संक्षिप्त उत्तर: मंगलवार, 1 दिसंबर 2026 को कालभैरव जयंती है, जिसे द्रिक पंचांग कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में भी दर्शाता है। कृष्ण अष्टमी 11:13 PM तक, मघा नक्षत्र 9:00 AM तक, फिर पूर्व फाल्गुनी। हैदराबाद (Hyderabad) में सूर्योदय 6:30 AM और सूर्यास्त 5:40 PM पर है।

काल भैरव कोई कोमल देवता नहीं हैं, और ठीक इसी कारण बहुत से लोगों को उनसे सांत्वना मिलती है। वे द्वार के रक्षक हैं, काल के स्वामी जो हर दिखावे को देख लेते हैं, और वह संरक्षक जिन्हें भक्त किसी यात्रा या कठिन कार्य से पहले स्मरण करते हैं। उनकी जयंती पर एक दीपक, एक प्रार्थना और किसी कुत्ते के प्रति दया, ये सब इस दिन का हिस्सा हैं।

आज का पंचांग (हैदराबाद, IST)

तत्वविवरण
वारमंगलवार
चंद्र मासकार्तिक (अमांत, जैसे तेलुगु पंचांग में); पूर्णिमांत (उत्तर भारतीय) पंचांग में मार्गशीर्ष
पक्षकृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा)
तिथिकृष्ण अष्टमी 11:13 PM तक, फिर नवमी
नक्षत्रमघा 9:00 AM तक, फिर पूर्व फाल्गुनी
योगवैधृति 12:15 PM तक
करणबालव (दिन के लिए दर्शाया गया)
सूर्योदय6:30 AM
सूर्यास्त5:40 PM
चंद्रोदय12:40 AM, मध्यरात्रि के बाद (बुधवार 2 दिसंबर की भोर); पिछला चंद्रोदय सोमवार 30 नवंबर को 11:45 PM पर था
चंद्रास्त12:22 PM
राहु काल, यमगंड, मुहूर्तयहाँ नहीं दिए गए हैं: कृपया अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखें

स्रोत: हैदराबाद के लिए द्रिक पंचांग का दैनिक पंचांग। तिथि और नक्षत्र के समाप्ति समय भारतीय मानक समय में हैं और पूरे भारत में एक ही क्षण बदलते हैं; सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय शहर-दर-शहर कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

आज के पर्व और व्रत

  • कालभैरव जयंती: काल भैरव का प्राकट्य दिवस। हमारी कालभैरव जयंती 2026 गाइड में इसका विस्तृत वर्णन है।
  • कालाष्टमी: भैरव की मासिक अष्टमी, आज अपने सबसे महत्वपूर्ण रूप में।
  • मासिक कृष्ण जन्माष्टमी: कृष्ण अष्टमी पर श्रीकृष्ण के जन्म का मासिक स्मरण, जिसे कुछ वैष्णव परिवार मनाते हैं।
  • कार्तिक मास जारी: तेलुगु पंचांग में यह कार्तिक बहुल अष्टमी है, और संध्या दीपदान जारी रहता है।

धार्मिक महत्व

शिव पुराण की परंपरा में प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा को अहंकार हो गया और उन्होंने शिव के प्रति अपमानजनक बातें कहीं। शिव के क्रोध से भैरव प्रकट हुए, जिन्होंने ब्रह्मा के पाँच सिरों में से एक काट दिया। उस कर्म का पाप लेकर भैरव भिक्षुक बनकर भटकते रहे, कपाल उनके हाथ से चिपका रहा, जब तक वे काशी नहीं पहुँचे, जहाँ अंततः वह छूट गया। तब शिव ने उन्हें उस पवित्र नगरी का कोतवाल, अर्थात रक्षक, नियुक्त किया। वाराणसी (Varanasi) के तीर्थयात्री परंपरागत रूप से कालभैरव मंदिर के दर्शन करते हैं, और मान्यता है कि काशी में रहने के लिए उनकी अनुमति ली जाती है। अधिक पढ़ें: कालभैरव मंदिर, काशी के रक्षक।

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यह कथा दंड से अधिक अहंकार को काटने के बारे में है, चाहे वह सर्वोच्च प्राणियों में ही क्यों न हो। भैरव का श्याम स्वरूप, उनका त्रिशूल, उनकी मुंडमाला और उनका श्वान, सब एक ही भाव की ओर संकेत करते हैं: काल हर दिखावे को निगल जाता है, और जो भक्त इस सत्य का सामना करता है उसे किसी बात का भय नहीं। कालभैरव अष्टकम, जो परंपरा से आदि शंकराचार्य द्वारा काशी में रचित माना जाता है, आज व्यापक रूप से गाया जाता है; देखें कालभैरव अष्टकम: पाठ और अर्थ।

