पंचांग 18 दिसंबर 2026, शुक्रवार: शुक्ल नवमी, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, लक्ष्मी पूजा और धनुर्मास दिन 3
शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026 एक शांत शुक्ल नवमी है, जिस दिन कोई बड़ा पर्व नहीं है। यह धनुर्मास की तीसरी भोर है और पारंपरिक रूप से देवी लक्ष्मी को समर्पित शुक्रवार भी। यहाँ हैदराबाद का पंचांग, घर पर सरल लक्ष्मी पूजा, मंत्र ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः और विदेश में बसे हिंदुओं के लिए स्थानीय सूर्योदय जानकारी दी गई है।

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026 एक शांत शुक्ल नवमी है, जिस दिन कोई बड़ा पर्व नहीं है। यह धनुर्मास की तीसरी भोर है और पारंपरिक रूप से देवी लक्ष्मी को समर्पित शुक्रवार भी।
संक्षिप्त उत्तर: शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026 को मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी है, द्रिक पंचांग के अनुसार कोई बड़ा पर्व नहीं, एक सामान्य दिन। नवमी 11:14 PM IST तक रहेगी और नक्षत्र 4:10 PM तक उत्तरा भाद्रपद है। यह शांत भाव से शुक्रवार की लक्ष्मी पूजा और धनुर्मास के तीसरे तिरुप्पावै पद के पाठ के लिए अच्छा दिन है।
जिन दिनों कोई पर्व नहीं होता, उन्हीं में दैनिक साधना सच में बसती है। अगले सप्ताह वैकुंठ एकादशी, दत्त जयंती और मार्गशीर्ष पूर्णिमा की व्यस्त श्रृंखला आने वाली है, इसलिए आज पूजा-स्थान की सफ़ाई करने, दीपकों को सँवारने और एक शांत लय में आने का अवसर है।
आज का पंचांग (हैदराबाद)
| पंचांग अंग | हैदराबाद, IST |
|---|---|
| तारीख और वार | शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026 |
| चांद्र मास | मार्गशीर्ष (अमांत, जैसा तेलुगु राज्यों में माना जाता है); उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में भी मार्गशीर्ष |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| तिथि | नवमी 11:14 PM तक, फिर दशमी |
| नक्षत्र | उत्तरा भाद्रपद 4:10 PM तक, फिर रेवती |
| योग | व्यतीपात 12:19 PM तक |
| करण (दिन का पहला) | बालव |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 6:40 AM / 5:46 PM |
| चंद्रोदय / चंद्रास्त | 12:51 PM / 1:28 AM |
| द्रिक पंचांग में सूचीबद्ध व्रत-पर्व | कोई बड़ा पर्व नहीं |
| राहु काल, यमगंड, मुहूर्त | यहाँ शामिल नहीं; अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखें |
स्रोत: हैदराबाद, तेलंगाना (IST) के लिए द्रिक पंचांग का दैनिक पंचांग। तिथि और नक्षत्र के समाप्ति-समय पूरे भारत में एक ही क्षण होते हैं; सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय शहर-दर-शहर कुछ मिनट बदलते हैं।
धार्मिक महत्व
शुक्रवार व्यापक रूप से विष्णु की अर्धांगिनी देवी लक्ष्मी को समर्पित है, जिन्हें हर अर्थ में समृद्धि देने वाली माना जाता है: थाली में अन्न, स्वास्थ्य, घर में सौहार्द और चरित्र की भलाई। धनुर्मास में, जब हर भोर विष्णु की उपासना होती है, शुक्रवार को लक्ष्मी की प्रार्थना इस चित्र को पूर्ण करती है। श्री वैष्णव परंपरा करुणामयी मध्यस्थ लक्ष्मी के माध्यम से ही विष्णु तक पहुँचती है।
