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सबरीमला श्री अय्यप्पा मंदिर

सबरिमला श्री अयप्पा मंदिर

अयप्पा temple · पत्तनामथित्ता, Kerala, India

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सबरीमला श्री धर्मशास्ता मंदिर (Sabarimala Sree Dharma Sastha Temple) केरल के पत्तनंतिट्टा ज़िले में भगवान अय्यप्पा, जिन्हें धर्मशास्ता भी कहा जाता है, का पर्वतीय धाम है। यह पश्चिमी घाट में पेरियार टाइगर रिज़र्व के वनों से घिरी एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड करता है, और यहाँ हर वर्ष विश्व की सबसे बड़ी तीर्थयात्री भीड़ों में से एक उमड़ती है।

सबरीमला पूरे वर्ष नहीं खुलता। मंदिर मलयालम पंचांग का पालन करता है: यह नवंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक मंडल–मकरविलक्कु सीज़न के लिए, हर मलयालम मास के शुरुआती दिनों के लिए और विषु तथा ओणम जैसे पर्वों के लिए खुलता है। तीर्थयात्री परंपरागत रूप से 41 दिन का संयम-व्रत रखते हैं, इरुमुडि पोटली साथ ले जाते हैं और गर्भगृह तक पहुँचने के लिए अठारह पवित्र सीढ़ियाँ, पदिनेट्टाम्पडि, चढ़ते हैं।

Faith & Tradition

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Religious Significance of सबरिमला श्री अयप्पा मंदिर

भक्तों का विश्वास है कि अय्यप्पा का जन्म शिव और मोहिनी रूप धारण किए विष्णु से हुआ था, इसीलिए उन्हें हरिहरपुत्र भी कहा जाता है। यहाँ उनकी पूजा योग मुद्रा में विराजमान नित्य ब्रह्मचारी देवता के रूप में होती है। मंदिर विशेष रूप से अपने तीर्थयात्रा-अनुशासन के लिए जाना जाता है। व्रतम के दौरान तीर्थयात्री पवित्र माला धारण करते हैं, काले वस्त्र पहनते हैं, शाकाहारी भोजन करते हैं, ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और बाल या नाखून नहीं काटते। तीर्थयात्री एक-दूसरे को 'स्वामी' कहकर संबोधित करते हैं, और मंदिर का मार्गदर्शक सूत्र है तत्वमसि, 'वह तुम ही हो'।

सबरीमला धार्मिक सीमाओं से परे जाने वाली परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। पारंपरिक मार्ग पर तीर्थयात्री एरुमेली की वावर मस्जिद में वावर का सम्मान करते हैं, जिन्हें अय्यप्पा के भजनों में भगवान के साथी के रूप में याद किया जाता है, और अठारह सीढ़ियों के निचले भाग के पास वावर का एक स्थान (वावर नड़ा) भी है। भगवती के रूप में पूजित मालिकप्पुरत्तम्मा सबसे प्रमुख उप-देवता हैं, और तीर्थयात्री अय्यप्पा के दर्शन के बाद उनके मंदिर में जाते हैं।

Heritage

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History of सबरिमला श्री अयप्पा मंदिर

केरल पर्यटन द्वारा बताई गई मंदिर-कथा के अनुसार, पंदलम के निःसंतान राजा राजशेखर को पंपा नदी के तट पर एक शिशु मिला जिसके गले में घंटी (मणि) बँधी थी, और उन्होंने उसे मणिकंठन के रूप में पाला। राक्षसी महिषी का वध करके अपना दिव्य उद्देश्य पूरा करने के बाद मणिकंठन ने कहा कि जहाँ उनका बाण गिरे, वहाँ सबरी पहाड़ी पर एक मंदिर बनाया जाए। पंदलम राजपरिवार की आज भी सबरीमला के अनुष्ठानों में विशेष भूमिका है; उसका प्रतिनिधि पवित्र आभूषणों, तिरुवाभरणम, की शोभायात्रा के साथ चलता है।

वर्तमान संरचना का प्रलेखित इतिहास कहीं अधिक हाल का है। केरल पर्यटन के अनुसार पुराना मंदिर 1950 में आग से नष्ट हो गया था और फिर पुनर्निर्मित किया गया, और तभी पत्थर की प्रतिमा के स्थान पर वह पंचलोह (पाँच धातुओं की) मूर्ति स्थापित की गई जिसकी आज पूजा होती है। अठारह सीढ़ियों को 1985 में पंचलोह से मढ़ा गया और अब वे स्वर्ण-मंडित हैं। 1973 में त्रावणकोर के महाराजा चित्तिरा तिरुनाल बलराम वर्मा ने तंक अंकि भेंट की, जो मंडल पूजा के लिए मूर्ति पर पहनाई जाने वाली स्वर्ण पोशाक है। सबरीमला मुख्य रूप से 20वीं सदी के उत्तरार्ध में एक विशाल तीर्थ केंद्र बना।

