संक्षिप्त उत्तर: अक्षय तृतीया 2027 भारत में रविवार, 9 मई 2027 को है। द्रिक पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया शनिवार, 8 मई को 11:42 AM IST से रविवार, 9 मई को 9:03 AM IST तक रहेगी, और दिल्ली में पूजा मुहूर्त 9 मई को 5:35 AM से 9:03 AM तक है। USA, कनाडा, UK, UAE और दक्षिण अफ्रीका में यह पर्व शनिवार, 8 मई को है; सिंगापुर, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में रविवार, 9 मई को।

अंतिम अपडेट: 25 अक्टूबर 2026। यह अक्षय तृतीया 2027 का हमारा मुख्य पेज है। इसमें द्रिक पंचांग से तिथि और तृतीया का समय, भारत और विश्व के शहरों के लिए पूजा मुहूर्त, सोना खरीदने की अवधि, घर पर सरल पूजा विधि और इस दिन से जुड़ी कथाएँ दी गई हैं। पर्व निकट आने पर हम इसी पेज को अपडेट करते रहेंगे।

अक्षय तृतीया 2027 की तिथि और तृतीया का समय (आखा तीज 2027 कब है)

विवरणभारत (IST)
अक्षय तृतीया, आखा तीजरविवार, 9 मई 2027
तृतीया तिथि आरंभ11:42 AM, शनिवार, 8 मई 2027 (द्रिक पंचांग)
तृतीया तिथि समाप्त9:03 AM, रविवार, 9 मई 2027 (द्रिक पंचांग)
पूजा मुहूर्त, दिल्ली5:35 AM से 9:03 AM, 9 मई (द्रिक पंचांग)
पूजा मुहूर्त, हैदराबाद5:47 AM से 9:03 AM, 9 मई (द्रिक पंचांग)
सोना खरीदने की अवधि (पूरी तृतीया)11:42 AM, 8 मई से 9:03 AM, 9 मई
मासवैशाख शुक्ल तृतीया (तेलुगु में वैशाख शुद्ध तदिया)
एक दिन पहलेपरशुराम जयंती, शनिवार, 8 मई 2027

हमारी 2027 पर्व शृंखला में यह भी पढ़ें: मकर संक्रांति 2027, वसंत पंचमी 2027, महाशिवरात्रि 2027, होली 2027। पिछले वर्ष का पेज: अक्षय तृतीया 2026 तिथि और मुहूर्त।

2027 में भारत और पश्चिमी देशों में अलग-अलग दिन क्यों

अक्षय तृतीया उस दिन मनाई जाती है जब पूर्वाह्न में, यानी सूर्योदय से मध्याह्न तक के भाग में, तृतीया व्याप्त हो। भारत में तृतीया 8 मई को दोपहर से ठीक पहले शुरू होती है, इसलिए वह उस पूर्वाह्न के केवल अंतिम कुछ मिनटों को छूती है; 9 मई को वह सूर्योदय से 9:03 AM तक, तीन मुहूर्त से अधिक समय तक रहती है, इसलिए द्रिक पंचांग 9 मई बताता है।

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यही क्षण न्यूयॉर्क में 8 मई को 2:12 AM पर और लंदन में 7:12 AM पर पड़ता है। वहाँ तृतीया शनिवार, 8 मई के पूरे पूर्वाह्न में रहती है और रविवार के सूर्योदय तक समाप्त हो जाती है, इसलिए पर्व 8 मई को है। सिडनी और सिंगापुर में यह 8 मई की दोपहर बाद शुरू होकर 9 मई की सुबह तक रहती है, इसलिए वहाँ भारत वाला दिन ही मान्य है। दुबई और डरबन में तृतीया 8 मई को सुबह के मध्य में शुरू होती है; फिर भी द्रिक पंचांग वहाँ 8 मई ही चुनता है, छोटे मुहूर्त के साथ।

