मई 2026 हिंदू कैलेंडर का अत्यंत पवित्र महीना है, जो एक दुर्लभ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) से और भी शक्तिशाली बन गया है। यह अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा और भगवान विष्णु को समर्पित है।

मई 2026 के प्रमुख त्यौहार

  • 1 मई (शुक्रवार): बुद्ध पूर्णिमा, कूर्म जयंती, वैशाख पूर्णिमा, सत्यनारायण व्रत

  • 5 मई (मंगलवार): संकष्टी चतुर्थी (एकदंत)

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  • 12 मई (मंगलवार): अपरा एकादशी — विष्णु व्रत

  • 14 मई (गुरुवार): प्रदोष व्रत

  • 16 मई (शनिवार): वट सावित्री व्रत, शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस्या

  • 17 मई (रविवार): अधिक मास प्रारंभ — पुरुषोत्तम मास

  • 25 मई (सोमवार): गंगा दशहरा — माँ गंगा का अवतरण दिवस

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  • 26-27 मई (मंगल/बुध): पद्मिनी एकादशी (अधिक मास की एकादशी)

  • 30-31 मई (शनि/रवि): अधिक पूर्णिमा / सत्यनारायण व्रत

अधिक मास का महत्व

पद्म पुराण के अनुसार अधिक मास में किए गए सभी पूजा, व्रत, जप और दान के पुण्य दस गुना फल देते हैं। यह महीना भगवान विष्णु का सबसे प्रिय मास है, जिसे "पुरुषोत्तम मास" भी कहा जाता है।


संपूर्ण विस्तृत लेख अंग्रेजी में पढ़ें — Hindu Festivals in May 2026 — Complete Guide

बुद्ध पूर्णिमा और कूर्म जयंती: 1 मई 2026 को एक साथ क्यों मनाएं?

वैशाख पूर्णिमा का दिन बौद्ध और वैष्णव दोनों परंपराओं में समान रूप से पवित्र माना जाता है। वैष्णव दृष्टि से यह तिथि भगवान विष्णु के कूर्म अवतार — द्वितीय दशावतार — की जयंती है, जब उन्होंने समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया था। श्रीमद्भागवत महापुराण (अष्टम स्कंध) में इस घटना का विस्तृत वर्णन है।

इस दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात विष्णु सहस्रनाम का पाठ और कूर्म-स्तोत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है। जो भक्त सत्यनारायण व्रत-कथा करना चाहते हैं, उनके लिए यह पूर्णिमा तिथि अत्यंत उपयुक्त है — इस दिन किया गया व्रत तीन पर्वों का सम्मिलित फल देता है।

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अपरा एकादशी 12 मई 2026: पाप-मुक्ति का अचूक व्रत

ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'अपरा एकादशी' कहते हैं। भविष्योत्तर पुराण में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया है कि इस एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या, गुरु-निंदा और मिथ्याभाषण जैसे घोर पापों से भी मुक्ति मिलती है। 'अपरा' शब्द का अर्थ ही 'अपार पुण्य देने वाली' है।

व्रत विधि में दशमी की रात्रि से ही सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। एकादशी को निर्जला या फलाहार व्रत रखकर भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप की पूजा करें तथा 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें। द्वादशी को पारण सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अनिवार्य है।

वट सावित्री और शनि जयंती: 16 मई 2026 को दो महान शक्तियों का संगम

ज्येष्ठ अमावस्या पर वट सावित्री व्रत और शनि जयंती का एक ही दिन पड़ना दुर्लभ संयोग है। वट सावित्री व्रत स्कंद पुराण और सावित्री-व्रत-कथा पर आधारित है, जिसमें सती सावित्री ने वट (बरगद) वृक्ष के नीचे यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। सुहागिन स्त्रियाँ वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए धागा बाँधती हैं और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।

शनि जयंती पर ज्येष्ठ अमावस्या को शनिदेव का जन्म माना जाता है। शनि पुराण के अनुसार इस दिन तिल के तेल का दीपक जलाना, काले तिल और उड़द से बना भोग अर्पित करना तथा 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का 108 बार जप करना शनि-दोष निवारण में अत्यंत प्रभावी है। पंजाब से लेकर तमिलनाडु तक के शनि मंदिरों में — जैसे तिरुनल्लारु (करैकाल) और शिंगणापुर (महाराष्ट्र) में — इस दिन लाखों भक्त उमड़ते हैं।

गंगा दशहरा 25 मई 2026: माँ गंगा के अवतरण का आध्यात्मिक रहस्य

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है। स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार इसी तिथि को देवी गंगा स्वर्गलोक से भगवान शिव की जटाओं के मार्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं — इसे 'गंगावतरण' कहते हैं। 'दशहरा' नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह व्रत दस प्रकार के पापों का हरण करता है।

हरिद्वार, ऋषिकेश, काशी (वाराणसी) और प्रयागराज में इस दिन विशेष गंगा आरती और दीपदान का आयोजन होता है। जो लोग गंगा-तट पर नहीं जा सकते, वे घर में गंगाजल से स्नान कर 'गंगे च यमुने चैव...' स्तोत्र का पाठ करें। इस दिन दान में जल-कलश, सफेद वस्त्र और तिल देना पुण्यकारी माना जाता है।

पद्मिनी एकादशी 26-27 मई 2026: अधिक मास की सर्वश्रेष्ठ एकादशी

अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में जो एकादशी आती है उसे 'पद्मिनी एकादशी' कहते हैं। पद्म पुराण में इसे 'सर्व-पाप-प्रणाशिनी' कहा गया है। भगवान विष्णु ने स्वयं इस एकादशी को अपने नाम 'पुरुषोत्तम' से जोड़ा है, इसलिए इस व्रत का फल सामान्य एकादशियों से कहीं अधिक है।

पद्मिनी एकादशी पर विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा विशेष रूप से की जाती है। केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (तिरुवनंतपुरम) तथा तिरुपति बालाजी मंदिर में अधिक मास की एकादशी को विशेष अभिषेक और कल्याणोत्सव होते हैं। जो साधक इस मास में प्रतिदिन विष्णु सहस्रनाम और भागवत पाठ करते हैं, उन्हें इस एकादशी का व्रत कुम्भ स्नान के तुल्य फल देता है — ऐसा पद्म पुराण का वचन है।

अधिक मास में साधना कैसे करें: व्यावहारिक मार्गदर्शिका

17 मई से प्रारंभ हो रहे पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन तुलसी-पूजन, विष्णु-पंचामृत अभिषेक और 'श्री विष्णवे नमः' का माला-जप विशेष फलदायी है। पद्म पुराण के अनुसार इस मास में दान-धर्म — विशेषकर अन्न-दान, वस्त्र-दान और गो-दान — का पुण्य अक्षय होता है।

अधिक मास में शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश और मुंडन संस्कार परंपरागत रूप से वर्जित माने जाते हैं, परंतु धार्मिक अनुष्ठान, तीर्थ-यात्रा और भजन-कीर्तन के लिए यह सर्वोत्तम काल है। जो भक्त इस मास में श्रीमद्भागवत के एक स्कंध का नित्य पाठ करते हैं, उन्हें पूर्ण मास का दिव्य फल प्राप्त होता है — यही इस मास की आराधना का सार है।