बुधवार, 10 जून 2026 का संध्यावंदन संकल्प एवं पंचांग — दृक्-गणित के अनुसार (विजयवाड़ा / हैदराबाद)। संकल्प पूजा से पूर्व बोला जाने वाला आशय-कथन है।

सूचना: नीचे दिया गया संकल्प बड़ों और गुरुओं से सीखा हुआ निष्काम संकल्प है। अपने स्थान और परंपरा के अनुसार इसे अनुकूलित करें। पंचांग की घड़ियाँ स्थान के अनुसार थोड़ी बदल सकती हैं।

पंचांग विवरण (10 जून 2026, बुधवार)

  • सूर्योदय: प्रातः 5:34 (विजयवाड़ा) / 5:41 (हैदराबाद) — सूर्यास्त: सायं 6:40 / 6:50
  • संवत्सर: श्री पराभव · अयन: उत्तरायण · ऋतु: ग्रीष्म
  • मास: अधिक ज्येष्ठ · पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • तिथि: दशमी — रात्रि 12:57 तक; तत्पश्चात एकादशी
  • नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद — प्रातः 9:21 तक; तत्पश्चात रेवती
  • योग: आयुष्मान् — प्रातः 6:30 तक; तत्पश्चात सौभाग्य (रात्रि 4:03 तक)
  • करण: वणिज दोपहर 1:52 तक; फिर भद्रा (विष्टि) रात्रि 12:57 तक; फिर बव
  • वर्ज्यम् (त्याज्य): रात्रि 8:49–10:20
  • दुर्मुहूर्त: प्रातः 11:41–दोपहर 12:33
  • अमृत काल: प्रातः 6:12 तक (शेष)
  • राहु काल: दोपहर 12:07–1:45
  • यमगण्ड काल: प्रातः 7:12–8:51
  • गुलिक काल: प्रातः 10:29–दोपहर 12:07
  • अभिजित मुहूर्त: आज नहीं
  • दिशा शूल: उत्तर
  • सूर्य राशि: वृषभ · चंद्र राशि: मीन
  • शक: शालिवाहन शक 1948 · विक्रम 2083 · कलि 5127 · ई. 2026-27

बुधवार होने के कारण राहु काल, यमगण्ड एवं गुलिक काल का ध्यान रखते हुए शुभ कार्यों को शुभ मुहूर्त में आरंभ करना श्रेयस्कर है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

10 जून 2026 को कौन सी तिथि और नक्षत्र थे?

10 जून 2026, बुधवार को कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रात्रि 12:57 तक थी, फिर एकादशी। नक्षत्र उत्तर भाद्रपद प्रातः 9:21 तक था, उसके बाद रेवती।

10 जून 2026 को राहु काल कब था?

विजयवाड़ा / हैदराबाद के अनुसार राहु काल दोपहर 12:07–1:45 तक था। यमगण्ड प्रातः 7:12–8:51 और गुलिक काल प्रातः 10:29–दोपहर 12:07 तक था।

10 जून 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब हुआ?

सूर्योदय प्रातः 5:34 (विजयवाड़ा) और 5:41 (हैदराबाद) पर हुआ। सूर्यास्त सायं 6:40 और 6:50 पर हुआ।

10 जून 2026 को वर्ज्यम् और दुर्मुहूर्त का समय क्या था?

वर्ज्यम् रात्रि 8:49–10:20 तक और दुर्मुहूर्त प्रातः 11:41–दोपहर 12:33 तक था। उस दिन अभिजित मुहूर्त नहीं था।

10 जून 2026 को कौन सा मास और संवत्सर था?

संवत्सर श्री पराभव, अयन उत्तरायण, ऋतु ग्रीष्म और मास अधिक ज्येष्ठ था। शालिवाहन शक 1948 और विक्रम 2083 चल रहा था।

संकल्प क्या होता है और इसे कब बोला जाता है?

संकल्प पूजा से पूर्व बोला जाने वाला आशय-कथन है। इसे अपने स्थान और परंपरा के अनुसार अनुकूलित करना चाहिए, क्योंकि पंचांग की घड़ियाँ स्थान के अनुसार थोड़ी बदल सकती हैं।