शहरवार अक्षय तृतीया 2027 पूजा मुहूर्त

मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय (या जहाँ तृतीया बाद में शुरू हो, वहाँ तृतीया आरंभ) से स्थानीय मध्याह्न तक, या तृतीया समाप्त होने तक रहता है। जिन पंक्तियों पर द्रिक लिखा है, वे द्रिक पंचांग के शहर-पेजों से ली गई हैं; बाकी हमारे कैलकुलेटर से हैं, जिसने वही नियम अपनाया और सभी 14 द्रिक शहरों में दिन पूरी तरह और समय एक मिनट के अंदर मिलाए। मई में उत्तरी अमेरिका में डेलाइट टाइम रहता है; विनिपेग, कैलगरी, एडमंटन और वैंकूवर नई साल-भर की घड़ियों (UTC-5, UTC-6 और UTC-7) का उपयोग करते हैं।

शहरअक्षय तृतीया 2027पूजा मुहूर्त (स्थानीय समय)
दिल्ली (द्रिक)रविवार, 9 मई5:35 AM से 9:03 AM
हैदराबाद (द्रिक)रविवार, 9 मई5:47 AM से 9:03 AM
मुंबईरविवार, 9 मई6:06 AM से 9:03 AM
चेन्नईरविवार, 9 मई5:45 AM से 9:03 AM
बेंगलुरुरविवार, 9 मई5:56 AM से 9:03 AM
कोलकातारविवार, 9 मई4:59 AM से 9:03 AM
अहमदाबादरविवार, 9 मई6:02 AM से 9:03 AM
न्यूयॉर्क (द्रिक)शनिवार, 8 मई5:46 AM से 12:53 PM
न्यू जर्सी (एडिसन)शनिवार, 8 मई5:48 AM से 12:54 PM
वॉशिंगटन DCशनिवार, 8 मई6:02 AM से 1:04 PM
अटलांटाशनिवार, 8 मई6:42 AM से 1:34 PM
शिकागो (द्रिक)शनिवार, 8 मई5:38 AM से 12:47 PM
ह्यूस्टनशनिवार, 8 मई6:33 AM से 1:18 PM
डलासशनिवार, 8 मई6:33 AM से 1:23 PM
फ़ीनिक्सशनिवार, 8 मई5:33 AM से 12:25 PM
सैन फ़्रांसिस्को बे एरिया (सैन होज़े, द्रिक)शनिवार, 8 मई6:05 AM से 1:04 PM
लॉस एंजेलिसशनिवार, 8 मई5:57 AM से 12:49 PM
सिएटलशनिवार, 8 मई5:41 AM से 1:06 PM
टोरंटो (द्रिक)शनिवार, 8 मई6:01 AM से 1:15 PM
मॉन्ट्रियलशनिवार, 8 मई5:32 AM से 12:51 PM
विनिपेग (UTC-5)शनिवार, 8 मई5:53 AM से 1:25 PM
कैलगरी (UTC-6, द्रिक)शनिवार, 8 मई5:57 AM से 1:33 PM
एडमंटन (UTC-6)शनिवार, 8 मई5:45 AM से 1:30 PM
वैंकूवर (UTC-7, द्रिक)शनिवार, 8 मई5:40 AM से 1:09 PM
लंदन (द्रिक)शनिवार, 8 मई7:12 AM (तृतीया आरंभ) से 12:58 PM
लेस्टरशनिवार, 8 मई7:12 AM (तृतीया आरंभ) से 1:01 PM
बर्मिंघमशनिवार, 8 मई7:12 AM (तृतीया आरंभ) से 1:04 PM
दुबई (द्रिक)शनिवार, 8 मई10:12 AM (तृतीया आरंभ) से 12:16 PM
अबू धाबीशनिवार, 8 मई10:12 AM (तृतीया आरंभ) से 12:19 PM
सिंगापुर (द्रिक)रविवार, 9 मई6:56 AM से 11:33 AM
कुआलालंपुररविवार, 9 मई7:02 AM से 11:33 AM
सिडनी (द्रिक)रविवार, 9 मई6:35 AM से 11:51 AM
मेलबर्नरविवार, 9 मई7:07 AM से 12:16 PM
ब्रिस्बेनरविवार, 9 मई6:17 AM से 11:44 AM
पर्थरविवार, 9 मई6:53 AM से 11:33 AM
ऑकलैंड (द्रिक)रविवार, 9 मई7:07 AM से 12:17 PM
वेलिंग्टनरविवार, 9 मई7:15 AM से 12:17 PM
डरबन (द्रिक)शनिवार, 8 मई8:12 AM (तृतीया आरंभ) से 11:52 AM
जोहान्सबर्गशनिवार, 8 मई8:12 AM (तृतीया आरंभ) से 12:04 PM

