संक्षिप्त उत्तर: उत्तर प्रदेश में दशहरा (विजयादशमी) 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है। विजय मुहूर्त: लखनऊ 1:45–2:30 PM, वाराणसी 1:37–2:23 PM, अयोध्या 1:40–2:25 PM और प्रयागराज 1:42–2:27 PM (स्थानीय समय, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना)। नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर से आरंभ होगी, और दुर्गा अष्टमी तथा महानवमी एक साथ सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को पड़ रही हैं।

उत्तर प्रदेश श्रीराम की भूमि है। उनकी जन्मभूमि अयोध्या इसी प्रदेश में है, और वाराणसी भी, जहाँ गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस की गहरी जड़ें हैं — रामायण की वह अवधी पुनर्रचना, जो उत्तर भारत की अधिकांश रामलीलाओं का आधार है। इसलिए आश्चर्य नहीं कि यहाँ दशहरा सबसे बढ़कर रामलीला का पर्व है: रात-दर-रात मंचों पर, खुले मैदानों में और गलियों में रामायण का मंचन, जिसका समापन विजयादशमी पर रावण दहन से होता है।

दशहरा 2026 की प्रमुख तिथियाँ (भारत)

पर्वतिथि (2026)
नवरात्रि आरंभ (घटस्थापना)रविवार, 11 अक्टूबर
दुर्गा अष्टमी और महानवमी (कन्या पूजन)सोमवार, 19 अक्टूबर
दशहरा / विजयादशमी (रावण दहन)मंगलवार, 20 अक्टूबर
दशमी तिथि20 अक्टूबर 12:50 PM IST से 21 अक्टूबर 2:11 PM IST तक
दीपावलीरविवार, 8 नवंबर

तिथियाँ भारत के लिए द्रिक पंचांग से ली गई हैं। चूँकि 2026 में अष्टमी और नवमी एक ही दिन हैं, इसलिए अधिकांश परिवारों के लिए कन्या पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर को होगा। दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर के कुछ ही बाद आरंभ होकर पूरी दोपहर रहती है, इसीलिए विजयादशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाई जा रही है। उत्तर प्रदेश के शहरों में बंगाली दुर्गा पूजा समितियाँ बंगाली पंजिका का पालन करती हैं, जिसके अनुसार 2026 में कोलकाता में बिजोया दशमी बुधवार, 21 अक्टूबर को है; अपनी स्थानीय समिति की घोषणाएँ देख लें।

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उत्तर प्रदेश के शहरों के लिए विजय मुहूर्त 2026

विजय मुहूर्त विजयादशमी की दोपहर का सबसे शुभ समय है, जिसमें परंपरागत रूप से अपराजिता पूजा, शमी पूजा, शस्त्र पूजा की जाती है तथा नए कार्य, खरीदारी या यात्रा का शुभारंभ किया जाता है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 के समय, स्थानीय समय (IST) में, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना किए गए:

शहरविजय मुहूर्त (20 अक्टूबर 2026)
लखनऊ1:45–2:30 PM
वाराणसी1:37–2:23 PM
अयोध्या1:40–2:25 PM
प्रयागराज1:42–2:27 PM

इन चारों में वाराणसी सबसे पूर्व में स्थित है, इसलिए वहाँ मुहूर्त सबसे पहले आरंभ होता है; पश्चिम में स्थित लखनऊ में सबसे बाद में। चारों मुहूर्त 12:50 PM IST पर दशमी तिथि आरंभ होने के बाद पड़ते हैं। कानपुर, आगरा, मथुरा, गोरखपुर या मेरठ जैसे अन्य नगरों के लिए अपने स्थान के अनुसार बने पंचांग को देखें।

उत्तर प्रदेश की रामलीला विरासत

रामनगर की रामलीला, वाराणसी के पास

वाराणसी के सामने गंगा के पूर्वी तट पर स्थित रामनगर की रामलीला को व्यापक रूप से भारत की सबसे पारंपरिक रामलीलाओं में से एक माना जाता है। यह लंबे समय से काशी नरेश (बनारस के महाराजा) के संरक्षण से जुड़ी रही है, और एक महीने तक चलने वाले ऐसे मंचन के रूप में प्रसिद्ध है जिसमें कथा नगर के आसपास अलग-अलग स्थानों पर आगे बढ़ती है, ताकि दर्शक अयोध्या से वन और वन से लंका तक कथा के साथ-साथ चलते हैं। इसमें रामचरितमानस का पाठ होता है।