हाल के वर्षों में मंदिर दो सार्वजनिक विवादों से गुज़रा है। 2011 में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने केरल हाई कोर्ट को बताया कि पोन्नम्बलमेडु पहाड़ी पर दिखने वाली मकरविलक्कु ज्योति हर वर्ष लोगों द्वारा जलाई जाती है। भक्त अलग से मकर ज्योति की वंदना करते हैं, जो मकर संक्रांति पर आकाश में दिखने वाला एक तारा है। लगभग 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाएँ परंपरागत रूप से यह तीर्थयात्रा नहीं करती रही हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि सभी आयु की महिलाएँ प्रवेश कर सकती हैं। पुनर्विचार याचिकाएँ नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजी गईं, जिसने अप्रैल–मई 2026 में मामले की सुनवाई की और 14 मई 2026 को अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक फ़ैसले की प्रतीक्षा थी, इसलिए पाठक बाद के घटनाक्रम की जानकारी अवश्य लें।

Architecture and sacred features

केरल पर्यटन के वर्णन के अनुसार गर्भगृह (श्रीकोविल) की छत स्वर्ण-मढ़ी है जिस पर कलश शोभित हैं, और यह मंडपों, बलिक्कलपुरा तथा स्वर्ण-मढ़े ध्वजस्तंभ के साथ आसपास की भूमि से काफ़ी ऊँचे चबूतरे पर स्थित है। भीतर जाने का एकमात्र विधिवत मार्ग अठारह सीढ़ियाँ हैं। इनके आधार की रक्षा द्वारपाल वलिय कडुत्त स्वामी और करुप्प स्वामी करते हैं, और पास ही आऴि है, एक पवित्र अग्निकुंड जिसमें तीर्थयात्री घी से खाली हुए नारियल डालते हैं। मुख्य मंदिर के दक्षिण-पश्चिम में गणपति का मंदिर है, और मालिकप्पुरत्तम्मा का मंदिर थोड़ी ही दूरी पर है।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की सूची के अनुसार (अक्टूबर 2026 में जाँचा गया), sabarimalaonline.org पर वर्चुअल-क्यू प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग सभी तीर्थयात्रियों के लिए अनिवार्य है। केवल इरुमुडि लेकर आने वाले भक्तों को ही अठारह सीढ़ियाँ चढ़ने की अनुमति है। तीर्थयात्री परंपरागत रूप से 41 दिन का व्रतम पूरा करते हैं और काले वस्त्र पहनते हैं।

खुलने की तिथियाँ, दर्शन का समय, पार्किंग के नियम और प्रवेश के नियम हर सीज़न में बदलते रहते हैं और सुप्रीम कोर्ट के लंबित फ़ैसले से प्रभावित हो सकते हैं। यात्रा से पहले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड से वर्तमान व्यवस्थाओं की पुष्टि कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (Travancore Devaswom Board) (official website) before travelling. Last reviewed 5 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at सबरिमला श्री अयप्पा मंदिर

वृश्चिकम–धनु (नवंबर के मध्य से दिसंबर के अंत तक)

मंडल पूजा

41 दिन का मंडल सीज़न वृश्चिकम की पहली तारीख को शुरू होता है और मंडल पूजा के साथ समाप्त होता है, जब मूर्ति को आरन्मुला पार्थसारथी मंदिर से शोभायात्रा में लाई गई तंक अंकि पहनाई जाती है।

मकरम (जनवरी का मध्य)

मकरविलक्कु

मकर संक्रांति पर तिरुवाभरणम आभूषण पंदलम के वलियकोयिक्कल मंदिर से शोभायात्रा में पहुँचते हैं और मूर्ति को अलंकृत करते हैं, तथा पोन्नम्बलमेडु पर मकरविलक्कु जलाया जाता है। कुछ दिनों बाद सीज़न समाप्त हो जाता है।

मीनम (मार्च–अप्रैल)

पैंकुनि उत्रम (तिरु उत्सवम)

मंदिर का दस दिवसीय वार्षिक उत्सव ध्वजारोहण से शुरू होता है, इसमें पल्लिवेट्टा (अनुष्ठानिक आखेट) शामिल है और इसका समापन आराट्टु, यानी पंपा में पवित्र स्नान, के साथ होता है।

मेडम (अप्रैल)

विषु

मंदिर मलयालम नववर्ष के लिए खुलता है, और भक्तों के भोर में दर्शन के लिए विषुक्कणि सजाई जाती है।

इडवम (मई)

प्रतिष्ठा दिनम (स्थापना दिवस)

कलश पूजा और कलश अभिषेक के साथ मूर्ति की प्रतिष्ठा की वर्षगाँठ मनाई जाती है।

कर्किडकम–चिंगम (अगस्त–सितंबर)

ओणम और निरपुत्तरि

मंदिर निरपुत्तरि, यानी धान की नई बालियों के अर्पण, और ओणम के लिए खुलता है, जब मेलशांति उत्राडम के दिन अय्यप्पा के लिए भोज तैयार करते हैं।

