संक्षिप्त उत्तर: बिहार में दशहरा (विजयादशमी) 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को है। विजय मुहूर्त: पटना दोपहर 1:28 से 2:14 PM, गया 1:29 से 2:15 PM, दरभंगा 1:25 से 2:11 PM, मुज़फ़्फ़रपुर 1:27 से 2:13 PM (स्थानीय समय, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना)। नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होती है, और अष्टमी व नवमी एक साथ सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को पड़ रही हैं।

बिहार में दशहरा का मतलब है दुर्गा पूजा। दस दिनों तक राज्य भर के कस्बों और गाँवों में देवी के पंडाल सजते हैं, पटना की सड़कें देर रात तक दर्शनार्थियों से भरी रहती हैं, और घरों में कलश के साथ नवरात्रि का व्रत रखा जाता है। मिथिला में देवी पूजा की पुरानी परंपराएँ जयंती के अंकुरों और पारिवारिक अनुष्ठानों के साथ निभाई जाती हैं, और विजयादशमी की शाम पटना सहित कई शहरों में रावण के पुतले जलाए जाते हैं। इस गाइड में 2026 की तिथियाँ, चार शहरों के विजय मुहूर्त की तालिका, जानने योग्य परंपराएँ और विदेश में रहने वाले बिहारी परिवारों के लिए सुझाव दिए गए हैं।

दशहरा 2026 की मुख्य तिथियाँ (भारत)

पर्वतिथि (2026)
नवरात्रि आरंभ (कलश स्थापना)रविवार, 11 अक्टूबर
दुर्गा अष्टमी और महानवमी (कन्या पूजन, हवन)सोमवार, 19 अक्टूबर
दशहरा / विजयादशमी (रावण दहन)मंगलवार, 20 अक्टूबर
दशमी तिथि20 अक्टूबर 12:50 PM IST से 21 अक्टूबर 2:11 PM IST तक
बिजया दशमी (बंगाल परंपरा का पंचांग)बुधवार, 21 अक्टूबर
दीवालीरविवार, 8 नवंबर

तिथियाँ भारत के लिए द्रिक पंचांग से ली गई हैं। चूँकि 2026 में अष्टमी और नवमी एक ही दिन हैं, इसलिए अष्टमी का व्रत, कन्या पूजन और नवमी का हवन सभी सोमवार, 19 अक्टूबर के आसपास होंगे। बिहार के कई परिवार और पूजा समितियाँ मिथिला या अन्य स्थानीय पंचांग मानते हैं, और बंगाली पूजाएँ बंगाली पंजिका का पालन करती हैं, जिसके अनुसार बिजया दशमी बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को है। पंडालों के पट खुलने, निशा पूजा, संधि पूजा और विसर्जन के लिए अपने पुरोहित या पूजा समिति का पालन करें।

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बिहार के शहरों के लिए विजय मुहूर्त 2026

विजय मुहूर्त विजयादशमी की दोपहर का सबसे शुभ समय है, जिसमें परंपरागत रूप से अपराजिता पूजा, शमी पूजा, शस्त्र पूजा की जाती है और नया काम शुरू करना, वाहन खरीदना या यात्रा पर निकलना शुभ माना जाता है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 का समय, स्थानीय समय में, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना किया गया:

शहरविजय मुहूर्त (20 अक्टूबर 2026)
पटना1:28–2:14 PM
गया1:29–2:15 PM
दरभंगा1:25–2:11 PM
मुज़फ़्फ़रपुर1:27–2:13 PM

चारों मुहूर्त एक-दूसरे से कुछ ही मिनटों के अंतर पर हैं, और उत्तर-पूर्व में स्थित दरभंगा में यह थोड़ा पहले है। ये सभी 12:50 PM IST पर दशमी तिथि शुरू होने के बाद पड़ते हैं। भागलपुर, पूर्णिया या बेगूसराय जैसे अन्य शहरों के लिए उसी शहर का पंचांग देखें।