भारत के मुहूर्त को अपने टाइम ज़ोन में न बदलें; अपने शहर की पंक्ति देखें। यदि आप सुबह पूजा न कर पाएँ, तो उसी दिन बाद में श्रद्धा से की गई पूजा भी पूर्ण मानी जाती है, और विदेश के कई मंदिर अपना अक्षय तृतीया कार्यक्रम निकटतम सप्ताहांत पर रखते हैं।

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अक्षय तृतीया 2027 पर सोना खरीदने का समय, देशवार

द्रिक पंचांग पूरी तृतीया को सोना, चाँदी या अन्य स्थायी वस्तुएँ खरीदने के लिए शुभ मानता है। द्रिक के समय (तृतीया 8 मई को 06:12 UTC से 9 मई को 03:33 UTC तक) के आधार पर स्थानीय अवधि:

स्थानतृतीया अवधि (स्थानीय समय)
भारत11:42 AM शनि 8 मई से 9:03 AM रवि 9 मई
न्यूयॉर्क, टोरंटो (ईस्टर्न टाइम)2:12 AM से 11:33 PM, शनि 8 मई
शिकागो, ह्यूस्टन, विनिपेग1:12 AM से 10:33 PM, शनि 8 मई
कैलगरी, एडमंटन12:12 AM से 9:33 PM, शनि 8 मई
बे एरिया, लॉस एंजेलिस, वैंकूवर, फ़ीनिक्स11:12 PM शुक्र 7 मई से 8:33 PM शनि 8 मई
लंदन, UK7:12 AM शनि 8 मई से 4:33 AM रवि 9 मई
दुबई, UAE10:12 AM शनि 8 मई से 7:33 AM रवि 9 मई
डरबन, जोहान्सबर्ग8:12 AM शनि 8 मई से 5:33 AM रवि 9 मई
सिंगापुर, कुआलालंपुर, पर्थ2:12 PM शनि 8 मई से 11:33 AM रवि 9 मई
सिडनी, मेलबर्न, ब्रिस्बेन4:12 PM शनि 8 मई से 1:33 PM रवि 9 मई
ऑकलैंड, वेलिंग्टन6:12 PM शनि 8 मई से 3:33 PM रवि 9 मई

एक सावधानी: शास्त्र अक्षय तृतीया पर खरीदारी से कहीं अधिक दान की महिमा गाते हैं। सोना खरीदना बाद में जुड़ी परंपरा है; इससे धन की गारंटी नहीं मिलती, और यह पेज निवेश सलाह नहीं है। ज्वैलर्स के त्योहारी ऑफ़र मार्केटिंग हैं। उतना ही खरीदें जितना पहले से तय किया हो और बजट में हो, बिल संभालकर रखें और हॉलमार्क जाँच लें।

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अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है

अक्षय का अर्थ है अविनाशी। मान्यता है कि इस तृतीया पर आरंभ किए गए जप, पूजा, दान और सत्कर्म का पुण्य कभी क्षीण नहीं होता, इसलिए परिवार इस दिन नए कार्य शुरू करते हैं, गृह प्रवेश करते हैं या विद्या आरंभ करते हैं। यह उन गिने-चुने दिनों में से है जिसे बहुत से घर पूरे दिन शुभ मानते हैं, हर कार्य के लिए अलग मुहूर्त देखे बिना।