Location

How to Reach सबरिमला श्री अयप्पा मंदिर

वाहन केवल पहाड़ी की तलहटी में स्थित पंपा तक ही जा सकते हैं। वहाँ से तीर्थयात्री पैदल सन्निधानम तक चढ़ते हैं, जिसकी दूरी केरल पर्यटन लगभग 5 किमी बताता है। केरल पर्यटन के अनुसार निकटतम हवाई अड्डे कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 154 किमी) और तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 170 किमी) हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन चेंगन्नूर (लगभग 85 किमी) है, और पत्तनंतिट्टा ज़िला प्रशासन तिरुवल्ला का भी नाम बताता है। KSRTC बसें और टैक्सियाँ इन स्थानों को पंपा से जोड़ती हैं; सीज़न के दौरान वाहनों की पार्किंग निलक्कल बेस कैंप पर संचालित होती है।

पंपा तक के वाहन-मार्ग के अलावा केरल पर्यटन तीन तीर्थ-मार्गों का वर्णन करता है: एरुमेली से करिमला होकर जाने वाला पारंपरिक वन-मार्ग, वंडीपेरियार मार्ग और चालक्कयम मार्ग। वन-मार्ग और नदी तक पहुँच कभी-कभी प्रतिबंधित हो सकती है, उदाहरण के लिए भारी वर्षा में, इसलिए त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड और पत्तनंतिट्टा ज़िला प्रशासन की वर्तमान सूचनाएँ अवश्य देखें।

Location: पत्तनामथित्ता, Kerala, India

Nearest airport: कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी)

Nearest railway station: चेंगन्नूर (Chengannur)

Questions

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सबरिमला श्री अयप्पा मंदिर: Frequently Asked Questions

सबरीमला मंदिर कब खुलता है?

यह मंडल–मकरविलक्कु सीज़न (लगभग नवंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक), हर मलयालम मास के शुरुआती दिनों और विषु, वार्षिक उत्सवम तथा ओणम जैसे पर्वों के लिए खुलता है। सटीक तिथियाँ हर वर्ष त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड द्वारा प्रकाशित की जाती हैं।

क्या सबरीमला के लिए वर्चुअल-क्यू (Virtual-Q) बुकिंग अनिवार्य है?

हाँ। त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के अनुसार sabarimalaonline.org के माध्यम से ऑनलाइन वर्चुअल-क्यू बुकिंग सभी तीर्थयात्रियों के लिए अनिवार्य है।

सबरीमला का 41 दिन का व्रतम क्या है?

यह तीर्थयात्रा से पहले संयम और तपस्या की अवधि है। भक्त माला धारण करते हैं, ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, शाकाहारी भोजन करते हैं, काले वस्त्र पहनते हैं और सादा जीवन जीते हैं। इसकी शुरुआत माला धारण करने की विधि से होती है और समापन तीर्थयात्रा के बाद होता है।

18 सीढ़ियाँ (पदिनेट्टाम्पडि) कौन चढ़ सकता है?

परंपरा के अनुसार, केवल वे तीर्थयात्री जिन्होंने व्रतम रखा है और जो इरुमुडि पोटली लेकर आते हैं, अठारह सीढ़ियाँ चढ़ सकते हैं। पंदलम राजपरिवार के सदस्यों को इरुमुडि ले जाने से छूट है।

क्या मकरविलक्कु की ज्योति प्राकृतिक है?

2011 में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने केरल हाई कोर्ट को बताया था कि पोन्नम्बलमेडु पर मकरविलक्कु हर वर्ष लोगों द्वारा जलाया जाता है। भक्त अलग से मकर संक्रांति पर उदित होने वाले मकर ज्योति तारे की वंदना करते हैं।

क्या महिलाएँ सबरीमला जा सकती हैं?

परंपरागत रूप से रजस्वला आयु (लगभग 10 से 50 वर्ष) की महिलाएँ यह तीर्थयात्रा नहीं करतीं। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी, लेकिन नौ न्यायाधीशों की पीठ ने मई 2026 में पुनर्विचार पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया, इसलिए योजना बनाने से पहले वर्तमान स्थिति अवश्य जाँच लें।

सबरीमला का निकटतम रेलवे स्टेशन कौन-सा है?

केरल पर्यटन (Kerala Tourism) के अनुसार लगभग 85 किमी दूर चेंगन्नूर सबसे निकट रेलवे स्टेशन है। वहाँ से KSRTC बसें और टैक्सियाँ पंपा की ओर चलती हैं।

सबरीमला के तीर्थयात्री एरुमेली की वावर मस्जिद क्यों जाते हैं?

अय्यप्पा के भजनों में वावर को भगवान के साथी के रूप में याद किया जाता है। पारंपरिक मार्ग से जाने वाले तीर्थयात्री एरुमेली की वावर मस्जिद में श्रद्धा अर्पित करते हैं, और सबरीमला में अठारह सीढ़ियों के पास वावर का एक स्थान भी है।