:15 PM, 4 जनवरी से 8:39 PM, 5 जनवरी
2बुधवार, 20 जनवरीबुध प्रदोष व्रतपौष शुक्ल5:50 PM से 8:31 PM4:41 AM, 20 जनवरी से 1:11 AM, 21 जनवरी
3बुधवार, 3 फरवरीबुध प्रदोष व्रतमाघ (उत्तर) / पौष (दक्षिण) कृष्ण6:02 PM से 8:39 PM1:50 PM, 3 फरवरी से 4:31 PM, 4 फरवरी
4गुरुवार, 18 फरवरीगुरु प्रदोष व्रतमाघ शुक्ल6:13 PM से 8:46 PM2:27 PM, 18 फरवरी से 11:14 AM, 19 फरवरी
5शुक्रवार, 5 मार्चशुक्र प्रदोष व्रतफाल्गुन (उत्तर) / माघ (दक्षिण) कृष्ण6:23 PM से 8:51 PM9:53 AM, 5 मार्च से 12:03 PM, 6 मार्च
6शनिवार, 20 मार्चशनि प्रदोष व्रतफाल्गुन शुक्ल6:32 PM से 8:45 PM11:17 PM, 19 मार्च से 8:45 PM, 20 मार्च
7रविवार, 4 अप्रैलरवि प्रदोष व्रतचैत्र (उत्तर) / फाल्गुन (दक्षिण) कृष्ण6:40 PM से 8:58 PM4:26 AM, 4 अप्रैल से 5:23 AM, 5 अप्रैल
8रविवार, 18 अप्रैलरवि प्रदोष व्रतचैत्र शुक्ल6:48 PM से 9:01 PM7:42 AM, 18 अप्रैल से 6:08 AM, 19 अप्रैल
9सोमवार, 3 मईसोम प्रदोष व्रतवैशाख (उत्तर) / चैत्र (दक्षिण) कृष्ण8:03 PM से 9:06 PM8:03 PM, 3 मई से 7:30 PM, 4 मई
10सोमवार, 17 मईसोम प्रदोष व्रतवैशाख शुक्ल7:06 PM से 9:10 PM4:28 PM, 17 मई से 4:03 PM, 18 मई
11बुधवार, 2 जूनबुध प्रदोष व्रतज्येष्ठ (उत्तर) / वैशाख (दक्षिण) कृष्ण7:15 PM से 9:17 PM8:28 AM, 2 जून से 6:34 AM, 3 जून
12बुधवार, 16 जूनबुध प्रदोष व्रतज्येष्ठ शुक्ल7:21 PM से 9:21 PM2:30 AM, 16 जून से 3:20 AM, 17 जून
13गुरुवार, 1 जुलाईगुरु प्रदोष व्रतआषाढ़ (उत्तर) / ज्येष्ठ (दक्षिण) कृष्ण7:23 PM से 9:24 PM6:14 PM, 1 जुलाई से 3:23 PM, 2 जुलाई
14गुरुवार, 15 जुलाईगुरु प्रदोष व्रतआषाढ़ शुक्ल7:21 PM से 9:23 PM2:40 PM, 15 जुलाई से 4:34 PM, 16 जुलाई
15शनिवार, 31 जुलाईशनि प्रदोष व्रतश्रावण (उत्तर) / आषाढ़ (दक्षिण) कृष्ण7:13 PM से 9:19 PM2:18 AM, 31 जुलाई से 10:57 PM, 31 जुलाई
16शनिवार, 14 अगस्तशनि प्रदोष व्रतश्रावण शुक्ल7:02 PM से 9:11 PM5:21 AM, 14 अगस्त से 7:53 AM, 15 अगस्त
17रविवार, 29 अगस्तरवि प्रदोष व्रतभाद्रपद (उत्तर) / श्रावण (दक्षिण) कृष्ण6:46 PM से 9:01 PM9:35 AM, 29 अगस्त से 6:12 AM, 30 अगस्त
18सोमवार, 13 सितंबरसोम प्रदोष व्रतभाद्रपद शुक्ल6:29 PM से 8:48 PM10:12 PM, 12 सितंबर से 12:39 AM, 14 सितंबर
19सोमवार, 27 सितंबरसोम प्रदोष व्रतआश्विन (उत्तर) / भाद्रपद (दक्षिण) कृष्ण6:12 PM से 8:36 PM4:55 PM, 27 सितंबर से 1:54 PM, 28 सितंबर
20मंगलवार, 12 अक्टूबरभौम प्रदोष व्रतआश्विन शुक्ल5:55 PM से 8:24 PM4:13 PM, 12 अक्टूबर से 5:48 PM, 13 अक्टूबर
21बुधवार, 27 अक्टूबरबुध प्रदोष व्रतकार्तिक (उत्तर) / आश्विन (दक्षिण) कृष्ण5:40 PM से 8:14 PM1:03 AM, 27 अक्टूबर से 10:49 PM, 27 अक्टूबर
22गुरुवार, 11 नवंबरगुरु प्रदोष व्रतकार्तिक शुक्ल5:30 PM से 8:08 PM10:07 AM, 11 नवंबर से 10:20 AM, 12 नवंबर
23गुरुवार, 25 नवंबरगुरु प्रदोष व्रतमार्गशीर्ष (उत्तर) / कार्तिक (दक्षिण) कृष्ण5:24 PM से 8:06 PM10:50 AM, 25 नवंबर से 9:47 AM, 26 नवंबर
24शनिवार, 11 दिसंबरशनि प्रदोष व्रतमार्गशीर्ष शुक्ल5:25 PM से 8:09 PM2:53 AM, 11 दिसंबर से 1:42 AM, 12 दिसंबर
25शनिवार, 25 दिसंबरशनि प्रदोष व्रतपौष (उत्तर) / मार्गशीर्ष (दक्षिण) कृष्ण5:31 PM से 8:15 PM11:08 PM, 24 दिसंबर से 11:31 PM, 25 दिसंबर

