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मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, मदुरै

मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, मदुरै

देवी temple · मदुरै, Tamil Nadu, India

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अरुलमिगु मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर तमिलनाडु के मदुरै नगर के केंद्र में स्थित है। यह एक युगल मंदिर है: एक सन्निधि देवी मीनाक्षी को समर्पित है, जो पार्वती का स्वरूप हैं, और दूसरी उनके पति सुंदरेश्वर को, जो शिव का स्वरूप हैं। प्राचीन मदुरै नगर इसी के चारों ओर बसा। मदुरै ज़िला प्रशासन इस मंदिर को वह धुरी बताता है जिसके चारों ओर नगर विकसित हुआ, और कहता है कि परिसर लगभग 65,000 वर्ग मीटर में फैला है।

मंदिर का संचालन तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग करता है। यह अपने गगनचुंबी गोपुरमों, सहस्र स्तंभ मंडप और स्वर्ण कमल सरोवर (पोत्तामरै कुलम) के लिए प्रसिद्ध है। हर वर्ष अप्रैल–मई में यहाँ चित्तिरै उत्सव होता है, जिसमें मीनाक्षी के राज्याभिषेक और सुंदरेश्वर से उनके विवाह का उत्सव मनाया जाता है।

Faith & Tradition

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Religious Significance of मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, मदुरै

HR&CE विभाग द्वारा दिए गए मंदिर के स्थल पुराण के अनुसार पांड्य राजा मलयध्वज और उनकी रानी कांचनमाला ने संतान के लिए प्रार्थना की। पार्वती उनके यहाँ तडातगै के रूप में जन्मीं, जिन्हें मीनाक्षी, अर्थात् 'मछली जैसी आँखों वाली', भी कहा जाता है। उन्होंने पांड्य देश पर शासन किया और शिव से विवाह किया, जो मदुरै में सुंदर पांड्यन के रूप में राज करते थे। परंपरा के अनुसार इस दंपति ने बाद में उग्र कुमार पांड्यन का राज्याभिषेक किया, जिन्हें मुरुगन का स्वरूप माना जाता है, और फिर मीनाक्षी और सुंदरेश्वर के रूप में मंदिर में विराजमान हुए।

मदुरै परंजोति मुनिवर के तिरुविळैयाडल पुराणम् की कथा-भूमि भी है, जिसमें इस नगर में शिव की चौंसठ दिव्य लीलाओं (तिरुविळैयाडल) का वर्णन है। इनमें से कई लीलाओं का मंचन मंदिर के उत्सवों में किया जाता है। HR&CE विभाग यह परंपरा भी दर्ज करता है कि शैव संत तिरुज्ञानसंबंदर ने यहीं पांड्य राजा कून पांडियन को उनके रोग से मुक्त किया था। तमिल संगम के नगर के रूप में मदुरै की पहचान इस मंदिर से गहराई से जुड़ी है।

Heritage

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History of मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, मदुरै

मदुरै पांड्य राजाओं की राजधानी था। Encyclopaedia Britannica के अनुसार वहाँ पांड्य राजधानी 4वीं से 11वीं शताब्दी ईस्वी तक रही। Britannica यह भी दर्ज करता है कि 1310 में नगर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। इसके बाद विजयनगर–नायक काल में, 16वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान, मंदिर, तेप्पकुलम सरोवर और 1,000 खंभों वाले मंडप का पुनर्निर्माण हुआ। मदुरै ज़िला प्रशासन के अनुसार तिरुमलै नायक (1623–55) के शासन में मंदिर का बहुत विस्तार हुआ।

HR&CE विभाग कई गोपुरमों का काल अलग-अलग बताता है। वह पश्चिमी गोपुरम को 1315 से 1347 के बीच का मानता है। दक्षिणी गोपुरम 1559 में विश्वनाथ नायक के समय बना। अम्मन (मीनाक्षी) सन्निधि का सात-तला गोपुरम 1569 में अरियनाथ मुदलियार के पुत्र ने बनवाया, और पश्चिमी आदि वीथि पर एक पाँच-तला गोपुरम 1570 में बना। उत्तरी गोपुरम का निर्माण कृष्णप्पा नायक प्रथम के समय आरंभ हुआ। ये तिथियाँ दिखाती हैं कि परिसर कई शताब्दियों में और अनेक संरक्षकों के अधीन विकसित हुआ।

