त्योहार की तिथियाँ: 6 नवंबर – 10 नवंबर, 2026
मुख्य दिन (लक्ष्मी पूजा): रविवार, 8 नवंबर, 2026
विषय: पाँचों पावन दिनों के लिए मिठाइयाँ, नमकीन और उत्सव के व्यंजन


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दिन 1 — 6 नवंबर, शुक्रवार | धनतेरस

महत्व: भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) और माँ लक्ष्मी की पूजा; सोना-चाँदी खरीदना शुभ माना जाता है

मुख्य व्यंजन: काजू कतली (काजू की हीरे के आकार की बर्फी)

दिवाली पर सबसे ज़्यादा उपहार में दी जाने वाली मिठाई — चाँदी के वर्क से सजी, मुलायम, मुँह में घुल जाने वाली काजू बर्फी। घर पर ताज़ा बनाई गई यह मिठाई किसी भी मिठाई की दुकान को मात देती है।

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सामग्री (लगभग 30 टुकड़े बनते हैं)

  • 2 कप कच्चे काजू (बिना नमक वाले)
  • 1 कप चीनी
  • ½ कप पानी
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच घी (चिकना करने के लिए)
  • सजाने के लिए चाँदी का वर्क (खाने योग्य चाँदी की परत) — वैकल्पिक

विधि

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  1. काजू को सूखे ब्लेंडर में बारीक पीस लें। ज़्यादा देर न पीसें, वरना काजू तेल छोड़ने लगेंगे।
  2. भारी तले की कड़ाही में चीनी और पानी मिलाएँ। मध्यम आँच पर एक तार की चाशनी बनने तक पकाएँ — उँगलियों के बीच एक बूँद रखने पर एक तार बनना चाहिए।
  3. आँच धीमी करें; काजू पाउडर और इलायची डालें। कलछी से लगातार चलाते रहें।
  4. 8–10 मिनट पकाएँ, जब तक मिश्रण कड़ाही के किनारे न छोड़ दे और आटे जैसा न बन जाए।
  5. गरम रहते ही चिकनी की हुई थाली में निकालें। चिकने कलछे या बेलन से 5 मिमी मोटाई तक फैलाएँ।
  6. ऊपर हल्के हाथ से चाँदी का वर्क लगाएँ। 20 मिनट ठंडा करें, फिर तेज़ चाकू से हीरे के आकार में काटें।

खास सुझाव: अगर बेलते समय आटा फटे, तो वह बहुत सूखा है — उसमें ½ छोटा चम्मच गुनगुना दूध मिलाकर गूँधें। अगर चिपके, तो 2–3 मिनट और पकाएँ।


बोनस: धनतेरस का नमकीन — नमकीन मठरी

कुरकुरी, परतदार तली हुई मठरी — दिवाली का पारंपरिक नाश्ता, जिसे मेहमानों के साथ बाँटने के लिए बड़ी मात्रा में बनाया जाता है।

सामग्री

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  • 2 कप मैदा
  • ¼ कप बारीक सूजी
  • ½ कप घी या तेल (मोयन के लिए)
  • 1 छोटा चम्मच अजवाइन
  • 1 छोटा चम्मच जीरा
  • स्वादानुसार नमक
  • गूँधने के लिए ठंडा पानी
  • तलने के लिए तेल

विधि

  1. मैदा, सूजी, अजवाइन, जीरा और नमक मिलाएँ। घी डालकर हाथों से तब तक मसलें जब तक मिश्रण ब्रेडक्रम्ब जैसा न हो जाए।
  2. धीरे-धीरे ठंडा पानी डालकर सख़्त आटा गूँध लें। ढककर 20 मिनट रखें।
  3. आटे की छोटी लोइयाँ बनाएँ; मोटी (लगभग 5 मिमी) पूरियाँ बेलें। काँटे से चारों ओर छेद करें ताकि वे फूलें नहीं।
  4. मध्यम-धीमी आँच पर 12–15 मिनट तक, बीच-बीच में पलटते हुए, सुनहरा और अंदर तक कुरकुरा होने तक तलें।
  5. कागज़ पर निकालकर तेल सोखने दें; पूरी तरह ठंडा होने पर एयरटाइट डिब्बे में रखें।

खास सुझाव: धीमी आँच पर तलना ही राज़ है — तेज़ आँच बाहर से भूरा कर देती है, पर बीच का हिस्सा कच्चा और नरम रह जाता है।


