संक्षिप्त उत्तर: यह माँ दुर्गा के लिए एक विशेष पूजा संकल्प (संकल्प-वचन) है, जिसे पूजा से पहले बोला जाता है — दुर्गाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी पर। भारत में 2026 में ये पर्व सोमवार, 19 अक्टूबर (अष्टमी और, द्रिक पंचांग के अनुसार, नवमी) और मंगलवार, 20 अक्टूबर (विजयादशमी) को हैं। पूरा पाठ नीचे तेलुगु और देवनागरी में दिया गया है।

यह संकल्प वासु मुक्तिनूतलपाटि (Vasu Mukthinuthalapati, వాసు ముక్తినూతలపాటి) ने साझा किया है, जिनका कहना है कि इन पर्व-दिनों में देवी की पूजा से पहले इसका पाठ करने से उपासना विशेष रूप से सार्थक हो जाती है। यह एक लंबा, भक्तिपूर्ण संकल्प है: जगन्माता को प्रसन्न करने के सामान्य उद्देश्य के साथ-साथ इसमें नवदुर्गा, अष्टमातृका, सप्तमातृका और दशमहाविद्याओं के नाम आते हैं, देवी माहात्म्य में देवी द्वारा संहार किए गए असुरों का स्मरण होता है, और पूरे विश्व के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

तेलुगु में संकल्प

మమోపాత్త సమస్తదురితక్షయద్వారా శ్రీపరమేశ్వరప్రీత్యర్థం, శ్రీ జగదంబికా దుర్గా పరమేశ్వరీ ప్రీత్యర్థం, శ్రీ చండికా పరదేవతానుగ్రహప్రాప్త్యర్థం, శ్రీదుర్గాష్టమీ, మహార్నవమి , విజయదశమి మహాపర్వణి శ్రీమహా దుర్గాదేవతా ప్రీత్యర్థం, శ్రీదేవీ మాహాత్మ్యపారాయణ ఫలప్రాప్త్యర్థం, శ్రీదేవీభాగవత పురాణోక్త శ్రీ జగదంబికానుగ్రహసిద్ధ్యర్థం, శ్రీ లలితా పరాభట్టారికా సమేత శ్రీ పరాశక్త్యనుగ్రహ ప్రాప్త్యర్థం, ఆదిపరాశక్తి స్వరూపిణీం, జగజ్జననీం, భక్త కల్పలతికాం, సర్వమంగళ మాంగళ్యాం, సర్వాభీష్ట ప్రదాయినీం, సర్వదేవతా స్వరూపిణీం, సర్వశక్తిమయీం, సచ్చిదానంద స్వరూపిణీం, సృష్టి స్థితి లయకారిణీం, బ్రహ్మవిష్ణుమహేశ్వరాది సకల దేవతా శక్తిస్వరూపిణీం, వేదవేదాంగ వేదాంత సారభూతాం, సకలలోకైక మాతరం శ్రీ దుర్గాపరమేశ్వరీ ముద్దిశ్య, శ్రీ మహాకాళీ మహాలక్ష్మీ, మహాసరస్వతీ స్వరూపిణీనాం, నవదుర్గా స్వరూపిణీనాం, అష్టమాతృకా స్వరూపిణీనాం, అష్టశక్తి స్వరూపిణీనాం, సప్తమాతృకా స్వరూపిణీనాం, దశమహావిద్యా స్వరూపిణీనాం దేవతానుగ్రహ ప్రాప్త్యర్థం, శ్రీచండికా పరదేవతా ప్రసాదసిద్ధ్యర్థం, శైలపుత్రీ బ్రహ్మచారిణీ చంద్రఘంటా కూష్మాండా స్కందమాతా కాత్యాయనీ కాలరాత్రి మహాగౌరీ సిద్ధిదాత్రీ స్వరూపిణీనాం శ్రీ నవదుర్గా దేవతానుగ్రహ ప్రాప్త్యర్థం, శ్రీమహిషాసురమర్దిన్యనుగ్రహ సిద్ధ్యర్థం, మధుకైటభ మహిషాసుర ధూమ్రలోచన చండముండ రక్తబీజ శుంభని శుంభాది దైత్య సంహారిణ్యాః శ్రీచండికా పరదేవతాయాః ప్రీత్యర్థం, శ్రీదేవ్యా దివ్య కటాక్ష వీక్షణ ప్రాప్త్యర్థం, శ్రీదేవ్యాః కరుణా కటాక్ష సిద్ధ్యర్థం, శ్రీదేవ్యాః పాదారవింద భక్తి ప్రాప్త్యర్థం, శ్రీ దేవ్యామనన్య భక్తిప్రాప్త్యర్థం, వైరాగ్యజ్ఞాన విజ్ఞాన సిద్ధ్యర్థం, సద్బుద్ధి సత్సంకల్ప సదాచార సన్మార్గ ప్రాప్త్యర్థం, ఆధ్యాత్మికాధి దైవికాధి భౌతిక త్రివిధతాపోపశమనార్థం, సమస్త లోక క్షేమార్థం, సమస్తజన సుఖశాంతి సౌభాగ్య సమృద్ధ్యర్థం, ధర్మవిజయ సిద్ధ్యర్థం, అధర్మవినాశార్థం, దేశరాష్ట్ర గ్రామ నగరాణాం క్షేమ స్థైర్యాభి వృద్ధ్యర్థం, గోబ్రాహ్మణహితార్థం, లోకకల్యాణార్థం, సమస్త సన్మంగళ ప్రాప్త్యర్థం, శ్రీదుర్గాష్టమీ , మహార్నవమీ, విజయదశమి పుణ్యతిథౌ శ్రీ దుర్గాపరమేశ్వరీ ప్రీత్యర్థం, శ్రీచండికా పరదేవతా ప్రసాద సిద్ధ్యర్థం, యథాశక్తి యథావిధి ధ్యానావాహనాసన పాద్యార్ఘ్యా ఆచమనీయ స్నాన వస్త్రాభరణ గంధ పుష్ప ధూప దీప నైవేద్యతాంబూల నీరాజనాది షోడశోపచార పూజాం, కుంకుమార్చనాం, పుష్పార్చనాం, అష్టోత్తరశతనామార్చనాం, సహస్రనామార్చనాం, దేవీస్తోత్ర పారాయణం, దుర్గా సప్తశతీ పారాయణం చ యథాశక్తి కరిష్యే॥

