नवरात्रि आरती संग्रह — हिंदी और अंग्रेज़ी

संपूर्ण भक्ति संग्रह — जय अम्बे गौरी, जय आद्य शक्ति, महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम् और नवरात्रि 2026 के लिए नव दुर्गा की पावन कथा।
स्रोत: www.hindutone.com


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नवरात्रि क्या है? | नवरात्रि का अर्थ और महत्व

नवरात्रि (Navratri) का शाब्दिक अर्थ है "नौ रातें" — नव (नव = नौ) और रात्रि (रात्रि = रात)। यह पावन पर्व दिव्य स्त्री ऊर्जा शक्ति का उत्सव है, जो माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रकट होती है, जिन्हें सामूहिक रूप से नव दुर्गा (Nav Durga) कहा जाता है।

यह पर्व वर्ष में चार बार मनाया जाता है — जिनमें शरद ऋतु की शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) सबसे अधिक धूमधाम से मनाई जाती है — यह उपवास, प्रार्थना, गरबा नृत्य और आरतियों व स्तोत्रों के जाप का समय है। दसवाँ दिन, विजयादशमी (दशहरा), महिषासुर राक्षस पर देवी की विजय की स्मृति में मनाया जाता है।

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नवरात्रि 2026 की तिथियाँ: 11 अक्टूबर 2026 (आरंभ) — 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी)। नौ रातों में से हर रात माँ दुर्गा के एक विशेष स्वरूप को समर्पित है, और भक्त उनकी दिव्य कृपा पाने के लिए सुबह और शाम आरती करते हैं।


माँ दुर्गा की पावन कथा | The Sacred Story of Goddess Durga

शक्ति का उद्गम | The Origin of Shakti

सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मांड संतुलन में था — दिव्य त्रिमूर्ति ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता), विष्णु (पालनकर्ता) और महेश (संहारकर्ता) ब्रह्मांडीय व्यवस्था बनाए रखते थे। परंतु राक्षसराज महिषासुर (Mahishasura) के रूप में एक महान अंधकार उठ खड़ा हुआ। कठोर तपस्या से उसने भगवान ब्रह्मा से वरदान पाया था कि कोई पुरुष, कोई देवता और मनुष्य से जन्मा कोई भी प्राणी उसका वध नहीं कर सकेगा। इस अजेयता के बल पर महिषासुर ने तीनों लोकों — स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल — में आतंक फैला दिया।

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पराजित होकर अपने स्वर्गलोक से निकाले गए देवता भगवान ब्रह्मा के पास पहुँचे, जो उन सबको भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास ले गए। जब राक्षस के अत्याचार की कथा सुनाई गई, तो तीनों महान देवताओं के हृदय में दिव्य क्रोध जाग उठा। उनके संयुक्त दिव्य तेज से एक प्रचंड ज्योति प्रकट हुई — इतनी उज्ज्वल कि उसने समस्त सृष्टि को आलोकित कर दिया। इस पावन ज्योति ने एक परम सुंदर और सर्वशक्तिमान देवी का रूप धारण किया: माँ दुर्गा (Maa Durga), जिन्हें शक्ति, भवानी, चंडिका और आदि पराशक्ति भी कहा जाता है।


देवी का प्रादुर्भाव | The Birth of the Goddess

हर देवता ने माँ दुर्गा को अपनी दिव्य शक्ति और अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। भगवान शिव ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र, इंद्र देव ने अपना वज्र, यमराज ने अपना दंड, वरुण देव ने अपना शंख और पाश, अग्नि देव ने अपना भाला दिया, इत्यादि। हिमालय ने उन्हें दिव्य वाहन के रूप में एक सिंह भेंट किया।

इस प्रकार दस भुजाओं से सुशोभित, प्रत्येक में एक दिव्य अस्त्र धारण किए और राजसी सिंह पर विराजमान देवी सहस्र सूर्यों के तेज से दमक उठीं। उनकी गर्जना पूरे ब्रह्मांड में गूँज उठी, जिससे पर्वत और सागर काँप उठे।

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राक्षस महिषासुर ने अपनी सेनाएँ भेजीं। एक-एक करके उसके महान असुर सेनापति — चिक्षुर, चामर और बिडालाक्ष — देवी के हाथों मारे गए। हर बार महिषासुर बचने के लिए अपना रूप बदलता रहा — कभी भैंसा, कभी सिंह, कभी मनुष्य और कभी हाथी बनकर — परंतु माँ दुर्गा ने हर रूप का सामना किया और अंततः अपने त्रिशूल से उसकी छाती भेदकर उसके अत्याचार का सदा के लिए अंत कर दिया।