दिन 2 — 7 नवंबर, शनिवार | छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी)

महत्व: राक्षस नरकासुर पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय का उत्सव; भोर में तेल स्नान की परंपरा; 14 दीये जलाना

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मुख्य व्यंजन: बेसन के लड्डू

सौंधी, खुशबूदार बेसन के लड्डू — दिवाली की अनिवार्य मिठाई, जो 2–3 हफ़्ते तक अच्छी रहती है और प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है।

सामग्री (लगभग 20 लड्डू बनते हैं)

  • 2 कप बेसन, मोटा (दरदरा) बेसन बेहतर
  • ¾ कप घी
  • 1 कप पिसी चीनी (स्वादानुसार कम-ज़्यादा करें)
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • 2 बड़े चम्मच कटे बादाम, काजू और पिस्ता
  • एक चुटकी जायफल (वैकल्पिक)

विधि

  1. भारी कड़ाही में धीमी आँच पर घी गरम करें। बेसन डालें और लगातार चलाते हुए 20–25 मिनट तक भूनें, जब तक वह सुनहरा-भूरा न हो जाए और उससे गहरी सौंधी खुशबू न आने लगे। धैर्य रखें — कम भुना बेसन लड्डू का स्वाद बिगाड़ देता है।
  2. आँच से उतारें; कमरे के तापमान तक ठंडा होने दें (ज़रूरी — गरम में चीनी डालने से गुठलियाँ बन जाती हैं)।
  3. पिसी चीनी, इलायची, जायफल और कटे मेवे मिलाएँ।
  4. जब मिश्रण इतना गुनगुना रह जाए कि हाथ में लिया जा सके, तब चिकने गोल लड्डू बाँधें।
  5. हर लड्डू पर पिस्ते का एक टुकड़ा लगाएँ। एयरटाइट डिब्बे में रखें।

खास सुझाव: पूरे समय धीमी आँच पर भूनना बेहद ज़रूरी है — मिश्रण चखकर देखें; आँच से उतारने से पहले उसमें कच्चे बेसन का ज़रा भी स्वाद नहीं होना चाहिए।


बोनस: छोटी दिवाली विशेष — चकली (मुरुक्कु)

कुरकुरी गोल-घुमावदार नमकीन — दक्षिण भारत की दिवाली की खास पहचान, जिसे पूरे भारत में पसंद किया जाता है।

सामग्री

  • 2 कप चावल का आटा
  • ½ कप उड़द दाल का आटा (भुना हुआ)
  • 1 छोटा चम्मच जीरा
  • 1 छोटा चम्मच तिल
  • ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच मक्खन
  • स्वादानुसार नमक
  • आटा गूँधने के लिए पानी
  • तलने के लिए तेल

विधि

  1. सारी सूखी सामग्री मिलाएँ; मक्खन मसलकर मिलाएँ। धीरे-धीरे गुनगुना पानी डालकर चिकना, लचीला आटा गूँधें।
  2. चकली प्रेस (मुरुक्कु मेकर) में आटा भरें। तेल लगे कागज़ पर या सीधे गरम तेल में गोल-गोल घेरे बनाते हुए दबाएँ।
  3. मध्यम आँच पर हर तरफ़ 3–4 मिनट कुरकुरी और सुनहरी होने तक तलें। ठंडी होने पर ये और कुरकुरी हो जाएँगी।
  4. तेल अच्छी तरह निथार लें; ठंडा करके रखें।

खास सुझाव: पहले एक चकली तलकर देखें — अगर तेल में डालते ही टूट जाए तो आटे में और पानी चाहिए; अगर तेल सोखे तो पानी कम करें।


दिन 3 — 8 नवंबर, रविवार | मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजा)

महत्व: सबसे पवित्र रात्रि — प्रदोष काल में माँ लक्ष्मी की पूजा (लक्ष्मी पूजा मुहूर्त नई दिल्ली में 5:54 PM – 7:50 PM, मुंबई में 6:27 PM – 8:27 PM); दीये जलाना; परिवार के साथ भोज; आतिशबाज़ी

मुख्य व्यंजन: गुलाब जामुन

मुलायम, चाशनी में डूबे खोए के गोले — भारत की सबसे प्रिय उत्सव मिठाई, जिसे मुख्य दिवाली की रात गरमागरम परोसा जाता है।

सामग्री (लगभग 25 नग बनते हैं)

