हरियाली अमावस्या 2026: तिथि, तर्पण व वृक्षारोपण
हरियाली अमावस्या 2026 (बुध, 12 अगस्त) — वृक्षारोपण की अमावस्या, पितृ तर्पण, दान, और 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण (भारत में अदृश्य)।

हरियाली अमावस्या 2026 (बुध, 12 अगस्त) — वृक्षारोपण की अमावस्या, पितृ तर्पण, दान, और 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण (भारत में अदृश्य)।
संक्षिप्त उत्तर: हरियाली अमावस्या 2026 बुधवार, 12 अगस्त को है। तेलुगु अमांत कैलेंडर में यह आषाढ़ अमावस्या है — श्रावण मास के 13 अगस्त को आरंभ होने से एक दिन पहले। यह वृक्षारोपण, पितृ तर्पण व दान का दिन है। 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता।
हरियाली अमावस्या वह "हरित नव-चंद्र" है जो वर्षा के मध्य का सूत्रपात करती है। तेलुगु कैलेंडर में यह आषाढ़ अमावस्या है, श्रावण मास के 13 अगस्त को आरंभ होने से एक दिन पहले।
हरियाली अमावस्या 2026 — तिथि व मुख्य तथ्य
- तिथि: बुधवार, 12 अगस्त 2026
- पर्व: आषाढ़ अमावस्या (अमांत) = श्रावण अमावस्या (पूर्णिमांत, उत्तर)
- किसलिए: वृक्षारोपण, पितृ तर्पण, दान
- क्षेत्रीय नाम: हरियाली (उत्तर), चितलागी (ओडिशा), गटारी (महाराष्ट्र), आदि अमावसै (तमिलनाडु)
- नोट: इसी दिन सूर्य ग्रहण — भारत में अदृश्य
वृक्षारोपण परंपरा
इस अमावस्या की परिभाषित विशेषता — व नाम का कारण — वर्षा में कोमल मिट्टी में वृक्ष लगाना है। परिवार संकल्प के साथ लगाते हैं, और परंपरा में हर वृक्ष का पुण्य है: पीपल-बरगद दीर्घायु व आश्रय हेतु, नीम स्वास्थ्य हेतु, तुलसी-बिल्व भक्ति हेतु, आँवला कल्याण हेतु। श्रद्धा से किया गया यह सच्चा पर्यावरण-धर्म है।
पितृ तर्पण — पूर्वजों का स्मरण
अमावस्या पितरों के स्मरण की सबसे पावन बेला है। तर्पण दक्षिण की ओर जल, काले तिल व कुश के साथ, पूर्वजों की शांति की प्रार्थना के साथ किया जाता है।
- स्नान के बाद दक्षिण की ओर जल, काले तिल व कुश लेकर बैठें।
- नाम व गोत्र (जहाँ ज्ञात) से पूर्वजों का स्मरण कर संकल्प लें।
- तिल सहित जल धीरे-धीरे, पितृ प्रार्थना के साथ, तीन बार अर्पित करें।
- कौवे, गाय या जरूरतमंद को भोजन दें, और दान (अन्नदान) करें।
- यदि स्वयं न कर सकें, तो श्रद्धापूर्वक जल अर्पण व पूर्वजों के नाम दान स्वीकार्य है।
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण
12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण है — आइसलैंड व उत्तरी स्पेन में पूर्ण — पर यह भारत में दिखाई नहीं देता, अतः परंपरा अनुसार वहाँ सूतक नहीं लगता। जहाँ दृश्य है, परिवार ग्रहण काल में भोजन से बचते व बाद में स्नान करते हैं। ये परंपरागत आचरण हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। देखें सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 गाइड।
इस अमावस्या के क्षेत्रीय नाम
| क्षेत्र | नाम |
|---|---|
| उत्तर भारत | हरियाली अमावस्या |
| ओडिशा | चितलागी अमावस्या |
| महाराष्ट्र | गटारी अमावस्या |
| तमिलनाडु | आदि अमावसै |
| तेलुगु (अमांत) | आषाढ़ अमावस्या |
अमावस्या नियम व दान
अमावस्या पितृ कर्म, दान व — विशेषकर हरियाली अमावस्या पर — वृक्षारोपण हेतु आदर्श मानी जाती है, न कि बड़े नए आरंभ हेतु। अन्नदान विशेष पुण्यकारी है। यह पृष्ठ परंपरा बताता है, अमावस्या, आत्माओं या "नकारात्मक ऊर्जा" का भय नहीं फैलाता।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाली अमावस्या 2026 कब है?
हरियाली अमावस्या 2026 बुधवार, 12 अगस्त को है। तेलुगु अमांत कैलेंडर में यह आषाढ़ अमावस्या है — श्रावण मास के 13 अगस्त को आरंभ होने से एक दिन पहले।
हरियाली अमावस्या पर क्या करते हैं?
प्रमुख आचरण हैं वर्षा में कोमल मिट्टी में वृक्ष लगाना, पूर्वजों को पितृ तर्पण, और अन्नदान जैसे दान।
पितृ तर्पण कैसे करें?
दक्षिण की ओर, काले तिल व कुश सहित जल तीन बार पूर्वजों की प्रार्थना के साथ अर्पित करें, फिर कौवे, गाय या जरूरतमंद को भोजन दें।
क्या 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत को प्रभावित करता है?
नहीं। 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, अतः परंपरा अनुसार वहाँ सूतक नहीं लगता। यह आइसलैंड व उत्तरी स्पेन में पूर्ण है।
क्या हरियाली अमावस्या और आषाढ़ अमावस्या एक ही हैं?
हाँ। उत्तर भारत जिसे हरियाली (श्रावण) अमावस्या कहता है, वह तेलुगु अमांत में आषाढ़ अमावस्या है — एक ही दिन, 12 अगस्त 2026।
हरियाली अमावस्या पर कौन-से वृक्ष लगाए जाते हैं?
परंपरागत रूप से पीपल, बरगद, नीम, तुलसी, बिल्व व आँवला — प्रत्येक का परंपरा में पुण्य है, संकल्प के साथ कोमल वर्षा-मिट्टी में लगाए जाते हैं।




