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मोढेरा सूर्य मंदिर

सूर्य temple · Gujarat, India

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उत्तर गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित मोढेरा का सूर्य मंदिर 11वीं सदी का मंदिर है, जो सूर्य देव को समर्पित है। यह पुष्पावती नदी के पास स्थित है और चालुक्य (सोलंकी) राजा भीम प्रथम के समय, संभवतः 1026–27 ई. में बनाया गया था। आज यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है।

यह परिसर एक ही पूर्व–पश्चिम अक्ष पर बने तीन भागों के लिए जाना जाता है: मंडप सहित मुख्य मंदिर, एक अलग स्तंभयुक्त सभा मंडप, और सामने बना विशाल सीढ़ीदार जलाशय, जिसे सूर्य कुंड या राम कुंड कहा जाता है। दिसंबर 2022 में इस मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जे के लिए भारत की अस्थायी सूची में जोड़ा गया।

Faith & Tradition

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Religious Significance of मोढेरा सूर्य मंदिर

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) मोढेरा को गुजरात में बने अनेक सूर्य मंदिरों में सबसे महत्वपूर्ण बताता है, और इसे कश्मीर के मार्तंड तथा ओडिशा के कोणार्क के साथ भारत के सबसे प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में गिनता है। यूनेस्को की अस्थायी सूची में इसके जुड़ने की घोषणा करते समय सरकार ने इसे अपनी तरह का सबसे प्राचीन मंदिर बताया, जिसने बाद के स्थापत्य और अलंकरण कार्यों की दिशा तय की और जो सोलंकी शैली को उसके श्रेष्ठतम रूप में दर्शाता है।

मोढेरा स्वयं भी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है। स्कंद पुराण में दर्ज परंपरा के अनुसार, रावण के साथ युद्ध के बाद श्रीराम ने मोढेरक नामक गाँव में यज्ञ किया था, और यह स्थान मोढ ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा माना जाता है। ये पारंपरिक कथाएँ हैं, पुरातात्विक निष्कर्ष नहीं।

Heritage

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History of मोढेरा सूर्य मंदिर

IGNCA इस मंदिर का समय लगभग 1026–27 ई. बताता है, जो चालुक्य राजा भीम प्रथम (लगभग 1022–1063 ई.) का शासनकाल था। मोढेरा चालुक्यों की राजधानी अणहिलपाटक (पाटन) से लगभग 24 किमी दक्षिण में स्थित है।

बाद की शताब्दियों में मंदिर को भारी क्षति पहुँची। IGNCA के विवरण में एक पुराने वर्णन का उल्लेख है, जिसके अनुसार आक्रमणकारियों ने मूर्तियों को विकृत कर दिया और मंदिर का ऊपरी भाग उड़ा दिया, जिससे उसका शिखर नष्ट हो गया। तब से यह मंदिर बिना शिखर के ही खड़ा है।

ASI ने मोढेरा के 'सूर्य मंदिर, सूर्य कुंड, आसपास के अन्य मंदिरों और खुली मूर्तियों' को गुजरात के केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में सूचीबद्ध किया है। 20 दिसंबर 2022 को The Hindu ने बताया कि इस मंदिर को गुजरात के वडनगर नगर और त्रिपुरा की उनाकोटि मूर्तियों के साथ यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में जोड़ा गया है।

Architecture and sacred features

IGNCA के अनुसार मुख्य मंदिर एक ऊँचे आधार पर बना है और इसमें गर्भगृह तथा एक बंद मंडप (गूढ़मंडप) हैं, और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। भीतर से इसका माप लगभग 51 फीट 9 इंच x 25 फीट 8 इंच है, जिसमें से लगभग आधा भाग गर्भगृह का है। मंडप के भीतर आलों में सूर्य की प्रतिमाएँ हैं, और स्तंभों व सरदलों पर रामायण के दृश्य अंकित हैं। सामने एक अलग सभा मंडप है, जिसे स्थानीय रूप से सीता चावड़ी कहा जाता है और जिस पर महाभारत के दृश्य उकेरे गए हैं; उसके आगे एक औपचारिक तोरण के दो स्तंभ शेष हैं, हालाँकि स्वयं तोरण अब नहीं रहा।