2008 में UNESCO ने रामायण के पारंपरिक मंचन, रामलीला, को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया, और इस संदर्भ में रामनगर की रामलीला का उल्लेख सबसे अधिक होता है। आरंभ की सही तिथि, प्रसंगों का क्रम और दर्शकों की व्यवस्था जैसे विवरण रामलीला के अपने पारंपरिक पंचांग के अनुसार चलते हैं और अखिल भारतीय नवरात्रि तिथियों से भिन्न हो सकते हैं, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले वर्तमान जानकारी अवश्य देख लें।

लखनऊ: ऐशबाग और मोहल्लों की रामलीलाएँ

लखनऊ में ऐशबाग की रामलीला को व्यापक रूप से शहर की सबसे पुरानी रामलीलाओं में से एक बताया जाता है, और कई अन्य मोहल्ले व आवासीय क्षेत्र अपनी-अपनी रामलीला का मंचन करते हैं तथा दशहरे की शाम पुतले जलाते हैं। लखनऊ का बंगाली समुदाय दुर्गा पूजा भी मनाता है, इसलिए पर्व के दौरान शहर में दोनों परंपराएँ साथ-साथ दिखाई देती हैं। कार्यक्रम हर वर्ष प्रत्येक समिति द्वारा तय किए जाते हैं; 2026 के लिए स्थानीय घोषणाएँ देखें।

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अयोध्या

अनेक भक्तों के लिए श्रीराम की नगरी अयोध्या में नवरात्रि या दशहरा बिताना अपने आप में एक तीर्थयात्रा है। राम जन्मभूमि मंदिर, जिसकी जनवरी 2024 में हुई प्राण-प्रतिष्ठा में दुनिया भर से भक्त आए थे, तथा हनुमानगढ़ी और सरयू के घाटों जैसे प्राचीन स्थल, पूरे उत्सव काल में बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं। दशहरे के आसपास अयोध्या में भी रामलीला का मंचन होता है; कार्यक्रम और कोई भी आधिकारिक व्यवस्था हर वर्ष घोषित की जाती है, इसलिए तिथि के निकट इन्हें देख लें। भीड़ बहुत अधिक हो सकती है, इसलिए पर्याप्त समय लेकर चलें और वर्तमान दर्शन व्यवस्था के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

प्रयागराज की शोभायात्राएँ

प्रयागराज में दशहरा शोभायात्राओं की लंबी परंपरा है, जिनमें स्थानीय समितियों द्वारा आयोजित सजी हुई झाँकियाँ और रोशनी से जगमगाती प्रस्तुतियाँ उत्सव के दिनों में शहर के विभिन्न हिस्सों से होकर निकलती हैं। मार्ग, तिथियाँ और समय हर वर्ष स्थानीय स्तर पर तय होते हैं, और उसी के अनुसार यातायात व्यवस्था बदलती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की घोषणाओं का पालन करें।

उत्तर प्रदेश के देवी धामों में नवरात्रि

रामलीला के साथ-साथ, उत्तर प्रदेश में नवरात्रि उपवास और देवी उपासना का समय है। अनेक परिवार नौ दिन का व्रत रखते हैं और कन्या पूजन के साथ उसका समापन करते हैं। मिर्ज़ापुर के पास विंध्याचल स्थित विंध्यवासिनी मंदिर प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध शक्ति धामों में से एक है और नवरात्रि में यहाँ विशेष भीड़ रहती है। वाराणसी में दुर्गा कुंड मंदिर एक अत्यंत प्रिय देवी धाम है, और शहर का बंगाली समुदाय अपने पंडालों में दुर्गा पूजा मनाता है। वाराणसी आने वाले तीर्थयात्री प्रायः इनके साथ काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन भी करते हैं। उत्सव काल में मंदिरों में बहुत भीड़ रहती है, इसलिए वर्तमान समय के लिए प्रत्येक मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

विजयादशमी पर क्या करें

  • अपराजिता और शमी पूजा: दोपहर में, संभव हो तो विजय मुहूर्त के दौरान, विजय की देवी और शमी वृक्ष की पूजा करें।
  • शस्त्र पूजा: औज़ारों, वाहनों, बही-खातों और लैपटॉप को साफ़ करके उनकी पूजा करें।
  • नीलकंठ दर्शन: उत्तर प्रदेश के कई घरों में दशहरे पर नीलकंठ पक्षी (Indian roller) के दर्शन शुभ माने जाते हैं।
  • रावण दहन: सूर्यास्त के बाद सामुदायिक पुतला दहन में शामिल हों, जिससे अधिकांश नगरों में रामलीला का समापन होता है।
  • आशीर्वाद लें: बड़ों के चरण स्पर्श करें और पड़ोसियों के साथ मिठाई बाँटें।

दशहरे के महत्व और पूरी पूजा विधि के लिए देखें हमारी दशहरा / विजयादशमी 2026 मुख्य मार्गदर्शिका.