बिहार कैसे मनाता है

पटना के दुर्गा पूजा पंडाल

पटना में दुर्गा पूजा शरद ऋतु का सबसे बड़ा सार्वजनिक उत्सव है। शहर भर की पूजा समितियाँ पारंपरिक से लेकर भव्य थीम वाले पंडाल बनाती हैं, जिनमें महिषासुर का वध करती माँ दुर्गा की प्रतिमा, साथ में लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय विराजते हैं। कई पूजाओं में सप्तमी के आसपास पंडाल के पट या प्रतिमा का मुख भक्तों के लिए खोला जाता है, जिसके बाद हर शाम भीड़ बढ़ती जाती है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को परिवार देर रात तक पंडाल घूमते हैं और रास्ते में मेलों व खाने के स्टॉल पर रुकते हैं। शहर की कुछ पूजाएँ, ख़ासकर पुराने बंगाली मोहल्लों की, कई दशकों से होती आ रही हैं। समितियाँ और कार्यक्रम हर साल बदलते हैं, इसलिए स्थानीय घोषणाएँ देखें।

घर पर नवरात्रि: कलश और व्रत

बिहारी घरों में नवरात्रि प्रतिपदा को कलश स्थापना के साथ शुरू होती है। मिट्टी की वेदी पर कलश स्थापित किया जाता है, उसके चारों ओर जौ बोया जाता है, और अक्सर नौ दिनों तक अखंड दीया जलाया जाता है। परिवार के कई सदस्य व्रत रखते हैं, कुछ पूरे नौ दिन और कुछ केवल पहले और आख़िरी दिन, और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन में छोटी कन्याओं की देवी के रूप में पूजा की जाती है और उन्हें पूरी, हलवा और चना खिलाया जाता है, और हवन के साथ व्रत पूरा होता है।

मिथिला की परंपराएँ

उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र में, दरभंगा, मधुबनी और आसपास के ज़िलों में, दुर्गा पूजा शाक्त उपासना की गहरी परंपरा में रची-बसी है। कई परिवार कलश के पास जौ बोते हैं; इसके अंकुर, जिन्हें जयंती कहा जाता है, देवी को अर्पित किए जाते हैं और विजयादशमी पर परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद के रूप में दिए जाते हैं, अक्सर सिर पर या कानों के पीछे रखे जाते हैं। घर और पूजा में महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले मैथिली भक्ति गीत इस पर्व के माहौल का हिस्सा हैं, और कई पूजाओं में सप्तमी या अष्टमी की रात निशा पूजा होती है। रीति-रिवाज़ गाँव-गाँव और परिवार-परिवार में अलग होते हैं, और बड़े-बुज़ुर्ग व कुल पुरोहित ही इनके सबसे अच्छे मार्गदर्शक हैं।

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गांधी मैदान और अन्य जगहों पर रावण दहन

दशहरे की शाम पटना का सबसे बड़ा रावण दहन आमतौर पर गांधी मैदान में होता है, जहाँ विशाल भीड़ के सामने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के ऊँचे पुतले जलाए जाते हैं, अक्सर अंतिम युद्ध की रामलीला के मंचन के बाद। पटना के मोहल्लों में और राज्य भर के शहरों में छोटे रावण दहन कार्यक्रम होते हैं। समय, प्रवेश और यातायात व्यवस्था की घोषणा हर साल आयोजक और ज़िला प्रशासन करते हैं, इसलिए जाने से पहले आधिकारिक घोषणाएँ देखें।

विसर्जन

विजयादशमी के बाद प्रतिमाओं को संगीत, ढोल और नाचते भक्तों के साथ शोभायात्रा में विसर्जन के लिए ले जाया जाता है। दिन, मार्ग और समय हर समिति और स्थानीय प्रशासन तय करते हैं, और हाल के वर्षों में कुछ जगहों पर अधिकारियों ने निर्धारित तालाबों या कृत्रिम कुंडों में विसर्जन के निर्देश दिए हैं। मार्ग और समय के बारे में आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।

व्यावहारिक सुझाव

  • भीड़: सप्तमी से दशमी की शामों में पंडाल वाले इलाक़ों और रावण दहन के मैदानों में बहुत भारी भीड़ होती है। बच्चों को पास रखें, मिलने की एक जगह तय कर लें और कम से कम क़ीमती सामान साथ रखें।
  • सुरक्षा: जलते पुतलों से काफ़ी दूर खड़े रहें और आयोजकों व पुलिस के निर्देशों का पालन करें।
  • यातायात: बड़े पंडालों और गांधी मैदान के आसपास सड़क बंद होने के बारे में ज़िला प्रशासन और ट्रैफ़िक पुलिस की सूचनाएँ देखें।
  • छुट्टियाँ: दुर्गा पूजा की छुट्टियों की तिथियों के लिए बिहार सरकार की 2026 की आधिकारिक अवकाश सूची देखें।