नवमी, नौवीं तिथि, हर नवरात्रि के अंत में देवी का दिन है, और चैत्र में यह श्रीराम का जन्मदिन है। सामान्य शुक्ल नवमी पर कोई विशेष अनुष्ठान नहीं होता, पर पूर्णता से इसका संबंध इसे एकादशी वाले सप्ताहांत से पहले छोटे-छोटे लंबित काम पूरे करने का स्वाभाविक समय बनाता है।
उत्तरा भाद्रपद, जो 4:10 PM तक नक्षत्र है, शास्त्रीय सूचियों में गहराई के नाग अहिर्बुध्न्य से जुड़ा है। ज्योतिषी इसे प्रायः शांत, गहरा और धैर्यवान तारा बताते हैं, जो एक शांत शुक्रवार के अनुकूल है।
शुक्रवार की सरल लक्ष्मी पूजा
- सुबह प्रवेश-द्वार को झाड़-पोंछकर एक छोटी रंगोली बनाएँ। अनेक परिवार मानते हैं कि स्वच्छ, उजले घर में लक्ष्मी का स्वागत होता है।
- लक्ष्मी जी, या लक्ष्मी-नारायण के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ।
- कमल या कोई भी ताज़ा फूल, कुमकुम और हल्दी अर्पित करें। आवश्यक हैं केवल दीपक, एक फूल और एक प्रार्थना।
- नीचे दिए मंत्र का 108 बार जप करें, या यदि आप जानते हों तो लक्ष्मी अष्टोत्तर का पाठ करें।
- दूध, चावल की खीर, फल या गुड़ जैसा नैवेद्य अर्पित करें।
- सूर्यास्त के बाद (हैदराबाद में 5:46 PM) देहरी पर दीपक जलाएँ।
सामग्री नहीं है? एक दीपक जलाएँ, या सूर्यास्त से पहले हाथ जोड़कर शांति से खड़े हो जाएँ। कृतज्ञता की सच्ची प्रार्थना अपने आप में लक्ष्मी पूजा है।
आज का मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः
अर्थ: "ॐ, महान देवी लक्ष्मी को नमस्कार।" "श्री" उनका नाम भी है और मंगल तथा कृपा का वाचक शब्द भी। जो आपके पास पहले से है, उसके लिए कृतज्ञता के साथ इसका जप करें; भक्ति निःस्वार्थ भाव से अर्पित की जाती है, किसी निश्चित फल की अपेक्षा के बिना।
आज आप क्या कर सकते हैं
- भोर में तिरुप्पावै का तीसरा पाशुरम पढ़ें।
- घर की एक अलमारी या एक कोना व्यवस्थित करें; व्यवस्था के छोटे-छोटे कार्य लक्ष्मी के स्वागत का पारंपरिक तरीका हैं।
- किसी ज़रूरतमंद को चावल, दाल या भोजन दें।
- रविवार को वैकुंठ एकादशी की तैयारी की एक छोटी सूची बनाएँ (उपवास की योजना, मंदिर दर्शन, गीता पाठ)।
- यदि शुक्रवार को देवी उपासना आपके परिवार की परंपरा है तो ललिता सहस्रनाम या लक्ष्मी अष्टोत्तर का पाठ करें।
- यदि आपका परिवार मुहूर्त मानता है और व्यतीपात योग से बचना चाहता है, तो दोपहर से पहले कोई नया बड़ा अनुबंध न करें।
परिवार और बच्चों के लिए
बच्चों से रंगोली बनाने या दीपक के पास छोटे कटोरे में फूल सजाने में मदद लें। उन्हें समझाएँ कि लक्ष्मी केवल धन नहीं, बल्कि दया, स्वच्छता और बाँटने का भाव भी हैं। हर शुक्रवार एक सिक्का या एक फल दान करने जैसी सरल पारिवारिक आदत यह सीख किसी भी उपदेश से बेहतर सिखाती है।
विदेश में हिंदू: शुक्र 18 दिसंबर, स्थानीय सूर्योदय पर
भारत के बाहर भारतीय घड़ी के समय नहीं, अपने स्थानीय सूर्योदय को आधार मानें। तालिका में स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त तथा स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि और नक्षत्र दिए गए हैं, जिनकी गणना HinduTone के पंचांग कैलकुलेटर से की गई है और द्रिक पंचांग से मिलान किया गया है; विदेश में पर्व की तारीखें एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं — अपने मंदिर के पंचांग का पालन करें।
| देश | शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | सूर्योदय पर तिथि | सूर्योदय पर नक्षत्र |
|---|---|---|---|---|---|
