"वक्रतुण्ड महाकाय" श्लोक हिंदुओं द्वारा किसी भी शुभ कार्य से पूर्व बोली जाने वाली अत्यंत प्रसिद्ध गणेश प्रार्थना है। विघ्नेश्वर का स्मरण कर कार्य निर्विघ्न होने की कामना का मंत्र।

श्लोक व अर्थ

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ — "वक्र सूँड, विशाल काय, करोड़ सूर्यों के समान तेज वाले हे देव, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।"

गणेश प्रथम पूज्य क्यों

गणेश विघ्नों को हरने वाले विघ्नेश्वर हैं। विवाह, गृहप्रवेश, अध्ययन, व्यापार-आरंभ — किसी भी शुभ कार्य में पहले उनकी पूजा कर यह श्लोक बोलने से कार्य निर्विघ्न चलता है, ऐसी मान्यता है।

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कब व कैसे जप करें

  1. किसी कार्य, अध्ययन, यात्रा, पूजा के आरंभ में श्लोक बोलें।
  2. बुधवार व चतुर्थी पर गणेश के समक्ष दीप जलाकर जप करें।
  3. वक्रतुण्ड श्लोक सहित "ॐ गं गणपतये नमः" 21/108 बार जप।
  4. एकाग्रता व भक्ति से उच्चारण महत्वपूर्ण।

मूल मंत्र

गणेश: ॐ गं गणपतये नमः · oṃ gaṃ gaṇapataye namaḥ.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वक्रतुण्ड महाकाय श्लोक का अर्थ क्या है?

"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥" — वक्र सूँड, विशाल काय, करोड़ सूर्यों के तेज वाले देव, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें — यह प्रार्थना है।

गणेश की पूजा पहले क्यों?

गणेश विघ्नेश्वर व प्रथम पूज्य हैं; किसी भी शुभ कार्य से पूर्व उनका स्मरण विघ्न दूर करता है, ऐसा शास्त्र कहता है।

कब जप करें?

किसी भी कार्य, अध्ययन, यात्रा, पूजा के आरंभ में; बुधवार व चतुर्थी पर विशेष।

मूल मंत्र कौन-सा है?

"ॐ गं गणपतये नमः" — गणेश मूल मंत्र; वक्रतुण्ड श्लोक के साथ जप सकते हैं।

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मुख्य बिंदु

  • वक्रतुण्ड महाकाय = विघ्न-निवारण की प्रसिद्ध गणेश प्रार्थना।
  • गणेश प्रथम पूज्य व विघ्नेश्वर हैं।
  • मूल मंत्र ॐ गं गणपतये नमः।

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