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यामाई मंदिर

देवी temple · Maharashtra, India

श्री यमाई देवी मंदिर महाराष्ट्र के सातारा ज़िले की खटाव तालुका में औंध की एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित देवी मंदिर है (Incredible India; Zilla Parishad Satara)। गाँव के पास की लगभग 800 फ़ुट ऊँची पहाड़ी मूलपीठ या मुलिपीठ कहलाती है, और इसकी चोटी पर बना मंदिर देवी यमाई को समर्पित है (Zilla Parishad Satara; Pudhari)। यह मंदिर खटाव तालुका के औंध गाँव में है (TV9 Marathi)।

यमाई औंध की ग्रामदेवी और औंध के पूर्व शासक पंत प्रतिनिधि परिवार की कुलदेवी हैं (Zilla Parishad Satara; Pudhari)। पर्यटन मंत्रालय उन्हें कई मराठी परिवारों की कुलदेवी भी बताता है (Incredible India)।

Faith & Tradition

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Religious Significance of यामाई मंदिर

पर्यटन मंत्रालय यमाई को देवी पार्वती और रेणुका का संयुक्त रूप तथा शिव और पार्वती के मिलन का प्रतीक बताता है (Incredible India)। परंपरा के अनुसार, वनवास के दौरान राम सीता को खोज रहे थे, तब पार्वती उनकी परीक्षा लेने के लिए सीता के रूप में उनके सामने प्रकट हुईं; राम ने उन्हें पहचान लिया और "ये माई" ("आओ, माँ") कहकर पुकारा, और देवी का यह रूप यमाई कहलाने लगा (Incredible India)।

पहाड़ी के मंदिर के अलावा औंध गाँव में भी एक यमाई मंदिर है, जहाँ देवी की ग्रामनिवासिनी यमाई के रूप में पूजा होती है, जबकि पहाड़ी के मंदिर को देवी का मूल स्थान बताया जाता है (Pudhari)। उत्सव इन दोनों मंदिरों और औंध के पुराने राजमहल में पूजित देवी कराड देवी को आपस में जोड़ते हैं (Pudhari)।

Heritage

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History of यामाई मंदिर

औंध पंत प्रतिनिधि परिवार की जागीर का मुख्यालय था, जिनका दो मंज़िला मराठा शैली का वाडा गाँव में स्थित है (Zilla Parishad Satara)। यह परिवार आज भी देवी से निकटता से जुड़ा है: नवरात्रि उत्सव के दौरान इसके सदस्य यमाई की पालकी शोभायात्रा और पूजा की अगुवाई करते हैं (Pudhari)।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

श्री भवानी संग्रहालय, जिसकी स्थापना औंध के पंत प्रतिनिधि शासकों ने की थी और जो अब महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा संचालित है, मंदिर के साथ देखा जा सकता है (Zilla Parishad Satara; Incredible India)। यात्रा से पहले वर्तमान व्यवस्था और समय की पुष्टि श्री यमाई देवी देवस्थान ट्रस्ट या स्थानीय प्रशासन से कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with the temple administration before travelling. Last reviewed 11 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at यामाई मंदिर

पौष (आम तौर पर जनवरी)

यमाई देवी यात्रा

पहाड़ी मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा शाकंभरी पूर्णिमा के आसपास अपने चरम पर होती है, जब देवी को पालकी में शोभायात्रा के रूप में निकाला जाता है (Incredible India)।

आश्विन (सितंबर–अक्टूबर)

शारदीय नवरात्रि

श्री यमाई देवी देवस्थान ट्रस्ट एक उत्सव आयोजित करता है, जिसमें गाँव के मंदिर में प्रतिदिन कीर्तन, मूलपीठ पहाड़ी पर पालकी शोभायात्रा और पूजा के साथ अष्टमी यात्रा, तथा गाँव से दशहरा शोभायात्रा शामिल हैं (Pudhari)।

Location

How to Reach यामाई मंदिर

मंदिर सातारा ज़िले की खटाव तालुका में औंध गाँव के पास की पहाड़ी पर स्थित है (Zilla Parishad Satara; Incredible India)। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार निकटतम रेलवे स्टेशन सातारा और निकटतम हवाई अड्डा छत्रपति राजाराम महाराज हवाई अड्डा, कोल्हापुर है (Incredible India)।

Location: Maharashtra, India

Nearest airport: छत्रपति राजाराम महाराज हवाई अड्डा, कोल्हापुर

Nearest railway station: सातारा

Questions

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यामाई मंदिर: Frequently Asked Questions

औंध का यमाई देवी मंदिर कहाँ है?

यह महाराष्ट्र के सातारा ज़िले की खटाव तालुका में औंध गाँव के पास लगभग 800 फ़ुट ऊँची मूलपीठ पहाड़ी की चोटी पर स्थित है (Zilla Parishad Satara; Incredible India)।

क्या यह पुणे के पास वाला औंध है?

नहीं। यह मंदिर सातारा ज़िले की खटाव तालुका के औंध में है (Incredible India; TV9 Marathi)।

यमाई किसकी कुलदेवी हैं?

वे औंध की ग्रामदेवी और पंत प्रतिनिधि परिवार की कुलदेवी हैं (Zilla Parishad Satara)। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार कई मराठी परिवार भी उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं (Incredible India)।

देवी का नाम यमाई कैसे पड़ा?

परंपरा के अनुसार, जब पार्वती सीता के रूप में प्रकट हुईं, तब राम ने उन्हें पहचान लिया और "ये माई" अर्थात् "आओ, माँ" कहकर पुकारा, जिससे देवी को यह नाम मिला (Incredible India)।

यमाई देवी यात्रा कब होती है?

वार्षिक यात्रा हिंदू मास पौष में, आम तौर पर जनवरी में, होती है और शाकंभरी पूर्णिमा के आसपास अपने चरम पर पहुँचती है (Incredible India)।

नवरात्रि में मंदिर में क्या होता है?

मूलपीठ पहाड़ी पर अष्टमी यात्रा निकलती है, जिसमें पंत प्रतिनिधि परिवार के सदस्यों की अगुवाई में पालकी शोभायात्रा, पूजा और आरती होती है (Pudhari)।

औंध में और क्या देखने योग्य है?

औंध में श्री भवानी संग्रहालय है, जो पंत प्रतिनिधि शासकों द्वारा स्थापित एक कला संग्रहालय है और अब महाराष्ट्र सरकार द्वारा संचालित है (Zilla Parishad Satara; Incredible India)।