दीवाली की रात के भजन और आरतियाँ जो हर परिवार को गानी चाहिए
दीपों का पर्व दीवाली घर-घर में गूँजते भजनों और आरतियों की मधुर ध्वनि के बिना अधूरा है।

दीपों का पर्व दीवाली घर-घर में गूँजते भजनों और आरतियों की मधुर ध्वनि के बिना अधूरा है।
दीवाली, दीपों का पर्व, घर-घर में गूँजते भजनों और आरतियों की मधुर ध्वनि के बिना अधूरा है। जैसे दीये हमारे परिवेश को प्रकाशित करते हैं, वैसे ही भक्ति गीत हमारी आत्मा को आलोकित करते हैं, हमें ईश्वर से जोड़ते हैं और पारिवारिक बंधनों को मज़बूत करते हैं। यहाँ उन आवश्यक भजनों और आरतियों की विस्तृत मार्गदर्शिका है जो हर परिवार को इस शुभ रात्रि में गानी चाहिए।
दीवाली भजनों का आध्यात्मिक महत्व
दीवाली पर भजन और आरतियाँ गाना केवल एक परंपरा नहीं है—यह एक आध्यात्मिक साधना है जो वातावरण को शुद्ध करती है, दिव्य आशीर्वाद को आमंत्रित करती है और पूरे घर में सकारात्मक तरंगें उत्पन्न करती है। सामूहिक गायन परिवारों को एक साथ लाता है और सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाता है।
दीवाली की रात के लिए आवश्यक लक्ष्मी आरतियाँ
1. ॐ जय लक्ष्मी माता
यह पूरे भारत में गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय लक्ष्मी आरती है। इसमें देवी लक्ष्मी की धन, समृद्धि और सुख की दात्री के रूप में स्तुति की जाती है। परिवार पूजा वेदी के चारों ओर एकत्र होकर, हाथों में दीये लेकर, आने वाले वर्ष में सुख-समृद्धि के लिए देवी का आशीर्वाद पाने हेतु यह आरती गाते हैं।
कब गाएँ: लक्ष्मी पूजा के दौरान, जो सामान्यतः प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में होती है।
2. जय लक्ष्मी रमणा
संत पंडित श्री नारायण दत्त श्रीमाली द्वारा रचित यह आरती लक्ष्मी जी का भगवान विष्णु की अर्धांगिनी के रूप में गुणगान करती है। इसके सुंदर पद देवी के दिव्य गुणों और ब्रह्मांड में समृद्धि बनाए रखने में उनकी भूमिका का वर्णन करते हैं।
3. सुखकर्ता दुखहर्ता (गणेश आरती)
लक्ष्मी पूजा आरंभ करने से पहले गणेश आरती गाना आवश्यक है। विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है ताकि पूजा बिना बाधा के संपन्न हो और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद घर में बना रहे।
पारंपरिक दीवाली भजन
4. रघुपति राघव राजा राम
महात्मा गांधी द्वारा लोकप्रिय बनाया गया यह कालजयी भजन भक्तिमय वातावरण बनाने के लिए उत्तम है। इसकी सरल धुन बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्यों के लिए इसमें शामिल होना आसान बनाती है।
5. श्री रामचंद्र कृपालु भजमन
तुलसीदास द्वारा रचित यह सुंदर भजन भगवान राम की करुणा और कृपा की स्तुति करता है। चूँकि दीवाली भगवान राम के अयोध्या लौटने का भी उत्सव है, इसलिए इस भजन का विशेष महत्व है।
6. ॐ जय जगदीश हरे (सार्वभौमिक आरती)
इसे अक्सर "सभी आरतियों का राजा" कहा जाता है; यह सार्वभौमिक आरती किसी भी देवता की पूजा में गाई जा सकती है। कई परिवार अपनी दीवाली पूजा का समापन इसी व्यापक प्रार्थना से करते हैं, जो परमेश्वर से आशीर्वाद माँगती है।