Advertisement

అని సంకల్పం చెప్పుకొని పూజ చేసుకుంటే చాలా విశిష్టంగా ఉంటుంది. — వాసు ముక్తినూతలపాటి

यही संकल्प देवनागरी में

जो पाठक तेलुगु लिपि नहीं पढ़ते, उनके लिए यहाँ वही संस्कृत पाठ देवनागरी में दिया गया है, जिसे ऊपर दिए गए तेलुगु पाठ से अक्षरशः लिप्यंतरित किया गया है।

ममोपात्त समस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं, श्री जगदंबिका दुर्गा परमेश्वरी प्रीत्यर्थं, श्री चंडिका परदेवतानुग्रहप्राप्त्यर्थं, श्रीदुर्गाष्टमी, महार्नवमि , विजयदशमि महापर्वणि श्रीमहा दुर्गादेवता प्रीत्यर्थं, श्रीदेवी माहात्म्यपारायण फलप्राप्त्यर्थं, श्रीदेवीभागवत पुराणोक्त श्री जगदंबिकानुग्रहसिद्ध्यर्थं, श्री ललिता पराभट्टारिका समेत श्री पराशक्त्यनुग्रह प्राप्त्यर्थं, आदिपराशक्ति स्वरूपिणीं, जगज्जननीं, भक्त कल्पलतिकां, सर्वमंगळ मांगळ्यां, सर्वाभीष्ट प्रदायिनीं, सर्वदेवता स्वरूपिणीं, सर्वशक्तिमयीं, सच्चिदानंद स्वरूपिणीं, सृष्टि स्थिति लयकारिणीं, ब्रह्मविष्णुमहेश्वरादि सकल देवता शक्तिस्वरूपिणीं, वेदवेदांग वेदांत सारभूतां, सकललोकैक मातरं श्री दुर्गापरमेश्वरी मुद्दिश्य, श्री महाकाळी महालक्ष्मी, महासरस्वती स्वरूपिणीनां, नवदुर्गा स्वरूपिणीनां, अष्टमातृका स्वरूपिणीनां, अष्टशक्ति स्वरूपिणीनां, सप्तमातृका स्वरूपिणीनां, दशमहाविद्या स्वरूपिणीनां देवतानुग्रह प्राप्त्यर्थं, श्रीचंडिका परदेवता प्रसादसिद्ध्यर्थं, शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी सिद्धिदात्री स्वरूपिणीनां श्री नवदुर्गा देवतानुग्रह प्राप्त्यर्थं, श्रीमहिषासुरमर्दिन्यनुग्रह सिद्ध्यर्थं, मधुकैटभ महिषासुर धूम्रलोचन चंडमुंड रक्तबीज शुंभनि शुंभादि दैत्य संहारिण्याः श्रीचंडिका परदेवतायाः प्रीत्यर्थं, श्रीदेव्या दिव्य कटाक्ष वीक्षण प्राप्त्यर्थं, श्रीदेव्याः करुणा कटाक्ष सिद्ध्यर्थं, श्रीदेव्याः पादारविंद भक्ति प्राप्त्यर्थं, श्री देव्यामनन्य भक्तिप्राप्त्यर्थं, वैराग्यज्ञान विज्ञान सिद्ध्यर्थं, सद्बुद्धि सत्संकल्प सदाचार सन्मार्ग प्राप्त्यर्थं, आध्यात्मिकाधि दैविकाधि भौतिक त्रिविधतापोपशमनार्थं, समस्त लोक क्षेमार्थं, समस्तजन सुखशांति सौभाग्य समृद्ध्यर्थं, धर्मविजय सिद्ध्यर्थं, अधर्मविनाशार्थं, देशराष्ट्र ग्राम नगराणां क्षेम स्थैर्याभि वृद्ध्यर्थं, गोब्राह्मणहितार्थं, लोककल्याणार्थं, समस्त सन्मंगळ प्राप्त्यर्थं, श्रीदुर्गाष्टमी , महार्नवमी, विजयदशमि पुण्यतिथौ श्री दुर्गापरमेश्वरी प्रीत्यर्थं, श्रीचंडिका परदेवता प्रसाद सिद्ध्यर्थं, यथाशक्ति यथाविधि ध्यानावाहनासन पाद्यार्घ्या आचमनीय स्नान वस्त्राभरण गंध पुष्प धूप दीप नैवेद्यतांबूल नीराजनादि षोडशोपचार पूजां, कुंकुमार्चनां, पुष्पार्चनां, अष्टोत्तरशतनामार्चनां, सहस्रनामार्चनां, देवीस्तोत्र पारायणं, दुर्गा सप्तशती पारायणं च यथाशक्ति करिष्ये॥

