दिवाली 2026 — 5 दिवसीय पर्व कैलेंडर एक नज़र में
[image: 🌟] 2026 के लिए विशेष बात: दिवाली का रविवार को पड़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।

[image: 🌟] 2026 के लिए विशेष बात: दिवाली का रविवार को पड़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।
[image: 🌟] 2026 के लिए विशेष बात: दिवाली का रविवार को पड़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। रविवार के स्वामी सूर्य देव हैं — प्रकाश, जीवन-शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा के देवता — जो दिवाली के मूल भाव, अंधकार पर प्रकाश की विजय, को पूरी तरह दर्शाते हैं। माना जाता है कि रविवार की दिवाली आने वाले वर्ष के लिए विशेष आशीर्वाद और सफलता प्रदान करती है।
[image: 🕯️] लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026 — सटीक समय
दिवाली के पालन में सबसे महत्वपूर्ण बात है सही मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करना। लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद की संध्या बेला) में की जानी चाहिए, जब अमावस्या तिथि विद्यमान हो और आदर्श रूप से वृषभ लग्न (Taurus Ascendant) में — यह “स्थिर” लग्न है, जो सुनिश्चित करता है कि देवी लक्ष्मी आपके घर में स्थायी रूप से निवास करें।
मुख्य दिवाली 2026 मुहूर्त (नई दिल्ली / हैदराबाद IST)
[image: ⚠️] शहर-वार टिप्पणी: मुहूर्त का समय आपके शहर के देशांतर के अनुसार 15–45 मिनट तक बदलता है। सटीक स्थानीय समय के लिए हमेशा अपने स्थानीय पंचांग, मंदिर अधिकारियों या द्रिक पंचांग (DrikPanchang.com) जैसे विश्वसनीय ज्योतिष मंचों से पुष्टि करें।
वृषभ लग्न सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त क्यों है
प्राचीन ग्रंथ, जिनमें धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु शामिल हैं, बताते हैं कि वृषभ लग्न — एक स्थिर लग्न — में की गई लक्ष्मी पूजा से देवी के धन, स्वास्थ्य और समृद्धि के आशीर्वाद घर में अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी बन जाते हैं। इसीलिए प्रदोष + वृषभ लग्न की अवधि दिवाली पूजा का सर्वोत्तम समय है।
विभिन्न शहरों के लिए मुहूर्त (अनुमानित IST)
[image: 📌] सटीकता के लिए अपने शहर के निर्देशांकों के साथ द्रिक पंचांग (DrikPanchang.com) पर सही समय की पुष्टि करें।
[image: 🌟] दिवाली क्या है? — अर्थ, उत्पत्ति और गहरा महत्व
“दिवाली” शब्द
शब्द दिवाली (जिसे दीपावली भी कहते हैं) दो संस्कृत शब्दों से बना है — “दीप” (दीया, प्रकाश) और “आवली” (पंक्ति, श्रृंखला)। इसका शाब्दिक अर्थ है “दीपों की पंक्ति” — उन सुनहरे दीयों की धाराओं का सटीक वर्णन, जो इस रात हर घर, मंदिर और गली को एक जगमगाती आकाशगंगा में बदल देती हैं।
दिवाली क्यों मनाई जाती है? — पावन कथाएँ
दिवाली विभिन्न परंपराओं में अनेक दिव्य घटनाओं की स्मृति में मनाई जाती है — जो इसके सार्वभौमिक आध्यात्मिक महत्व का प्रमाण है।
1. भगवान राम की अयोध्या वापसी (सबसे प्रसिद्ध) सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान राम की विजयी वापसी का उत्सव है, जब वे 14 वर्ष के वनवास और राक्षसराज रावण पर विजय के बाद सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। अयोध्यावासियों ने अपने प्रिय राजा का स्वागत हज़ारों दीये (तेल के दीपक) जलाकर किया — हर गली, घर और मार्ग को प्रकाशित कर दिया। दिवाली हर वर्ष इसी आनंदमय घर-वापसी के क्षण को दोहराती है।
2. भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय (नरक चतुर्दशी) दिवाली से एक दिन पहले — नरक चतुर्दशी — भगवान कृष्ण (और सत्यभामा) द्वारा राक्षस नरकासुर के वध का उत्सव है, जिसने 16,000 स्त्रियों को अपने कारागार में बंदी बना रखा था। नरकासुर की मृत्यु का समाचार सुनकर लोगों ने उत्सव में दीये जलाए। यह कथा विशेष रूप से दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और वैष्णव समुदायों में मनाई जाती है।
3. देवी लक्ष्मी का प्राकट्य दिवस (कार्तिक अमावस्या) विष्णु पुराण के अनुसार, देवी लक्ष्मी ब्रह्मांडीय सागर के मंथन (समुद्र मंथन) से प्रकट हुईं — और वह भी इसी अमावस्या को। वे अपनी पूर्ण दिव्य आभा में, कमल पुष्पों, स्वर्ण मुद्राओं और दिव्य कृपा से दीप्त होकर प्रकट हुईं। कार्तिक अमावस्या को उनका जन्मदिवस माना जाता है — इसलिए यह उनकी पूजा के लिए वर्ष की सबसे शक्तिशाली रात है।
4. भगवान महावीर का निर्वाण (जैन परंपरा) जैन धर्म के प्रवर्तक तीर्थंकर महावीर ने इसी अमावस्या की रात मोक्ष (अंतिम मुक्ति) प्राप्त किया। इसलिए दिवाली जैन कैलेंडर में भी सबसे पवित्र दिन है, जिसे महावीर के ज्ञान के दिव्य प्रकाश के प्रतीक “दीपों के पर्व” के रूप में मनाया जाता है।
5. देवी काली की विजय (बंगाली परंपरा) बंगाल और पूर्वी भारत में दिवाली की रात (काली पूजा) देवी काली को समर्पित है — दिव्य माँ का वह उग्र रक्षक रूप, जिसने इस रात सभी राक्षसों का संहार किया। भव्य काली पूजा पंडाल और मध्यरात्रि अनुष्ठान इस पर्व की पहचान हैं।