  • 1 कप खोया (मावा), मसला हुआ
  • 3 बड़े चम्मच मैदा
  • 1 बड़ा चम्मच बारीक सूजी
  • एक चुटकी बेकिंग सोडा
  • 2 बड़े चम्मच दूध (बाँधने के लिए)
  • तलने के लिए तेल / घी

चाशनी के लिए:

  • 2 कप चीनी
  • 2 कप पानी
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • केसर के 4–5 धागे
  • 1 छोटा चम्मच गुलाब जल

विधि

  1. पहले चाशनी बनाएँ: चीनी और पानी को चीनी घुलने तक उबालें। केसर, इलायची और गुलाब जल डालें। धीमी आँच पर गरम रखें।
  2. खोया, मैदा, सूजी और बेकिंग सोडा मिलाकर नरम आटा गूँधें। बाँधने भर के लिए ही दूध डालें — ज़्यादा न गूँधें।
  3. चिकने, बिना दरार वाले गोले बनाएँ (कंचे से थोड़े छोटे — तलने पर ये फूलेंगे)।
  4. धीमी-मध्यम आँच पर तेल गरम करें। गोले धीरे से डालें; लगातार घुमाते हुए 8–10 मिनट तक धीरे-धीरे तलें, जब तक चारों ओर से गहरे कत्थई रंग के न हो जाएँ।
  5. तुरंत गरम चाशनी में डालें। परोसने से पहले कम से कम 2 घंटे भीगने दें; रात भर भिगोना सबसे अच्छा है।

खास सुझाव: धीमी आँच पर तलना ज़रूरी है — तेज़ आँच बाहर से भूरा कर देती है पर बीच का हिस्सा कच्चा रह जाता है। तेल इतना गरम हो कि गोले धीरे-धीरे ऊपर आएँ, तुरंत नहीं।


मुख्य दिवाली का भोजन: पनीर मखनी + लच्छा पराठा

मुख्य दिवाली की रात के लिए एक उत्सव भरा भोजन।

पनीर मखनी की सामग्री

  • 400 ग्राम पनीर (टुकड़ों में कटा)
  • 4 बड़े टमाटर (उबालकर छीले और प्यूरी किए हुए)
  • 1 बड़ा प्याज़ (पिसा और भुना हुआ)
  • 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट
  • 2 बड़े चम्मच मक्खन + 1 बड़ा चम्मच तेल
  • 1 छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
  • ½ छोटा चम्मच गरम मसाला
  • 100 मिली ताज़ी क्रीम
  • 1 छोटा चम्मच चीनी
  • स्वादानुसार नमक
  • अंत में डालने के लिए कसूरी मेथी (सूखी मेथी पत्ती)

विधि

  1. मक्खन + तेल गरम करें; प्याज़ का पेस्ट सुनहरा होने तक भूनें। अदरक-लहसुन पेस्ट डालें; 2 मिनट पकाएँ।
  2. टमाटर प्यूरी, कश्मीरी मिर्च और धनिया पाउडर डालें; मध्यम आँच पर 15 मिनट, तेल अलग होने तक पकाएँ।
  3. चिकना पीस लें; वापस कड़ाही में डालें। पनीर के टुकड़े और ½ कप पानी डालें; 8 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ।
  4. क्रीम, चीनी, नमक और गरम मसाला मिलाएँ। कसूरी मेथी हथेलियों के बीच मसलकर अंत में डालें।
  5. लच्छा पराठे के साथ परोसें (गेहूँ के आटे का परतदार पराठा, जिसे बेलने से पहले आटे को चुन्नटों में मोड़कर बनाया जाता है)।

खास सुझाव: बिल्कुल अंत में डाली गई कसूरी मेथी स्वाद में कमाल का फ़र्क लाती है — रेस्तराँ जैसे स्वाद का यही राज़ है।


दिन 4 — 9 नवंबर, सोमवार | गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)

महत्व: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने का उत्सव; अन्नकूट (भोजन का पर्वत) — श्रीकृष्ण को 56 व्यंजन (छप्पन भोग) अर्पित किए जाते हैं; इसे पड़वा (गुजरात और महाराष्ट्र में नववर्ष) भी कहते हैं

मुख्य व्यंजन: पंचरत्न दाल (पाँच दालों वाली दाल)

पाँच दालों से बनी पौष्टिक, उत्सव भरी दाल — परंपरा से भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित अन्नकूट भोग का हिस्सा।