नौ दिन का महायुद्ध और विजय | The Nine Nights of Victory

देवी माहात्म्य (जिसे दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ भी कहते हैं) के अनुसार, देवी और महिषासुर के बीच युद्ध नौ दिन और नौ रातों तक चला। हर रात देवी ने एक अलग स्वरूप में प्रकट होकर युद्ध किया — प्रत्येक स्वरूप एक विशेष बुराई पर विजय पाने के लिए आवश्यक एक अनूठे दिव्य गुण का प्रतीक है। इन नौ स्वरूपों को सामूहिक रूप से नव दुर्गा के रूप में पूजा जाता है।

दसवें दिन — विजयादशमी (विजय की दशमी) — माँ दुर्गा विजयी हुईं; उन्होंने महिषासुर का वध कर ब्रह्मांड में शांति, धर्म और प्रकाश पुनः स्थापित किया। देवता आनंदित हुए, स्वर्ग से पुष्पवर्षा हुई और दिव्य संगीत से ब्रह्मांड गूँज उठा।

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यह विजय अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की शाश्वत जीत का प्रतीक है। उस आदि दिवस से ही विश्वभर के भक्त नवरात्रि में देवी की आराधना करते हैं, उनकी आरतियाँ गाते हैं, उनकी कथाएँ सुनाते हैं और शक्ति, साहस तथा दिव्य कृपा के लिए उनका आशीर्वाद माँगते हैं।


नव दुर्गा — नौ दिव्य स्वरूप | Nav Durga — The Nine Sacred Forms


जय अम्बे गौरी — नवरात्रि की मुख्य आरती

जय अम्बे गौरी — मुख्य आरती


॥ मुखड़ा — Chorus ॥


॥ अंतरा 1 ॥


॥ अंतरा 2 ॥


॥ अंतरा 3 ॥


॥ अंतरा 4 ॥


॥ अंतरा 5 ॥


॥ अंतरा 6 ॥


॥ अंतरा 7 ॥


॥ अंतरा 8 ॥


॥ समापन प्रार्थना ॥


जय आद्य शक्ति — गुजराती नवरात्रि आरती

जय आद्य शक्ति — आरती


॥ मुखड़ा — Chorus ॥


॥ अंतरा 1 ॥


॥ अंतरा 2 ॥


॥ अंतरा 3 ॥


महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम् — पावन श्लोक

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम् — शुभ श्लोक

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम् माँ दुर्गा की स्तुति में रचे गए सबसे प्रिय संस्कृत स्तोत्रों में से एक है। इसकी रचना आदि शंकराचार्य को समर्पित मानी जाती है; इसका हर श्लोक एक लयबद्ध, मधुर छंद में है, जो युद्ध में दौड़ते देवी के सिंह की गर्जती टापों का आभास कराता है।


॥ श्लोक 1 ॥

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दनुते। गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते॥

अर्थ: हे पर्वतराज की पुत्री, पृथ्वी को आनंद देने वाली, संपूर्ण विश्व को प्रसन्न करने वाली, नंदी द्वारा स्तुत — आप जो विशाल विंध्य पर्वत के शिखर पर निवास करती हैं, जो विष्णु की दिव्य लीला हैं और विजयी इंद्र द्वारा पूजित हैं।


॥ श्लोक 2 — ध्रुवपद (Refrain) ॥

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

अर्थ: आपकी जय हो, जय हो — हे महिषासुर का संहार करने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली, हे पर्वत की पुत्री!


नवरात्रि 2026 — आरती मुहूर्त और समय

आरती का शुभ समय — 2026


नवरात्रि आरती कैसे करें | How to Perform Navratri Aarti

आरती पूजा की चरण-दर-चरण विधि

1. स्नान और शुद्धि सबसे पहले स्नान करें और स्वच्छ, हो सके तो चटकीले रंग के वस्त्र पहनें। देवी के विशेष स्वरूप के सम्मान में यदि संभव हो तो उस दिन का नवरात्रि रंग पहनें।

2. पूजा स्थापना एक स्वच्छ वेदी पर देवी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। नीचे लाल कपड़ा बिछाएँ और ताज़े फूल, फल, नारियल, कुमकुम, हल्दी और एक दीया (तेल का दीपक) सजाएँ।

3. कलश स्थापना पहले दिन (प्रतिपदा) देवी के प्रतीक के रूप में ताँबे या पीतल का जल-पात्र (कलश) स्थापित करें। उस पर आम के पत्ते, एक नारियल रखें और उसके चारों ओर लाल धागा (मौली) बाँधें।