6. बलि-वामन कथा (गोवर्धन पूजा — दिन 4) भगवान विष्णु अपने वामन (बौने) अवतार में राक्षसराज बलि से तीनों लोक वापस लेने के लिए अवतरित हुए। गोवर्धन पूजा के दिन बलि के पाताल-गमन का स्मरण किया जाता है — और कुछ परंपराओं में बलि को एक न्यायप्रिय राजा के रूप में मनाया जाता है, जो हर वर्ष अपनी प्रजा को आशीर्वाद देने लौटते हैं।
[image: 🪔] दिन 1 — धनतेरस 2026 (6 नवंबर, शुक्रवार)
धनतेरस — “धन” (संपत्ति) और “तेरस” (त्रयोदशी) से बना — कार्तिक कृष्ण पक्ष के 13वें दिन आता है और भगवान धन्वंतरि (दिव्य वैद्य, विष्णु के अवतार) तथा भगवान कुबेर सहित देवी लक्ष्मी (कुबेर — धन के देवता) को समर्पित है।
धनतेरस के प्रमुख अनुष्ठान
सोने और चाँदी की ख़रीदारी धनतेरस पर सोना, चाँदी, नए बर्तन या मूल्यवान वस्तुएँ ख़रीदना अत्यंत शुभ माना जाता है — मान्यता है कि इस दिन ख़रीदा गया धन कई गुना बढ़ता है। आशीर्वाद के लिए चाँदी का एक छोटा सिक्का ख़रीदना भी पर्याप्त माना जाता है।
- ख़रीदारी का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 6 नवंबर को शाम 5:33 PM – 8:09 PM (प्रदोष काल, नई दिल्ली; धनतेरस पूजा मुहूर्त 6:02–7:57 PM)
- इससे बचें: राहु काल (6 नवंबर को नई दिल्ली में 10:42 AM – 12:04 PM)
यम दीपम (मृत्यु के देवता के लिए दीपक) शाम को एक चार बत्तियों वाला दीया (चतुर्मुखी दीपम) जलाकर उसका मुख दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है — जो मृत्यु के देवता यम की दिशा है। यम को प्रसन्न करने और परिवार के सभी सदस्यों की अकाल मृत्यु व रोग से रक्षा के लिए यह दीपक जलता रखा जाता है। यह धनतेरस के सबसे महत्वपूर्ण, पर अक्सर अनदेखे किए जाने वाले अनुष्ठानों में से एक है।
लक्ष्मी–कुबेर पूजा पूरे वर्ष धन और आर्थिक स्थिरता का आशीर्वाद पाने के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर (ब्रह्मांड के ख़ज़ाने के रक्षक) दोनों की विशेष पूजा की जाती है।
[image: 🕯️] दिन 2 — छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी 2026 (7 नवंबर, शनिवार)
मुख्य दिवाली से एक दिन पहले के दिन को छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी कहा जाता है — जो भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति है।
नरक चतुर्दशी के प्रमुख अनुष्ठान
अभ्यंग स्नान (भोर में पवित्र तेल स्नान) इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान — भक्त सूर्योदय से पहले उठते हैं और स्नान से पहले पूरे शरीर पर तिल या नारियल का तेल लगाते हैं। यह अनुष्ठान सभी पापों के शुद्धिकरण और भक्त के जीवन से नरक के निवारण का प्रतीक है। स्नान सूर्योदय से पहले पूरा हो जाना चाहिए।
मेहंदी लगाना दिवाली के श्रृंगार अनुष्ठान के रूप में महिलाएँ अपने हाथों और पैरों पर सुंदर मेहंदी के डिज़ाइन बनाती हैं।
संध्या में 14 दीये शाम को 14 दीये जलाकर घर के अलग-अलग कोनों में, विभिन्न दिशाओं की ओर रखे जाते हैं — ताकि मुख्य दिवाली की रात से पहले बुरी शक्तियाँ दूर हों, पूर्वजों की छाया हटे और घर की ऊर्जा शुद्ध हो।
[image: ✨] दिन 3 — मुख्य दिवाली 2026 (8 नवंबर, रविवार) — संपूर्ण पूजा विधि
यह पाँच दिवसीय पर्व का हृदय है — कार्तिक अमावस्या, वह रात जब देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और उन घरों को आशीर्वाद देती हैं जो प्रकाश, स्वच्छता और भक्ति से उनका स्वागत करते हैं।
सुबह की तैयारियाँ
1. गहन सफ़ाई (शोधन) अपने घर का हर कोना साफ़ करें — यह वैकल्पिक नहीं है। कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी केवल स्वच्छ, प्रकाशित और आनंदमय घरों में प्रवेश करती हैं। झाड़ू-पोंछा करें, अनावश्यक सामान हटाएँ और हर कमरे में गंगाजल (पवित्र जल) छिड़कें।
2. प्रवेश द्वार पर रंगोली मुख्य द्वार पर जीवंत रंगों से एक सुंदर रंगोली बनाएँ — जिसमें द्वार से भीतर की ओर आते देवी लक्ष्मी के चरण-चिह्न (लक्ष्मी चरण) भी हों। यह देवी के स्वागत का पारंपरिक आसन है। ताज़े फूल, गेंदे की पंखुड़ियाँ या रंगीन चूर्ण का प्रयोग करें।
3. घर की सजावट
- सभी दरवाज़ों पर तोरण (आम के पत्तों की बंदनवार) लटकाएँ।
- सजावट के लिए गेंदे की मालाएँ और झालर लाइटें लटकाएँ।
- खिड़कियों, बालकनी, छतों और आँगन में दीये रखें।
- प्रवेश द्वार के आसपास पानी के कटोरों में फूलों की पंखुड़ियाँ और दीये तैराएँ।
4. नए वस्त्र पहनें सूर्यास्त से पहले स्नान करें और नए या स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र पहनें। पसंदीदा रंग: लाल, पीला, केसरिया, सुनहरा या गहरा नारंगी — समृद्धि और शुभता के रंग।
लक्ष्मी पूजा सामग्री (संपूर्ण सूची)
चरण-दर-चरण लक्ष्मी पूजा विधि — 16 पावन चरण
पूजा आरंभ से पहले: पूजा कक्ष को साफ़ करें और यह मंत्र बोलते हुए गंगाजल छिड़कें:
“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥”
