गुडी पड़वा — विक्रम संवत् नववर्ष २०८३

Gudi Padwa · Vikram Samvat Navvarsh 2083 | Chaitra Shukla Pratipada [image: 🌸] गुरुवार, १९ मार्च २०२६ — चैत्र शुक्ल प्रतिपदाHinduTone.
Gudi Padwa · Vikram Samvat Navvarsh 2083 | Chaitra Shukla Pratipada
[image: 🌸] गुरुवार, १९ मार्च २०२६ — चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
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✦ विक्रम संवत् २०८३ मंगलमय हो!
हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ! चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के सभी बंधुओं को गुडी पड़वा एवं विक्रम संवत् नववर्ष की अनेकानेक बधाई।
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[image: 📅] गुडी पड़वा २०२६ — तिथि एवं मुहूर्त
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[image: 🗺️] इन राज्यों में मनाया जाता है नव संवत्सर
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[image: 🪔] गुडी पड़वा क्या है?
गुडी पड़वा हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाने वाला नववर्ष का पर्व है। यह दिन विक्रम संवत् के नए वर्ष के आगमन का प्रतीक है।
- [image: 📅] तिथि २०२६: गुरुवार, १९ मार्च २०२६
- [image: 🗓] संवत्: विक्रम संवत् २०८३ (संवत्सर: सिद्धार्थी)
- [image: 🪐] वर्ष स्वामी: बृहस्पति — शुभ, ज्ञान और समृद्धि का ग्रह
- [image: 🌍] मान्यता: उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में व्यापक
- [image: 🙏] महत्त्व: ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि रचना का प्रथम दिन; भगवान राम के अयोध्या आगमन का उत्सव; सत्य युग का आरंभ
[image: 🌺] परंपरा और उत्सव
[image: 🏛] उत्तर प्रदेश
काशी, प्रयागराज और अयोध्या में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर विशेष पूजा-अर्चना होती है। गंगा स्नान का विशेष महत्त्व है। पंचांग श्रवण की परंपरा से नया वर्ष आरंभ होता है। मथुरा-वृंदावन में ब्रज होरी और चैती के गीत गाए जाते हैं। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है।
[image: 🌿] मध्य प्रदेश
उज्जैन में महाकाल की विशेष भस्म आरती होती है। विक्रम संवत् के प्रवर्तक सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन में यह पर्व विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। इंदौर और भोपाल में विक्रमोत्सव का भव्य आयोजन होता है।
[image: 🏜] राजस्थान
जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में नवरात्रि कलश स्थापना के साथ नव संवत्सर का आरंभ होता है। घटस्थापना मुहूर्त प्रातः ६:५६ से ७:४९ बजे के बीच है। राजपूत परंपराओं के अनुसार थेवर पूजा और ध्वजारोहण किए जाते हैं।
[image: 🎋] बिहार
पटना, गया और बोधगया में नव संवत्सर पूजन होता है। मिथिलांचल में चैती लोकगीत की मधुर परंपरा है। मैथिल ब्राह्मण समुदाय में इस दिन विशेष अनुष्ठान होते हैं। तेल-उबटन और पवित्र स्नान से नए वर्ष का स्वागत किया जाता है।
[image: 🌸] नव संवत्सर २०८३ — विशेष महत्त्व
संवत्सर: सिद्धार्थी — यह नाम सफलता, लक्ष्य-प्राप्ति और आत्मज्ञान का प्रतीक है।
वर्ष स्वामी — बृहस्पति: बृहस्पति के स्वामित्व में आने वाला वर्ष ज्ञान, धर्म, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का सूचक माना जाता है। यह वर्ष शिक्षा, धार्मिक कार्यों और परिवार के लिए शुभ है।
१९ मार्च २०२६ को एक साथ:
- गुडी पड़वा (महाराष्ट्र)
- विक्रम संवत् नववर्ष / हिन्दू नव वर्ष (उत्तर भारत)
- उगादि (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक)
- चैत्र नवरात्रि आरंभ (सम्पूर्ण भारत)
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[image: 🌸] नव संवत्सर का संदेश
नया संवत्सर नई आशाएँ लाए, सिद्धार्थी वर्ष सुख-समृद्धि छाए। बृहस्पति का आशीर्वाद बरसाए, हर घर में खुशियाँ और मंगल आए। [image: 🌺]
विक्रम संवत् २०८३ — गुरुवार, १९ मार्च २०२६ — HinduTone.com परिवार की ओर से [image: 🙏]
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- [image: 🪔] चैत्र नवरात्रि आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुडी पड़वा २०२६ कब है?
गुडी पड़वा २०२६ गुरुवार, १९ मार्च २०२६ को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर है। इसी दिन विक्रम संवत् २०८३ का नववर्ष आरंभ होता है।
विक्रम संवत् २०८३ के संवत्सर का नाम और वर्ष स्वामी क्या है?
विक्रम संवत् २०८३ का संवत्सर सिद्धार्थी है, जो सफलता, लक्ष्य-प्राप्ति और आत्मज्ञान का प्रतीक है। वर्ष स्वामी बृहस्पति हैं, जिन्हें ज्ञान, धर्म और समृद्धि का सूचक माना जाता है।
गुडी पड़वा २०२६ पर घटस्थापना मुहूर्त क्या है?
घटस्थापना मुहूर्त प्रातः ६:५६ से ७:४९ बजे के बीच है। राजस्थान में इसी नवरात्रि कलश स्थापना के साथ नव संवत्सर का आरंभ होता है।
गुडी पड़वा और हिन्दू नववर्ष का धार्मिक महत्त्व क्या है?
जैसा कि प्रचलित है, यह ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि रचना का प्रथम दिन है। इसे भगवान राम के अयोध्या आगमन के उत्सव और सत्य युग के आरंभ से भी जोड़ा जाता है।
१९ मार्च २०२६ को कौन-कौन से पर्व एक साथ मनाए जाएंगे?
१९ मार्च २०२६ को महाराष्ट्र में गुडी पड़वा, उत्तर भारत में विक्रम संवत् नववर्ष, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादि तथा सम्पूर्ण भारत में चैत्र नवरात्रि का आरंभ एक साथ है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में नव संवत्सर कैसे मनाया जाता है?
उत्तर प्रदेश में काशी, प्रयागराज और अयोध्या में विशेष पूजा, गंगा स्नान और पंचांग श्रवण की परंपरा है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल की विशेष भस्म आरती होती है और इंदौर-भोपाल में विक्रमोत्सव का आयोजन होता है।
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