  • त्रेता युग: कई पौराणिक पंचांग वैशाख शुक्ल तृतीया को त्रेता युग के आरंभ का दिन बताते हैं, इसलिए यह एक युगादि तिथि है।
  • परशुराम: माना जाता है कि भगवान विष्णु के छठे अवतार का जन्म इसी तृतीया को हुआ था; इस वर्ष उनकी जयंती एक दिन पहले की संध्या को मनाई जाएगी।
  • श्रीकृष्ण और सुदामा: निर्धन ब्राह्मण मित्र सुदामा श्रीकृष्ण के लिए मुट्ठी भर चिवड़ा (पोहा) लेकर आए और कुछ नहीं माँगा; घर लौटे तो पाया कि उनके परिवार की सारी आवश्यकताएँ पूरी हो चुकी थीं। यह कथा विनम्र भक्ति की सीख के रूप में सुनाई जाती है।
  • अक्षय पात्र: महाभारत परंपरा में वनवास के समय पांडवों को एक ऐसा पात्र मिला जिसमें भोजन कभी समाप्त नहीं होता था; लोक-कथाओं में इसे इसी दिन से जोड़ा जाता है।
  • कुबेर और लक्ष्मी: लोक परंपरा के अनुसार इसी दिन कुबेर को धन का रक्षक बनाया गया था, इसलिए कई घरों में लक्ष्मी, नारायण और कुबेर की एक साथ पूजा होती है।

ये कथाएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलती हैं, और यहाँ हमने इन्हें अपने शब्दों में लिखा है। विस्तार से पढ़ें अक्षय तृतीया की कथा और श्रीकृष्ण और सुदामा की कथा।

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भारत में अक्षय तृतीया कैसे मनाई जाती है

  • उत्तर और पश्चिम भारत (आखा तीज): लक्ष्मी-नारायण पूजा, सोना या चाँदी की खरीद, और राजस्थान व गुजरात में बहुत से विवाह, क्योंकि पूरा दिन शुभ माना जाता है।
  • ओडिशा: किसान मौसम की बुआई शुरू करते हैं, और पुरी में परंपरा से रथ यात्रा के रथों का निर्माण इसी दिन आरंभ होता है, साथ ही देवताओं की चंदन यात्रा भी।
  • आंध्र प्रदेश: विशाखापत्तनम के पास सिंहाचलम मंदिर में चंदनोत्सवम होता है, वर्ष का वह एकमात्र दिन जब भगवान के दर्शन चंदन-लेप के बिना होते हैं। 2027 के दर्शन समय के लिए मंदिर की अपनी घोषणा देखें।
  • उत्तराखंड: गंगोत्री और यमुनोत्री धाम परंपरा से अक्षय तृतीया के आसपास यात्रा-काल के लिए खुलते हैं। मंदिर समितियाँ कपाट खुलने की सटीक तिथियाँ वसंत में घोषित करती हैं, इसलिए अभी दिखने वाली किसी भी तिथि को अपुष्ट मानें।
  • जैन परंपरा: अक्षय तृतीया वह दिन है जब भगवान ऋषभनाथ ने गन्ने के रस से अपना दीर्घ उपवास तोड़ा था, और वर्ष भर का वर्षी तप करने वाले इसी दिन उसका पारण करते हैं।

घर पर अक्षय तृतीया पूजा विधि

  1. सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान साफ़ करें और एक नए वस्त्र पर लक्ष्मी-नारायण (या केवल विष्णु) का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
  2. आम के पत्तों और नारियल के साथ जल से भरा कलश रखें, और घी का दीपक व धूप जलाएँ।
  3. चंदन, कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), विष्णु को तुलसी दल और लक्ष्मी को कमल या लाल फूल अर्पित करें।
  4. नैवेद्य अर्पित करें: फल, खीर जैसी कोई मिठाई, और कई घरों में जौ (यव) या गुड़ के साथ भीगी चने की दाल।
  5. विष्णु सहस्रनाम, कनकधारा स्तोत्र या महालक्ष्मी अष्टकम (पहला श्लोक नीचे) का पाठ करें। केवल "ॐ नमो नारायणाय" या "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का 108 बार जप भी पर्याप्त है।
  6. यदि आपने सोना, चाँदी या कोई नई वस्तु खरीदी है, तो पूजा के समय उसे भगवान के सामने रखें।
  7. अंत में आरती करें और प्रसाद बाँटें।

