जय श्री गणेश! 3 जून 2026 बुधवार को दुर्लभ अधिक ज्येष्ठ मास में विभुवन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। बाधाओं को दूर करने वाले विघ्नहर्ता गणेश को समर्पित यह मासिक व्रत जीवन की बाधाओं पर विजय का शक्तिशाली साधन है।

यह हमारे जून 2026 के संपूर्ण हिंदू त्योहार कैलेंडर का भाग है।

2026 में संकष्टी चतुर्थी विशेष क्यों है

2026 में अधिक ज्येष्ठ मास (17 मई – 15 जून)। इस अतिरिक्त मास में किया गया व्रत फल को कई गुना बढ़ाता है; गणेश की कृपा और भी प्रचुर रूप से प्रवाहित होती है।

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सटीक तिथि व तिथि-विवरण

  • तिथि: 3 जून 2026 बुधवार

  • तिथि (पंचांग): ज्येष्ठ अधिक कृष्ण चतुर्थी

  • पूजा का सर्वोत्तम समय: सूर्योदय से चंद्रोदय (संध्या) तक

  • चंद्रोदय (लगभग): सामान्यतः रात 8–9 बजे के बाद — स्थानीय पंचांग देखें

संकष्टी चतुर्थी की दिव्य कथा

श्रीकृष्ण व युधिष्ठिर के संवाद (भविष्य व नृसिंह पुराण) में इस व्रत की महिमा प्रकट हुई। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर गणेश विशेष रूप से प्रकट होकर सभी “संकष्ट” (कष्ट) दूर करते हैं। एक पौराणिक कथा अनुसार असुर द्वारा रची बाधाओं को गणेश ने अपनी बुद्धि व शक्ति से दूर किया — भक्ति से पूजने वालों को वही रक्षा-कृपा मिलती है; बाह्य ही नहीं, संदेह-भय-अहंकार जैसी आंतरिक बाधाएँ भी दूर होती हैं।

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आध्यात्मिक महत्त्व व लाभ

  • करियर, शिक्षा, विवाह, व्यापार व स्वास्थ्य में बाधाओं का निवारण

  • बुद्धि व विवेक की प्राप्ति

  • ग्रह दोषों (विशेषकर राहु-केतु, शनि) से राहत

  • पारिवारिक शांति व बुरी शक्तियों से रक्षा

अधिक मास 2026 में यह फल चार गुना माना जाता है — विद्यार्थियों, विलंब झेल रहे पेशेवरों व संतान/सामंजस्य चाहने वालों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित।

चरण-दर-चरण पूजा विधि

  1. ब्रह्म मुहूर्त में जागें, स्नान; स्वच्छ (पीले/लाल) वस्त्र।

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  2. गणेश मूर्ति/चित्र रखें; दीप व धूप जलाएँ।

  3. लाल पुष्प, दूर्वा (21), मोदक, लाल चंदन अर्पित करें।

  4. “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जप; गणेश अथर्वशीर्ष/चालीसा पाठ व कपूर आरती।

  5. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें; दर्शन के बाद ही व्रत खोलें।

व्रत: निर्जला या फलाहार; अनाज, प्याज, लहसुन व मांसाहार त्यागें।

शक्तिशाली मंत्र

प्रमुख (108 बार): ॐ गं गणपतये नमः

संकटनाशन स्तोत्र: “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ / निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा”

निष्कर्ष

3 जून 2026 — अपने बोझ हल्के कर धर्म-पथ पर आनंद से चलने का गणेश का दिव्य निमंत्रण। प्रेम से व्रत, जप व मोदक अर्पण करने पर भगवान आपके हर संकष्ट को स्वयं दूर करते हैं।

ॐ गं गणपतये नमः · जय श्री गणेश!

आगे पढ़ें: जून 2026 हिंदू त्योहार — संपूर्ण मार्गदर्शिका


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2026 में संकष्टी चतुर्थी कब है?

3 जून 2026 बुधवार (ज्येष्ठ अधिक कृष्ण चतुर्थी)। चंद्रोदय (सामान्यतः रात 8–9 बजे के बाद) के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।

अस्वस्थ होने पर व्रत रख सकते हैं?

अवश्य। पूजा करें व हल्का फलाहार रखें — भगवान भाव देखते हैं, कठोरता नहीं।