तोरण से सीढ़ियाँ नीचे सूर्य कुंड तक जाती हैं, जो एक आयताकार जलाशय है और IGNCA के अनुसार लगभग 176 फीट x 120 फीट का है; इसमें चबूतरों और सीढ़ियों की पंक्तियाँ जल तक पहुँचती हैं। इसके चारों ओर बने छोटे देवालयों में शेषनाग पर शयन करते विष्णु, त्रिविक्रम और देवी शीतला जैसी प्रतिमाएँ हैं। मंदिर पूर्वमुखी है; IGNCA द्वारा उद्धृत विवरण के अनुसार विषुव के दिनों में उगते सूर्य की किरणें द्वारों से होकर गर्भगृह की प्रतिमा तक पहुँचें, ऐसी योजना थी।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

यह मंदिर ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए स्मारक के सामान्य नियम लागू होते हैं: नक्काशी पर न चढ़ें और न ही उसे छुएँ, तथा स्थल के कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें। प्रवेश टिकट, खुलने का समय और कोई लाइट-एंड-साउंड शो अधिकारियों द्वारा तय किए जाते हैं; यात्रा से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या गुजरात पर्यटन (Gujarat Tourism) से वर्तमान व्यवस्था की पुष्टि कर लें।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) before travelling. Last reviewed 5 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at मोढेरा सूर्य मंदिर

जनवरी, उत्तरायण के बाद

उत्तरार्ध महोत्सव (मोढेरा नृत्य महोत्सव)

उत्तरायण के कुछ समय बाद सूर्य मंदिर में आयोजित होने वाला शास्त्रीय नृत्य महोत्सव, जो सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा का प्रतीक है; 2025 के आयोजन में भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, कथक, कथकली, मणिपुरी और अन्य नृत्य शैलियाँ प्रस्तुत की गईं।

Location

How to Reach मोढेरा सूर्य मंदिर

महेसाणा जिला प्रशासन के अनुसार निकटतम हवाई अड्डा सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद (लगभग 94 किमी) और निकटतम रेलवे स्टेशन मेहसाणा जंक्शन (लगभग 28 किमी) है। सड़क मार्ग से मंदिर मेहसाणा शहर से लगभग 35 किमी दूर है।

जिला प्रशासन के अनुसार सड़क मार्ग से मोढेरा पाटन और बेचराजी के बीच राज्य राजमार्ग 7 पर स्थित है। मेहसाणा या अहमदाबाद से टैक्सी और बसें ली जा सकती हैं।

Location: Gujarat, India

Nearest airport: सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद (महेसाणा जिला प्रशासन के अनुसार लगभग 94 किमी)

Nearest railway station: मेहसाणा जंक्शन (महेसाणा जिला प्रशासन के अनुसार लगभग 28 किमी)

Questions

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मोढेरा सूर्य मंदिर: Frequently Asked Questions

मोढेरा सूर्य मंदिर किसने बनवाया?

इसका निर्माण चालुक्य (सोलंकी) राजा भीम प्रथम के शासनकाल में हुआ था। IGNCA इसके निर्माण का समय लगभग 1026–27 ई. बताता है।

मोढेरा सूर्य मंदिर किस देवता को समर्पित है?

यह सूर्य देव को समर्पित है। मुख्य मंडप के भीतर आलों में सूर्य की प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

मोढेरा का सूर्य कुंड क्या है?

यह मंदिर के सामने बना विशाल आयताकार सीढ़ीदार जलाशय है, जिसे राम कुंड भी कहा जाता है। IGNCA के अनुसार इसका आकार लगभग 176 x 120 फीट है, और इसके किनारों व कोनों पर छोटे देवालय बने हैं।

मोढेरा सूर्य मंदिर का शिखर क्यों नहीं है?

बाद की शताब्दियों में मंदिर को क्षति पहुँची। IGNCA द्वारा उद्धृत एक पुराने विवरण के अनुसार मंदिर का ऊपरी भाग, उसके शिखर सहित, उड़ा दिया गया था।

क्या मोढेरा सूर्य मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है?

अभी नहीं। इसे दिसंबर 2022 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में जोड़ा गया, जो संभावित नामांकन की दिशा में पहला कदम है।

मोढेरा कैसे पहुँचें?

महेसाणा जिला प्रशासन के अनुसार निकटतम हवाई अड्डा अहमदाबाद में (लगभग 94 किमी) और निकटतम रेलवे स्टेशन मेहसाणा जंक्शन (लगभग 28 किमी) है। यह स्थल पाटन और बेचराजी के बीच राज्य राजमार्ग 7 पर स्थित है।

मोढेरा नृत्य महोत्सव कब होता है?

उत्तरार्ध महोत्सव जनवरी में उत्तरायण के बाद मंदिर परिसर में आयोजित होता है। 2025 में यह 18 और 19 जनवरी को हुआ था।