दान: इस दिन गर्मी से जुड़ी वस्तुओं का दान परंपरागत है: मिट्टी के घड़े में जल, छाछ, पंखे, छाते, चप्पलें, अनाज या किसी ज़रूरतमंद को भोजन। विदेश में फ़ूड बैंक या मंदिर की रसोई को दान देना भी इसी भावना को निभाता है।

स्वास्थ्य संबंधी सूचना: व्रत ऐच्छिक है। गर्भवती, बुज़ुर्ग, मधुमेह से पीड़ित, अस्वस्थ या नियमित दवा लेने वाले लोग सामान्य भोजन करें या पहले डॉक्टर से पूछें, बच्चों से व्रत न करवाएँ, और मई की गर्मी में पानी पीते रहें।

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महालक्ष्मी अष्टकम, पहला श्लोक

इंद्र द्वारा रचित महालक्ष्मी की यह स्तुति अक्षय तृतीया और शुक्रवार को व्यापक रूप से पढ़ी जाती है। sanskritdocuments.org पर प्रकाशित पाठ से पहला श्लोक:

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ १॥

namaste'stu mahāmāye śrīpīṭhe surapūjite |
śaṅkhacakragadāhaste mahālakṣmi namo'stu te || 1||

अर्थ: हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान और देवताओं द्वारा पूजित देवी, आपको नमस्कार है; शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली हे महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है। पढ़ें अर्थ सहित संपूर्ण महालक्ष्मी अष्टकम और कनकधारा स्तोत्र।

NRI परिवारों के लिए अक्षय तृतीया

  • पश्चिम में शनिवार: USA, कनाडा, UK, खाड़ी देशों और दक्षिण अफ्रीका में यह पर्व शनिवार, 8 मई को है, इसलिए कामकाजी परिवारों के लिए सुबह की पूरी पूजा करना आसान है। भारत, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में रविवार, 9 मई को पर्व है।
  • भारत में परिवार को फ़ोन: जब उत्तरी अमेरिका में शनिवार की शाम होती है, तब भारत में रविवार की सुबह, यानी अक्षय तृतीया, हो चुकी होती है।
  • मंदिर: विदेश के कई मंदिर सप्ताहांत पर लक्ष्मी-नारायण अभिषेकम, कनकधारा या सहस्रनाम पारायणम करते हैं। उनके कैलेंडर देखें।
  • विदेश में सोना: USA, UK, UAE और सिंगापुर में भारतीय ज्वैलर्स अक्षय तृतीया ऑफ़र चलाते हैं; दाम और शुद्धता की तुलना करें, और याद रखें कि एक छोटा सिक्का या दान भी उतना ही परंपरागत है।

पर्व तिथियाँ, अप्रैल से मई 2027

पर्वभारत में तिथि (द्रिक पंचांग)
हनुमान जयंतीमंगलवार, 20 अप्रैल 2027
वरूथिनी एकादशीरविवार, 2 मई 2027
परशुराम जयंतीशनिवार, 8 मई 2027
अक्षय तृतीया (यह पेज)रविवार, 9 मई 2027
गंगा सप्तमीबुधवार, 12 मई 2027
सीता नवमीशुक्रवार, 14 मई 2027
मोहिनी एकादशीरविवार, 16 मई 2027
नृसिंह जयंतीमंगलवार, 18 मई 2027
बुद्ध पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमागुरुवार, 20 मई 2027

अक्षय तृतीया 2027: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्षय तृतीया 2027 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया 2027 भारत में रविवार, 9 मई 2027 को है। वैशाख शुक्ल तृतीया शनिवार, 8 मई को 11:42 AM IST पर शुरू होकर रविवार, 9 मई को 9:03 AM IST पर समाप्त होगी। दिल्ली में पूजा मुहूर्त 9 मई को 5:35 AM से 9:03 AM तक है।

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USA और UK में अक्षय तृतीया 2027 8 मई को है या 9 मई को?