द्रिक पंचांग मंगलवार की अधिष्ठात्री देवी के रूप में माँ दुर्गा को दर्शाता है, और कई घरों में मंगलवार हनुमान जी या मुरुगन का भी दिन है। ये सब भैरव के साथ सहज रूप से जुड़ते हैं, जो शाक्त परंपरा में देवी के मंदिरों में उनके साथ रहने वाले रक्षक हैं।

सरल पूजा विधि

  • प्रातः: स्नान करें और काल भैरव या शिव के चित्र के सामने, हो सके तो सरसों या तिल के तेल का, दीपक जलाएँ।
  • अर्पण: फूल, थोड़ी विभूति, काले तिल और गुड़ या घर पर बनी मिठाई जैसा सरल नैवेद्य।
  • जप: नीचे दिया गया मंत्र, या यदि आप जानते हों तो कालभैरव अष्टकम।
  • संध्या: कई भक्त शाम को भैरव या शिव मंदिर जाते हैं; अष्टमी 11:13 PM तक है।
  • दया: भैरव के वाहन के सम्मान में प्रचलित प्रथा के अनुसार किसी कुत्ते को भोजन कराएँ।

बिना सामग्री का विकल्प: शांत बैठें, मंत्र जपें और साहस व स्पष्टता के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें। किसी भूखे प्राणी को भोजन कराना स्वयं एक सार्थक अर्पण है।

विस्तृत चरणों के लिए देखें कालभैरव अष्टमी 2026 पूजा विधि और मंत्र।

आज का मंत्र

ॐ कालभैरवाय नमः

अर्थ: "ॐ, काल भैरव को नमस्कार," जो काल के स्वामी हैं। 11, 21 या 108 बार जपें। भक्त इसे साहस और स्थिरता के लिए जपते हैं; यह एक प्रार्थना है, हर विपत्ति से रक्षा की गारंटी नहीं।

उपवास

कुछ भक्त संध्या पूजा तक उपवास रखते हैं या एक समय भोजन करते हैं। यह व्यक्तिगत निर्णय है। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और मधुमेह या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले लोग उपवास के लिए स्वयं को बाध्य न समझें और ऐसा करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।

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आज आप क्या कर सकते हैं

  • सुबह या शाम काल भैरव के लिए सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएँ।
  • कालभैरव अष्टकम पढ़ें या सुनें।
  • किसी आवारा या मोहल्ले के कुत्ते को उपयुक्त भोजन कराएँ।
  • यदि पास में हो तो शाम को किसी भैरव या शिव मंदिर जाएँ।
  • काल के स्वामी की भावना में, कुछ मिनट इस पर विचार करें कि आप अपना समय कैसे उपयोग करते हैं।
  • कृष्ण भक्त मासिक जन्माष्टमी के लिए तुलसी और माखन अर्पित कर सकते हैं।

परिवार और बच्चों के साथ

बच्चों को भैरव का परिचय द्वार के रक्षक, कुत्तों के मित्र और समय के रखवाले के रूप में कराएँ। किसी बड़े की उपस्थिति में उन्हें मोहल्ले के किसी कुत्ते को भोजन कराने में मदद करने दें। उग्र चित्रों को सरलता से समझाया जा सकता है: वे बलशाली दिखते हैं ताकि जिनकी वे रक्षा करते हैं उन्हें डरना न पड़े।

विदेश में हिंदू: आपके शहर में सूर्योदय, तिथि और नक्षत्र

यदि आप भारत से बाहर रहते हैं, तो ऊपर दिए गए हैदराबाद के समय को परिवर्तित न करें। नीचे की तालिका में हर शहर का अपना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त है, साथ ही उस स्थानीय सूर्योदय पर प्रचलित तिथि और नक्षत्र।

