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तारा तारिणी मंदिर

देवी temple · तारातारिणी, Odisha, India

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तारा तारिणी मंदिर ओडिशा के गंजाम जिले में पुरुषोत्तमपुर के निकट ऋषिकुल्या नदी के दक्षिणी तट पर कुमारी पहाड़ी पर स्थित जुड़वाँ देवियों तारा और तारिणी का पहाड़ी धाम है। तारातारिणी विकास बोर्ड के अनुसार यह ब्रह्मपुर (बरहामपुर) से लगभग 30 किमी उत्तर में है।

यह ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण शक्ति धामों में से एक है। मंदिर बोर्ड तारा और तारिणी को दक्षिण ओडिशा के लगभग हर परिवार की कुलदेवी बताता है, और ओडिशा पर्यटन विभाग उन्हें गंजाम क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी कहता है।

Faith & Tradition

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Religious Significance of तारा तारिणी मंदिर

मंदिर बोर्ड द्वारा दर्ज पौराणिक परंपरा के अनुसार यह धाम उन शक्तिपीठों में से एक है जो वहाँ प्रकट हुए जहाँ देवी सती के शरीर के अंग गिरे थे, और माना जाता है कि कुमारी पहाड़ी पर सती के स्तन गिरे थे। ओडिशा पर्यटन इसे चार आदि शक्तिपीठों में से एक बताता है; शक्तिपीठों की सूचियाँ अलग-अलग ग्रंथों में भिन्न हैं।

मंदिर बोर्ड तारा तारिणी को तांत्रिक उपासना से भी जोड़ता है और प्रारंभिक बौद्ध प्रभाव की संभावना बताता है, जिसके लिए वह महायान बौद्ध धर्म की देवी तारा के नाम और गर्भगृह के भीतर बुद्ध की एक छोटी बैठी हुई प्रतिमा की ओर संकेत करता है। बोर्ड इसे प्रलेखित तथ्य के बजाय एक संभावित व्याख्या के रूप में प्रस्तुत करता है।

मंदिर बोर्ड और कलिंग टीवी की एक रिपोर्ट, दोनों के अनुसार परिवार प्रायः छोटे बच्चों को मन्नत के रूप में उनके पहले मुंडन के लिए मंदिर लाते हैं, विशेषकर चैत्र उत्सव के दौरान।

Heritage

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History of तारा तारिणी मंदिर

मंदिर बोर्ड कहता है कि पहाड़ी पर पूजा बहुत प्राचीन काल से होती आई है, पर यह भी बताता है कि कोई ऐतिहासिक अभिलेख इसके आरंभ का समय निश्चित नहीं करता। बोर्ड बताता है कि मौर्य काल में दक्षिणी कलिंग की राजधानी जौगड़ में स्थित अशोक का शिलालेख पहाड़ी से केवल लगभग 4 किमी दूर है, और उसका सुझाव है कि ऋषिकुल्या नदी पर होने वाले व्यापार ने नाविकों के बीच तारा की पूजा को बढ़ावा दिया होगा।

बोर्ड द्वारा दर्ज एक स्थानीय किंवदंती के अनुसार पुरुषोत्तमपुर के निकट खरिड़ा वीर जगन्नाथपुर शासन के एक ब्राह्मण वसु प्रहराज दो बहनों के पालक पिता बने, जो मानव रूप में देवियाँ थीं, और उनकी आज्ञा पर उन्होंने नित्य पूजा के लिए पहाड़ी की चोटी पर धाम की स्थापना की। यह एक परंपरा है, कोई दिनांकित ऐतिहासिक अभिलेख नहीं।

Architecture and sacred features

मुख्य धाम पहाड़ी की चोटी पर एक छोटा मंदिर है। मंदिर बोर्ड और ओडिशा पर्यटन के अनुसार गर्भगृह में सोने और चाँदी के आभूषणों से सुसज्जित, मानव मुख के आकार वाले दो पत्थर तारा और तारिणी को दर्शाते हैं, और उनके बीच पीतल के दो मुख उनकी चलंती प्रतिमा (उत्सव-मूर्तियाँ) के रूप में रखे गए हैं।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

ओडिशा पर्यटन के अनुसार कोई प्रवेश शुल्क नहीं है, और दर्शन सुबह और दोपहर के सत्रों में होते हैं, बीच में दोपहर का विराम रहता है (अक्टूबर 2026 में जाँचा गया)। चैत्र के मंगलवार जैसे उत्सव के दिनों में समय बढ़ा दिया जाता है। यात्रा से पहले वर्तमान व्यवस्था की पुष्टि तारातारिणी विकास बोर्ड या ओडिशा पर्यटन से कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with तारातारिणी विकास बोर्ड (Taratarini Development Board) (official website) before travelling. Last reviewed 5 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at तारा तारिणी मंदिर