चरण 1 — कलश स्थापना (पवित्र पात्र की स्थापना)
- जल से भरा कलश (ताँबे/मिट्टी का घड़ा) स्थापित करें।
- ऊपर गोलाई में आम के 5 पत्ते लगाएँ।
- अंदर सुपारी, सिक्का, गेंदे का फूल और चावल के दाने डालें।
- ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।
- कलश सभी पवित्र नदियों, सागर और दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है।
चरण 2 — मूर्ति स्थापना
- चौकी पर बिछे लाल कपड़े के मध्य में देवी लक्ष्मी को स्थापित करें।
- लक्ष्मी के बाईं ओर भगवान गणेश को स्थापित करें (लक्ष्मी की दृष्टि से — यानी मूर्ति की ओर मुख करने पर आपके दाईं ओर)।
- उनके दोनों ओर भगवान कुबेर और देवी सरस्वती का एक छोटा चित्र रखें।
- मूर्ति के सामने सिक्के और आभूषण सजाएँ।
चरण 3 — संकल्प दाहिनी हथेली में जल लेकर दृढ़ संकल्प करें:
“ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः — अद्य कार्तिक कृष्णपक्ष अमावस्या तिथौ, श्री महालक्ष्मी पूजां करिष्ये” (“आज, कार्तिक अमावस्या पर, मैं देवी महालक्ष्मी की यह पूजा करता/करती हूँ।”)
चरण 4 — गणेश पूजा (सबसे पहले) हमेशा भगवान गणेश के आवाहन से आरंभ करें:
“ॐ गं गणपतये नमः — वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
चरण 5 — आवाहन (देवी को आमंत्रित करना) हाथ जोड़कर देवी लक्ष्मी का मूर्ति में आवाहन करें:
“ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्”
चरण 6 — पंचामृत अभिषेकम् लक्ष्मी की मूर्ति को पाँच पवित्र अमृतों से स्नान कराएँ:
- दूध → “ॐ स्तुतये नमः”
- दही → “ॐ श्रियै नमः”
- शहद → “ॐ कमलायै नमः”
- शक्कर → “ॐ प्रसन्नायै नमः”
- घी → “ॐ शुभायै नमः”
फिर शुद्ध जल से धोएँ। साफ़ सफ़ेद कपड़े से धीरे से पोंछें।
चरण 7 — वस्त्र और श्रृंगार (सज्जा) नया पीला या लाल वस्त्र अर्पित करें। माथे पर कुमकुम, हथेलियों पर हल्दी का लेप और सिंदूर की बिंदी लगाएँ। मूर्ति को आभूषणों, फूलों और गेंदे व कमल की माला से सजाएँ।
चरण 8 — कमल और पुष्प अर्पण देवी को कमल के फूल (लक्ष्मी का प्रिय पुष्प) और ताज़ी पंखुड़ियाँ अर्पित करें। हर कमल अर्पित करते समय जपें:
“ॐ श्रीं ह्रीं कमलायै नमः”
चरण 9 — धूप चंदन या खस की धूप जलाएँ और मंत्र जपते हुए देवी के सामने 7 बार दक्षिणावर्त घुमाएँ:
“ॐ धूपम् आघ्रापयामि नमः”
चरण 10 — दीप घी का दीया जलाएँ और देवी के सामने दक्षिणावर्त घुमाएँ। जपें:
“ॐ दीपं दर्शयामि नमः”
चरण 11 — नैवेद्य (भोग अर्पण) खीर, मालपुआ, बताशे, फल और नारियल अर्पित करें। थाली देवी के सामने रखें और उन्हें भोग स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करें:
“ॐ नैवेद्यं समर्पयामि नमः”
चरण 12 — श्री सूक्त पाठ विधिपूर्वक श्री सूक्त का पाठ करें — ऋग्वेद का 16 मंत्रों वाला वैदिक स्तोत्र, जो पूर्णतः देवी लक्ष्मी को समर्पित है। यह सबसे प्राचीन और शक्तिशाली लक्ष्मी स्तोत्र है और दिवाली पर इसका पाठ वर्ष का सबसे पुण्यकारी आध्यात्मिक कर्म माना जाता है।
चरण 13 — लक्ष्मी चालीसा और 108 नाम
- पाठ करें: लक्ष्मी चालीसा (40 पावन चौपाइयाँ)।
- जप करें: अष्टोत्तर शतनामावली — देवी लक्ष्मी के 108 पवित्र नाम।
चरण 14 — कुबेर पूजा दिव्य कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर से विशेष प्रार्थना करें। लक्ष्मी की मूर्ति के पास कुबेर यंत्र (या कुबेर का चित्र) रखें और जपें:
“ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं कुबेराय नमः — धन धन धन कुरु कुरु स्वाहा”
चरण 15 — चोपड़ा पूजा (व्यापारियों के लिए) व्यापारी वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय अनुष्ठान करते हैं — चोपड़ा पूजा (बही-खातों की पूजा):
- देवी के सामने नए बही-खाते रखें।
- बहियों के चारों ओर पीला धागा बाँधें।
- हर बही पर कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएँ।
- जपें: “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
- हर खाते के पहले पृष्ठ पर “श्री” या “ॐ श्रीं” लिखें।
- समृद्ध नए वित्तीय वर्ष के लिए देवी का आशीर्वाद माँगें।
चरण 16 — आरती और प्रदक्षिणा पूजा का समापन भव्य लक्ष्मी आरती से करें:
“ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता, तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता”
- पाँच बत्तियों वाली कपूर आरती को मुख की ओर 7 बार और चरणों की ओर 4 बार दक्षिणावर्त घुमाएँ।
- पूरी आरती के दौरान घंटी बजाएँ — लक्ष्मी आरती में कभी ताली न बजाएँ (केवल घंटी का प्रयोग करें)।
- वेदी की 3 प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें।
- फिर साष्टांग प्रणाम (पूर्ण दंडवत) करें।
- परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद — खीर, बताशे और फल — बाँटें।
दीप प्रज्वलन अनुष्ठान
पूजा के बाद इस पावन क्रम में पूरे घर में दीये जलाएँ:
- पहला दीया पूजा कक्ष / मंदिर में
- फिर मुख्य द्वार पर (लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए)