सामग्री

  • हर एक ¼ कप: चना दाल, मूँग दाल, मसूर दाल, तुअर दाल, उड़द दाल
  • 2 बड़े चम्मच घी
  • 1 छोटा चम्मच जीरा
  • 2 सूखी लाल मिर्च
  • 1 बड़ा प्याज़ (बारीक कटा)
  • 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट
  • 2 टमाटर (कटे हुए)
  • 1 छोटा चम्मच हल्दी
  • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
  • ½ छोटा चम्मच गरम मसाला
  • स्वादानुसार नमक
  • अंत में डालने के लिए ताज़ा हरा धनिया और नींबू

विधि

  1. पाँचों दालें एक साथ धोकर 30 मिनट भिगोएँ। हल्दी और 3 कप पानी के साथ प्रेशर कुकर में 3–4 सीटी आने तक, नरम होने तक पकाएँ।
  2. कड़ाही में घी गरम करें; जीरा और सूखी मिर्च का तड़का लगाएँ।
  3. प्याज़ डालें; सुनहरा होने तक भूनें। अदरक-लहसुन पेस्ट डालें; 2 मिनट पकाएँ।
  4. टमाटर और सारे मसाले डालें; तेल अलग होने तक पकाएँ (10 मिनट)।
  5. पकी हुई दाल मसाले में डालें; साथ में 10 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ। पानी से गाढ़ापन ठीक करें।
  6. नींबू का रस और ताज़ा हरा धनिया डालकर तैयार करें। चावल या चपाती के साथ परोसें।

खास सुझाव: पकी दाल का एक कलछी भर हिस्सा मसलकर वापस मिला दें — इससे बिना कोई स्टार्च मिलाए दाल प्राकृतिक रूप से गाढ़ी हो जाती है।


गोवर्धन विशेष मिठाई: चूरमा लड्डू

राजस्थान के देसी, गेहूँ के आटे के लड्डू — गोवर्धन पूजा के भोग का मुख्य हिस्सा।

सामग्री

  • 2 कप गेहूँ का आटा
  • ½ कप + 2 बड़े चम्मच घी
  • ¾ कप पिसी चीनी
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • 2 बड़े चम्मच कटे सूखे मेवे

विधि

  1. गेहूँ के आटे में 2 बड़े चम्मच घी मसलकर भुरभुरा करें। बस इतना पानी डालें कि सख़्त आटा गुँध जाए। 15 मिनट रखें।
  2. मोटी रोटियाँ बनाएँ; सूखे तवे पर धीमी आँच पर दोनों तरफ़ से पूरी तरह पकने और हल्की सख़्त होने तक सेंकें।
  3. रोटियों के टुकड़े करें; ब्लेंडर में दरदरा पीस लें।
  4. गरम चूरमे में बचा हुआ घी, पिसी चीनी, इलायची और सूखे मेवे मिलाएँ।
  5. गरम रहते ही लड्डू बाँधें; ठंडे होने पर ये सख़्त हो जाते हैं।

खास सुझाव: रोटियाँ हल्की गरम रहते ही पीसें — ठंडी रोटियाँ ज़्यादा बारीक और कम दानेदार पिसती हैं।


दिन 5 — 10 नवंबर, मंगलवार | भाई दूज

महत्व: बहनें भाइयों की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं और उनके माथे पर तिलक लगाती हैं; भाई उपहार देते हैं; यमुना जी द्वारा यमराज के स्वागत की कथा से प्रेरित

मुख्य व्यंजन: नारियल बर्फी

मुलायम, खुशबूदार नारियल की बर्फी — भाई दूज की सबसे पारंपरिक मिठाई, जिसे बहनें अपने भाइयों के लिए बनाती हैं।

सामग्री (लगभग 20 टुकड़े बनते हैं)

  • 2 कप ताज़ा या सूखा नारियल (कद्दूकस किया हुआ)
  • 1 कप चीनी
  • ½ कप पानी
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • 1 बड़ा चम्मच घी
  • गुलाब जल की कुछ बूँदें (वैकल्पिक)
  • सजाने के लिए कटे पिस्ता