तालिका कैसे पढ़ें: तिथियाँ, नाम और प्रदोष काल का समय नई दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग से लिए गए हैं। जब त्रयोदशी शाम के दौरान शुरू होती है, तो दिखाया गया काल सूर्यास्त से नहीं बल्कि उसी क्षण से शुरू होता है (जैसे 3 मई को)। प्रदोष काल आपके अपने सूर्यास्त के अनुसार चलता है, इसलिए मुंबई, हैदराबाद या चेन्नई में समय दिल्ली से कुछ आगे-पीछे होता है।

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भारतीय शहर: अधिकांश प्रदोष के दिन पूरे भारत में तिथि एक ही रहती है। 2027 में दो तिथियाँ सीमा पर हैं, क्योंकि त्रयोदशी सूर्यास्त के आसपास शुरू या समाप्त होती है। 5 जनवरी के भौम प्रदोष में त्रयोदशी 4 और 5 जनवरी दोनों दिन मुंबई के लगभग पूरे प्रदोष काल में रहती है। 3 मई के सोम प्रदोष में त्रयोदशी 3 मई की शाम को शुरू होकर 4 मई की शाम को समाप्त होती है, इसलिए जल्दी सूर्यास्त वाले शहरों को मंगलवार, 4 मई को इसका अधिक भाग मिलता है: हमारी गणना के अनुसार चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता में व्रत 4 मई को होगा, और हैदराबाद में दोनों दिन लगभग बराबर हैं। इन दोनों के लिए अपने शहर का पंचांग या मंदिर देखें।

विदेश में प्रदोष व्रत 2027 तिथियाँ: तिथि एक दिन क्यों खिसक सकती है

तिथि (चंद्र दिवस) पूरी दुनिया में एक ही क्षण शुरू और समाप्त होती है, पर व्रत का दिन तय करने वाला नियम स्थानीय है: वह आपके शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय या मध्यरात्रि को देखता है। ये हर शहर में अलग-अलग घड़ी के समय पर होते हैं, इसलिए वही तिथि विदेश में अलग तारीख पर पड़ सकती है। व्यवहार में उत्तरी अमेरिका में तिथि अक्सर एक दिन पहले और ऑस्ट्रेलिया व पूर्वी एशिया में कभी-कभी एक दिन बाद होती है; लंदन और दुबई प्रायः भारत से मेल खाते हैं। भारत की तिथि या समय को अपने टाइम ज़ोन में न बदलें। अपने शहर की पंक्ति देखें, या अपने पंचांग ऐप में अपना शहर चुनें।