- फिर खिड़कियों और बालकनी में (ताकि बाहर से दिखाई दें)
- फिर रसोई में (जहाँ से परिवार को पोषण मिलता है)
- फिर सीढ़ियों और कोनों में — हर कमरे के
- अंत में घर के बाहर — चारदीवारी, द्वार और छत पर दीये रखें।
[image: 🕯️] घी (गाय का घी सबसे पवित्र है) या तिल के तेल से कम से कम 11 दीये जलाएँ। अधिकतम आशीर्वाद के लिए 108 दीये जलाएँ। इन्हें पूरी रात जलने दें — मध्यरात्रि से पहले दीयों को कभी बुझने न दें।
[image: 🌄] दिन 4 — गोवर्धन पूजा 2026 (9 नवंबर, सोमवार)
गोवर्धन पूजा उस प्रसंग की स्मृति है, जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर वृंदावन के लोगों को इंद्र की विनाशकारी वर्षा से बचाया — इस कार्य ने देवराज इंद्र का अहंकार तोड़ा और भगवान कृष्ण की दिव्य श्रेष्ठता स्थापित की।
गोवर्धन पूजा के प्रमुख अनुष्ठान
अन्नकूट (भोजन का पर्वत) मुख्य अनुष्ठान — भोजन का पर्वत (अन्नकूट) 56 विभिन्न व्यंजनों (छप्पन भोग) से बनाकर भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है। यह स्वयं गोवर्धन पर्वत का प्रतीक है। छप्पन भोग के सामान्य व्यंजनों में शामिल हैं: खीर, हलवा, लड्डू, पूरी, सब्ज़ी, चटनी, पापड़, अचार, नारियल लड्डू, सूखे मेवे और विभिन्न मिठाइयाँ।
गुजराती और मारवाड़ी नव वर्ष (बेस्तु वरस) विशेषकर गुजराती और मारवाड़ी व्यापारी समुदायों के लिए गोवर्धन पूजा विक्रम संवत 2083 — उनके नव वर्ष — की शुरुआत है। नए बही-खाते खोले जाते हैं, देव पूजा की जाती है और दिव्य आशीर्वाद के साथ नया वित्तीय वर्ष आरंभ होता है।
गौ पूजा (गाय की पूजा) गायों को फूलों, मालाओं और रंगों से सजाया जाता है और पवित्र गोवर्धन पर्वत तथा देवी लक्ष्मी के स्वरूप के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
[image: 👫] दिन 5 — भाई दूज 2026 (10 नवंबर, मंगलवार)
भाई दूज (जिसे यम द्वितीया या भैया दूज भी कहते हैं) भाई-बहन के पवित्र बंधन का उत्सव है — रक्षा बंधन का हिंदू समकक्ष पर्व।
पावन कथा
इस दिन यमराज (मृत्यु के देवता) अपनी बहन यमुना (पवित्र नदी देवी) के घर गए। उन्होंने प्रेमपूर्ण भोजन से उनका स्वागत किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और उनकी कुशलता की प्रार्थना की। अत्यंत प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया — कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक लगवाएगा, वह अकाल मृत्यु से सुरक्षित रहेगा। इसीलिए भाई दूज का तिलक जीवन-रक्षक अनुष्ठान माना जाता है।
भाई दूज के प्रमुख अनुष्ठान
तिलक समारोह बहनें भाइयों को अपने घर आमंत्रित करती हैं (या भाई के घर जाती हैं)। बहन:
- कुमकुम, चावल, दीया, फूल और मिठाई के साथ पूजा की थाली तैयार करती है।
- भाई के माथे पर कुमकुम और चावल के दानों का तिलक लगाती है।
- उसकी लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करती है।
- भाई बहन को एक हार्दिक उपहार देता है और उसे आशीर्वाद देता है।
- भाई दूज 2026 का तिलक मुहूर्त: बुधवार, 11 नवंबर को 1:10 PM – 3:20 PM IST (अपराह्न, नई दिल्ली — द्रिक पंचांग)
[image: 🌺] दिवाली पर पूजित लक्ष्मी के 8 रूप (अष्ट लक्ष्मी)
दिवाली पर देवी लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं हैं — वे समृद्धि के आठ आयामों का प्रतिनिधित्व करती हैं। दिवाली पर अष्ट लक्ष्मी पूजा करने से समृद्धि के सभी आठ रूप घर में आमंत्रित होते हैं:
[image: 🌸] सुझाव: अपनी लक्ष्मी पूजा का आरंभ सभी 8 रूपों का आवाहन करते हुए इस मंत्र से करें: “ॐ अष्टलक्ष्म्यै नमः” और 8 कमल के फूल अर्पित करें — देवी के प्रत्येक रूप के लिए एक।
[image: 🔱] शक्तिशाली दिवाली मंत्र और स्तोत्र
महालक्ष्मी बीज मंत्र (सबसे शक्तिशाली)
“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” धन, समृद्धि और दिव्य कृपा के लिए पूजा के दौरान 108 बार जपें।
लक्ष्मी गायत्री मंत्र
“ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्” दिव्य प्रेरणा और आशीर्वाद के निरंतर प्रवाह के लिए।
श्री सूक्त का प्रारंभिक मंत्र (ऋग्वेद)
“हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्, चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह” “हे अग्निदेव, मेरे लिए उन लक्ष्मी का आवाहन करें, जो स्वर्ण वर्ण वाली हैं, सोने और चाँदी की मालाओं से सुशोभित हैं, और चंद्रमा के समान दीप्तिमान हैं।”
कुबेर मंत्र (व्यापार में समृद्धि के लिए)
“ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं कुबेराय नमः” व्यापार में सफलता के लिए चोपड़ा पूजा से पहले 108 बार जपें।
गणेश मंत्र (हर पूजा के आरंभ के लिए)
“ॐ गं गणपतये नमः — ऋद्धि सिद्धि सहिताय नमः”
दिवाली आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता
पूरे भारत में गाई जाने वाली प्रसिद्ध दिवाली आरती:
“ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता, तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता...”