शनिवार, 8 मई को। द्रिक पंचांग न्यूयॉर्क, शिकागो, सैन होज़े, टोरंटो, कैलगरी, वैंकूवर, लंदन, दुबई और डरबन के लिए 8 मई बताता है, क्योंकि वहाँ तृतीया 8 मई के पूर्वाह्न में व्याप्त है और 9 मई के सूर्योदय तक (या उसके कुछ ही बाद) समाप्त हो जाती है। सिंगापुर, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में भारत की तरह रविवार, 9 मई को ही पर्व मनाया जाएगा।

अक्षय तृतीया 2027 पर सोना खरीदने का सबसे अच्छा समय क्या है?

द्रिक पंचांग पूरी तृतीया को शुभ मानता है: भारत में 8 मई को 11:42 AM से 9 मई को 9:03 AM तक। विदेश में इस पेज की तालिका से अपने शहर की तृतीया अवधि देखें। सोना खरीदना एक परंपरा है, धार्मिक अनिवार्यता नहीं, और इससे लाभ की कोई गारंटी नहीं होती; उतना ही खरीदें जितना आपके बजट में हो, या इस दिन को दान से मनाएँ।

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परशुराम जयंती 2027 कब है?

परशुराम जयंती भारत में शनिवार, 8 मई 2027 (द्रिक पंचांग) को है, यानी अक्षय तृतीया से एक दिन पहले। यह उस दिन मनाई जाती है जब संध्या (प्रदोष) काल में तृतीया हो, इसलिए इस वर्ष दोनों पर्व अलग-अलग दिन पड़ रहे हैं।

क्या अक्षय तृतीया पर व्रत रखना ज़रूरी है?

नहीं। कुछ परिवार सुबह की पूजा तक हल्का उपवास रखते हैं, या केवल सात्विक भोजन करते हैं। व्रत ऐच्छिक है; गर्भवती, बुज़ुर्ग, मधुमेह से पीड़ित, अस्वस्थ या नियमित दवा लेने वाले लोग सामान्य भोजन करें या पहले डॉक्टर से पूछें। मई में भारत और खाड़ी देशों में गर्मी अधिक होती है, इसलिए पर्याप्त पानी पिएँ।

इसे अक्षय क्यों कहते हैं?

अक्षय का अर्थ है 'जिसका कभी क्षय न हो'। मान्यता है कि इस तृतीया पर आरंभ की गई पूजा, दान और सत्कर्म सदा फल देते रहते हैं। पौराणिक कथाएँ इस दिन को त्रेता युग के आरंभ, श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा पर कृपा, पांडवों के अक्षय पात्र और भगवान परशुराम के जन्म से जोड़ती हैं।

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संपादकीय टिप्पणी

संपादकीय टिप्पणी (25 अक्टूबर 2026): यह एक नया पेज है और अक्षय तृतीया 2027 के लिए हमारा एकमात्र मुख्य पेज है। तिथि, तृतीया के आरंभ और समाप्ति का समय, तथा दिल्ली, हैदराबाद, न्यूयॉर्क, शिकागो, सैन होज़े, टोरंटो, कैलगरी, वैंकूवर, लंदन, दुबई, सिंगापुर, सिडनी, ऑकलैंड और डरबन के पूजा मुहूर्त व सोना खरीदने की अवधि द्रिक पंचांग के अक्षय तृतीया 2027 शहर-पेजों से 25 अक्टूबर 2026 को ली गई हैं। अन्य शहरों के मुहूर्त उसी नियम से हमारे सूर्योदय कैलकुलेटर द्वारा निकाले गए हैं। अप्रैल-मई की पर्व सूची द्रिक पंचांग के हैदराबाद के 2027 कैलेंडर से है। मंदिरों की तिथियाँ (सिंहाचलम, गंगोत्री, यमुनोत्री, पुरी) मंदिर स्वयं घोषित करते हैं और पुष्टि होने तक यहाँ नहीं दी गई हैं।