मंदिर में समय-समय पर प्रतिष्ठा-समारोह (कुंभाभिषेकम) होते हैं। HR&CE विभाग 1974, 1995 और 8 अप्रैल 2009 के समारोह दर्ज करता है। सबसे हाल का समारोह मरम्मत कार्य के बाद 17 सितंबर 2026 को हुआ, और The Hindu ने इसे 17 वर्षों में पहला बताया।

Architecture and sacred features

मंदिर द्रविड़ शैली का है। मीनाक्षी और सुंदरेश्वर के गर्भगृह संकेंद्रित गलियारों (प्राकारों) से घिरे हैं और उनमें प्रवेश रंगीन चूना-प्लास्टर की मूर्तियों से ढके विशाल गोपुरमों से होता है। मदुरै ज़िला प्रशासन आयिरम काल मंडपम (सहस्र स्तंभ मंडप) को विशेष रूप से रेखांकित करता है, जिसके नक्काशीदार खंभे किसी भी कोण से एक सीध में दिखाई देते हैं, और बाहरी गलियारों के संगीतमय पत्थर के खंभों को भी, जिनके बारे में कहा जाता है कि थपथपाने पर वे अलग-अलग स्वर देते हैं।

पोत्तामरै कुलम (स्वर्ण कमल सरोवर) मंदिर का पवित्र सरोवर है। विभिन्न स्रोत गोपुरमों की संख्या अलग-अलग बताते हैं। ज़िला प्रशासन युगल सन्निधियों के चारों ओर पाँच विशाल द्वारों का उल्लेख करता है, जबकि 2026 के प्रतिष्ठा-समारोह की प्रेस रिपोर्टों में 12 गोपुरमों पर अनुष्ठानों का उल्लेख है।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

तमिलनाडु HR&CE विभाग की सूची के अनुसार (अक्टूबर 2026 में जाँचा गया) मंदिर सुबह और शाम के सत्रों में खुला रहता है, और दोपहर में बंद रहता है। उत्सव के दिनों में और सितंबर 2026 के प्रतिष्ठा-समारोह के बाद समय बदल सकता है, इसलिए यात्रा से पहले HR&CE विभाग या मंदिर कार्यालय से वर्तमान व्यवस्था की पुष्टि कर लें।

तमिलनाडु के अन्य मंदिरों की तरह प्रवेश से पहले जूते-चप्पल बाहर छोड़ने होते हैं, और शालीन वस्त्र अपेक्षित हैं। चित्तिरै उत्सव और प्रमुख उत्सव के दिनों में बहुत भारी भीड़ होती है। वर्तमान वेशभूषा और प्रवेश व्यवस्था की पुष्टि HR&CE विभाग या मंदिर कार्यालय से कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग (official website) before travelling. Last reviewed 5 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, मदुरै

चित्तिरै (अप्रैल–मई)

चित्तिरै तिरुविळा (मीनाक्षी तिरुकल्याणम)

लगभग बारह दिनों में यह उत्सव मीनाक्षी के राज्याभिषेक (पट्टाभिषेकम), उनकी दिग्विजय (दिग्विजयम), सुंदरेश्वर से उनके दिव्य विवाह और मंदिर रथ यात्रा से होकर आगे बढ़ता है। इसके बाद यह अळगर कोइल से कल्लळगर की यात्रा और वैगै नदी में उनके प्रवेश के उत्सव से जुड़ जाता है।

आवणि (अगस्त–सितंबर)

आवणि मूलम

शिव की चौंसठ तिरुविळैयाडल लीलाओं के प्रसंगों का शोभायात्रा में मंचन किया जाता है। इनमें से एक कथा वह है जिसमें शिव ने वृद्धा वंदी से पुट्टु के एक हिस्से के बदले मिट्टी ढोई थी; इसका मंचन वैगै के निकट पुट्टु तोप्पु मंडपम में होता है।

पुरट्टासि (सितंबर–अक्टूबर)

नवरात्रि

मंदिर में देवी के गर्भगृह के पास वाले गलियारे में गुड़ियों की एक बड़ी गोलु झाँकी सजाई जाती है, जिसे देखने शाम के समय हज़ारों दर्शनार्थी आते हैं।