देवी लक्ष्मी के भजन
7. महालक्ष्मी अष्टकम्
संस्कृत का यह आठ श्लोकों वाला स्तोत्र देवी लक्ष्मी के आठ रूपों का सुंदर वर्णन करता है। यद्यपि परंपरागत रूप से इसका पाठ किया जाता है, फिर भी कई परिवारों ने इसके मधुर संस्करण अपनाए हैं जिन्हें साथ मिलकर गाया जा सकता है।
8. लक्ष्मी चालीसा
संरचना में हनुमान चालीसा के समान, यह 40 चौपाइयों वाली रचना देवी लक्ष्मी के विभिन्न गुणों की स्तुति करती है और समृद्धि व कल्याण के लिए उनकी कृपा माँगती है।
9. पधारो म्हारे देस
राजस्थान का यह स्वागत भजन देवताओं को घर में आमंत्रित करता है। दीवाली की रात परिवार इसे देवी लक्ष्मी के स्वागत में गाते हैं और उनका आशीर्वाद पाने की अपनी उत्सुकता प्रकट करते हैं।
क्षेत्रीय दीवाली गीत
10. दीवाली आई रे (लोकगीत)
विभिन्न क्षेत्रों के अपने-अपने लोकगीत हैं जो दीवाली के आगमन का उत्सव मनाते हैं। अक्सर बच्चों द्वारा गाए जाने वाले ये उल्लासपूर्ण गीत उत्सव में रौनक भर देते हैं और नई पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं।
11. दीपावली दीपावली दीप जलाओ (तमिल)
दक्षिण भारत में यह मधुर तमिल गीत दीपावली उत्सव के दौरान लोकप्रिय है। यह दीप जलाने के लिए प्रेरित करता है और अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव मनाता है।
भक्तिमय वातावरण कैसे बनाएँ
पारिवारिक भजन-संध्या के लिए सुझाव:
पहले से तैयारी करें: दीवाली से कुछ दिन पहले भजनों का अभ्यास करें ताकि सभी को धुन और बोल याद हो जाएँ।
सबको शामिल करें: परिवार के अलग-अलग सदस्यों को अलग-अलग आरतियाँ सौंपें, ताकि बच्चे भी भाग लें।
पारंपरिक वाद्यों का प्रयोग करें: यदि संभव हो तो भक्तिभाव बढ़ाने के लिए हारमोनियम, ढोलक, तबला या साधारण करताल (मंजीरे) के साथ गाएँ।
उचित व्यवस्था करें: सभी को पूजा स्थल के चारों ओर गोलाकार बैठाएँ, जिससे एकता और भक्ति का भाव जगे।
सही समय का ध्यान रखें: लक्ष्मी आरती गाने का सबसे शुभ समय लक्ष्मी पूजा मुहूर्त है, जो सामान्यतः शाम को होता है।
लक्ष्मी पूजा का क्रम
दीवाली की रात गायन का पारंपरिक क्रम इस प्रकार है:
- गणेश आरती से आरंभ करें - सुखकर्ता दुखहर्ता
- लक्ष्मी पूजा और आरती - ॐ जय लक्ष्मी माता या जय लक्ष्मी रमणा
- पूरक भजन - रघुपति राघव, श्री रामचंद्र कृपालु
- सार्वभौमिक आरती से समापन करें - ॐ जय जगदीश हरे
- प्रसाद वितरण - जब तक दिव्य तरंगें गूँज रही हों, मिठाइयाँ बाँटें
साथ मिलकर भजन गाने के लाभ
आध्यात्मिक उन्नति: सामूहिक गायन शक्तिशाली आध्यात्मिक तरंगें उत्पन्न करता है जो घर को शुद्ध करती हैं।
पारिवारिक जुड़ाव: यह रिश्तों को मज़बूत करता है और अविस्मरणीय यादें बनाता है।
संस्कृति का संरक्षण: नई पीढ़ी अपनी विरासत को सीखती और सराहती है।
मानसिक शांति: भक्ति संगीत तनाव कम करता है और आंतरिक शांति देता है।
सकारात्मक ऊर्जा: भजन घर में दिव्य कृपा और सकारात्मक तरंगों को आकर्षित करते हैं।
आधुनिक रूप