चैत्र (मार्च-अप्रैल), हर मंगलवार

चैत्र पर्व (चैत्र जात्रा)

मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव; सोमवार की रात से ही भारी भीड़ जुटने लगती है, और दूसरा व तीसरा मंगलवार सबसे शुभ माना जाता है। अनेक परिवार अर्पण के रूप में बच्चों का मुंडन कराते हैं।

मासिक, हर संक्रांति पर

संक्रांति मेला

हर हिंदू मास का पहला दिन तांत्रिक साधकों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है; मंदिर द्वार के पास रखी उत्सव-मूर्तियों को अर्पण किया जाता है।

आश्विन (सितंबर-अक्टूबर)

शारदीय पर्व

मंदिर बोर्ड के पंचांग के अनुसार मूलाष्टमी से दशहरा तक मनाया जाता है।

चैत्र (मार्च-अप्रैल)

बासंतिका पर्व

देवी का वसंत उत्सव; कलिंग टीवी के अनुसार चैत्र उत्सवों के दौरान देवी को बासंतिका दुर्गा वेश में सजाया जाता है।

कार्तिक अमावस्या (अक्टूबर-नवंबर)

दीपावली / श्यामा काली पूजा

मंदिर बोर्ड द्वारा धाम के वार्षिक उत्सवों में सूचीबद्ध।

Location

How to Reach तारा तारिणी मंदिर

मंदिर बोर्ड के अनुसार निकटतम रेलवे स्टेशन ईस्ट कोस्ट रेलवे की हावड़ा-चेन्नई लाइन पर स्थित ब्रह्मपुर (बरहामपुर) है, जो लगभग 32 किमी दूर है, और निकटतम हवाई अड्डा बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर है, जो लगभग 174 किमी दूर है। ब्रह्मपुर से पुरुषोत्तमपुर, पोलसरा और आस्का की ओर जाने वाली बसें तारातारिणी जंक्शन से होकर गुजरती हैं, और ब्रह्मपुर से टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

मंदिर बोर्ड और कलिंग टीवी के विवरण के अनुसार, पहाड़ी पर पहुँचकर तीर्थयात्री सामने की ओर की 999 सीढ़ियाँ चढ़ सकते हैं, पिछली ओर की सड़क से वाहन द्वारा ऊपर जा सकते हैं, या पहाड़ी की तलहटी से रोपवे ले सकते हैं।

Location: तारातारिणी, Odisha, India 761018

Nearest airport: बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (लगभग 174 किमी)

Nearest railway station: ब्रह्मपुर (बरहामपुर), लगभग 32 किमी

Questions

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तारा तारिणी मंदिर: Frequently Asked Questions

तारा तारिणी मंदिर कहाँ है?

यह ओडिशा के गंजाम जिले में पुरुषोत्तमपुर के निकट ऋषिकुल्या नदी के दक्षिणी तट पर कुमारी पहाड़ी पर स्थित है, ब्रह्मपुर से लगभग 30 किमी उत्तर में।

तारा और तारिणी कौन हैं?

ये जुड़वाँ देवियाँ हैं, जिनकी पूजा शक्ति के रूपों में की जाती है। गर्भगृह में इन्हें मुख के आकार वाले दो अलंकृत पत्थरों द्वारा दर्शाया जाता है, और पीतल के मुख उत्सव-मूर्तियों के रूप में हैं।

क्या तारा तारिणी एक शक्तिपीठ है?

परंपरा के अनुसार कुमारी पहाड़ी पर सती के स्तन गिरे थे, और इस मंदिर को शक्तिपीठ माना जाता है। ओडिशा पर्यटन इसे चार आदि शक्तिपीठों में से एक बताता है, हालाँकि शक्तिपीठों की सूचियाँ अलग-अलग ग्रंथों में भिन्न हैं।

तारा तारिणी मंदिर तक कितनी सीढ़ियाँ हैं?

मंदिर बोर्ड के अनुसार पहाड़ी के सामने की ओर 999 सीढ़ियाँ हैं। पहाड़ी के पिछली ओर एक सड़क भी है और पहाड़ी की तलहटी से एक रोपवे भी है।

तारा तारिणी का मुख्य उत्सव कब होता है?

चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) के हर मंगलवार को मनाया जाने वाला चैत्र पर्व इस धाम का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है।

परिवार तारा तारिणी में बच्चों का मुंडन क्यों कराते हैं?

बच्चे के पहले बाल मंदिर में अर्पित करना भक्तों के बीच एक प्रचलित मन्नत है, और चैत्र पर्व के दौरान इसके लिए विशेष व्यवस्था की जाती है।

तारा तारिणी मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन कौन-सा है?

ब्रह्मपुर (बरहामपुर) स्टेशन, जो मंदिर बोर्ड के अनुसार लगभग 32 किमी दूर है।