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श्री वराहस्वामी मंदिर

विष्णु temple · Andhra Pradesh, India

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श्री भू वराह स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमला में भगवान विष्णु के वराह (शूकर) अवतार का मंदिर है। इसका प्रशासन करने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अनुसार यह श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के उत्तर में स्वामी पुष्करिणी सरोवर के तट पर स्थित है।

तिरुमला आने वाले हर तीर्थयात्री के लिए यह मंदिर महत्वपूर्ण है। लंबी परंपरा के अनुसार, भक्त भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन से पहले भू वराह स्वामी के दर्शन करते हैं।

Faith & Tradition

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Religious Significance of श्री वराहस्वामी मंदिर

TTD द्वारा दर्ज कथा के अनुसार, तिरुमला मूल रूप से आदि वराह क्षेत्र, अर्थात वराह का धाम, के नाम से जाना जाता था। TTD ब्रह्म पुराण का हवाला देते हुए बताता है कि वेंकटेश्वर के अनुरोध पर वराह ने उन्हें पहाड़ियों पर भूमि प्रदान की। कहा जाता है कि कृतज्ञता स्वरूप वेंकटेश्वर ने वराह को प्रथम दर्शन और प्रथम नैवेद्य (भोग) का विशेषाधिकार दिया।

इसी परंपरा के कारण TTD वेंकटेश्वर से पहले भू वराह स्वामी के दर्शन को आवश्यक बताता है। 2011 की Times of India की एक रिपोर्ट के अनुसार, तिरुमला में आज भी पहली घंटी, पूजा और नैवेद्य भू वराह स्वामी को ही अर्पित किए जाते हैं। ये आस्था के विषय हैं और यहाँ परंपरा के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।

Heritage

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History of श्री वराहस्वामी मंदिर

TTD के अनुसार, जब वेंकटेश्वर पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब वराह पहले से ही पहाड़ियों पर विराजमान थे; पवित्र परंपरा में इस मंदिर का यही स्थान है। देखे गए स्रोतों में मंदिर के निर्माण के तिथियुक्त ऐतिहासिक अभिलेख नहीं मिले, इसलिए यहाँ स्थापना या जीर्णोद्धार की कोई तिथि नहीं दी गई है।

यह मंदिर मुख्य मंदिर के अनुष्ठान-पंचांग से गहराई से जुड़ा है। The Hindu ने 2013 में बताया था कि वार्षिक ब्रह्मोत्सवम के अंतिम दिन, पुष्करिणी में चक्रस्नानम से पहले उत्सव मूर्तियों और चक्रत्ताळ्वार को मुख्य मंदिर से भू वराह स्वामी मंदिर ले जाया गया।

Plan Your Visit

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Darshan and Visitor Information

TTD मंदिर के दैनिक दर्शन का समय दो सत्रों, सुबह और शाम, में सूचीबद्ध करता है (अक्टूबर 2026 में जाँचा गया)। उत्सवों के दौरान समय बदल सकता है, इसलिए यात्रा से पहले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम से वर्तमान व्यवस्था की पुष्टि कर लें। तिरुमला के लिए TTD के सामान्य ड्रेस कोड और आचरण नियम यहाँ भी लागू होते हैं।

Timings and arrangements change with seasons and festivals. Confirm current details with तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) (official website) before travelling. Last reviewed 5 October 2026.

Sacred Calendar

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Festivals at श्री वराहस्वामी मंदिर

श्रावण (अगस्त–सितंबर)

वराह जयंती

TTD श्रावण मास में श्रवण नक्षत्र के दिन भू वराह स्वामी का वार्षिक विशेष अभिषेक करता है; समाचार रिपोर्टों में दूध, घी, शहद और नारियल पानी से स्नपन तिरुमंजनम का वर्णन मिलता है।

सितंबर–अक्टूबर

ब्रह्मोत्सवम – चक्रस्नानम का दिन

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मोत्सवम के अंतिम दिन स्वामी पुष्करिणी में पवित्र स्नान से पहले उत्सव मूर्तियों और चक्रत्ताळ्वार को इस मंदिर में ले जाया जाता है।

Location

How to Reach श्री वराहस्वामी मंदिर

यह मंदिर तिरुमला मंदिर नगर के भीतर, स्वामी पुष्करिणी के पास और मुख्य वेंकटेश्वर मंदिर के ठीक उत्तर में है, इसलिए तीर्थयात्री प्रायः अपनी तिरुमला यात्रा के दौरान पैदल ही यहाँ दर्शन कर लेते हैं।

तिरुमला पहुँचने के लिए यात्री पहले तिरुपति आते हैं, जिसे TTD सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़ा बताता है। TTD के अनुसार तीर्थयात्री रेणिगुंटा या गुडूर रेलवे स्टेशन पर उतरकर सड़क मार्ग से तिरुपति जा सकते हैं, या चेन्नई अथवा बेंगलुरु तक हवाई यात्रा करके वहाँ से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। तिरुपति से तिरुमला घाट रोड या पैदल मार्गों से पहुँचा जाता है।

Location: Andhra Pradesh, India

Nearest railway station: तिरुपति (TTD के अनुसार रेणिगुंटा भी)

Questions

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श्री वराहस्वामी मंदिर: Frequently Asked Questions

तिरुमला में श्रद्धालु वेंकटेश्वर से पहले वराह स्वामी के दर्शन क्यों करते हैं?

TTD द्वारा दर्ज कथा के अनुसार, वराह ने पहाड़ियों पर भूमि वेंकटेश्वर को प्रदान की थी, और बदले में वेंकटेश्वर ने वराह को प्रथम दर्शन और प्रथम नैवेद्य का अधिकार दिया। इसीलिए TTD पहले भू वराह स्वामी के दर्शन करने को परंपरा बताता है।

भू वराह स्वामी मंदिर ठीक-ठीक कहाँ स्थित है?

यह तिरुमला में मुख्य श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के उत्तर में, स्वामी पुष्करिणी के तट पर स्थित है।

मंदिर का प्रबंधन कौन करता है?

इसका प्रशासन तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) करता है, जो इसे तिरुमला के मंदिरों में सूचीबद्ध करता है।

तिरुमला में वराह जयंती कब मनाई जाती है?

TTD इसे हर वर्ष श्रावण मास में श्रवण नक्षत्र के दिन, प्रायः अगस्त या सितंबर में, विशेष अभिषेक के साथ मनाता है।

आदि वराह क्षेत्र क्या है?

TTD और The Hindu की रिपोर्टों के अनुसार, यह तिरुमला का पारंपरिक नाम है, जिसका अर्थ है वराह का निवास स्थान।

मंदिर के दर्शन का समय क्या है?

TTD सुबह और शाम के दर्शन सत्र सूचीबद्ध करता है। समय बदल सकता है, इसलिए यात्रा से पहले TTD से पुष्टि कर लें।