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नेपाली मंदिर

शिव temple · वाराणसी, Uttar Pradesh, India

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नेपाली मंदिर, जिसका औपचारिक नाम श्री सम्राजेश्वर पशुपतिनाथ महादेव मंदिर है, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा किनारे ललिता घाट पर स्थित एक शिव मंदिर है (Live History India; Outlook)। इसका निर्माण 19वीं शताब्दी में नेपाल के राजपरिवार के सदस्यों ने काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर की प्रतिकृति के रूप में करवाया था (Onlinekhabar; Republica)।

स्थानीय रूप से इसे नेपाली मंदिर और 'मिनी खजुराहो' भी कहा जाता है; दूसरा नाम इसकी नक्काशीदार काष्ठकला के कारण पड़ा (Onlinekhabar; Republica; Live History India)। नेपाल से तीर्थयात्री नियमित रूप से यहाँ आते हैं, और रिपोर्टों में इसे भारत और नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया गया है (Onlinekhabar; Republica)।

Faith & Tradition

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Religious Significance of नेपाली मंदिर

यह मंदिर पशुपतिनाथ रूप में भगवान शिव को समर्पित है, जो काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्थित महान मंदिर के आराध्य देव हैं (Live History India; Onlinekhabar)। यहाँ प्रतिदिन पूजा होती है, और नेपाल से आने वाले श्रद्धालु कहते हैं कि वे यहाँ अवश्य आते हैं क्योंकि यह काठमांडू के मंदिर जैसा दिखता है (Onlinekhabar; Republica)।

2022 की समाचार रिपोर्टों में कहा गया कि पास में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विकसित होने के बाद मंदिर में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की संख्या बढ़ रही थी (Onlinekhabar; Republica; WION)। अप्रैल 2022 में नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने वाराणसी यात्रा के दौरान इस मंदिर में पूजा-अर्चना की (WION; The Week; Outlook)।

Heritage

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History of नेपाली मंदिर

नेपाल के राजा रण बहादुर शाह, जिन्होंने राजगद्दी त्याग दी थी, 1804 में काठमांडू लौटने से पहले निर्गुणानंद स्वामी नाम से एक संन्यासी के रूप में काशी में रहे (Onlinekhabar; Live History India)। इस अवधि में वे ललिता घाट पर ठहरे थे (Onlinekhabar), और Live History India मंदिर की शुरुआत को नगर में उनके प्रवास से जोड़ता है (Live History India)।

बाद में राजा राजेंद्र बिक्रम शाह के समय ललिता घाट को नेपाली विरासत स्थल के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, और वहाँ की इमारतें 'काशी का नेपाली मंदिर' और 'पशुपति मंदिर' के नाम से जानी जाने लगीं (Onlinekhabar)। मंदिर किसने शुरू करवाया और यह कब पूरा हुआ, इस पर विवरण अलग-अलग हैं, इसलिए यह पृष्ठ केवल 19वीं शताब्दी की वही तिथि देता है जिस पर रिपोर्टें सहमत हैं (Onlinekhabar; Republica)।

Architecture and sacred features

यह मंदिर नेपाली पैगोडा शैली में बना है, जिसकी दो-स्तरीय छत के शीर्ष पर स्वर्णमंडित कलश है, और इसे लाल रंग से रंगा गया है (Live History India)। यह लकड़ी और टेराकोटा पत्थर से बना है, और इसकी नक्काशी, जिसमें से कुछ की तुलना खजुराहो की नक्काशी से की जाती है, के कारण ही इसे 'मिनी खजुराहो' कहा जाता है (Live History India; Republica; Onlinekhabar)। इसमें लकड़ी का इतना अधिक उपयोग हुआ है कि इसे कंठवाला, अर्थात 'लकड़ी वाला', भी कहा जाता है (Live History India)।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

2022 की रिपोर्टों में दोपहर के समय लंबी कतारों का उल्लेख है (Onlinekhabar; Republica)। दर्शन से पहले वर्तमान समय और व्यवस्थाओं की पुष्टि स्थानीय स्तर पर या वाराणसी जिला प्रशासन से कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with the temple administration before travelling. Last reviewed 11 October 2026.

Location

How to Reach नेपाली मंदिर

यह मंदिर वाराणसी के गंगा तट पर ललिता घाट पर, मणिकर्णिका घाट से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है (Live History India; Outlook)। यात्रा से पहले घाटों तक जाने के वर्तमान मार्ग और स्थानीय परिवहन की जानकारी वाराणसी जिला प्रशासन या उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग से अवश्य जाँच लें।

Location: वाराणसी, Uttar Pradesh, India

Questions

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नेपाली मंदिर: Frequently Asked Questions

वाराणसी में नेपाली मंदिर कहाँ है?

यह गंगा किनारे ललिता घाट पर, मणिकर्णिका घाट से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है (Live History India; Outlook)।

नेपाली मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?

यह मंदिर पशुपतिनाथ रूप में भगवान शिव को समर्पित है (Onlinekhabar; Live History India)।

मंदिर का औपचारिक नाम क्या है?

इसका औपचारिक नाम श्री सम्राजेश्वर पशुपतिनाथ महादेव मंदिर है, और इसे अक्सर सम्राजेश्वर पशुपतिनाथ भी कहा जाता है (Live History India; Onlinekhabar; WION)।

नेपाली मंदिर किसने बनवाया?

इसका निर्माण 19वीं शताब्दी में नेपाल के राजपरिवार के सदस्यों ने करवाया था (Onlinekhabar; Republica)। किस राजा ने इसे शुरू करवाया और यह कब पूरा हुआ, इस पर विवरण अलग-अलग हैं।

इसे मिनी खजुराहो क्यों कहा जाता है?

यह नाम इसकी नक्काशी से आया है, जिसमें से कुछ की तुलना खजुराहो की नक्काशी से की जाती है (Live History India; Republica; Onlinekhabar)।

यह मंदिर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से कैसे जुड़ा है?

इसे काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर की प्रतिकृति के रूप में बनाया गया था, और नेपाल से तीर्थयात्री नियमित रूप से यहाँ दर्शन के लिए आते हैं (Onlinekhabar; Republica; Live History India)।