यद्यपि पारंपरिक गायन का अपार महत्व है, आज कई परिवार सही उच्चारण और धुन सीखने के लिए रिकॉर्ड की गई आरतियों या ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करते हैं। फिर भी, सार भागीदारी और भक्ति में है, न कि त्रुटिहीन गायन में। अपूर्ण ढंग से गाया गया हो, तब भी हृदय से की गई भक्ति ईश्वर तक पहुँचती है।
निष्कर्ष
इस दीवाली, अपने परिवार को पूजा वेदी के चारों ओर एकत्र करें, दीये जलाएँ और भक्ति में अपनी आवाज़ों को एक साथ उठने दें। चाहे आप ये सभी भजन गाएँ या अपने परिवार के मन को छूने वाले कुछ चुनें, साथ मिलकर गाने से प्रेम, आस्था और दिव्य आशीर्वाद से भरा एक पवित्र वातावरण बनता है।
याद रखें, देवी लक्ष्मी उन घरों को आशीर्वाद देती हैं जहाँ उनका स्वागत केवल भौतिक तैयारियों से नहीं, बल्कि निर्मल हृदय, भक्ति गीतों और सच्चे प्रेम से किया जाता है। अपने घर को इन कालजयी धुनों से गूँजने दें और ऐसी यादें बनाएँ जिन्हें पीढ़ियाँ सँजोकर रखेंगी।
शुभ दीपावली! देवी लक्ष्मी आपके परिवार पर अपनी श्रेष्ठतम कृपा बरसाएँ।
क्या आपने इस वर्ष कोई नया दीवाली भजन सीखा? नीचे टिप्पणियों में अपने परिवार के पसंदीदा दीवाली गीत साझा करें और परंपरा को जीवित रखें!
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दीवाली 2026 कब है और परिवारों को लक्ष्मी आरती कब गानी चाहिए?
दीवाली और लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को भारत में और अमेरिका (USA), कनाडा, ब्रिटेन (UK) तथा ऑस्ट्रेलिया में भी है। लक्ष्मी आरती परंपरागत रूप से सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के दौरान गाई जाती है; अपने शहर का मुहूर्त अवश्य देखें।
दीवाली की रात आरतियों का सही क्रम क्या है?
गणेश आरती सुखकर्ता दुखहर्ता से आरंभ करें, फिर ॐ जय लक्ष्मी माता या जय लक्ष्मी रमणा के साथ लक्ष्मी पूजा करें। रघुपति राघव राजा राम और श्री रामचंद्र कृपालु जैसे भजन जोड़ें, ॐ जय जगदीश हरे से समापन करें और फिर प्रसाद बाँटें।
दीवाली पर लक्ष्मी आरती से पहले गणेश आरती क्यों गाई जाती है?
विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है ताकि पूजा बिना किसी बाधा के संपन्न हो। परिवार लक्ष्मी पूजा आरंभ करने से पहले सुखकर्ता दुखहर्ता गाते हैं।
बच्चों के लिए कौन-से दीवाली भजन गाना सबसे आसान है?
रघुपति राघव राजा राम की धुन सरल है, जिसे बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्य आसानी से गा सकते हैं। दीवाली के आगमन का उत्सव मनाने वाले उल्लासपूर्ण क्षेत्रीय लोकगीत भी बच्चों में लोकप्रिय हैं।
विदेश में रहने वाले NRI परिवार दीवाली भजन और आरतियाँ कैसे सीख सकते हैं?
कई परिवार धुन और उच्चारण सीखने के लिए रिकॉर्ड की गई आरतियों या ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करते हैं और दीवाली से कुछ दिन पहले अभ्यास करते हैं। सही गायन से अधिक हृदय से भागीदारी मायने रखती है, इसलिए घर पर साथ मिलकर गाई गई कुछ आरतियाँ भी परंपरा को जीवित रखती हैं।