समय-समय पर (नवीनतम 17 सितंबर 2026)

कुंभाभिषेकम

मंदिर का प्रतिष्ठा-समारोह उसके गोपुरमों और सन्निधियों की पवित्रता का नवीकरण करता है। यह सबसे हाल में सितंबर 2026 में हुआ, अप्रैल 2009 के पिछले समारोह के 17 वर्ष बाद।

Location

How to Reach मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, मदुरै

HR&CE विभाग के अनुसार मदुरै रेलवे स्टेशन (मदुरै जंक्शन) मंदिर से लगभग 1.6 किमी और मदुरै हवाई अड्डा लगभग 10.7 किमी दूर है। मदुरै ज़िला प्रशासन हवाई अड्डे को अवनियापुरम में, नगर से लगभग 12 किमी दूर बताता है। यहाँ से घरेलू उड़ानें और कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें कोलंबो, दुबई और सिंगापुर की उड़ानें शामिल हैं। मदुरै जंक्शन दक्षिण रेलवे के मदुरै मंडल का मुख्यालय है और यहाँ से चेन्नई, नई दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के लिए सीधी ट्रेनें हैं।

नगर बसें मंदिर क्षेत्र तक जाती हैं। HR&CE विभाग C3 और C4 मार्गों का उल्लेख करता है, जो पेरियार बस स्टैंड और मट्टुतावणी को जोड़ते हैं। मंदिर पुराने नगर में चित्तिरै और मासी वीथियों के घेरे के भीतर स्थित है।

Location: मदुरै, Tamil Nadu, India

Nearest airport: मदुरै हवाई अड्डा, अवनियापुरम (HR&CE के अनुसार लगभग 10.7 किमी)

Nearest railway station: मदुरै जंक्शन (HR&CE के अनुसार लगभग 1.6 किमी)

Questions

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मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, मदुरै: Frequently Asked Questions

मदुरै के मीनाक्षी मंदिर में किनकी पूजा होती है?

यह देवी मीनाक्षी, जो पार्वती का स्वरूप हैं, और सुंदरेश्वर, जो शिव का स्वरूप हैं, का युगल मंदिर है। मंदिर की कथा के अनुसार मीनाक्षी का जन्म एक पांड्य राजा के यहाँ हुआ और उनका विवाह मदुरै में शिव से हुआ।

मीनाक्षी मंदिर कब बना?

इसका उद्गम प्राचीन है और आंशिक रूप से पौराणिक है। Britannica के अनुसार 1310 में मदुरै के विनाश के बाद 16वीं और 17वीं शताब्दी में मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, और HR&CE अलग-अलग गोपुरमों का काल 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच बताता है।

मीनाक्षी तिरुकल्याणम कब मनाया जाता है?

यह चित्तिरै उत्सव का मुख्य आकर्षण है, जो तमिल मास चित्तिरै (अप्रैल–मई) में होता है। सटीक तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं और HR&CE विभाग द्वारा घोषित की जाती हैं।

मीनाक्षी मंदिर में पिछला कुंभाभिषेकम कब हुआ?

सबसे हाल का प्रतिष्ठा-समारोह 17 सितंबर 2026 को हुआ। HR&CE विभाग के अनुसार इससे पहले वाला 8 अप्रैल 2009 को हुआ था।

मंदिर मदुरै जंक्शन और हवाई अड्डे से कितनी दूर है?

HR&CE विभाग के अनुसार मदुरै रेलवे स्टेशन लगभग 1.6 किमी और मदुरै हवाई अड्डा लगभग 10.7 किमी दूर है।

सहस्र स्तंभ मंडप (हज़ार खंभों वाला मंडप) क्या है?

यह आयिरम काल मंडपम है, मंदिर का एक विशाल स्तंभयुक्त मंडप, जो अपने नक्काशीदार खंभों के लिए प्रसिद्ध है। Britannica के अनुसार 1,000 खंभों वाला मंडप उन संरचनाओं में था जिनका 16वीं–17वीं शताब्दी में पुनर्निर्माण हुआ।

मीनाक्षी मंदिर का प्रबंधन कौन करता है?

इसका प्रशासन तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग करता है, जो आधिकारिक वेबसाइट maduraimeenakshi.hrce.tn.gov.in चलाता है।