गणेश अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम) + वक्रतुंड मंत्र
गणेश अष्टोत्तर शतनामावली — भगवान गणेश के 108 नाम — और गणेश चतुर्थी 2026 के लिए वक्रतुंड महाकाय मंत्र, अर्थों के साथ और जप कैसे करें।

गणेश अष्टोत्तर शतनामावली — भगवान गणेश के 108 नाम — और गणेश चतुर्थी 2026 के लिए वक्रतुंड महाकाय मंत्र, अर्थों के साथ और जप कैसे करें।
भगवान गणेश के नामों का जप गणेश चतुर्थी की आराधना का केंद्र है। गणेश अष्टोत्तर शतनामावली — गणेश के 108 नाम — और प्रिय वक्रतुंड महाकाय मंत्र उनके आशीर्वाद का आवाहन करने और बाधाओं को दूर करने के लिए पूजा में पढ़े जाते हैं। यह HinduTone मार्गदर्शिका गणेश चतुर्थी 2026 के लिए 108 नामों और वक्रतुंड मंत्र का परिचय देती है।
प्रत्येक नाम के साथ अक्षत या 21 पत्री अर्पित करते हुए, पूजा के दौरान वक्रतुंड महाकाय मंत्र और गणेश अष्टोत्तर का पाठ करें।
वक्रतुंड महाकाय मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ · निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
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अर्थ: "हे वक्र सूँड और विशाल काया वाले प्रभु, जिनका तेज एक करोड़ सूर्यों के समान है — कृपया मेरे सभी कार्यों को सदा निर्विघ्न करें।" यह सबसे लोकप्रिय गणेश आवाहन है, जो किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले पढ़ा जाता है।
गणेश अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
अष्टोत्तर का पाठ 108 नामों में से प्रत्येक के लिए "ॐ <नाम> नमः" के रूप में किया जाता है, अक्सर अक्षत, फूल या पत्री अर्पित करते हुए। कुछ नामों का चयन और उनका अर्थ:
- ॐ गजाननाय नमः — हाथी के मुख वाले
- ॐ गणाध्यक्षाय नमः — गणों के स्वामी
- ॐ विघ्नराजाय नमः — बाधाओं को दूर करने वाले राजा
- ॐ विनायकाय नमः — परम नायक
- ॐ द्वैमातुराय नमः — दो माताओं वाले
- ॐ सुमुखाय नमः — शुभ मुख वाले
- ॐ एकदन्ताय नमः — एक दाँत वाले
- ॐ लम्बोदराय नमः — विशाल उदर वाले
- ॐ वक्रतुण्डाय नमः — वक्र सूँड वाले
- ॐ गजकर्णकाय नमः — हाथी के कान वाले
- ॐ विघ्नहारिणे नमः — बाधाओं को दूर करने वाले
- ॐ सिद्धि-विनायकाय नमः — सफलता प्रदान करने वाले
ये बारह नाम 108 की संपूर्ण जपमाला का हिस्सा हैं, प्रत्येक गणेश के एक पहलू की स्तुति करता है — उनका रूप, उनकी शक्तियाँ, और बाधाओं को दूर करने वाले तथा ज्ञान और सफलता प्रदान करने वाले के रूप में उनकी कृपा।
जप कैसे करें
- गणेश का आवाहन करने के लिए वक्रतुंड मंत्र से आरंभ करें
- अक्षत, फूल या पत्री अर्पित करते हुए 108 नामों में से प्रत्येक के लिए "ॐ <नाम> नमः" का पाठ करें
- एकाग्रता और भक्ति के साथ जप करें; यदि आप सीख रहे हैं तो एक रिकॉर्डिंग आपका मार्गदर्शन कर सकती है
- आरती और वक्रतुंड मंत्र के साथ पुनः समापन करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
गणेश अष्टोत्तर क्या है?
अष्टोत्तर शतनामावली भगवान गणेश के 108 नामों की जपमाला है, जिनमें से प्रत्येक का आराधना में "ॐ <नाम> नमः" के रूप में जप किया जाता है।
वक्रतुंड मंत्र क्या है?
"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा" — सभी कार्यों को निर्विघ्न बनाने की प्रार्थना, जो शुभ कार्य से पहले पढ़ी जाती है।
इनका पाठ कब किया जाता है?
गणेश चतुर्थी की पूजा के दौरान — आमतौर पर अक्षत, फूल या 21 पत्री अर्पित करते हुए — और किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को आरंभ करने से पहले।
अंतिम शब्द
वक्रतुंड मंत्र और गणेश के 108 नामों का जप इस गणेश चतुर्थी 2026 पर बाधाओं को दूर करने वाले का आवाहन करने का एक सरल, शक्तिशाली तरीका है। इन्हें अपनी पूजा में और प्रत्येक नए आरंभ से पहले भक्ति के साथ पढ़ें। गणपति बप्पा मोरया!
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