[image: 🎨] दिवाली रंगोली 2026 — पारंपरिक डिज़ाइन और अर्थ
रंगोली (जिसे तेलुगु में मुग्गु, तमिल में कोलम और संस्कृत में रंगवल्ली कहते हैं) दिवाली की सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है — देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के प्रवेश द्वार पर बनाई गई रंगीन ज्यामितीय या पुष्प आकृतियाँ।
दिवाली रंगोली के सबसे शुभ प्रतीक
प्रयुक्त सामग्री
- पारंपरिक: रंगीन चावल का आटा, खड़िया चूर्ण, फूलों की पंखुड़ियाँ (गेंदा, गुलाब)
- आधुनिक: रंगीन रंगोली पाउडर, आकृतियों के भीतर LED लाइटें
- पर्यावरण-अनुकूल 2026 सुझाव: केवल प्राकृतिक फूलों की पंखुड़ियाँ, हल्दी, कुमकुम और चावल का आटा प्रयोग करें — कृत्रिम रासायनिक रंगों से बचें।
[image: 🍬] क्षेत्र के अनुसार पारंपरिक दिवाली मिठाइयाँ और नमकीन
कोई भी दिवाली अपनी शानदार उत्सव मिठाइयों के बिना पूरी नहीं होती — जो उपहार में दी जाती हैं, बाँटी जाती हैं और पूरे आनंद से चखी जाती हैं।
उत्तर भारत
- काजू कतली (काजू की बर्फी) — दिवाली गिफ़्ट बॉक्स की सबसे ख़ास मिठाई
- बेसन लड्डू — घी और इलायची के साथ भुने बेसन के लड्डू
- गुलाब जामुन — गुलाब की सुगंध वाली चाशनी में डूबे मुलायम खोये के गोले
- मठरी और चकली — नाश्ते की थाली के लिए नमकीन
- मावा बर्फी — केसर और पिस्ते वाली खोये की बर्फी
महाराष्ट्र
- चकली — चावल के आटे से बना कुरकुरा, सर्पिलाकार तला नमकीन
- करंजी (गुजिया) — नारियल-गुड़ भरी अर्धचंद्राकार पेस्ट्री
- अनारसे — सफ़ेद तिल में लिपटे चावल के आटे के बिस्कुट
- चिवड़ा — मूँगफली और करी पत्ते वाला पोहे का नमकीन मिश्रण
दक्षिण भारत (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु)
- मुरुक्कु — चावल-दाल से बना कुरकुरा सर्पिलाकार नमकीन
- बोब्बट्लु / होलिगे / ओब्बट्टु — दाल-गुड़ भरी मीठी रोटी
- रवा लड्डू — नारियल और इलायची वाले सूजी के लड्डू
- बेल्लम पोंगल — गुड़ से मीठा किया गया चावल-दाल का पोंगल
- कज्जिकायलु — मीठे नारियल की भरावन वाली तली हुई पेस्ट्री
गुजरात
- मोहनथाल — केसर और इलायची वाली बेसन की बर्फी
- सुखड़ी (गोल पापड़ी) — गेहूँ के आटे, घी और गुड़ के चौकोर टुकड़े
- मावा घुघरा — तली हुई पेस्ट्री में शकरकंद की भरावन
बंगाल
- संदेश — अनेक स्वादों में ताज़े छेने की मिठाई
- मिष्टी दोई — मीठा जमाया हुआ दही
- रसगुल्ला — चाशनी में डूबे स्पंजी छेने के गोले
- नोलेन गुड़ेर पायेश — खजूर के गुड़ से बनी चावल की खीर
[image: 🎉] दिवाली 2026 — पूरे भारत में क्षेत्रीय उत्सव
गुजरात — चोपड़ा पूजा और दिवाली मेला
दिवाली गुजरात में नए व्यापारिक वर्ष की शुरुआत है। सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है चोपड़ा पूजा — दिवाली की रात देवी लक्ष्मी के सामने नए बही-खातों का शुभारंभ। सूरत, अहमदाबाद और राजकोट में भारत के कुछ सबसे भव्य दिवाली मेले लगते हैं, जिनमें आतिशबाज़ी, पारंपरिक प्रस्तुतियाँ और विशाल सामुदायिक समागम होते हैं।
बंगाल — काली पूजा (श्यामा पूजा)
पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में दिवाली की रात काली पूजा (जिसे श्यामा पूजा भी कहते हैं) बड़ी श्रद्धा से की जाती है। भव्य काली पूजा पंडाल बनाए जाते हैं, जिनमें काली की प्रभावशाली काली या नीली प्रतिमाएँ होती हैं। पुजारी मध्यरात्रि में तांत्रिक अनुष्ठान करते हैं। कोलकाता शहर रोशनी की आकाशगंगा में बदल जाता है, क्योंकि काली मंदिरों के अलावा अन्य मंदिर भी प्रकाश उत्सव में भाग लेते हैं।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना — दीपावली (3 दिन)
दक्षिण के तेलुगु राज्यों में दिवाली मुख्य रूप से 3 दिनों का उत्सव है:
- नरक चतुर्दशी — भोर से पहले अभ्यंग स्नान; नरकासुर के पुतले का दहन
- दिवाली (लक्ष्मी पूजा की रात) — पारंपरिक तेल के दीपकों के साथ भव्य लक्ष्मी पूजा
- बलि पाड्यमी (गोवर्धन पूजा) — राजा बलि की पूजा, जिनके बारे में माना जाता है कि वे घरों में पधारते हैं
पारंपरिक दीपम (दीपक) कला तेलुगु दिवाली उत्सवों की पहचान है — ज्यामितीय आकृतियों में सजी दीपों की सुंदर व्यवस्थाएँ, जिन्हें “दीप रंगोली” कहते हैं, हर घर के सामने जगमगाती हैं।
तमिलनाडु — कार्तिगई दीपम का संबंध
दिवाली तमिलनाडु में मुख्यतः नरक चतुर्दशी के रूप में मनाई जाती है — जिसमें अभ्यंग स्नान अनुष्ठान पर ज़ोर होता है। भोर से पहले के अनुष्ठानिक स्नान के बाद सुबह 4–5 AM पटाखे फोड़े जाते हैं। तमिल परंपरा में मुख्य दीप पर्व वास्तव में कार्तिगई दीपम है (जो एक महीने बाद नवंबर में आता है), जब घरों की हर सीढ़ी और सतह पर दीपों की पंक्तियाँ सजाई जाती हैं।
