इंसानियत मिटती जा रही है! — माता-पिता की देखभाल ही असली संपत्ति है
करोड़ों की संपत्ति होते हुए भी मुंबई में एक माँ अकेली मर गई, बेटा अमेरिका में 18 महीने तक फोन तक नहीं किया — जीते-जी माता-पिता से प्रेम ही असली संपत्ति है।
करोड़ों की संपत्ति होते हुए भी मुंबई में एक माँ अकेली मर गई, बेटा अमेरिका में 18 महीने तक फोन तक नहीं किया — जीते-जी माता-पिता से प्रेम ही असली संपत्ति है।
करोड़ों की दौलत होते हुए भी, यदि पास कोई अपना न हो तो वह जीवन कितना दयनीय होता है — यह एक हृदयविदारक घटना बताती है। जीते-जी माता-पिता को प्रेम से पुकारना ही सच्ची संपत्ति है।
मुंबई में एक वृद्ध माँ — करोड़ों की संपत्ति की मालकिन। उसका बेटा अमेरिका में बड़ा इंजीनियर; पैसा, पद, हैसियत सब कुछ था। पर लगभग 18 महीने तक उसने माँ को फोन तक नहीं किया।
आखिरकार अमेरिका से भारत आकर बेटे ने घर का दरवाज़ा खोला तो सोफे पर बैठी अवस्था में ही माँ का शव मिला। बताया जाता है कि लगभग दस महीने पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
करोड़ों की संपत्ति, बड़ी नौकरी, अमेरिका का जीवन — सब कुछ होते हुए भी माँ बिलकुल अकेली! यह केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि हमारा समाज किस ओर जा रहा है, यह प्रश्न खड़ा करती है।
हम बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?
हम बच्चों को बड़ी पढ़ाई सिखाते हैं, बड़ी नौकरी की कामना करते हैं, पैसा कमाना सिखाते हैं। लेकिन —
- ❤️ क्या हम उन्हें माता-पिता से प्रेम करना सिखा रहे हैं?
- 🙏 क्या क्षमा करना सिखा रहे हैं?
- 🤝 क्या वृद्धावस्था में माता-पिता का सहारा बनना सिखा रहे हैं?
- 👵👴 क्या दादा-दादी, नाना-नानी से स्नेह रखना सिखा रहे हैं?
जिन माता-पिता ने हमारे लिए अनगिनत रातें जागकर बिताईं, यदि उनके लिए कुछ मिनट भी न निकाल सकें, तो हमारी सारी कमाई का मूल्य क्या?
पैसा नहीं, इंसानियत ही इंसान को इंसान बनाती है
पैसा व्यक्ति को धनी बना सकता है; पर प्रेम, सेवा और मानवता ही इंसान को सच्चा "इंसान" बनाते हैं।
- 👉 माता-पिता के रहते ही उन्हें पुकारिए।
- 👉 एक फोन कीजिए — "कैसी हो माँ?" ज़रूर पूछिए।
- 👉 ये मूल्य बच्चों को भी सिखाइए।
माता-पिता के जाने के बाद किए गए अंतिम संस्कार से कहीं बड़ा है — उनके जीते-जी कहा गया एक प्रेमभरा शब्द।
🙏 इंसानियत न मिटे — इंसान के भीतर का "इंसान" जीवित रहे।
(सामाजिक जागरूकता हेतु एक विचारशील लेख।)