| अमेरिका (USA) | न्यूयॉर्क | 7:13 AM | 4:32 PM | शुक्ल नवमी | रेवती |
| ब्रिटेन (UK) | लंदन | 7:59 AM | 3:54 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| कनाडा | टोरंटो | 7:44 AM | 4:43 PM | शुक्ल नवमी | रेवती |
| ऑस्ट्रेलिया | सिडनी | 5:37 AM | 8:05 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| ब्राज़ील | साओ पाउलो | 5:14 AM | 6:52 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | दुबई | 6:56 AM | 5:33 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| सिंगापुर | सिंगापुर | 6:58 AM | 7:03 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| मलेशिया | कुआलालंपुर | 7:10 AM | 7:09 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| जर्मनी | फ्रैंकफर्ट | 8:17 AM | 4:25 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| दक्षिण अफ्रीका | डरबन | 4:49 AM | 6:55 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
| यूरोप | एम्स्टर्डम | 8:43 AM | 4:29 PM | शुक्ल नवमी | उत्तरा भाद्रपद |
न्यूयॉर्क और टोरंटो में सूर्योदय के समय नक्षत्र रेवती में आ चुका है, जबकि अन्य स्थानों पर अभी उत्तरा भाद्रपद है। सूची के हर शहर में सूर्योदय पर शुक्ल नवमी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 18 दिसंबर 2026 को कोई त्योहार है?
द्रिक पंचांग के अनुसार शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026 को हैदराबाद के लिए कोई बड़ा त्योहार नहीं है। यह मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी, धनुर्मास का तीसरा दिन और लक्ष्मी उपासना का सामान्य शुक्रवार है।
18 दिसंबर 2026 को कौन-सी तिथि है?
सूर्योदय के समय शुक्ल नवमी है, जो 11:14 PM IST तक रहेगी, उसके बाद दशमी आरंभ होगी। नक्षत्र 4:10 PM तक उत्तरा भाद्रपद है, फिर रेवती।
शुक्रवार को देवी लक्ष्मी से क्यों जोड़ा जाता है?
शुक्रवार का नाम शुक्र ग्रह पर है, जिसे भारतीय परंपरा में सौंदर्य, सुख-सुविधा और समृद्धि से जोड़ा जाता है। समय के साथ अनेक क्षेत्रों में शुक्रवार लक्ष्मी और देवी के अन्य रूपों की उपासना का सबसे प्रचलित दिन बन गया। यह किसी एक शास्त्रीय नियम के बजाय एक व्यापक लोक-परंपरा है।
क्या व्यतीपात योग पूजा के लिए अशुभ समय है?
व्यतीपात, जो आज 12:19 PM तक है, मुहूर्त-शास्त्र में व्यापार या किसी संस्कार जैसे नए कार्य आरंभ करने के लिए टाला जाता है। इससे दैनिक पूजा, प्रार्थना या दान में कोई बाधा नहीं होती। यदि आप कोई महत्वपूर्ण तिथि तय कर रहे हैं तो अपने पुरोहित से पूछें।
अंतिम विचार
परंपरा कहती है कि लक्ष्मी वहीं निवास करती हैं जहाँ कृतज्ञता, ईमानदारी और व्यवस्था हो। इस शांत शुक्रवार को बस यह देखें कि आपको क्या-क्या मिला है। कल दशमी है, वैकुंठ एकादशी की पूर्व संध्या।
पिछला दिन: पंचांग गुरुवार 17 दिसंबर 2026. अगला दिन: पंचांग शनिवार 19 दिसंबर 2026. पूरा महीना: दिसंबर 2026 के हिंदू त्योहार, तिथियाँ और अनुष्ठान.
संपादक की टिप्पणी
संपादक की टिप्पणी (9 अक्टूबर 2026): पंचांग के समय और व्रत-पर्व स्थान, क्षेत्रीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। यह मार्गदर्शिका हैदराबाद (IST) के लिए द्रिक पंचांग पर आधारित है। कृपया स्थानीय पूजा-समय किसी विश्वसनीय पंचांग या पुरोहित से अवश्य जाँच लें।