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प्रदोष (भारतीय मास)भारत (दिल्ली)न्यूयॉर्कटोरंटोलंदनदुबईसिंगापुरसिडनी
जनवरी (कृष्ण)मंगल 5 जनवरीसोम 4 जनवरीसोम 4 जनवरीसोम 4 जनवरीसोम 4 जनवरीमंगल 5 जनवरीमंगल 5 जनवरी
जनवरी (शुक्ल)बुध 20 जनवरीमंगल 19 जनवरीमंगल 19 जनवरीबुध 20 जनवरीबुध 20 जनवरीबुध 20 जनवरीबुध 20 जनवरी
फरवरी (कृष्ण)बुध 3 फरवरीबुध 3 फरवरीबुध 3 फरवरीबुध 3 फरवरीबुध 3 फरवरीबुध 3 फरवरीबुध 3 फरवरी
फरवरी (शुक्ल)गुरु 18 फरवरीगुरु 18 फरवरीगुरु 18 फरवरीगुरु 18 फरवरीगुरु 18 फरवरीगुरु 18 फरवरीगुरु 18 फरवरी
मार्च (कृष्ण)शुक्र 5 मार्चशुक्र 5 मार्चशुक्र 5 मार्चशुक्र 5 मार्चशुक्र 5 मार्चशुक्र 5 मार्चशुक्र 5 मार्च
मार्च (शुक्ल)शनि 20 मार्चशुक्र 19 मार्चशुक्र 19 मार्चशुक्र 19 मार्चशनि 20 मार्चशनि 20 मार्चशनि 20 मार्च
अप्रैल (कृष्ण)रवि 4 अप्रैलशनि 3 अप्रैलशनि 3 अप्रैलरवि 4 अप्रैलरवि 4 अप्रैलरवि 4 अप्रैलरवि 4 अप्रैल
अप्रैल (शुक्ल)रवि 18 अप्रैलरवि 18 अप्रैलरवि 18 अप्रैलरवि 18 अप्रैलरवि 18 अप्रैलरवि 18 अप्रैलरवि 18 अप्रैल
मई (कृष्ण)सोम 3 मईसोम 3 मईसोम 3 मईसोम 3 मईसोम 3 मईमंगल 4 मईमंगल 4 मई
मई (शुक्ल)सोम 17 मईसोम 17 मईसोम 17 मईसोम 17 मईसोम 17 मईसोम 17 मईमंगल 18 मई
जून (कृष्ण)बुध 2 जूनबुध 2 जूनबुध 2 जूनबुध 2 जूनबुध 2 जूनबुध 2 जूनबुध 2 जून
जून (शुक्ल)बुध 16 जूनमंगल 15 जूनमंगल 15 जूनबुध 16 जूनबुध 16 जूनबुध 16 जूनबुध 16 जून
जुलाई (कृष्ण)गुरु 1 जुलाईगुरु 1 जुलाईगुरु 1 जुलाईगुरु 1 जुलाईगुरु 1 जुलाईगुरु 1 जुलाईशुक्र 2 जुलाई
जुलाई (शुक्ल)गुरु 15 जुलाईगुरु 15 जुलाईगुरु 15 जुलाईगुरु 15 जुलाईगुरु 15 जुलाईगुरु 15 जुलाईशुक्र 16 जुलाई
जुलाई (कृष्ण)शनि 31 जुलाईशुक्र 30 जुलाईशुक्र 30 जुलाईशुक्र 30 जुलाईशनि 31 जुलाईशनि 31 जुलाईशनि 31 जुलाई
अगस्त (शुक्ल)शनि 14 अगस्तशनि 14 अगस्तशनि 14 अगस्तशनि 14 अगस्तशनि 14 अगस्तशनि 14 अगस्तशनि 14 अगस्त
अगस्त (कृष्ण)रवि 29 अगस्तरवि 29 अगस्तरवि 29 अगस्तरवि 29 अगस्तरवि 29 अगस्तरवि 29 अगस्तरवि 29 अगस्त
सितंबर (शुक्ल)सोम 13 सितंबररवि 12 सितंबररवि 12 सितंबररवि 12 सितंबरसोम 13 सितंबरसोम 13 सितंबरसोम 13 सितंबर
सितंबर (कृष्ण)सोम 27 सितंबरसोम 27 सितंबरसोम 27 सितंबरसोम 27 सितंबरसोम 27 सितंबरसोम 27 सितंबरमंगल 28 सितंबर
अक्टूबर (शुक्ल)मंगल 12 अक्टूबरमंगल 12 अक्टूबरमंगल 12 अक्टूबरमंगल 12 अक्टूबरमंगल 12 अक्टूबरमंगल 12 अक्टूबरबुध 13 अक्टूबर
अक्टूबर (कृष्ण)बुध 27 अक्टूबरमंगल 26 अक्टूबरमंगल 26 अक्टूबरबुध 27 अक्टूबरबुध 27 अक्टूबरबुध 27 अक्टूबरबुध 27 अक्टूबर
नवंबर (शुक्ल)गुरु 11 नवंबरगुरु 11 नवंबरगुरु 11 नवंबरगुरु 11 नवंबरगुरु 11 नवंबरगुरु 11 नवंबरगुरु 11 नवंबर
नवंबर (कृष्ण)गुरु 25 नवंबरगुरु 25 नवंबरगुरु 25 नवंबरगुरु 25 नवंबरगुरु 25 नवंबरगुरु 25 नवंबरगुरु 25 नवंबर
दिसंबर (शुक्ल)शनि 11 दिसंबरशुक्र 10 दिसंबरशुक्र 10 दिसंबरशनि 11 दिसंबरशनि 11 दिसंबरशनि 11 दिसंबरशनि 11 दिसंबर
दिसंबर (कृष्ण)शनि 25 दिसंबरशुक्र 24 दिसंबरशुक्र 24 दिसंबरशनि 25 दिसंबरशनि 25 दिसंबरशनि 25 दिसंबरशनि 25 दिसंबर

