पंचांग 3 नवंबर 2026 (मंगलवार): कृष्ण नवमी, मघा नक्षत्र, हनुमान और दुर्गा पूजा तथा आज की तिथि
मंगलवार, 3 नवंबर 2026 कृष्ण पक्ष का एक सामान्य दिन है: हैदराबाद में कृष्ण नवमी 11:54 AM तक, फिर दशमी, और पूरे दिन मघा नक्षत्र। मंगलवार हनुमान जी और जगदम्बा का दिन है, और पितरों का नक्षत्र मघा हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का एक क्षण निकालने का निमंत्रण देता है।

मंगलवार, 3 नवंबर 2026 कृष्ण पक्ष का एक सामान्य दिन है: हैदराबाद में कृष्ण नवमी 11:54 AM तक, फिर दशमी, और पूरे दिन मघा नक्षत्र। मंगलवार हनुमान जी और जगदम्बा का दिन है, और पितरों का नक्षत्र मघा हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का एक क्षण निकालने का निमंत्रण देता है।
संक्षिप्त उत्तर: मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को कोई प्रमुख त्योहार नहीं है। हैदराबाद में तिथि कृष्ण नवमी 11:54 AM तक, फिर दशमी है, और नक्षत्र पूरे दिन मघा रहेगा। मंगलवार हनुमान जी और जगदम्बा का दिन है: एक दीपक, हनुमान चालीसा या एक छोटा-सा मंत्र ही पूरी साधना है।
नवमी नौवीं तिथि है, वही तिथि जिस दिन चैत्र के शुक्ल पक्ष में श्रीराम का जन्म हुआ था। हनुमान जी राम के सबसे बड़े भक्त हैं, इसलिए मंगलवार को पड़ने वाली नवमी सेवा पर चिंतन करने का सुंदर दिन है: वह शक्ति जो दूसरों के काम आए, दिखावे के लिए कभी नहीं। इसमें पितरों का नक्षत्र मघा जोड़ दें, तो आज का भाव अपने-आप स्पष्ट हो जाता है। हम अपने पूर्वजों के कंधों पर खड़े हैं, और उनका आशीर्वाद लेकर दीवाली के सप्ताह में प्रवेश करते हैं।
आज का पंचांग (हैदराबाद)
| पंचांग अंग | हैदराबाद (IST) |
|---|---|
| दिनांक | मंगलवार, 3 नवंबर 2026 |
| चांद्र मास | आश्विन (अमांत, तेलुगु और दक्षिण भारतीय पंचांग); कार्तिक (पूर्णिमांत, उत्तर भारत) |
| पक्ष | कृष्ण (घटता चंद्रमा) |
| तिथि | नवमी 11:54 AM तक, फिर दशमी |
| नक्षत्र | मघा, 4 नवंबर को 03:26 AM तक |
| योग | शुक्ल 09:54 AM तक |
| करण | गरज |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 06:15 AM / 05:44 PM |
| चंद्रोदय / चंद्रास्त | 01:50 AM / 01:43 PM |
| राहुकाल, अभिजित और अन्य मुहूर्त | यहाँ शामिल नहीं; कृपया स्थानीय पंचांग देखें |
स्रोत: हैदराबाद के लिए द्रिक पंचांग का दैनिक पंचांग, IST। राहुकाल, अभिजित और अन्य मुहूर्तों के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
धार्मिक महत्व
श्रीराम के प्रति हनुमान जी की भक्ति का वर्णन वाल्मीकि रामायण में है, विशेषकर सुंदरकांड में, जहाँ वे सीता माता को खोजने के लिए समुद्र लांघते हैं। मंगलवार (और शनिवार) को उनकी लोकप्रिय पूजा बाद की भक्ति-परंपरा है, जिसे रामचरितमानस के रचयिता तुलसीदास ने बहुत आकार दिया; हनुमान चालीसा भी परंपरागत रूप से उन्हीं की रचना मानी जाती है।
मघा नक्षत्र पितरों से जुड़ा है। आज उनका सम्मान करने के लिए श्राद्ध या पुरोहित की आवश्यकता नहीं है। अपने दादा-दादी, नाना-नानी के नाम लेना, उनकी स्मृति में दीपक जलाना, या उनके नाम पर कोई एक भला काम करना हृदय से किया गया स्मरण है। कई घरों में सुबह की नवमी जगदम्बा को भी समर्पित की जाती है, इसलिए हनुमान जी के दीपक के पास दुर्गा माँ के चित्र के आगे एक लाल फूल सहज ही शोभा देता है।
पूजा विधि
- आवश्यक: स्नान के बाद हनुमान जी (या राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी एक साथ) के सामने दीपक जलाएँ, एक फूल अर्पित करें और नीचे दिया मंत्र जपें।
- वैकल्पिक: हनुमान मंदिर में सिंदूर और चमेली का तेल, पान के पत्तों की माला, प्रसाद के रूप में गुड़ और भुने चने, और हनुमान चालीसा।
- संध्या: 05:44 PM के सूर्यास्त के बाद दीपक जलाएँ; कुछ परिवार मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ भागों में करते हैं।
सामग्री नहीं है? शांत बैठें, हनुमान जी की समुद्र-छलाँग को याद करें, और मंत्र ग्यारह बार जपें। जैसे हनुमान जी ने किया, वैसे ही अपने दिन का काम श्रीराम को अर्पित करें।
आज का मंत्र
ॐ हनुमते नमः (IAST: oṃ hanumate namaḥ)। अर्थ: "ॐ, हनुमान जी को नमस्कार।" यह हनुमान जी का सबसे सरल और सबसे अधिक प्रचलित नाम-मंत्र है, जिसे कोई भी जप सकता है। 11 या 108 बार जपें।
