क्या मंदिर में मंत्रशक्ति होती है? — गर्भगृह, यंत्र और परिक्रमा का रहस्य
मंदिर में मंत्रों की शक्ति कैसे काम करती है? गर्भगृह, मूर्ति के नीचे यंत्र, नित्य पूजा, परिक्रमा और पिछली दीवार की देव-मूर्ति — सरल भाषा में समझें।

मंदिर में मंत्रों की शक्ति कैसे काम करती है? गर्भगृह, मूर्ति के नीचे यंत्र, नित्य पूजा, परिक्रमा और पिछली दीवार की देव-मूर्ति — सरल भाषा में समझें।
क्या मंदिर में सचमुच मंत्रशक्ति होती है? सरल भाषा में — कैसे गर्भगृह, मूर्ति के नीचे स्थित यंत्र और नित्य पूजा मिलकर एक अद्भुत आकर्षण शक्ति उत्पन्न करते हैं। (पारंपरिक आध्यात्मिक व्याख्या।)
मंदिर में सबसे शक्तिशाली स्थान है गर्भगृह। उसमें भी मूर्ति को चार दीवारों के मध्य नहीं, बल्कि जानबूझकर पिछली दीवार के निकट रखा जाता है।
मंत्र + यंत्र = पावर बैंक
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, प्रतिदिन पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार और अभिषेक से वह समस्त मंत्रशक्ति मूर्ति के नीचे स्थित यंत्र में संचित होती है। वह यंत्र एक पावर बैंक जैसा है — वहीं से वह शक्ति मूर्ति में प्रवाहित होती है। इसी शक्ति से मूर्ति में विशेष आकर्षण आता है; लाखों भक्त कितनी भी दूरी और व्यय सहकर दर्शन को क्यों आते हैं — इसका कारण यही मंत्रशक्ति है।
परिक्रमा क्यों?
मूर्ति से चारों दिशाओं में तप-शक्ति की किरणें प्रसारित होती हैं; उसी शक्ति को ग्रहण करने हेतु हम मंदिर की परिक्रमा करते हैं।
पिछली दीवार की मूर्ति और बलिपीठ
चारों दीवारों में देव के सर्वाधिक निकट पिछली दीवार होती है, अतः वहाँ सर्वाधिक शक्ति होती है — इसीलिए हमारे पूर्वज उस पिछली दीवार पर देव-मूर्ति उकेरते हैं; दर्शन के बाद वहाँ कुछ क्षण रुकने से वह शक्ति भक्त में प्रवेश करती है। इसी प्रकार बलिपीठ पर पक्षियों के लिए अन्न रखा जाता है, ताकि वह शक्ति-प्रसाद उन्हें भी मिले और उन्हें उत्तम जन्म प्राप्त हो।
मंदिर के मंत्र + यंत्र + नित्य पूजा = मूर्ति में अद्भुत आकर्षण शक्ति।
(संकलन: श्री सद्गुरु पीठम्। यह एक पारंपरिक आध्यात्मिक मान्यता की व्याख्या है।)