विदेश में रहने वाले बिहारी परिवारों के लिए

  • अपने शहर के लिए गणना किया गया पंचांग इस्तेमाल करें। पटना के विजय मुहूर्त को अपने स्थानीय टाइम ज़ोन में न बदलें।
  • मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 ज़्यादातर देशों में कामकाजी दिन है। कई मंदिर और बिहारी व बंगाली संगठन नज़दीकी सप्ताहांत पर दुर्गा पूजा या दशहरा कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
  • रविवार, 11 अक्टूबर को घर पर कलश के पास जौ बोएँ; नौ दिनों में जयंती के अंकुरों को बढ़ते देखना बच्चों को बहुत अच्छा लगता है।
  • बिहार में परिवार को वीडियो कॉल करें ताकि बच्चे पंडाल और रावण दहन देख सकें।

दशहरे के महत्व और पूरी पूजा विधि के लिए देखें हमारी दशहरा / विजयादशमी 2026 मुख्य गाइड.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में दशहरा 2026 कब है?

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026। भारत के लिए द्रिक पंचांग के अनुसार, नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ शुरू होती है, और दुर्गा अष्टमी तथा महानवमी दोनों सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को हैं।

दशहरा 2026 पर पटना में विजय मुहूर्त क्या है?

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को पटना में स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1:28 से 2:14 PM, द्रिक पंचांग पद्धति से गणना की गई। गया में 1:29 से 2:15 PM, दरभंगा में 1:25 से 2:11 PM और मुज़फ़्फ़रपुर में 1:27 से 2:13 PM है।

पटना में रावण दहन कहाँ होता है?

पटना का सबसे बड़ा रावण दहन आमतौर पर दशहरे की शाम गांधी मैदान में होता है, और कई अन्य मैदान व मोहल्ले अपने-अपने आयोजन करते हैं। समय, प्रवेश और यातायात व्यवस्था की घोषणा हर साल आयोजक और ज़िला प्रशासन करते हैं, इसलिए 2026 के लिए आधिकारिक घोषणाएँ देखें।

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2026 में बिहार में दुर्गा पूजा का विसर्जन कब है?

बिहार की अधिकांश पूजाएँ विजयादशमी के दिन या उसके बाद विसर्जन करती हैं, लेकिन सटीक दिन और समय हर पूजा समिति और स्थानीय प्रशासन तय करते हैं। बंगाली पंजिका मानने वाली समितियाँ बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को बिजया दशमी मनाती हैं। अपनी समिति का कार्यक्रम देखें।

मिथिला की दुर्गा पूजा में जयंती क्या है?

मिथिला के कई घरों में नवरात्रि की शुरुआत में कलश के पास मिट्टी में जौ बोया जाता है। इसके हरे अंकुर, जिन्हें जयंती कहते हैं, देवी को अर्पित किए जाते हैं और विजयादशमी पर आशीर्वाद के रूप में दिए जाते हैं, अक्सर परिवार के सदस्यों के सिर पर या कानों के पीछे रखे जाते हैं। रीति-रिवाज़ हर परिवार में अलग होते हैं।

क्या मैं USA या UK में पटना का मुहूर्त इस्तेमाल कर सकता हूँ?

नहीं। मुहूर्त का समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए उसे किसी दूसरे टाइम ज़ोन में बदला नहीं जा सकता। अपने शहर का पंचांग इस्तेमाल करें या अपने स्थानीय मंदिर का कैलेंडर मानें।

संपादक की टिप्पणी

संपादक की टिप्पणी (5 अक्टूबर 2026): पिछला संस्करण खो जाने के बाद यह पेज अपने मूल पते पर फिर से प्रकाशित किया गया है। तिथियाँ भारत के लिए द्रिक पंचांग से ली गई हैं, और विजय मुहूर्त का समय हर शहर के लिए द्रिक पंचांग पद्धति से गणना किया गया है। हमने पूजा समितियों के नाम नहीं दिए हैं और न ही रावण दहन का समय, विसर्जन मार्ग या छुट्टियों की तिथियाँ दी हैं, क्योंकि ये हर साल बदलते हैं; कृपया स्थानीय घोषणाएँ और आधिकारिक स्रोत देखें। मिथिला के रीति-रिवाज़ परिवारों और गाँवों में अलग-अलग होते हैं, इसलिए अपने कुल पुरोहित या बड़ों का मार्गदर्शन लें।

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