Advertisement

संकल्प का अर्थ

संकल्प में बताया जाता है कि कौन पूजा कर रहा है, किसकी, क्यों और कैसे। यह संकल्प क्रम से इन्हीं भागों से होकर गुज़रता है। नीचे दिए गए अर्थ इसके मुख्य वाक्यांशों की सरल व्याख्या हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

  • ममोपात्त समस्त दुरित क्षय द्वारा: मेरे द्वारा संचित सभी दोषों और पापों के क्षय के लिए, और इस प्रकार परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए।
  • दुर्गा परमेश्वरी प्रीत्यर्थं: दुर्गाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी के महापर्व पर जगदंबिका दुर्गा परमेश्वरी को प्रसन्न करने और पराशक्ति चंडिका की कृपा पाने के लिए।
  • देवी माहात्म्य और देवी भागवत: देवी माहात्म्य के पारायण का फल पाने के लिए, और देवी भागवत पुराण में वर्णित जगन्माता तथा ललिता पराभट्टारिका की कृपा के लिए।
  • उनके स्वरूप: देवी को आदिपराशक्ति, जगज्जननी, सभी मंगलों को देने वाली, ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के पीछे की शक्ति, तथा वेद और वेदांत का सार कहकर संबोधित किया गया है।
  • महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती: देवी माहात्म्य के तीन महान स्वरूप, और उनके बाद नवदुर्गा, अष्टमातृका, अष्टशक्ति, सप्तमातृका और दशमहाविद्या।
  • नवदुर्गा के नाम: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — नवरात्रि की नौ रातों में पूजे जाने वाले नौ स्वरूप।
  • महिषासुरमर्दिनी: मधु और कैटभ, महिषासुर, धूम्रलोचन, चंड और मुंड, रक्तबीज, शुंभ और निशुंभ का संहार करने वाली।
  • भक्त के लिए: देवी की करुणामयी दृष्टि, उनके चरणकमलों में भक्ति, अनन्य भक्ति, वैराग्य, ज्ञान और विज्ञान, सद्बुद्धि और सदाचार, तथा तीनों प्रकार के तापों (आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक) से मुक्ति।
  • विश्व के लिए: सभी लोकों का कल्याण, सभी लोगों के लिए सुख, शांति और समृद्धि, धर्म की विजय और अधर्म का नाश, देश, राज्य, ग्राम और नगर की सुरक्षा और उन्नति, गौ और ब्राह्मणों का हित, और लोककल्याण अर्थात संसार का मंगल।
  • अनुष्ठान: षोडशोपचार पूजा (ध्यान और आवाहन से लेकर नैवेद्य, तांबूल और नीराजन तक सोलह उपचार), कुंकुमार्चन, पुष्पार्चन, 108 नाम, 1,000 नाम, देवी स्तोत्र और दुर्गा सप्तशती पारायण।
  • यथाशक्ति करिष्ये: "मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार इसे करूँगा/करूँगी।"

संकल्प का पाठ कैसे करें

परिवारों और परंपराओं में विधि के विवरण अलग-अलग होते हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन करें। एक सामान्य क्रम इस प्रकार है:

Advertisement
  • स्नान करें, पूजा स्थान तैयार करें और दीप जलाएँ।
  • आचमन (भगवान के नामों के साथ तीन बार जल ग्रहण करना) और प्राणायाम करें।
  • दाहिनी हथेली में थोड़े अक्षत (हल्दी या कुमकुम मिले चावल) और जल लें, और उसे बाएँ हाथ से ढक लें।
  • संकल्प का सामान्य आरंभिक भाग बोलें, जिसमें स्थान, संवत्सर, ऋतु, मास, पक्ष, तिथि और वार का उल्लेख होता है, जैसे आप अपनी दैनिक पूजा में बोलते हैं।
  • इसके बाद यह पाठ "ममोपात्त" से "यथाशक्ति करिष्ये" तक बोलें।
  • अक्षत और जल को एक थाली में छोड़ दें, और गणपति प्रार्थना तथा देवी के ध्यान के साथ पूजा आरंभ करें।

धीरे-धीरे और स्पष्ट उच्चारण करें। यदि पूरा पाठ आपके लिए लंबा हो, तो इसे इसी पृष्ठ से या प्रिंटआउट से पढ़ें; गति से अधिक महत्व भावना का है।

दुर्गाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी 2026 की तिथियाँ

  • दुर्गाष्टमी (महाअष्टमी): भारत में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026; USA और UK में रविवार, 18 अक्टूबर।
  • महानवमी: द्रिक पंचांग के अनुसार सोमवार, 19 अक्टूबर 2026; बंगाल और मैसूरु में मंगलवार, 20 अक्टूबर।
  • विजयादशमी (दशहरा): मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026।

तिथि का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने स्थान के लिए सही दिन और समय जानने हेतु स्थानीय पंचांग या अपने मंदिर का कार्यक्रम देखें।

Advertisement

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संकल्प क्या होता है?

संकल्प पूजा के आरंभ में बोला जाने वाला विधिवत संकल्प-वचन है। भक्त दाहिनी हथेली में अक्षत (चावल) और जल लेकर समय और स्थान, देवता, पूजा का उद्देश्य और किए जाने वाले अनुष्ठानों का उल्लेख करता है।

2026 में इस संकल्प का प्रयोग कब किया जा सकता है?

यह शारदीय नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों के लिए रचा गया है। भारत में दुर्गाष्टमी (महाअष्टमी) सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को है, द्रिक पंचांग के अनुसार महानवमी सोमवार, 19 अक्टूबर को है (बंगाल और मैसूरु में मंगलवार, 20 अक्टूबर), और विजयादशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। USA और UK में अष्टमी रविवार, 18 अक्टूबर को पड़ती है।

क्या इस पाठ से पहले तिथि और स्थान बोलना आवश्यक है?

हाँ। यह पाठ "ममोपात्त" से आरंभ होता है, जो परंपरागत रूप से संकल्प के उस सामान्य आरंभिक भाग के बाद आता है जिसमें स्थान, संवत्सर, ऋतु, मास, पक्ष, तिथि और वार का उल्लेख होता है। पहले वह आरंभिक भाग बोलें, जैसे आप अपनी दैनिक पूजा में बोलते हैं, और फिर यह पाठ आगे बोलें।

Advertisement

क्या संकल्प में बताए गए हर अनुष्ठान को करना ज़रूरी है?

पाठ में षोडशोपचार पूजा, कुंकुमार्चन, पुष्पार्चन, 108 और 1,000 नाम, देवी स्तोत्र और दुर्गा सप्तशती पारायण का उल्लेख है, और यह "यथाशक्ति करिष्ये" अर्थात "मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार इसे करूँगा/करूँगी" के साथ समाप्त होता है। कई परिवार पूरा संकल्प बोलते हैं और जितना संभव हो उतना करते हैं।

अगर मैं तेलुगु नहीं पढ़ पाता/पाती, तो क्या संकल्प पढ़ सकता/सकती हूँ?

हाँ। यही संस्कृत पाठ यहाँ देवनागरी में भी दिया गया है, जिसे तेलुगु से अक्षरशः लिप्यंतरित किया गया है, ताकि हिंदी, मराठी या संस्कृत पढ़ने वाले भी इसका पाठ कर सकें।

संपादकीय टिप्पणी (18 अक्टूबर 2026)

संकल्प का पाठ वैसा ही प्रस्तुत किया गया है जैसा वासु मुक्तिनूतलपाटि ने साझा किया है। देवनागरी संस्करण उसी पाठ का सीधा अक्षरशः लिप्यंतरण है। अर्थ और पाठ-विधि से जुड़ी टिप्पणियाँ हिंदूटोन (HinduTone) की अपनी मार्गदर्शिका हैं; तिथियाँ हिंदूटोन के नवरात्रि पृष्ठों के अनुसार हैं (भारत के लिए द्रिक पंचांग)।

संबंधित मार्गदर्शिकाएँ