राम से बड़ा राम का नाम है। ✨ 🌺

अतः आइये जानते हैं 5 चमत्कारी 'राम मंत्रों' के बारे में:

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1. राम मूल मंत्र

🔹 ।।ॐ श्री रामाय नमः।।

2. राम तारक मंत्र

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🔹 ।।श्री राम जय राम जय जय राम।।

3. राम गायत्री मंत्र

🔹 ।।ॐ दशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि, तन्नो राम प्रचोदयात्।।

4. राम ध्यान मंत्र

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🔹 ॐ आपदामपहर्तारम् दाताराम् सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामम् श्रीरामम् भूयो-भूयो नमाम्यहम्।।

5. कोदण्ड राम मंत्र

🔹 ।।श्री राम जय राम कोदण्ड राम।।

🌿 श्रीराम भक्तों पर सदा कृपा बनाए रखें! 🌿 🙏🚩

राम नाम को 'तारक मंत्र' क्यों कहा जाता है?

वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण दोनों में यह उल्लेख मिलता है कि 'राम' नाम दो अक्षरों — 'र' और 'म' — से बना है। 'र' अग्नि बीज है जो पापों को भस्म करता है, और 'म' अमृत बीज है जो जीवन को पोषण देता है। इस संयोग के कारण यह नाम समस्त मंत्रों का सार माना जाता है।

काशी विश्वनाथ की परंपरा में यह मान्यता अत्यंत प्रचलित है कि भगवान शिव काशी में मरने वाले प्रत्येक जीव के कान में 'राम तारक मंत्र' का उपदेश देते हैं। इसीलिए इसे 'तारक मंत्र' कहते हैं — जो संसार-सागर से तारता है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है: 'राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।'

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पाँचों राम मंत्रों के जाप की सही विधि और समय क्या है?

राम मूल मंत्र 'ॐ श्री रामाय नमः' का जाप प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में, स्नान के पश्चात तुलसी की माला से 108 बार करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस मंत्र का संबंध भगवान राम के षोडशोपचार पूजन से है और यह उपासक की भक्ति को सुदृढ़ करता है।

राम गायत्री मंत्र — 'ॐ दशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि, तन्नो राम प्रचोदयात्' — का जाप सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए, क्योंकि गायत्री छंद के सभी मंत्र सूर्य-शक्ति से अनुप्राणित होते हैं। यह मंत्र बुद्धि, विवेक और निर्णय-शक्ति को प्रखर करता है।

कोदण्ड राम मंत्र विशेषतः उन भक्तों के लिए प्रभावशाली माना जाता है जो भय, शत्रु-बाधा या न्यायिक संकट से पीड़ित हों। 'कोदण्ड' श्रीराम के उस धनुष का नाम है जो अपराजेय शक्ति का प्रतीक है। आंध्र प्रदेश के कोदण्डराम स्वामी मंदिर (वोंटिमिट्टा) में इस मंत्र की विशेष साधना की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

राम ध्यान मंत्र में वर्णित 'आपदाओं का नाश' — शास्त्रीय आधार क्या है?

राम ध्यान मंत्र 'ॐ आपदामपहर्तारम् दाताराम् सर्वसम्पदाम्' वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड की स्तुति परंपरा से जुड़ा है। इसमें श्रीराम को 'आपदाओं को हरने वाला' और 'समस्त सम्पदाओं का दाता' कहा गया है — ये दोनों विशेषण उनके राज्याभिषेक के संदर्भ में वर्णित गुणों से मेल खाते हैं।

'लोकाभिरामम्' पद विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। इसका अर्थ है — जो तीनों लोकों को आनंदित करते हैं। विष्णु पुराण में भगवान विष्णु के दशावतारों में राम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के रूप में वर्णित किया गया है, अर्थात् वे आदर्श जीवन-मूल्यों के मूर्त स्वरूप हैं। इसी कारण इस मंत्र का नित्य जाप साधक के जीवन में धैर्य और संतुलन लाता है।

तुलसीदास और संत परंपरा में राम मंत्र की महिमा

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में काकभुशुण्डि और गरुड़ के संवाद में स्पष्ट कहा है: 'सकल सिद्धि सुख संपति नाना। दिसि अरु विदिसि भरे भगवाना।' उनके अनुसार राम नाम का जाप करने वाले भक्त को संसार के समस्त सुख और मोक्ष — दोनों स्वयमेव प्राप्त हो जाते हैं।

संत रामदास स्वामी, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु थे, ने 'दासबोध' ग्रंथ में राम नाम को 'सगुण और निर्गुण दोनों का सेतु' बताया है। उनकी स्थापित सज्जनगढ़ (सातारा, महाराष्ट्र) और चाफल की राम मंदिर परंपरा में 'श्री राम जय राम जय जय राम' का कोटि जाप आज भी अनवरत होता है।

कबीर दास ने भी कहा: 'राम नाम जपना, पराया माल अपना' — जिसका आशय है कि राम नाम की शरण लेने वाले को किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं रहती। इस प्रकार निर्गुण और सगुण दोनों धाराओं के संतों ने राम मंत्र की अलौकिक शक्ति को एकमत से स्वीकार किया है।

राम मंत्र जाप के समय मन की एकाग्रता कैसे साधें?

मंत्र-शास्त्र के अनुसार जाप तीन प्रकार का होता है — वाचिक (मुख से उच्चारण), उपांशु (होंठ हिलाकर धीरे-धीरे) और मानसिक (मन में)। इनमें मानसिक जाप को सर्वाधिक फलदायी माना गया है क्योंकि इसमें मन की समस्त शक्ति एक ही बिंदु पर केंद्रित होती है। नारद भक्ति सूत्र में भी कहा है कि भक्ति का चरमोत्कर्ष तभी होता है जब साधक का मन निरंतर ईश्वर-नाम में लीन रहे।

एकाग्रता के लिए अयोध्या, चित्रकूट या रामेश्वरम् जैसे तीर्थस्थलों की छवि मन में रखकर जाप करना उपयोगी होता है। इसके अतिरिक्त श्रीराम के धनुर्धारी स्वरूप का ध्यान करते हुए — जैसा कि रामरक्षास्तोत्र में वर्णित है — मंत्र जाप करने से मन शीघ्र स्थिर होता है।