राजस्थान — गुलाबी नगरी में दिवाली
जयपुर में भारत के सबसे दर्शनीय दिवाली उत्सवों में से एक होता है। सिटी पैलेस, हवा महल, आमेर किला और सभी ऐतिहासिक स्मारक भव्य रूप से रोशन किए जाते हैं। विशाल सामुदायिक आतिशबाज़ी रेगिस्तानी आकाश को रंगों से भर देती है, और जयपुर के बाज़ार आभूषण, वस्त्र और पारंपरिक शिल्प ख़रीदने वाले दिवाली ख़रीदारों से भरे रहते हैं।
मुंबई — रोशनी का शहर
मुंबई (Bombay) अतुलनीय ऊर्जा के साथ दिवाली मनाता है:
- शहर का प्रसिद्ध मरीन ड्राइव रोशनी की सजावट से जगमगाता है।
- धारावी — दुनिया की सबसे बड़ी शहरी बस्ती — सुंदर हस्त-चित्रित दीये और दिवाली के मिट्टी के बर्तन बनाती है, जो पूरे देश में भेजे जाते हैं।
- कॉर्पोरेट दिवाली पार्टियाँ और कर्मचारियों को उपहार देने के अभियान मुंबई के व्यापारिक कैलेंडर के बड़े आयोजन हैं।
- दक्षिण मुंबई के गुजराती और मारवाड़ी परिवारों में प्रसिद्ध दिवाली पड़वा उत्सव की अपनी अलग ही शान है।
अयोध्या — भव्य दीपोत्सव 2026
अयोध्या — भगवान राम की जन्मभूमि — देश की सबसे पवित्र दिवाली का आयोजन करती है। जनवरी 2024 में ऐतिहासिक राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या का दीपोत्सव (दीपों का उत्सव) एक राष्ट्रीय आयोजन बन गया है:
- लाखों दीये जलाकर सरयू नदी के तटों को रोशन किया जाता है — जिससे प्रकाश की एक ऐसी नदी बनती है जो अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है।
- भव्य रामलीला मंचन और लेज़र शो राम की वापसी की कथा सुनाते हैं।
- भारत के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री परंपरागत रूप से पहला दीया जलाने में भाग लेते हैं।
- अयोध्या का दीपोत्सव एक साथ सबसे अधिक तेल के दीपक जलाने का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक है।
वाराणसी — रोशन गंगा घाट
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट और गंगा किनारे के सभी 84 घाट तैरते दीयों, आतिशबाज़ी और गंगा आरती के मनमोहक दृश्य में बदल जाते हैं — जो दुनिया के सबसे आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली दिवाली दृश्यों में से एक रचते हैं।
[image: 🎁] दिवाली 2026 उपहार गाइड
दिवाली भारत का सबसे बड़ा उपहार-मौसम है — शादियों के बाद दूसरे स्थान पर।
पारंपरिक उपहार (हमेशा शुभ)
- सूखे मेवों के डिब्बे — उत्तम काजू, बादाम, पिस्ता, किशमिश के हैम्पर
- मिठाई के डिब्बे — काजू कतली, लड्डू और मिली-जुली मिठाइयाँ
- दीये और मोमबत्तियाँ — हाथ से रंगे मिट्टी के दीये, मधुमक्खी के मोम की मोमबत्तियाँ
- चाँदी / सोने के सिक्के — लक्ष्मी–गणेश की छाप वाले
- पूजा थाली सेट — दीया, धूपदान और घंटी के साथ पीतल या चाँदी की थाली
आधुनिक उपहार (कॉर्पोरेट और विचारशील)
- गॉरमेट हैम्पर — प्रीमियम चॉकलेट, कारीगरी कुकीज़, सुगंधित घी
- घर के लिए सुगंध सेट — डिफ़्यूज़र, अगरबत्ती सेट, रूम स्प्रे
- हस्तनिर्मित मिट्टी के बर्तन — दिवाली थीम वाले हाथ से रंगे बर्तन
- अनुभव — स्पा वाउचर, फ़ाइन डाइनिंग, रिट्रीट बुकिंग
- दान रूपी उपहार — किसी प्रियजन के नाम पर किसी प्रमाणित NGO को दान करें
[image: 📦] कॉर्पोरेट उपहार की अंतिम तिथि: कस्टमाइज़्ड/ब्रांडेड उपहारों का ऑर्डर 5–15 अक्टूबर 2026 तक और सामान्य हैम्पर का ऑर्डर 20 अक्टूबर तक दें, ताकि धनतेरस (6 नवंबर) से पहले डिलीवरी सुनिश्चित हो।
[image: 🌿] कार्तिक अमावस्या पर दिवाली उपवास (व्रत)
कई भक्त दिवाली पर पूर्ण उपवास रखते हैं और शाम को लक्ष्मी पूजा के बाद ही इसे खोलते हैं।
[image: ✅] व्रत में अनुमत आहार
- सभी ताज़े फल और सूखे मेवे
- दूध, दही, घी, पनीर, मखाना
- साबूदाना के व्यंजन, कुट्टू के आटे की रोटियाँ
- केवल सेंधा नमक
- नारियल पानी, लस्सी और फलों का रस
- आलू, शकरकंद, अरबी, साबूदाना खीर
[image: ❌] व्रत में वर्जित
- सभी अनाज (गेहूँ, चावल, जौ)
- प्याज़ और लहसुन
- मांसाहारी भोजन, अंडे, शराब
- साधारण नमक
- पैकेटबंद या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ
दिवाली 2026 का आशीर्वाद साझा करें
धनतेरस से भाई दूज तक, दिवाली 2026 के पाँच दिन एक लंबी, जगमगाती प्रार्थना हैं। हर दिन एक अलग दीपक जलाता है: स्वास्थ्य, बुराई पर विजय, माँ लक्ष्मी की कृपा, प्रकृति के वरदानों के प्रति कृतज्ञता, और भाई-बहन का प्रेम। सबसे बढ़कर, दिवाली हमें याद दिलाती है कि सच्चा दीया हमारे भीतर जलता है, और जैसा कि कहा जाता है, प्रकाश अंधकार पर विजय पाता है। अपने उत्सव के दिनों की योजना बनाते समय अपने परिवार के साथ एक आशीर्वाद साझा करें, ताकि पाँचों दिनों की रोशनी आपके हर प्रियजन के हृदय तक पहुँचे।