देशशहरसूर्योदय (स्थानीय)सूर्यास्त (स्थानीय)सूर्योदय पर तिथिसूर्योदय पर नक्षत्र
अमेरिका (USA)न्यूयॉर्क (New York)6:59 AM4:30 PMकृष्ण अष्टमीपूर्व फाल्गुनी
ब्रिटेन (UK)लंदन (London)7:41 AM3:57 PMकृष्ण अष्टमीपूर्व फाल्गुनी
कनाडा (Canada)टोरंटो (Toronto)7:29 AM4:43 PMकृष्ण अष्टमीपूर्व फाल्गुनी
ऑस्ट्रेलिया (Australia)सिडनी (Sydney)5:35 AM7:52 PMकृष्ण सप्तमीमघा
ब्राज़ील (Brazil)साओ पाउलो (São Paulo)5:10 AM6:41 PMकृष्ण अष्टमीपूर्व फाल्गुनी
यूएई (UAE)दुबई (Dubai)6:45 AM5:29 PMकृष्ण अष्टमीमघा
सिंगापुर (Singapore)सिंगापुर (Singapore)6:50 AM6:56 PMकृष्ण अष्टमीमघा
मलेशिया (Malaysia)कुआलालंपुर (Kuala Lumpur)7:02 AM7:01 PMकृष्ण अष्टमीमघा
जर्मनी (Germany)फ्रैंकफर्ट (Frankfurt)8:00 AM4:27 PMकृष्ण अष्टमीपूर्व फाल्गुनी
दक्षिण अफ्रीका (South Africa)डरबन (Durban)4:46 AM6:43 PMकृष्ण अष्टमीमघा
यूरोप (Europe)एम्स्टर्डम (Amsterdam)8:25 AM4:32 PMकृष्ण अष्टमीपूर्व फाल्गुनी

HinduTone के पंचांग कैलकुलेटर से गणना, द्रिक पंचांग से सत्यापित; विदेश में पर्व की तिथियाँ एक दिन भिन्न हो सकती हैं, इसलिए अपने मंदिर के पंचांग का पालन करें।

ऊपर दिए सभी शहरों में स्थानीय सूर्योदय पर अष्टमी प्रचलित है, सिवाय सिडनी के, जहाँ अभी सप्तमी चल रही है। विदेश में कालभैरव जयंती के लिए अपने मंदिर के पंचांग का पालन करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कालभैरव जयंती 2026 कब है?

मंगलवार, 1 दिसंबर 2026। कृष्ण अष्टमी 12:11 AM पर आरंभ होकर 11:13 PM IST पर समाप्त होती है, जो पूरे दिन और शाम को व्याप्त करती है। उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग में यह मार्गशीर्ष की अष्टमी है (तेलुगु पंचांग में कार्तिक बहुल अष्टमी)।

काल भैरव कौन हैं?

काल भैरव शिव का उग्र स्वरूप हैं, जिन्हें काल (समय) के स्वामी और पवित्र स्थानों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से उन्हें काशी (वाराणसी) के कोतवाल, अर्थात रक्षक, के रूप में पूजा जाता है।

कालाष्टमी क्या है?

कालाष्टमी हर महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी है, जो भैरव को समर्पित है। मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत) में पड़ने वाली कालाष्टमी सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे कालभैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है।

आज मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी क्यों है?

हर कृष्ण पक्ष अष्टमी को कुछ वैष्णव मासिक जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं, अष्टमी पर श्रीकृष्ण के जन्म का स्मरण करते हुए। इसलिए आज, हर परिवार की परंपरा के अनुसार, भैरव और श्रीकृष्ण दोनों की आराधना होती है।

क्या कालभैरव जयंती पर उपवास करना आवश्यक है?

नहीं। कई भक्त उपवास रखते हैं या एक समय भोजन करते हैं, पर यह ऐच्छिक है। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और कोई भी स्वास्थ्य समस्या वाले लोग स्वयं को बाध्य न समझें और पहले डॉक्टर से परामर्श लें।

क्या यह सच है कि कालभैरव जयंती पर कुत्तों को भोजन कराया जाता है?

हाँ, यह एक व्यापक प्रथा है। कुत्ते को भैरव का वाहन माना जाता है, इसलिए इस दिन कई भक्त दया भाव से आवारा या मोहल्ले के कुत्तों को भोजन कराते हैं।

अंतिम विचार

काल भैरव हमें याद दिलाते हैं कि समय वह अतिथि है जो सदा आता है। आज रात निर्भय होकर उनका स्वागत करें: एक दीपक जलाएँ, किसी भूखे प्राणी को भोजन कराएँ और आपको मिले समय का सदुपयोग करें।

पिछला और अगला दिन

संपादकीय टिप्पणी

संपादकीय टिप्पणी (9 अक्टूबर 2026): पंचांग समय और पर्व-व्रत स्थान, क्षेत्रीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। यह गाइड हैदराबाद (IST) के लिए द्रिक पंचांग का पालन करती है। कृपया स्थानीय पूजा समय किसी विश्वसनीय पंचांग या पुरोहित से सत्यापित करें।

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