बहुला चतुर्थी 2026: तिथि, गो पूजा व गाय बहुला की कथा
बहुला चतुर्थी 2026 (सोम, 31 अगस्त) — गाय बहुला की सुंदर कथा, गो पूजा विधान, गेहूँ-दूध का निषेध, और संकष्टहर चतुर्थी के साथ इसका संयोग।

बहुला चतुर्थी 2026 (सोम, 31 अगस्त) — गाय बहुला की सुंदर कथा, गो पूजा विधान, गेहूँ-दूध का निषेध, और संकष्टहर चतुर्थी के साथ इसका संयोग।
संक्षिप्त उत्तर: बहुला चतुर्थी 2026 सोमवार, 31 अगस्त को है (तेलुगु अमांत कैलेंडर में श्रावण कृष्ण चतुर्थी)। माताएँ व कृषक परिवार गाय-बछड़े की पूजा कर संतान के कल्याण की प्रार्थना करते हैं, और उस गाय बहुला की कथा स्मरण करते हैं जिसने बाघ से किया वचन निभाया।
बहुला चतुर्थी (बहुला चविथि) श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में गो पूजा का एक कोमल तेलुगु त्योहार है। इसमें तेलुगु कैलेंडर की सबसे सुंदर कथाओं में से एक है, और इस वर्ष यह संकष्टहर चतुर्थी के साथ पड़ती है।
बहुला चतुर्थी 2026 — तिथि व मुख्य तथ्य
- तिथि: सोमवार, 31 अगस्त 2026
- पर्व: श्रावण कृष्ण चतुर्थी (अमांत) = भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी (पूर्णिमांत)
- देवता: गो माता (गाय), कामधेनु; तथा गणेश
- किसके द्वारा: माताएँ व कृषक परिवार
- इसी दिन: संकष्टहर / हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी
कैलेंडर इस मास को अलग नाम क्यों देता है
यह त्योहार कृष्ण पक्ष में है, ठीक वहीं जहाँ अमांत (तेलुगु) और पूर्णिमांत (उत्तर) प्रणालियाँ भिन्न होती हैं: तेलुगु पंचांग इसे श्रावण कृष्ण चतुर्थी कहता है, जबकि उत्तर भारतीय उसी दिन को भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी। दोनों सोमवार, 31 अगस्त 2026 की ओर संकेत करते हैं — केवल मास-नाम भिन्न है।
गाय बहुला की कथा (व्रत कथा)
त्योहार का हृदय बहुला नामक भक्त गाय की कथा है। घर से दूर चरते हुए वह एक भूखे बाघ के चंगुल में आ गई। बहुला ने अपने बछड़े को एक बार दूध पिलाने के लिए लौटने की विनती की, और वचन दिया कि वह अवश्य लौट आएगी। संदेह करते हुए भी बाघ ने उसे जाने दिया। उसने बछड़े को दूध पिलाया, कोमल विदा ली, और — वचन के अनुसार — बाघ का भोजन बनने लौट आई। उसकी सच्चाई और साहस से बाघ इतना द्रवित हुआ कि उसने उसे मुक्त कर आशीर्वाद दिया। कथा दो बातें सिखाती है: वचन का पालन, और करुणा का करुणा से उत्तर।
गो पूजा विधान — चरण-दर-चरण
- गाय-बछड़े को स्नान कराएँ और पूजा स्थान स्वच्छ रखें।
- गाय को हल्दी-कुंकुम लगाएँ और माला पहनाएँ।
- फूल, दीपक व धूप अर्पित कर आरती करें।
- दिन का पहला, ताज़ा बना भोजन गाय को खिलाएँ।
- बच्चों के साथ गाय की प्रदक्षिणा करें।
- परिवार सहित बहुला कथा पढ़ें या सुनें।
- फिर परिवार प्रसाद-भोजन साथ करता है।
गेहूँ-दूध का निषेध व नैवेद्य
कई परंपराओं में इस दिन गेहूँ के उत्पाद और दूध वर्जित हैं, और भोजन इनके बिना बनाया जाता है। अतः पारंपरिक भोग बाजरा व मूँग की तैयारियों, दही-रहित व्यंजनों व मौसमी सब्जियों पर आधारित होते हैं — साथ ही पहला भाग गाय को अर्पित।
व्यापक परंपरा में गो पूजा
गाय हिंदू चिंतन में गो माता और कामधेनु आदर्श के रूप में पूजित है। जिन शहरी परिवारों के पास पूजने को गाय नहीं, उनके लिए आज इस व्रत का जीवंत रूप है गोशाला का सहयोग — दान या भेंट द्वारा। यही दिन की भावना है: देखभाल का देखभाल से उत्तर।
उसी दिन संकष्टहर चतुर्थी
चूँकि संकष्टहर (हेरम्ब संकष्टी) चतुर्थी भी 31 अगस्त को है, कई परिवार दोनों करते हैं: दिनभर गो पूजा, और सायं चंद्रोदय पर गणेश अर्घ्य विघ्न-निवारण हेतु।
और पढ़ें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहुला चतुर्थी 2026 कब है?
बहुला चतुर्थी 2026 सोमवार, 31 अगस्त को है, जो तेलुगु अमांत कैलेंडर में श्रावण कृष्ण चतुर्थी है (पूर्णिमांत में भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी)।
बहुला चतुर्थी की कथा क्या है?
यह गाय बहुला की कथा है, जिसे बाघ ने पकड़ा और जो बछड़े को दूध पिलाने के वचन पर लौटी — और वचन निभाया। उसकी सच्चाई से द्रवित होकर बाघ ने उसे मुक्त कर दिया।
बहुला चतुर्थी पर गो पूजा कैसे करें?
गाय-बछड़े को स्नान कराएँ, हल्दी-कुंकुम लगाएँ, माला व आरती करें, दिन का पहला भोजन गाय को खिलाएँ, बच्चों के साथ प्रदक्षिणा करें, और बहुला कथा पढ़ें।
बहुला चतुर्थी पर क्या नहीं खाते?
कई परंपराओं में इस दिन गेहूँ के उत्पाद और दूध वर्जित हैं; भोजन बाजरा, मूँग व दही-रहित व्यंजनों से बनाया जाता है।
क्या बहुला चतुर्थी और संकष्टहर चतुर्थी एक ही हैं?
2026 में दोनों एक ही दिन (31 अगस्त) पड़ती हैं। बहुला चतुर्थी गो पूजा है; संकष्टहर चतुर्थी चंद्रोदय अर्घ्य वाला गणेश व्रत है। कई परिवार दोनों करते हैं।
गाय-रहित शहरी परिवार इसे कैसे मनाएँ?
गोशाला को दान या भेंट देकर, और बच्चों को बहुला कथा सुनाकर — देखभाल व वचन-पालन की भावना बनाए रखते हुए।