दीप श्लोक: दीपक की प्रार्थना
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धन-सम्पदा, शत्रु-बुद्धि-विनाशाय दीप-ज्योतिर् नमोऽस्तु ते।
अर्थ: मैं उस दीप-ज्योति को नमन करता/करती हूँ, जो शुभ और कल्याणकारी है, आरोग्य और धन-संपदा देती है, और दुर्भावना का नाश करती है। अनेक परिवार शाम का दीया जलाते समय इसका पाठ करते हैं।
दिवाली के लिए लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
अर्थ: महालक्ष्मी को नमस्कार। “श्रीं” वह बीज अक्षर है जो परंपरागत रूप से लक्ष्मी से जुड़ा है।
साझा करने के लिए दिवाली 2026 संदेश
🪔 इस दिवाली 2026 पर हमारे परिवार को प्रकाश, प्रेम और साथ के पाँच दिनों की शुभकामनाएँ। धनतेरस से भाई दूज तक हमारा घर आनंद से जगमगाता रहे। ✨ WhatsApp पर साझा करें
🙏 हमारे प्रिय बड़ों को: आपका आशीर्वाद हर दिन हमारा मार्ग रोशन करता है। यह दिवाली आपके लिए अच्छा स्वास्थ्य, शांति और ढेरों मुस्कानें लाए। 🪔 WhatsApp पर साझा करें
✨ दिवाली की शुभकामनाएँ, प्रिय मित्र! पर्व के पाँचों दिन आपको मुस्कुराने का एक नया कारण और भीतर एक उजली रोशनी दें। 🪔🌸 WhatsApp पर साझा करें
🌸 आपको और आपकी टीम को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह पर्व-काल हम सभी के लिए अच्छा स्वास्थ्य, स्पष्ट सोच और सार्थक काम लेकर आए। 🪔 WhatsApp पर साझा करें
🪔 दिवाली की रात माँ लक्ष्मी आपके घर पधारें और हर हृदय में कृपा, सद्भाव और संतोष बनकर निवास करें। 🌸🙏 WhatsApp पर साझा करें
🙏 जैसे भगवान राम की घर-वापसी पर अयोध्या दीपों से जगमगा उठी थी, वैसे ही इस दिवाली 2026 पर आपका घर धर्म, दया और आनंद से चमके। 🪔✨ WhatsApp पर साझा करें
दिवाली की एक छोटी प्रार्थना
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश, इन पाँच पावन दिनों के आरंभ पर मैं विनम्रता और कृतज्ञता के साथ आपको नमन करता/करती हूँ। मेरे परिवार को अच्छा स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव का आशीर्वाद दें। मेरे मन से आलस्य और संदेह की बाधाएँ दूर करें, और मुझे ईमानदार कर्म और सही प्रयास की ओर ले चलें। जो दीये मैं बाहर जलाऊँ, वे मुझे याद दिलाएँ कि इस पर्व-काल में और पूरे वर्ष भीतर कृतज्ञता और दया का दीपक जलाए रखूँ।
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[image: ❓] अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न — दिवाली 2026
प्रश्न 1. दिवाली 2026 कब है? दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है — हिंदू कार्तिक मास की अमावस्या को।
प्रश्न 2. दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है? लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय है प्रदोष काल + वृषभ लग्न — लगभग शाम 5:54 PM से 7:50 PM IST (नई दिल्ली का समय)। समय शहर के अनुसार बदलता है; अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
प्रश्न 3. धनतेरस 2026 कब है? धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। सोना और चाँदी ख़रीदने का सर्वश्रेष्ठ समय प्रदोष काल है: नई दिल्ली में 5:33 PM – 8:09 PM (धनतेरस पूजा मुहूर्त 6:02–7:57 PM)।
प्रश्न 4. गोवर्धन पूजा 2026 कब है? गोवर्धन पूजा 2026 सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है — मुख्य दिवाली के अगले दिन।
प्रश्न 5. भाई दूज 2026 कब है? भाई दूज 2026 मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है। तिलक मुहूर्त लगभग 1:10 PM – 3:20 PM IST (नई दिल्ली, 11 नवंबर) है।
प्रश्न 6. दिवाली 2026 विशेष क्यों है? दिवाली 2026 रविवार को पड़ रही है — जिसके स्वामी सूर्य हैं — इसलिए यह अत्यंत शुभ है, क्योंकि सूर्य का प्रकाश-प्रतीक दिवाली के अंधकार पर प्रकाश के भाव से पूरी तरह मेल खाता है।
प्रश्न 7. पूजा के दौरान लक्ष्मी की मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए? लक्ष्मी की मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इसे कभी दक्षिण की ओर (जो मृत्यु के देवता यम से जुड़ी है) न रखें। पूजा करते समय स्वयं पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
प्रश्न 8. दिवाली पर कितने दीये जलाने चाहिए? परंपरागत रूप से विषम संख्या में दीये जलाएँ — 11, 21, 51 या 108। कम से कम 5 दीये जलाएँ (पाँच तत्वों के प्रतीक)। अधिकतम आशीर्वाद के लिए घी से जलाए गए 108 दीये, जो पूरी रात जलते रहें, आदर्श हैं।