शहर तालिका कैसे पढ़ें: पंक्तियाँ वर्ष के क्रम में हैं (भारतीय तिथि का महीना और पक्ष)। बोल्ड का अर्थ है कि तिथि भारत से अलग है। न्यूयॉर्क, लंदन और सिडनी की तिथियाँ द्रिक पंचांग के 2027 प्रदोष पेजों से हैं; टोरंटो, दुबई और सिंगापुर की तिथियाँ उसी नियम से गणना की गई हैं। अलग तिथि होने पर वार का नाम भी बदल सकता है: उदाहरण के लिए पहला प्रदोष भारत में भौम (मंगलवार) प्रदोष है, पर न्यूयॉर्क में सोम (सोमवार) प्रदोष।

वैंकूवर (Vancouver): हमारी गणना के अनुसार (वैंकूवर पूरे वर्ष UTC−7 पर), 25 में से 21 तिथियों पर वैंकूवर की प्रदोष तिथि न्यूयॉर्क जैसी ही है; यह शनि 17 अप्रैल, मंगल 1 जून, शुक्र 13 अगस्त और शनि 28 अगस्त को अलग है। द्रिक पंचांग के कनाडा पेज अभी भी पुराने सर्दियों के समय का उपयोग कर सकते हैं, इसलिए अपने मंदिर द्वारा घोषित तिथि देख लें।

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विदेश में घड़ी का समय: हर तिथि स्थानीय घड़ी के समय के अनुसार है। न्यूयॉर्क और टोरंटो 14 मार्च को डेलाइट सेविंग टाइम पर जाते हैं और 7 नवंबर 2027 को वापस आते हैं; लंदन में बदलाव 28 मार्च और 31 अक्टूबर को होता है; सिडनी 4 अप्रैल को डेलाइट सेविंग छोड़ता है और 3 अक्टूबर को फिर शुरू करता है। दुबई (UTC+4) और सिंगापुर (UTC+8) में समय नहीं बदलता। कनाडा: नवंबर 2026 से ब्रिटिश कोलंबिया पूरे वर्ष UTC−7, अल्बर्टा UTC−6 और मैनिटोबा UTC−5 पर रहेंगे। सर्दियों में यह पुराने मानक समय से एक घंटा आगे है, इसलिए जो ऐप अपडेट नहीं हुआ है वह वैंकूवर, कैलगरी, एडमंटन और विनिपेग का समय एक घंटा पहले दिखाएगा, और मध्यरात्रि के आसपास की तिथियाँ गलत हो सकती हैं। टोरंटो में सामान्य ईस्टर्न समय-परिवर्तन जारी रहते हैं।