विधि

  1. अगर ताज़ा नारियल ले रहे हैं, तो उसे कड़ाही में धीमी आँच पर 3–4 मिनट सूखा भून लें। सूखे नारियल के लिए यह चरण छोड़ दें।
  2. चीनी और पानी उबालकर दो तार की चाशनी बनाएँ (उँगलियों के बीच एक बूँद से दो तार बनें)।
  3. कद्दूकस किया नारियल चाशनी में डालें; धीमी आँच पर अच्छी तरह मिलाएँ।
  4. 8–10 मिनट लगातार चलाएँ, जब तक मिश्रण गाढ़ा होकर कड़ाही के किनारे न छोड़ दे।
  5. घी, इलायची और गुलाब जल डालें। चिकनी की हुई ट्रे में डालकर बराबर फैलाएँ।
  6. पिस्ते से सजाएँ। 1 घंटा ठंडा करें; चौकोर या हीरे के आकार में काटें।

खास सुझाव: ताज़े नारियल की बर्फी कमरे के तापमान पर 2 दिन तक चलती है; सूखे नारियल वाली बर्फी 5–7 दिन तक।


भाई दूज विशेष भोजन: सूजी का हलवा + पूरी (प्रसाद भोग)

एक पूरा भोजन, जिसे बहनें परंपरा से भाई दूज पर भाइयों के लिए बनाती हैं।

सूजी के हलवे की सामग्री

  • 1 कप बारीक सूजी
  • ½ कप घी
  • ¾ कप चीनी
  • 2½ कप पानी
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • एक चुटकी केसर
  • काजू, किशमिश और बादाम

विधि

  1. पानी में चीनी और केसर डालकर चीनी घुलने तक उबालें; यह चाशनी गरम रखें।
  2. भारी कड़ाही में घी गरम करें; सूजी डालकर धीमी आँच पर लगातार चलाते हुए 10–12 मिनट तक भूनें, जब तक उसका रंग गहरा सुनहरा न हो जाए और गहरी सौंधी खुशबू न आए।
  3. काजू और किशमिश डालें; 1 मिनट और भूनें।
  4. भुनी सूजी में सावधानी से गरम चाशनी डालें — छींटे उड़ेंगे। जल्दी-जल्दी चलाएँ।
  5. ढककर धीमी आँच पर 5 मिनट पकाएँ, जब तक सारा पानी सोख न लिया जाए। काँटे से हल्का करें; बादाम से सजाएँ।

पूरी: 2 कप आटे में पानी और एक चुटकी नमक मिलाकर सख़्त आटा गूँधें। 15 मिनट रखें। पतली पूरियाँ बेलें; गरम तेल में फूलने और सुनहरी होने तक तलें। गरमागरम परोसें।

खास सुझाव: सूजी को गहरा सुनहरा होने तक भूनना ज़रूरी है — हल्की भुनी सूजी का हलवा कच्चा और फीका लगता है। यहाँ धैर्य ही सारा फ़र्क लाता है।


दिवाली रसोई की ज़रूरी चीज़ें — भंडार की सूची

त्योहार शुरू होने से पहले ये चीज़ें घर में रख लें:


दिवाली 2026 — 5 दिनों के व्यंजन एक नज़र में


आपको जगमगाती, आनंदमय दिवाली 2026 की शुभकामनाएँ — माँ लक्ष्मी आपके घर को समृद्धि, स्नेह और प्रकाश से भर दें। खुशी से पकाइए!


दिवाली 2026 का आशीर्वाद साझा करें

दिवाली 2026 के पाँचों दिनों में घर की रसोई में बनी हर मिठाई एक अर्पण बन जाती है। जब घी गरम होता है और पहला दीया जलता है, तो हमें याद आता है कि दीपक हमारे भीतर का प्रकाश है, और माँ लक्ष्मी की कृपा उस घर में आती है जो प्रेम और मिल-बाँटकर खाए भोजन से भरा हो। जैसा पुरानी कथाएँ बताती हैं, प्रकाश ने सदा अंधकार पर विजय पाई है। काजू कतली परोसने या बेसन के लड्डू बाँधने से पहले अपने परिवार और अपनी मेज़ पर जुटने वाले प्रियजनों के साथ एक हार्दिक आशीर्वाद साझा करें।

दीप श्लोक: दीपक की प्रार्थना

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

Shubham karoti kalyanam arogyam dhana-sampada, shatru-buddhi-vinashaya deepa-jyotir namostu te.

अर्थ: मैं दीपक की उस ज्योति को नमन करता/करती हूँ, जो शुभ और कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देती है तथा शत्रु-बुद्धि (द्वेष) का नाश करती है। कई परिवार शाम का दीया जलाते समय इसका पाठ करते हैं।

दिवाली के लिए लक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

Om Shreem Mahalakshmyai Namah.