व्यावहारिक सुझाव

  • रामलीला मैदानों और रावण दहन स्थलों पर भारी भीड़ होती है। बच्चों को पास रखें, मिलने का एक स्थान तय कर लें और कम से कम कीमती सामान साथ रखें।
  • पुतलों से पर्याप्त दूरी पर खड़े रहें, क्योंकि उनमें अक्सर पटाखे भरे होते हैं, और आयोजकों व पुलिस के निर्देशों का पालन करें।
  • बड़े आयोजनों के आसपास लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में यातायात परिवर्तन आम हैं। स्थानीय पुलिस की सूचनाओं पर ध्यान दें।

विदेश में बसे उत्तर प्रदेश के परिवारों के लिए

  • अपने शहर के लिए गणना किए गए पंचांग का उपयोग करें। लखनऊ या वाराणसी के विजय मुहूर्त को अपने स्थानीय टाइम ज़ोन में न बदलें।
  • मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 अधिकांश देशों में कार्यदिवस है। कई मंदिर और सामुदायिक संगठन अपनी रामलीला या रावण दहन निकटतम सप्ताहांत पर आयोजित करते हैं, इसलिए उनकी घोषणाएँ देख लें।

हमारी NRI परिवारों के लिए नवरात्रि 2026 मार्गदर्शिका में विदेश में अपनाए जा सकने वाले उपवास, कन्या पूजन और पूजा के चरण बताए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में दशहरा 2026 कब है?

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026। भारत के लिए द्रिक पंचांग के अनुसार नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर से आरंभ होगी, और दुर्गा अष्टमी तथा महानवमी दोनों सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को हैं।

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दशहरा 2026 पर लखनऊ में विजय मुहूर्त क्या है?

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को स्थानीय समय (IST) अनुसार 1:45–2:30 PM, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना की गई। वाराणसी के लिए यह 1:37–2:23 PM, अयोध्या के लिए 1:40–2:25 PM और प्रयागराज के लिए 1:42–2:27 PM है।

रामनगर की रामलीला क्या है?

यह वाराणसी से गंगा के उस पार रामनगर में मंचित होने वाली एक पारंपरिक रामलीला है, जो लगभग एक महीने तक चलने के लिए प्रसिद्ध है, और इसके प्रसंग नगर के भीतर व आसपास अलग-अलग स्थानों पर अभिनीत किए जाते हैं। रामायण के मंचन की रामलीला परंपरा को UNESCO ने 2008 में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया था। इसका कार्यक्रम अपने पारंपरिक पंचांग के अनुसार चलता है, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले वर्तमान जानकारी अवश्य देख लें।

लखनऊ की सबसे पुरानी रामलीला कौन-सी है?

ऐशबाग की रामलीला को व्यापक रूप से लखनऊ की सबसे पुरानी रामलीलाओं में से एक माना जाता है। हमने इसकी स्थापना की तिथि नहीं दी है क्योंकि विवरण अलग-अलग हैं; इसके इतिहास और 2026 के कार्यक्रम के लिए आयोजन समिति ही सबसे अच्छा स्रोत है।

क्या 2026 में अष्टमी और नवमी एक ही दिन हैं?

हाँ। भारत के लिए द्रिक पंचांग के अनुसार दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को पड़ रही हैं, इसलिए उत्तर प्रदेश के जो परिवार इनमें से किसी भी दिन कन्या पूजन करते हैं, वे उसी सोमवार को करेंगे।

क्या मैं USA या UK में वाराणसी के विजय मुहूर्त का उपयोग कर सकता हूँ?

नहीं। मुहूर्त का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए इसे किसी दूसरे टाइम ज़ोन में बदला नहीं जा सकता। अपने शहर के पंचांग का उपयोग करें या अपने स्थानीय मंदिर के कैलेंडर का पालन करें।

संपादकीय टिप्पणी

संपादकीय टिप्पणी (5 अक्टूबर 2026): पिछला संस्करण खो जाने के बाद यह पृष्ठ अपने मूल पते पर पुनः स्थापित किया गया है। पर्वों की तिथियाँ भारत के लिए द्रिक पंचांग से ली गई हैं, और लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या व प्रयागराज के विजय मुहूर्त का समय द्रिक पंचांग पद्धति से गणना किया गया है। हमने रामनगर और ऐशबाग की रामलीलाओं तथा प्रयागराज की शोभायात्राओं का केवल सामान्य वर्णन किया है; हमने स्थापना तिथियाँ, कार्यक्रम या स्थान नहीं दिए हैं क्योंकि ये विवरण स्रोत के अनुसार भिन्न होते हैं और हर वर्ष आयोजकों द्वारा तय किए जाते हैं। आधिकारिक व आयोजकों की घोषणाएँ, तथा वर्तमान समय के लिए प्रत्येक मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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