प्रदोष व्रत कैसे रखें

  • दिन में: अपने स्वास्थ्य के अनुसार सूर्योदय से उपवास रखें: फल और दूध, या पूजा के बाद एक समय भोजन।
  • सूर्यास्त से पहले: हो सके तो फिर से स्नान करें और पूजा की तैयारी करें: अभिषेक के लिए जल या दूध, बिल्व पत्र, सफेद फूल, दीपक और धूप।
  • प्रदोष काल: शिव और पार्वती की पूजा करें, अभिषेक करें और बिल्व पत्र चढ़ाएँ, तथा 'ॐ नमः शिवाय' या कोई शिव स्तोत्र जपें। कई भक्त प्रदोषम अभिषेक के लिए शिव मंदिर जाते हैं।
  • पूजा के बाद: प्रसाद ग्रहण करें और हल्के भोजन से व्रत खोलें।

विदेश में प्रदोष अक्सर कामकाजी दिन की शाम को पड़ता है। USA, UK, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिंदू मंदिरों में शाम को प्रदोषम अभिषेक होता है; अपने मंदिर का कैलेंडर देखें, जो स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार चलता है।

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प्रदोष उपवास और स्वास्थ्य

स्वास्थ्य संबंधी सूचना: प्रदोष का उपवास एक व्यक्तिगत साधना है, सहनशक्ति की परीक्षा नहीं। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ और मधुमेह, निम्न रक्तचाप, खान-पान संबंधी विकार वाले या नियमित दवा लेने वाले लोग पहले डॉक्टर से बात करें। वे फल-दूध का उपवास रख सकते हैं, एक सादा भोजन ले सकते हैं, या बिना उपवास के केवल पूजा कर सकते हैं। जब तक आपके डॉक्टर निर्जल व्रत की अनुमति न दें, पानी पीते रहें, और कमज़ोरी या अस्वस्थता लगे तो व्रत रोक दें। यह पेज किसी विशेष फल का वादा नहीं करता; व्रत ध्यान और भक्ति का अर्पण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में कितने प्रदोष व्रत हैं?

भारत में पच्चीस, हर पक्ष की त्रयोदशी (तेरहवीं चंद्र तिथि) पर एक। पहला भौम प्रदोष मंगलवार, 5 जनवरी को है और अंतिम शनि प्रदोष शनिवार, 25 दिसंबर 2027 को।

2027 में सोम प्रदोष कब है?

सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष सोम प्रदोष कहलाता है। 2027 में भारत में यह सोम 3 मई, सोम 17 मई, सोम 13 सितंबर और सोम 27 सितंबर को है।

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2027 में शनि प्रदोष कब है?

शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष शनि प्रदोष कहलाता है। 2027 में भारत में यह शनि 20 मार्च, शनि 31 जुलाई, शनि 14 अगस्त, शनि 11 दिसंबर और शनि 25 दिसंबर को है।

प्रदोष काल क्या है?

प्रदोष काल शाम का गोधूलि समय है, जो सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे तक रहता है। प्रदोष के दिन शिव पूजा इसी समय की जाती है। व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, इसलिए तिथि आपके शहर के सूर्यास्त पर निर्भर करती है।

क्या विदेश में प्रदोष की तिथि वही होती है?

हमेशा नहीं। 2027 में 25 में से 10 बार न्यूयॉर्क की तिथि भारत से एक दिन पहले है, और प्रदोष काल आपके अपने सूर्यास्त पर आधारित होता है। अपने शहर की तिथि और सूर्यास्त का ही उपयोग करें।

संपादक की टिप्पणी

संपादक की टिप्पणी (25 अक्टूबर 2026): भारत की तिथियाँ और तिथि-समय नई दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग के 2027 सूची पेजों से हैं, जिन्हें द्रिक के हैदराबाद कैलेंडर से मिलाया गया है। न्यूयॉर्क, लंदन और सिडनी की तिथियाँ द्रिक के 2027 प्रदोष पेजों से हैं (23 और 25 अक्टूबर 2026 को जाँची गईं); अन्य शहरों की तिथियाँ गणना से हैं। द्रिक के 2027 डेटा से पता चला कि जब दोनों शामों को सूर्यास्त के समय त्रयोदशी न हो, तो वह दिन लिया जाता है जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी अधिक समय तक हो; हमारा कैलकुलेटर अब यही नियम मानता है। जहाँ हमारे कैलकुलेटर और द्रिक में अंतर था, वहाँ हमने द्रिक को माना। मंदिर और क्षेत्रीय पंचांग पर्व की तिथियाँ बदल सकते हैं, और आपके परिवार या मंदिर की परंपरा सर्वोपरि है; यदि आपका स्थानीय मंदिर अलग दिन घोषित करे, तो मंदिर का पालन करें।

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