4. दीया जलाना घी का दीपक (अखंड ज्योति) जलाएँ, जो आदर्श रूप से पूरे नौ दिन जलता रहना चाहिए। यह देवी के उस दिव्य प्रकाश का प्रतीक है जो सारे अंधकार को दूर करता है।

5. आरती गाना जय अम्बे गौरी आरती गाएँ या उसका जाप करें और साथ में आरती की थाली (दीये वाली थाली) को देवी के सामने दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाएँ — पहले चरणों पर, फिर नाभि पर, फिर मुख पर और अंत में पूरे गोलाकार में।

6. प्रसाद वितरण देवी को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), फल और मिठाइयाँ अर्पित करें। आरती पूरी होने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बाँटें।

7. कन्या पूजन आठवें या नौवें दिन (अष्टमी या नवमी) नव दुर्गा का प्रतिनिधित्व करने वाली नौ छोटी कन्याओं को कंजक पूजा के लिए आमंत्रित करें। उनके चरण धोएँ, तिलक लगाएँ, पूरी, चना और हलवे का प्रसाद अर्पित करें और श्रद्धा स्वरूप उपहार दें।


नवरात्रि आरती का आध्यात्मिक महत्व

आरती का आध्यात्मिक महत्व

आरती शब्द संस्कृत शब्द आरात्रिक से बना है — वह प्रकाश जो अंधकार को दूर करता है। दीपक से आरती करना अपनी चेतना का प्रकाश ईश्वर को अर्पित करने का प्रतीक है। जब हम आरती गाते हैं, तो हर अक्षर एक प्रार्थना होता है; हर लौ अहंकार का देवी के चरणों में समर्पण होती है।

माना जाता है कि आरती के समय लयबद्ध घंटी की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करती है और वातावरण में दिव्य स्पंदन जगाती है। धूप की सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है और देवी की दिव्य उपस्थिति का आह्वान करती है।

नवरात्रि आरती केवल एक अनुष्ठान नहीं है — यह समर्पण, भक्ति और आत्म-शुद्धि की एक संपूर्ण साधना है।

"या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं — उन्हें नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार।


✦ जय माँ दुर्गा ✦ शुभ नवरात्रि 2026 ✦

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में नवरात्रि कब है?

नवरात्रि 2026, 11 अक्टूबर 2026 (आरंभ) से 20 अक्टूबर 2026 तक है, जो विजयादशमी (दशहरा) का दिन है। नौ रातों में से हर रात माँ दुर्गा के एक विशेष स्वरूप को समर्पित है।

घर पर नवरात्रि आरती कैसे करें?

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, एक स्वच्छ वेदी पर फूल, फल, नारियल, कुमकुम, हल्दी और दीये के साथ देवी को स्थापित करें और घी का दीपक जलाएँ। आरती की थाली को दक्षिणावर्त घुमाते हुए जय अम्बे गौरी आरती गाएँ — पहले चरणों पर, फिर नाभि पर, फिर मुख पर और अंत में पूरे गोलाकार में।

कलश स्थापना क्या है और यह कब की जाती है?

कलश स्थापना पहले दिन, प्रतिपदा को की जाती है। देवी के प्रतीक के रूप में ताँबे या पीतल का जल-पात्र स्थापित किया जाता है, जिस पर आम के पत्ते और नारियल रखे जाते हैं और चारों ओर लाल धागा बाँधा जाता है।

नवरात्रि में अखंड ज्योति क्या है?

यह घी का दीपक है जो आदर्श रूप से पूरे नौ दिन जलता रहना चाहिए। यह देवी के उस दिव्य प्रकाश का प्रतीक है जो अंधकार को दूर करता है।

कन्या पूजन क्या है और यह कब किया जाता है?

कन्या पूजन आठवें या नौवें दिन (अष्टमी या नवमी) किया जाता है। नव दुर्गा का प्रतिनिधित्व करने वाली नौ छोटी कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है, उनके चरण धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और उपहारों के साथ पूरी, चना और हलवे का प्रसाद अर्पित किया जाता है।

नवरात्रि शब्द का क्या अर्थ है और इसमें किसकी आराधना होती है?

नवरात्रि का अर्थ है 'नौ रातें' — नव (नौ) और रात्रि (रात) से मिलकर बना। इसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों में शक्ति की आराधना होती है, जिन्हें सामूहिक रूप से नव दुर्गा कहा जाता है, और दसवाँ दिन, विजयादशमी, महिषासुर पर उनकी विजय का प्रतीक है।