प्रश्न 9. चोपड़ा पूजा क्या है? चोपड़ा पूजा दिवाली की रात व्यापारियों द्वारा की जाने वाली नए बही-खातों की अनुष्ठानिक पूजा है। नए खाते (बही-खाता) वृषभ लग्न में देवी लक्ष्मी के सामने रखे जाते हैं, कुमकुम और हल्दी से आशीर्वादित किए जाते हैं, और नए वित्तीय वर्ष के लिए उनका शुभारंभ किया जाता है।
प्रश्न 10. यदि मुहूर्त छूट जाए, तो क्या दिवाली पूजा 8 PM के बाद की जा सकती है? हाँ। प्रदोष काल + वृषभ लग्न की अवधि आदर्श है, फिर भी पूजा मध्यरात्रि तक सार्थक रूप से की जा सकती है। अमावस्या की रात देवी लक्ष्मी की दिव्य उपस्थिति मध्यरात्रि तक सक्रिय मानी जाती है। मध्यरात्रि के बाद पूजा आरंभ न करें।
प्रश्न 11. रंगोली में लक्ष्मी के चरण-चिह्नों का क्या महत्व है? द्वार से भीतर की ओर कुमकुम या फूलों की पंखुड़ियों से लक्ष्मी चरण (लक्ष्मी के पदचिह्न) बनाना देवी के घर में प्रवेश करने और निवास करने का प्रतीक है। यह दिवाली की सबसे प्रिय और शुभ भूमि-कला परंपराओं में से एक है।
प्रश्न 12. क्या दिवाली केवल हिंदू पर्व है? नहीं। दिवाली जैन धर्मावलंबी भी मनाते हैं (भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में), सिख भी (बंदी छोड़ दिवस के रूप में — गुरु हरगोबिंद सिंह जी की कारावास से मुक्ति का उत्सव), और कुछ बौद्ध समुदाय भी। यह सचमुच प्रकाश का एक अखिल भारतीय पर्व है।
[image: 🙏] अंतिम शुभकामनाएँ — दिवाली 2026 की हार्दिक बधाई!
दिवाली ब्रह्मांड की ओर से यह याद दिलाती है कि कोई अंधकार स्थायी नहीं है, कोई कठिनाई अंतहीन नहीं है, और आपके भीतर का प्रकाश — चाहे कितना भी छोटा हो — अजेय है।
हर दीया जो आप 8 नवंबर 2026 को जलाते हैं, केवल मोम और बत्ती की लौ नहीं है। यह एक घोषणा है: कि सत्य टिकता है, अच्छाई की विजय होती है, और देवी लक्ष्मी स्वच्छ हृदय और स्वागत करते घर से की गई हर सच्ची प्रार्थना सुनती हैं।
अयोध्या में सरयू के तटों से वाराणसी के तैरते दीयों तक, मुंबई के मरीन ड्राइव के ऊपर की आतिशबाज़ी से आपके अपने द्वार की रंगोली तक — इस पावन रात एक ही प्रकाश हम सबको जोड़ता है।
देवी लक्ष्मी आपके घर पर अनंत समृद्धि की वर्षा करें। भगवान गणेश आपके मार्ग की हर बाधा दूर करें। दिवाली का प्रकाश कभी आपके हृदय को न छोड़े।
शुभ दीपावली 2026! दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
प्रकाशक: हिंदूटोन (HinduTone) — हिंदू त्योहारों, अनुष्ठानों, मंत्रों और आध्यात्मिक जीवन के लिए आपकी संपूर्ण मार्गदर्शिका।
आनंद फैलाएँ — यह लेख अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें और सभी को पूरी जानकारी, भक्ति और समृद्धि के साथ दिवाली 2026 मनाने में मदद करें!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली 2026 कब है और यह सप्ताह का कौन-सा दिन है?
मुख्य दिवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को कार्तिक अमावस्या पर है। धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को और छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) शनिवार, 7 नवंबर को है।
रविवार की दिवाली इतनी शुभ क्यों मानी जाती है?
रविवार के स्वामी सूर्य हैं — प्रकाश, जीवन-शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा के देवता। यह दिवाली के अंधकार पर प्रकाश की विजय के भाव को दर्शाता है, इसलिए माना जाता है कि रविवार की दिवाली आने वाले वर्ष के लिए विशेष आशीर्वाद लाती है।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कब करनी चाहिए?
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में, अर्थात सूर्यास्त के बाद की संध्या बेला में, अमावस्या तिथि रहते की जाती है। आदर्श रूप से यह वृषभ लग्न में होनी चाहिए — एक स्थिर लग्न, जिसके बारे में कहा जाता है कि इससे देवी का आशीर्वाद घर में स्थायी रूप से रहता है।
धनतेरस पर यम दीपम अनुष्ठान क्या है?
धनतेरस की शाम चार बत्तियों वाला एक दीया दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है, जो यम की दिशा है। परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु और रोग से रक्षा के लिए इसे जलता रखा जाता है।
क्या दिवाली मुहूर्त का समय शहर-दर-शहर बदलता है?
हाँ। मुहूर्त का समय आपके शहर के देशांतर के अनुसार 15 से 45 मिनट तक बदलता है। पूजा से पहले अपने स्थान के लिए स्थानीय पंचांग या द्रिक पंचांग (DrikPanchang.com) देखें।
छोटी दिवाली, यानी दिवाली से एक दिन पहले, क्या होता है?
छोटी दिवाली, या नरक चतुर्दशी, भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति है। भक्त सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) करते हैं और संध्या को घर के अलग-अलग कोनों में 14 दीये जलाते हैं।