आज आप क्या कर सकते हैं
- हनुमान चालीसा एक बार धीरे-धीरे पढ़ें, या काम पर जाते समय सुनें।
- अपने पूर्वजों के लिए दीपक जलाएँ और उनके नाम ज़ोर से लें (मघा नक्षत्र)।
- गुड़ और भुने चने अर्पित करें, फिर उन्हें परिवार या सहकर्मियों में बाँटें।
- हनुमान जी की सेवा-भावना से, किसी ज़रूरतमंद की एक घंटे मदद करें।
- दीवाली की सफ़ाई जारी रखें और अपने दीये व तेल जाँच लें।
- गुरुवार की रमा एकादशी की योजना बनाएँ: तय करें कि आप पूरा उपवास करेंगे, आंशिक या केवल प्रार्थना।
परिवार और बच्चों के लिए
बच्चों को हनुमान जी बहुत प्रिय हैं। उन्हें वह कथा सुनाएँ कि कैसे संजीवनी बूटी न पहचान पाने पर हनुमान जी पूरा पर्वत ही उठा लाए, फिर पूछें कि अगर वे निश्चित न हों तो क्या करेंगे। यह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने के बारे में बात करने का एक प्यारा तरीका है। बड़े बच्चे मघा के दिन के लिए परिवार-वृक्ष बना सकते हैं और हर दादा-दादी, नाना-नानी के बारे में अपनी जानी हुई एक बात लिख सकते हैं।
विदेश में बसे हिंदू: आज का सूर्योदय, तिथि और नक्षत्र
3 नवंबर 2026 को स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, और स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि व नक्षत्र।
| देश | शहर | स्थानीय सूर्योदय | स्थानीय सूर्यास्त | स्थानीय सूर्योदय पर तिथि | स्थानीय सूर्योदय पर नक्षत्र |
|---|---|---|---|---|---|
| अमेरिका (USA) | न्यूयॉर्क | 6:27 AM | 4:51 PM | कृष्ण दशमी | मघा |
| ब्रिटेन (UK) | लंदन | 6:55 AM | 4:31 PM | कृष्ण दशमी | मघा |
| कनाडा | टोरंटो | 6:54 AM | 5:07 PM | कृष्ण दशमी | मघा |
| ऑस्ट्रेलिया | सिडनी | 5:51 AM | 7:26 PM | कृष्ण नवमी | आश्लेषा |
| ब्राज़ील | साओ पाउलो | 5:18 AM | 6:22 PM | कृष्ण दशमी | मघा |
| संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | दुबई | 6:26 AM | 5:38 PM | कृष्ण नवमी | मघा |
| सिंगापुर | सिंगापुर | 6:45 AM | 6:51 PM | कृष्ण नवमी | मघा |
| मलेशिया | कुआलालंपुर | 6:55 AM | 6:57 PM | कृष्ण नवमी | मघा |
| जर्मनी | फ्रैंकफर्ट | 7:16 AM | 5:00 PM | कृष्ण नवमी | मघा |
| दक्षिण अफ्रीका | डरबन | 4:58 AM | 6:20 PM | कृष्ण नवमी | मघा |
| यूरोप | एम्स्टर्डम | 7:37 AM | 5:09 PM | कृष्ण दशमी | मघा |
HinduTone के पंचांग कैलकुलेटर से गणना की गई, द्रिक पंचांग से सत्यापित; विदेश में त्योहारों की तिथियाँ एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं — अपने मंदिर के पंचांग का पालन करें। इस तालिका के सभी समय हर शहर के स्थानीय समय हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 3 नवंबर 2026 को कोई त्योहार है?
द्रिक पंचांग में हैदराबाद के लिए कोई प्रमुख त्योहार सूचीबद्ध नहीं है। यह आश्विन (अमांत) के कृष्ण पक्ष का, या उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार कार्तिक का, एक सामान्य मंगलवार है।
आज की तिथि और नक्षत्र क्या हैं?
कृष्ण नवमी 11:54 AM IST तक, फिर दशमी। नक्षत्र मघा है, जो 4 नवंबर को 03:26 AM तक रहेगा, और योग शुक्ल है, जो 09:54 AM तक रहेगा।
मंगलवार हनुमान जी को क्यों समर्पित है?
मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है, और पूरे भारत की लोक-भक्ति में यह व्यापक रूप से हनुमान जी के लिए, साथ ही दुर्गा माँ के लिए और दक्षिण में सुब्रह्मण्य के लिए माना जाता है। यह किसी एक ग्रंथ में लिखा नियम नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है।
मघा नक्षत्र का क्या महत्व है?
पारंपरिक नक्षत्र सूचियों में मघा के अधिष्ठाता पितर, यानी हमारे पूर्वज हैं, और इसका प्रतीक राजसिंहासन है। बहुत से लोग मघा के दिन अपने पूर्वजों को कृतज्ञता के साथ स्मरण करते हैं।
अंत में एक विचार
सेवा करने वाली शक्ति, धन्यवाद देने वाली स्मृति: आज हनुमान जी और पूर्वज आपके साथ चलें। जय हनुमान।
संपादक की टिप्पणी
संपादक की टिप्पणी (9 अक्टूबर 2026): पंचांग के समय और त्योहारों का पालन स्थान, क्षेत्रीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकता है। यह मार्गदर्शिका हैदराबाद (IST) के लिए द्रिक पंचांग का अनुसरण करती है। कृपया स्थानीय पूजा-समय किसी विश्वसनीय पंचांग या पुरोहित से अवश्य जाँच लें।