अर्थ: महालक्ष्मी को नमस्कार। ‘श्रीं’ वह बीज अक्षर है जो परंपरा से माँ लक्ष्मी से जुड़ा है।

साझा करने के लिए दिवाली 2026 संदेश

🪔 इस दिवाली हम साथ मिलकर जो मिठाइयाँ बनाएँ, वे हमारे घर के हर कोने में प्रेम की मिठास भर दें। मेरे प्यारे परिवार को दिवाली की शुभकामनाएँ! ✨ WhatsApp पर साझा करें

🙏 मेरे माता-पिता और बड़ों के लिए: मेरे बनाए हर लड्डू में आपके आशीर्वाद का स्वाद है। माँ लक्ष्मी इस दिवाली आपको स्वस्थ और प्रसन्न रखें। 🌸 WhatsApp पर साझा करें

✨ आपकी दिवाली ताज़े गुलाब जामुन जैसी मीठी-गरम और दीयों की कतार जैसी उजली हो। दिवाली की शुभकामनाएँ, मेरे प्रिय मित्र! 🪔 WhatsApp पर साझा करें

🪔 आपको और आपके परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह त्योहार अच्छा स्वास्थ्य, निरंतर प्रगति और अपनों के साथ बाँटने लायक खुशी के पल लेकर आए। 🙏 WhatsApp पर साझा करें

🌸 माँ लक्ष्मी आपकी रसोई और आपके घर को भरपूर प्रेम, शांति और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद दें। शुभ दीपावली! 🪔✨ WhatsApp पर साझा करें

🙏 जैसे अयोध्या ने भगवान श्रीराम के स्वागत में दीप जलाए थे, वैसे ही आपका घर आनंद से जगमगाए और आपकी बाँटी हर मिठाई उनका आशीर्वाद फैलाए। दिवाली की शुभकामनाएँ! 🪔 WhatsApp पर साझा करें

दिवाली की एक छोटी प्रार्थना

हे माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश, हाथ जोड़कर मैं अपने परिवार के हाथों से बनी मिठाइयाँ आपको अर्पित करता/करती हूँ। हमारे घर को प्रकाश से, हमारे प्रियजनों को अच्छे स्वास्थ्य से और हमारे हृदयों को सद्भाव से आशीर्वादित करें। हमारे मार्ग की बाधाएँ दूर करें, मुझे ईमानदारी और सही प्रयास से कर्म करना सिखाएँ, और हर साथ खाए भोजन के लिए मुझे कृतज्ञता से भर दें। यह दीपक हमारे भीतर सदा जलता रहे। 🙏

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में मुख्य दिवाली किस दिन है?

लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है, और पाँच दिनों का यह त्योहार 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक चलेगा।

धनतेरस के लिए कौन-सी मिठाई सुझाई गई है?

काजू कतली — हीरे के आकार में कटी, चाँदी के वर्क से सजी काजू की बर्फी — धनतेरस की मुख्य मिठाई है। नमकीन मठरी इस दिन का बोनस नमकीन व्यंजन है।

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

मुहूर्त नई दिल्ली में 5:54 PM से 7:50 PM तक और मुंबई में 6:27 PM से 8:27 PM तक है। इस रात गुलाब जामुन गरमागरम परोसे जाते हैं, साथ में पनीर मखनी और लच्छा पराठे का भोजन होता है।

गोवर्धन पूजा पर क्या बनाया जाता है?

9 नवंबर को गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाई जाती है, जिसमें 56 व्यंजन (छप्पन भोग) अर्पित किए जाते हैं। पंचरत्न दाल और राजस्थानी चूरमा लड्डू इस दिन के मुख्य व्यंजन हैं।

बेसन के लड्डू कितने दिन चलते हैं?

7 नवंबर को छोटी दिवाली पर बनने वाले बेसन के लड्डू एयरटाइट डिब्बे में 2 से 3 हफ़्ते तक अच्छे रहते हैं। सही स्वाद के लिए बेसन को घी में धीमी आँच पर 20 से 25 मिनट तक भूनें।

काजू कतली का आटा फटने से कैसे रोकें?

अगर बेलते समय आटा फटे, तो वह बहुत सूखा है, इसलिए उसमें आधा छोटा चम्मच गुनगुना दूध मिलाकर गूँधें। अगर चिपके, तो 2 से 3 मिनट और पकाएँ।