गुडी पड़वा — विक्रम संवत् नववर्ष २०८३

Gudi Padwa · Vikram Samvat Navvarsh 2083 | Chaitra Shukla Pratipada
गुरुवार, १९ मार्च २०२६ — चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
HinduTone.com की ओर से सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ
✦ विक्रम संवत् २०८३ मंगलमय हो!
हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ! चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के सभी बंधुओं को गुडी पड़वा एवं विक्रम संवत् नववर्ष की अनेकानेक बधाई।
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गुडी पड़वा २०२६ — तिथि एवं मुहूर्त
| विवरण | समय / जानकारी |
|---|---|
तिथि | गुरुवार, १९ मार्च २०२६ |
तिथि आरंभ | १९ मार्च २०२६ — रात्रि २:२२ बजे |
तिथि समाप्त | २० मार्च २०२६ — रात्रि १२:२२ बजे |
घटस्थापना मुहूर्त | प्रातः ६:५६ — ७:४९ बजे |
अभिजित मुहूर्त | दोपहर १२:३५ — १:२३ बजे |
वर्ष स्वामी (ग्रह) | बृहस्पति (Jupiter) |
संवत्सर नाम | सिद्धार्थी |
शालिवाहन शक | १९४८ |
साथ में प्रारंभ | चैत्र नवरात्रि — १९ मार्च से |
इन राज्यों में मनाया जाता है नव संवत्सर
| राज्य | मुख्य केंद्र | विशेषता |
|---|---|---|
उत्तर प्रदेश | काशी · अयोध्या · मथुरा | गंगा स्नान, नव संवत्सर पूजा, पंचांग श्रवण |
मध्य प्रदेश | उज्जैन · इंदौर · भोपाल | महाकाल भस्म आरती, विक्रमोत्सव |
राजस्थान | जयपुर · जोधपुर · उदयपुर | नवरात्रि कलश स्थापना, राजपूत परंपरा |
बिहार | पटना · गया · मिथिलांचल | चैती लोकगीत, नव संवत्सर पूजन |
गुडी पड़वा क्या है?
गुडी पड़वा हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाने वाला नववर्ष का पर्व है। यह दिन विक्रम संवत् के नए वर्ष के आगमन का प्रतीक है।
तिथि २०२६: गुरुवार, १९ मार्च २०२६
संवत्: विक्रम संवत् २०८३ (संवत्सर: सिद्धार्थी)
वर्ष स्वामी: बृहस्पति — शुभ, ज्ञान और समृद्धि का ग्रह
मान्यता: उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में व्यापक
महत्त्व: ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि रचना का प्रथम दिन; भगवान राम के अयोध्या आगमन का उत्सव; सत्य युग का आरंभ
परंपरा और उत्सव
उत्तर प्रदेश
काशी, प्रयागराज और अयोध्या में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर विशेष पूजा-अर्चना होती है। गंगा स्नान का विशेष महत्त्व है। पंचांग श्रवण की परंपरा से नया वर्ष आरंभ होता है। मथुरा-वृंदावन में ब्रज होरी और चैती के गीत गाए जाते हैं। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है।
मध्य प्रदेश
उज्जैन में महाकाल की विशेष भस्म आरती होती है। विक्रम संवत् के प्रवर्तक सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन में यह पर्व विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। इंदौर और भोपाल में विक्रमोत्सव का भव्य आयोजन होता है।
राजस्थान
जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में नवरात्रि कलश स्थापना के साथ नव संवत्सर का आरंभ होता है। घटस्थापना मुहूर्त प्रातः ६:५६ से ७:४९ बजे के बीच है। राजपूत परंपराओं के अनुसार थेवर पूजा और ध्वजारोहण किए जाते हैं।
बिहार
पटना, गया और बोधगया में नव संवत्सर पूजन होता है। मिथिलांचल में चैती लोकगीत की मधुर परंपरा है। मैथिल ब्राह्मण समुदाय में इस दिन विशेष अनुष्ठान होते हैं। तेल-उबटन और पवित्र स्नान से नए वर्ष का स्वागत किया जाता है।
नव संवत्सर २०८३ — विशेष महत्त्व
संवत्सर: सिद्धार्थी — यह नाम सफलता, लक्ष्य-प्राप्ति और आत्मज्ञान का प्रतीक है।
वर्ष स्वामी — बृहस्पति: बृहस्पति के स्वामित्व में आने वाला वर्ष ज्ञान, धर्म, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का सूचक माना जाता है। यह वर्ष शिक्षा, धार्मिक कार्यों और परिवार के लिए शुभ है।
१९ मार्च २०२६ को एक साथ:
- गुडी पड़वा (महाराष्ट्र)
- विक्रम संवत् नववर्ष / हिन्दू नव वर्ष (उत्तर भारत)
- उगादि (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक)
- चैत्र नवरात्रि आरंभ (सम्पूर्ण भारत)
नववर्ष की विशेष रिंगटोन — HinduTone.com
| # | रिंगटोन नाम | श्रेणी | अवधि |
|---|---|---|---|
![]() | गुडी पड़वा मंगलगान | उत्सव | ४५ सेकंड |
![]() | विक्रम संवत् २०८३ स्वागत | भजन | ४० सेकंड |
![]() | शंख नाद नव संवत्सर | पारंपरिक | ३० सेकंड |
![]() | माँ दुर्गा चैती आरती | चैत्र नवरात्रि | ६० सेकंड |
![]() | ब्रज होरी चैत्र गीत | लोकगीत | ५० सेकंड |
![]() | सिद्धार्थी संवत्सर भजन | भजन | ४५ सेकंड |
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नव संवत्सर का संदेश
नया संवत्सर नई आशाएँ लाए, सिद्धार्थी वर्ष सुख-समृद्धि छाए। बृहस्पति का आशीर्वाद बरसाए, हर घर में खुशियाँ और मंगल आए।
विक्रम संवत् २०८३ — गुरुवार, १९ मार्च २०२६ — HinduTone.com परिवार की ओर से 
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